मंगलवार, 16 जनवरी 2018

नारी भी कछु खास पास है उसके अज़ब ख़जाना !

नारी भी कुछ ख़ास पास है
      उसके अज़ब ख़जाना !
पुरुष से कहीं भी कम नहीं
      यह निश्पक्ष रुप से जाना !!
तीन तत्व उसकी शक्ति हैं !
जिस पर पुरुषों की आसक्ति हैं
कोमल पन इनकी सुन्दरता
           और भावनाओं की प्रबलता .....
भाव प्रबलता के कारण ही .
तर्क विचार उसका शिथिल है !
भावों का उफान बहुत है !
रोहि कितना कोमल दिल है !
और पुरुष में देखा हमने .
पुरुष भाव हीन बनकर के
रह जाता है सूखा हुआ ठूँठ।
भाव-विचार का नहीं सन्तुलन ।
वहाँ आदर्श वादिता है झूँठ
नर नारी एक दूजे के सम्बल
दौनों को दौनों की  ज़रूरत !
         एक बलवान एक खूबसूरत!!
 अपने आप में दौनों अपूर्ण हैं
           ये सृष्टि के सिद्धान्त गूढ़ हैं
नारी की कमजोरी ही तो .
उसका हथियार भी  है !
ये कमजोरी कोमलता है ...
जो उसका श्रृंगार भी  है !!
ये पुरुष परुषता का पुतला .
            सुनसान सफर तन्हा ही चला ..
नारी अबला होकर भी सबला ।
             दुष्टों के लिए बन जाती है बला ।
नारी से जहाँ की लीला भी ।
यही परिवार कब़ीला है ।
नारी ही  संसार की जननी है !
ये सृष्टा के विधान का योजन .
नर नारी में सदीयों से ठनी है !!!
नारी हुश्न की मलिका कलिका है .
जिसके पुरुष  का जीवन खिला है ।
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सृष्टा ने यह संसार सैद्धान्तिक रूप से बनाया है !
अतः पुरुष और स्त्री दौनों ही परस्पर एक दूसरे की स्वाभाविक आवश्यकता हैं !
तथा दौनों एक दूसरे से मिलकर पूर्ण भी हैं
....जैसा कि यह उद् गार भी है ......
✍✍✍✍✍....... .
तू हुश्न की मलिका बाला .
मैं इश्क़ शाहञ्शाह !
तुझको जुरूरत है मेरी .
मुझको भी तेरी चाह !!
मुझको भी तेरी चाह.
बात ये बड़ी अनौखी !!
क्यों पसन्द है हमको .
तेरी अद़ाऐं चोखी ....
तू भावों का प्रवाह आह !
ये विचार है तन्हा !!
तू हुश्न की मलिका
बाला मैं इश्क शाहञ्शाह .
तुझको जुरूरत मेरी
मुझको भी तेरी चाह ..
दर्द और आनन्द में
करते हैं सभी आह !
वेग तो बस एक ही है
रोहि विपरित है पंरवाह !!!

योगेश कुमार रोहि की जानिब से पेश है ये ख़यालाती नज़्म.... सामईन की ख़िदमत में .....
आमीन् !!!

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