सोमवार, 22 जनवरी 2018

लोक तन्त्र के वृक्ष में घोटालों की दींम !

प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ निवर्तमानीय सन्दर्भों में लोक तन्त्र के नाम प्रचलित राजनैतिक व्यवस्थाओं पर कटाक्ष करती हुई ' योगेश कुमार रोहि के उन उद् गारों का स्वरूप है ! जो आधुनिक सामाजिक राजनैतिक विसंगतियों के  विश्लेषण से प्रादुर्भूत हैं !!!! योगेश कुमार रोहि का
सम्पर्क सूत्र है  -8077160219

आवासीय परिचय -- ग्राम आजादपुर पत्रालय पहाड़ीपुर
जनपद हरिगृह अर्थात् जो अब अल़ीगढ़ है !  उत्तर- प्रदेश
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~• लोक तन्त्र के वृक्ष में .
              घोटालों की दींम !
भ्रष्टाचार की आँधी में .
        हिल गयी जिसकी नींम !
चोर लुटेरे भ्रष्टों ने
      धामी सत्ता की डोर है !
घूसख़ोर अधिकारी है अब .
         मन्त्री घपलाख़ोर  हैं !!
भ्रष्टाचार का तीव्र विकिरण .
घोटालों का भूकम्प है !
व्यभिचारों का विकट सुनामी
  लोक तन्त्र सब डम्प है !!
जीवन मूल्यों में आया .
       रोहि प्रदूषण घनघोर है
नीयत में बेईमानी इनकी .
      मौके पर कोई चोर है ?
धर्म कर्म से जनता ऊबी .
     अब दिखाबों पर जोर है !
मैं भी थोड़ बेईमान हूँ !
      आखिर मैं इन्सान हूँ ??
संस्कृति की आड़ में
    ये नंगा नाच हर ओर है !
सूचनाओं का विस्फोट बहुत है
      बलात्कार का शोर है ?
फिल्में क्या दिखलाती हैं ?
    फिल्मों पर नित जोर है !
बलात्कार अनैतिकता हिंसा
    फिल्मों का ये निचौड़ है .
करती उनको सरकार पुरस्कृत
जो फिल्म सैक्स विभोर है ??
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दोगले विधान शासन है पंगु
अन्धा काणा कानून है ?
गरीब अमीर की
       अलग व्यवस्था !
दौनों का यहाँ अलग है रस्ता .
सस्ता एक महघा ख़ून है !
जो पानी सा सड़को पर वहता
    रोहि वो ग़रीब का ख़ून है !!
यहाँ कुलीन व्यवस्था
      ग़रीब अनाथ !
कौन देगा यहाँ उसका साथ !

भ्रष्ट व्यवस्थाऐं जो बिछी हुईं हैं
उनसे लड़ने को उठाओ हाथ !!
मेरे साथ सब मिलकर बोलो !
जय ग़रीब और जय अनाथ !!
मनोविजयी ही विश्व विजयी है
तब जीवन की होगी सार्थकता ---
गरीब अमीर का भेद मिटेगा !
पलटेगा भ्रष्टों का तख़्ता !!
चरित्र वित्त से उज्ज्वल रोहि
    चरित्र वान नहीं थकता !
मन को जीत जीवनपुनीत
तब जाने जाओगे  पुख़्ता !!〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
यह सन्देश ज्ञान की अथाह
   गहराईयों से उद्धृत है  ~~~~~~~~~~~~~

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