शनिवार, 24 जून 2017

लिथुअॉनियन देव अश्वनि द्वय

Ašviniai, commonly called the little horses, on the rooftop of a house in Nida Ašvieniai are divine twins in the Lithuanian mythology, identical to Latvian Dieva deli and the Baltic counterparts of Vedic Ashvins.[1] Both names derive from the same Proto-Indo-European root for the horse – *ek'w-.[2] Old Lithuanian ašva and Sanskrit ashva mean "horse". Ašvieniai are represented as pulling a carriage of Saulė (the Sun) through the sky.[1] Ašvieniai, depicted as žirgeliai or little horses, are common motifs on Lithuanian rooftops,[1] placed for
protection of the house.[3] Similar motifs can also be found on beehives, harnesses, bed frames, and other household objects.[4] Ašvieniai are related to Lithuanian Ūsinis and Latvian Ūsiņš (cf. Vedic Ushas), gods of horses.[5] References Last edited 8 months ago by Bender the Bot RELATED ARTICLES

एस्विनियाई, जिसे आमतौर पर छोटे घोड़े कहा जाता है, निदा एसविएनिया में एक घर की छत पर, लिथुआनियाई पौराणिक कथाओं में दिव्य जुड़वाँ हैं, जैसा लातवियाई डेवा डेली और वैदिक अश्विन के बाल्टिक समकक्षों के समान है। [1] दोनों नाम घोड़े के लिए एक ही प्रोटो-इंडो-यूरोपियन जड़ से निकलते हैं - * एकव - [2] ओल्ड लिथुआनियाई अथवा और संस्कृत राख का अर्थ "घोड़ा" है। एस्विवियाई को आकाश के माध्यम से शालेय (सूर्य) की गाड़ी खींचने के रूप में प्रस्तुत किया गया है। [1] एस्विएनियाई, जिरगेलिया या छोटे घोड़ों के रूप में दर्शाया गया है, लिथुआनियाई छतों पर सामान्य रूप से प्रस्तुतियां हैं, [1] घर की सुरक्षा के लिए रखी गई है। [3] इसी प्रकार की प्रस्तुतियों को बीहिव्स, हार्नेस, बेड फ़्रेम और अन्य घरेलू वस्तुओं पर भी पाया जा सकता है। [4] एस्विवियाई लिथुआनियाई एसिसिस और लातवियाई Ūsiņš (सीएफ वैदिक उषा) से संबंधित हैं, घोड़ों के देवता। [5] सन्दर्भ पिछले 8 महीनों पहले बेंडर बॉट से संबंधित लेख प्रकाशित

शुक्रवार, 23 जून 2017

हलाला कुरान की रोशनी में ..

इस्लामीय पारिभाषिक शब्दों में “हलाल , और “हलाला ” यह ऐैसे दो शब्द हैं , जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह तजिकिरा किया गया है .
दिखने में यह दौनों शब्द एक जैसे लगते हैं । परन्तु दौनों में अब अधिक भेद है ।
यह बात तो सभी जानते हैं कि,जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं , तो इसे हलाल करना कहते हैं .हलाल का अर्थ “अवर्जित ” होता है . लेकिन हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं .क्योंकि इस शब्द का सम्बन्ध मुसलमानों की वैवाहिक जीवन- पद्धति और कुरान के महिला विरोधी कानून से है .क्योंकि कुरान में अल्लाह के द्वारा बनाये हुए इस हवशी  ,और मूर्खता पूर्ण कानून की आड़ में मुल्ले , मौलवी और मुफ्ती मुफ्त में खुल कर अय्याशी करते हैं ।
यह पृथा उम्मते सुन्नत में ही प्रचलित है ।
शिया जमात में कभी नहीं ।
जो कुरान और हदीसों पर आधारित है .
एक समीक्षात्मक विवरण ---
1-तलाक कैसे हो जाती है यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने तीन बार “तलाक ” शब्द का उच्चारण कर दे , या कहे की मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए तो तलाक हो जाती है ..क्योंकि इस कथन को उस व्यक्ति की कसम माना जाता है .जैसा की कुरान ने कहा है , ” और अगर तुम पक्की कसम खाओगे तो उस पर अल्लाह जरुर पकड़ेगा (“सूरा – मायदा 5 :89 )तलाक के बारे में कुरान की इसी आयत के आधार पर हदीसों में इस प्रकार लिखा है , -“इमाम अल बगवी ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे की मैंने तुझे दो तलाक दिए और तीसरा देना चाहता हूँ , तब भी तलाक वैध ही मानी जाएगा .और सभी विद्वानों ने इसे जायज बताया है. नीचे कुछ अरब़ी भाषा में साक्ष्य हैं👇
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(Rawdha al-talibeen 7/73” “فرع قال البغوي ولو قال أنت بائن باثنتين أو ثلاث ونوى الطلاق وقع ثم إن نوى طلقتين أو ثلاثا فذاك -“इमाम इब्न कदमा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे कि मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए हैं . लेकिन चाहे उसने यह बात एक ही बार कही हो , फिर भी तलाक हो जायेगा .
Al-Kafi 3/122 ” إذا قال لزوجته : أنت طالق ثلاثا فهي ثلاث وإن نوى واحدة“ 2-अल्लाह की तरकीब 
ऐसा कई बार होता है कि व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देकर बाद में पछताता है , क्योंकि औरतें गुलामों की तरह काम करती हैं , और बच्चे भी पालती हैं . कुछ पढ़ी लिखी औरतें पैसा कमा कर घर भी चलाती है . इस इसलिए लोग फिर से अपनी औरत चाहते है . ” हे नबी तू नहीं जानता कि कदाचित् तलाक के बाद अल्लाह कोई नयी तरकीब सुझा दे ” सूरा -अत् तलाक 65 :1 और इस आयत के बाद काफी सोच विचार कर के अल्लाह ने जो उपाय निकाला है ,वह औरतों के लिए शर्मनाक है 3-वह है हलाला ( ज़िना)
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हलाला तलाक़ दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है; जिस के तहत मत्लूका(तलाक दी गयी पत्नी ) को किसी दूसरे मर्द के साथ निकाह करना होगा और उसके साथ हम बिस्तरी की शर्त लागू होगी फिर वह तलाक़ देगा, इसके बाद इद्दत ख़त्म औरत का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा, !
तब जा कर दोनों तमाम जिंदगी गुज़ारेंगे.हलाला के बारे में कुरान और हदीसों में इस प्रकार लिखा है ।👇
, और यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया , तो उस स्त्री को रखना जायज नहीं होगा . जब तक वह स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास (ज़िना ) न कर ले .फिर वह व्यक्ति भी उसे तलाक दे दे . तो फिर उन दौनों के लिए एक दूसरे की तरफ पलट आने में कोई दोष नहीं होगा।👇
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कुरान के हवाले से  “सूरा – बकरा 2 :230 “فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُ مِن بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يَتَرَاجَعَا إِن ظَنَّا أَن يُقِيمَا حُدُودَ اللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ 2:230 (नोट -इस आयत में अरबी में ” تحلّل لهُ इस प्रकरण में ‘तुहल्लिल लहु”शब्द आया है , मुस्लिम मौलवीयों ने  इसका अर्थ “wedding (विवाह) ” करते  हैं , जबकि इसका सही मायना है  (sexual intercourse ) अर्थात् स्त्री-पुरुष के अन्तरंग शारीरिक सम्बन्ध इसका सही अर्थ होता है . इसी से हलालाह حلالہ ” शब्द का विकास हुआ है . अंग्रेजी के एक अनुवाद में है देखें---👇
uptill she consummated intercourse with another person “अर्थात् जब तक तलाक शुदा महिला किसी दूसरे व्यक्ति से सम्भोग नहीं करवा लेती ) तब तक निकाह पुन: मान्य नहीं होता है और तलाक शुदा औरत का हलाला करवाकर घर वापसी को ” रजअ رجع” कहा जाता है ।
हलाला इस तरह होता है, पहले तलाकशुदा महिला इद्दत का समय पूरा करे।
फिर उसका कहीं और निकाह हो। शौहर के साथ उसके वैवाहिक रिश्ते बनें। इसके बाद शौहर अपनी मर्जी से तलाक दे या उसका इंतकाल हो जाए।
फिर बीवी इद्दत का समय पूरा करे। तब जाकर वह पहले शौहर से फिर से निकाह कर सकती है। बड़े बड़े इस्लाम के आलिम तलाक शुदा पत्नी को वापिस रखने के लिए हलाला को सही मानते हैं
4-हलाला का असली उद्देश्य  पति पत्नी में सुलह कराना नहीं , बल्कि तलाक दी गयी औरत से वेश्यावृत्ति करना है , जो इन हादिसों से साबित होता है , -“आयशा ने कहा कि रसूल के पास रिफ़ा अल कुरैजी कि पत्नी आई और बोली , रीफा ने मुझे तलक दे दिया था . और मैंने अब्दुर रहमान बिन अबू जुबैर से शादी कर ली , लेकिन वह नपुंसक है , अब मैं वापिस रिफ़ा के  पास जाना चाहती हूँ . रसूल ने कहा जब तक अब्दुर रहमान तुम्हारे साथ विधिवत् सम्भोग नहीं कर लेता , तुम रिफ़ा के  पास वापिस नहीं जा सकती देखें---👇
इस हदीश के हवाले से. “إلا إذا كان لديك علاقة جنسية كاملة مع ” Bukhari, Volume 7, किताब 63, सुमार 186 -“उम्मुल मोमिनीन आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तीन बार तलाक कह दिया , और फिर से अपनी पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा प्रकट की . रसूल ने कहा ऐसा करना बहुत बड़ा गुनाह है .. और जब तक उसकी पत्नी किसी दुसरे मर्द का शहद और वह उसके शहद का स्वाद नहीं चख लेते .
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حتى انها ذاق العسل من الزوج الآخر وذاقه العسل لها ” Abu Dawud, Book 12, Number 2302 5-हलाला व्यवसाय वहाँ अधिक होता है ।
जिन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पति -पत्नी में झगड़े होते रहते हैं ,वहां मुल्ले, मुफ्ती अपने दफ्तर बना लेते हैं , और साथ में दस बीस मुस्टंडे भी रखते हैं .इनका काम फतवे देना होता है ! चूँकि इस विज्ञान के युग में नेट , फोन ,और फेक्स जैसे साधन सामान्य है , और उन्ही के द्वारा तलाक देने का रिवाज हो चल रहा  है . कई बार मेल या फेक्स से औरत को तलाक की सूचना नहीं मिलती फिर भी मुल्ले तलाक मानकर हलाला तय कर देते हैं . 👇
देखिये देवबंद का फतवा अगर इंसान शराब के नशे में अपनी बीवी को फोन पर तीन बार तलाक बोल दे, लेकिन बाद में उसे पछतावा हो और वह तलाक न चाहता हो …तो क्या ऐसी सूरत में भी तलाक हो जाएगा’दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग दारुल इफ्ता से है ।
इस पर मुफ्तियों ने फतवा जारी किया है कि अगर तलाक नशे की हालत में दिया गया हो, तो भी पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो जाएगा।
मुल्ले मुफ्ती फ़ोन से या इशारे से दी गयी तलाक को जिन हदीसों का हवाला देते हैं , उन में से एक यह है , -“आयशा ने एक वार रसूल से  पूछा -
कि एक व्यक्ति ने सिर्फ तीन तलाक देने का इशारा ही किया था , और तलाक हो गयी , फिर उसकी पत्नी ने दुसरे आदमी से शादी कर ली .और अपने पहले पति के पास जाने की इच्छा प्रकट की . क्या ऐसा संभव है ? रसूल ने कहा जब तक उसका दूसरा व्यक्ति उसे तीसरे आदमी से सहवास नहीं नहीं करा देता , औरत पूर्व पति के पास नहीं जा सकती .Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 187 6-हलाली मुल्लों की हकीकत केवल मज़हब की आढ़ में अय्याशी है- चूँकि हलाला करवाने वाली औरत को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ सम्भोग करना और उसका सबूत भी प्रस्तुत करना जरूरी होता है , और फिर ऐसे व्यक्ति को खोजना होता है , जो बाद में उसे तलाक भी दे दे, तभी वह औरत अपने पहले पति के पास जा सकती है
. इस लिए इन मुल्लों ने बेकार जवान पाल रखे हैं , जो रुपये लेकर हलाला का धन्धा करते है . यह लोग जासूसी करते हैं और जहाँ भी कोई शराब पीकर भी औरत से तलाक बोल देता है वहीँ हलाला करने धमक जाते हैं .
विवश होकर मुर्ख मुसलमान अपनी पत्नियाँ हलाला करा लेते है, कई बार तो यह मुफ्ती मुफ्त में फर्जी तलाकनामे भी जारी कर देते हैं .👇

दिल्ली के पास बवाना गाँव में यही होता है
.ऐसी औरतें जिनका हलाला हो जाता है , वह अल्लाह का हुक्म समझकर चुप रहती है

इन दिनों कुछ मुस्लिम संगठन शरीयत की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस्लामीय शरीयत किस हद तक महिला विरोधी है, यह बात किसी से छुपी भी नही है!

इस्लामी शरीयत के अनुसार यदि एक ससुर अपनी बहू का बालात्कार ( ज़िना) कर दे तो उसे सजा देने के बजाये बहू के साथ उसका सम्बन्ध जायज माना जाता है!
पूरा देश इमराना केस में यह घृणित कृत्य देख चुका है! इमराना के ससुर मोहम्मद अली ने उसका बालात्कार किया, और बाद मे इस्लामीय पंचायतो ने इमराना को हुक्म दिया कि- "तुम्हारे पति से अब तुम्हारा निकाह टूट चुका है! अब तुम्हारा ससुर ही तुम्हारा पति है, और पति तुम्हारे लिये बेटे के समान है"

तनिक विचार करो कि क्या यह भी कोई न्याय हुआ, क्या देश के मुल्ले शरीयत अदालते बनाकर यही न्याय करेंगे ? निस्सन्देह यह शरीयत के तौर पर ज़िना है ।

असल में इस्लाम के पैगम्बर मौहम्मद साहब के जीवन मे एक ऐसी ही घटना भी घटी थी ! ऐसा हदीशें और कुरान की निस्वत से मलूमात होता है ।👇
पैगम्बर साहब का एक दत्तक पुत्र था "जैद"
जैद का विवाह एक सुन्दर महिला 'जैनब' से हुआ था!
एक दिन जैद की गैर-मौजूदगी मे मोहम्मद साहब उसके घर गये, और उन्होने अनजाने मे जैनब को कम कपड़ों मे देख लिया ! काम आवेग ने उनके मन को मथ  डाला
उसकी खूबसूरती देखते ही रसूल के मुँह से निकला "माशाऽल्लाह क्या सबाब है !.... अल्लाह कैसी-कैसी खूबसूरती बनाता है"
रसूल के यह शब्द जैनब ने सुन लिए, और जब जैद वापस आया तो उसे बता दिये!

जैद को लगा कि मेरी बीवी पैगम्बर साहब को पसन्द आ गयी, और जो चीज पैगम्बर को पसन्द आ जाये उस पर मेरा हक़ नही!
फिर जैद भागा-भागा रसूल के पास गया और बोला कि अब्बाजान ! मै जैनब को तलाक देने के लिये तैयार हूँ, आप उससे निकाह कर लो !

मोहम्मद साहब ने उसे समझाया, पर वह न माना, उसने कहा कि जो चीज आपको पसन्द आ जाये उस पर किसी और का अखित्यार  नही !
ऐसा कहकर जैद ने अपनी पत्नी जैनब को तलाक दे दिया!
अब रसूल धर्म संकट में आ गये, उन्होने सोचा कि यदि मै निकाह करूँगा तो अनायास ही मेरी बदनामी होगी! अतः उन्होंने एक तरीका निकाला, और एक आयत बना डाली जो कुरान-33/37 मे लिखी है-
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"जब तुम उस व्यक्ति से कह रहे थे जिस पर अल्लाह ने उपकार किया और तुमने उपकार किया कि तुम अपनी पत्नी को रोके रखो और अल्लाह से डरो!
तुम अपने हृदय में वह बात छिपाये हुए थे जिसको अल्लाह प्रकट करने वाला था ।
और तुम लोगों से डर रहे थे और अल्लाह को अधिक अधिकार है कि तुम उससे डरो। फिर जब जैद जैनब से अपनी इच्छापूर्ति कर चुका, तब मौहम्मद साहब से बोला  हमने तुमसे उसका विवाह कर दिया ताकि ईमानवालों पर अपने मुँह-बोले बेटों की पत्नियों के बारे में कोई संकोच न रहे।
जबकि वह उनसे अपनी आवश्यकतापूर्ति कर लें।
और अल्लाह का आदेश होने वाला ही था।"

अब इस आयत मे अल्लाह का फरमान देखो, अल्लाह कह रहे हैं कि मैने खुद तुम्हारा निकाह जैनब से करवा दिया है! ताकि दूसरे मुसलमानों को भी अपनी बहुओं से इच्छापूर्ति करने मे कोई संकोच न रहें!

इसी आयत के सहारे रसूल ने जैनब को संदेश भेजवाया कि ऐ जैनब! अल्लाह ने हमारा निकाह करवा दिया है, जिब्रील इसका साक्षी (साहिद) है, अब किसी काजी की जरूरत नही! तथा हुजूर ने अपनी बहू जैनब को अपनी बीवी बना लिया, और अब "ससुर-ससुर न रहा, बहू-बहू न रही"

मुसलमान अक्सर यह तो कहते हैं कि कुरान आसमानी किताब है, पर यह नही बताते कि हमारे रसूल की एक शादी भी आसमान मे ही हुई थी!
सवाल यह होता है कि यदि अल्लाह ने शादी करवायी तो क्या जैनब और हुजूर से अल्लाह ने पूँछा था कि तुम्हे कबूल है?
अगर अल्लाह ने हुजूर से नही पूँछा तो निकाह जायज कैसे हुआ, क्योंकि इस्लामी नियमों मे दुल्हा-दुल्हन से पूँछा जाता है !
और यदि अल्लाह ने पूँछा था तो क्या रसूल ने कहा था कि मुझे जैनब (मेरी बहू) कबूल है।

दूसरी बात मुसलमान अपनी बहू से सम्बन्ध इसलिये जायज मानते हैं क्योंकि यह अल्लाह का आदेश है और "सुन्नत-ए-रसूल" भी है!
तब तो ऐसी स्थिति मे उनका निकाह भी आसमान मे अल्लाह के द्वारा ही होना चाहिये!

ऐसा अजीब है अल्लाह, और उनके बनाये हुऐ नियम!

जरा सोचो कि किस बेशर्मी के साथ अल्लाह ने कुरान मे आदेश दिया है कि मुसलमान बिना किसी संकोच के अपनी बहुओं से आवश्यकतापूर्ति कर लें!
भला ऐसे आदेश देने वाला अल्लाह महान हो सकता है, और मुसलमान इसी कुरान पर इतराते हैं!

क्या देश के मुसलमान इसीलिये शरीयत मांग रहे हैं, ताकि अपनी पुत्र वधुओं से बिना संकोच व्यभिचार कर सके, और उन्हे सजा मिलने के बजाये अपनी ही बहू से शादी करने की छूट मिले।
इस सम्बन्ध में एक आयत बनायी गई  जो इस प्रकार है ।
कुरान-33/37 मे लिखी है-

अनुवादित रूप-------

  العربية    
1.सूरह अल फातिहा
2.सूरह अल बखरा
3.सूरह आले इमरान
4.सूरह अल निसा
5.सूरह अल माइदा
6.सूरह अल अनआम
7.सूरह अल आराफ
8.सूरह अल अनफाल
9.सूरह अत तौबा
10.सूरह यूनुस
11.सूरह हूद
12.सूरह यूसुफ
13.सूरह अर राद
14.सूरह इब्राहीम
15.सूरह अल हिज्र
16.सूरह अन नहल
17.सूरह बनी इस्राईल
18.सूरह अल कहफ़
19.सूरह मरयम
20.सूरह ताहा
21.सूरह अल अंबिया
22.सूरह अल हज
23.सूरह अल मोमिनून
24.सूरह अन नूर
25.सूरह अल फुरखान
26.सूरह अश शुअरा
27.सूरह अन नम्ल
28.सूरह अल खसस
29.सूरह अल अनकबूत
30.सूरह अर रूम
31.सूरह लुखमान
32.सूरह अस सज्दह
33.सूरह अल अहज़ाब
34.सूरह सबा
35.सूरह फातिर
36.सूरह यासीन
37.सूरह अस साफ्फात
38.सूरह साद
39.सूरह अज़ ज़ुमर
40.सूरह अल मोमिन
41.सूरह हा मीम अस सज्दह
42.सूरह अश शूरा
43.सूरह अज़ ज़ुखरुफ
44.सूरह अद दुखान
45.सूरह अल जासियह
46.सूरह अल अहखाफ
47.सूरह मुहम्मद
48.सूरह अल फतह
49.सूरह अल हुजुरात
50.सूरह खाफ
51.सूरहअज़ ज़ारियात
52.सूरह अत तूर
53.सूरह अन नज्म
54.सूरह अल खमर
55.सूरह अर रहमान
56.सूरह अल वाखियह
57.सूरह अल हदीद
58.सूरह अल मुजादलह
59.सूरह अल हश्र
60.सूरह अल मुमतहिनह
61.सूरह अस सफ
62.सूरह अल जुमुअह
63.सूरह अल मुनाफिखून
64.सूरह अत तागाबुन
65.सूरह अत तलाख
66.सूरह अत तह्रीम
67.सूरह अल मुल्क
68.सूरह अल खलम
69.सूरह अल हाख्खह
70.सूरह अल मआरिज
71.सूरह नूह
72.सूरह अल जिन्न
73.सूरह अल मुज्ज़म्मिल
74.सूरह अल मुद्दस्सिर
75.सूरह अल खियामह
76.सूरह अद दह्र
77.सूरह अल मूर्सलात
78.सूरह अन नबा
79.सूरह अन नाज़िआत
80.सूरह अबस
81.सूरह अत तक्वीर
82.सूरह अल इन्फितार
83.सूरह अल मुतफ्फिफीन
84.सूरह अल इन्शिखाक
85.सूरह अल बुरूज
86.सूरह अत तारीख
87.सूरह अल आला
88.सूरह अल गाशियह
89.सूरह अल फज्र
90.सूरह अल बलद
91.सूरह अश शम्स
92.सूरह अल लैल
93.सूरह अज़ ज़ुहा
94.सूरह अलम नश्रह
95.सूरह अत तीन
96.सूरह अल अलख
97.सूरह अल खद्र
98.सूरह अल बय्यिनह
99.सूरह अज़ ज़िल ज़ाल
100.सूरह अल आदियात
101.सूरह अल खारिअह
102.सूरह अत तकासुर
103.सूरह अल अस्र
104.सूरह अल हुमजह
105.सूरह अल फील
106.सूरह खुरैश
107.सूरह अल माऊन
108.सूरह अल कौसर
109.सूरह अल काफिरून
110.सूरह अन नस्र
111.सूरह अल लहब
112.सूरह अल इख्लास
113.सूरह अल फलख
114.सूरह अन नास

33.सूरह अल अहज़ाब

33:1  يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ اتَّقِ اللَّهَ وَلَا تُطِعِ الْكَافِرِينَ وَالْمُنَافِقِينَ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا
ऐ नबी! अल्लाह का डर रखना और इनकार करने वालों और कपटाचारियों का कहना न मानना।
वास्तव में अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है। 
33:2  وَاتَّبِعْ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا
और अनुसरण करना उस चीज़ का जो तुम्हारे रब की ओर से तुम्हें प्रकाशना की जा रही है।
निश्चय ही अल्लाह उसकी ख़बर रखता है जो तुम करते हो। 
33:3  وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
और अल्लाह पर भरोसा रखो। और अल्लाह भरोसे के लिए काफ़ी है।
33:4  مَّا جَعَلَ اللَّهُ لِرَجُلٍ مِّن قَلْبَيْنِ فِي جَوْفِهِ ۚ وَمَا جَعَلَ أَزْوَاجَكُمُ اللَّائِي تُظَاهِرُونَ مِنْهُنَّ أُمَّهَاتِكُمْ ۚ وَمَا جَعَلَ أَدْعِيَاءَكُمْ أَبْنَاءَكُمْ ۚ ذَٰلِكُمْ قَوْلُكُم بِأَفْوَاهِكُمْ ۖ وَاللَّهُ يَقُولُ الْحَقَّ وَهُوَ يَهْدِي السَّبِيلَ
अल्लाह ने किसी व्यक्ति के सीने में दो दिल नहीं रखे। और न उसने तुम्हारी उन पत्नियों को जिनसे तुम ज़िहार कर बैठते हो, वास्तव में तुम्हारी माँ बनाया, और न उसने तुम्हारे मुँह बोले बेटों को तुम्हारे वास्तविक बेटे बनाए। ये तो तुम्हारे मुँह की बातें हैं।
किन्तु अल्लाह सच्ची बात कहता है और वही मार्ग दिखाता है।
33:5  ادْعُوهُمْ لِآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِندَ اللَّهِ ۚ فَإِن لَّمْ تَعْلَمُوا آبَاءَهُمْ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ وَمَوَالِيكُمْ ۚ وَلَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ فِيمَا أَخْطَأْتُم بِهِ وَلَٰكِن مَّا تَعَمَّدَتْ قُلُوبُكُمْ ۚ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
उन्हें उनके बापों का बेटा कहकर पुकारो। अल्लाह के यहाँ यही अधिक न्यायसंगत बात है। और यदि तुम उनके बापों को न जानते हो, तो धर्म में वे तुम्हारे भाई तो हैं ही और तुम्हारे सहचर भी।
इस सिलसिले में तुमसे जो ग़लती हुई हो उसमें तुमपर कोई गुनाह नहीं, किन्तु जिसका संकल्प तुम्हारे दिलों ने कर लिया, उसकी बात और है। वास्तव में अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है।
33:6  النَّبِيُّ أَوْلَىٰ بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنفُسِهِمْ ۖ وَأَزْوَاجُهُ أُمَّهَاتُهُمْ ۗ وَأُولُو الْأَرْحَامِ بَعْضُهُمْ أَوْلَىٰ بِبَعْضٍ فِي كِتَابِ اللَّهِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُهَاجِرِينَ إِلَّا أَن تَفْعَلُوا إِلَىٰ أ

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विश्व  में भारतीय  संस्कृति और परम्परा  को महान  माना  जाता  है  .क्योंकि  इस में  स्त्रियों  को  देवी   की  तरह  सम्मान दिया  जाता   है  ।
लगभग  सन 622  में   मुहम्मद  साहब  को   मक्का  छोड़  कर  मदीना   जाना  पडा  था .उनके  साथ   कुछ  पुरुष  और  महिलायें  भी  थी . साथ   में  उनकी   प्रिय  पत्नी  आयशा  भी  थी . इसी  घटना   की  पृष्ठ-भूमि    में  कुरआन  की  सूरा  अहजाब की  वह  आयतें    दी गयी   हैं  जिनमे मौसी, चचेरी  बहिन  , और पुत्रवधु   से  शादी  करना  या उनसे  सम्भोग  करने  को जायज   ठहरा  दिया गया  है 

1–मौसी  के साथ कुकर्म
मुहम्मद  साहब  ने जिससे संभोग किया उस  पहली  औरत  का  नाम  ” खौला बिन्त  हकीम अल सलमिया  خولة بنت حكيم السلمية  ”  था  .
और  उसके  पति  का  नाम “उसमान  बिन  मजऊम –  عثمان بن مظعون‎ “  था .
खौला  मुहम्मद  साहब  की  माँ  की  बहिन  यानि  उनकी  सगी  मौसी  ( maternal aunt ) थी .
इसको  मुहम्मद  साहब  ने अपना  सहाबी  बना  दिया  था . मदीना  की  हिजरत  में मुहम्मद आयशा  के साथ  खौला को  भी  ले गए  थे .
यह  घटना  उसी  समय  की  है इस  औरत  ने  अय्याशी  के  लिए  खुद  को  मुहम्मद   के  हवाले  कर  दिया  था .यह बात  मुसनद   अहमद  में   इस प्रकार दी  गयी  है .👇
“खौला बिन्त  हकीम  ने रसूल  से पूछा  कि जिस औरत  को सपने में  ही स्खलन   होने  की  बीमारी  हो , तो  वह औरत  क्या  करे  , रसूल  ने  कहा  उसे  मेरे  पास लेटना  चाहिए “
“Khaula Bint Hakim al-Salmiya,asked the prophet about the woman having a wet dream, he said she should lay with    me “

محمد بن جعفر قال حدثنا شعبة وحجاج قال حدثني شعبة قال سمعت عطاء الخراساني يحدث عن‫حدثنا “””‬ ‫سعيد بن المسيب أن خولة بنت حكيم السلمية وهي إحدى خال ت النبي صلى ال عليه وسلم سألت النبي صلى ال‬ ‫عليه وسلم عن المرأة تحتلم فقال رسول ال صلى ال عليه وسلم لتغتسل‬Translation:26768 –

Musnad Ahmad (‫مسند أدحمد‬  )hadith-26768

तब  खौला  मुहम्मद  साहब  के पास  सो  गयी  , और  मुहम्मद  साहब  ने उसके  साथ सम्भोग  किया .2-आयशा  ने खौला  को  धिक्कारा
जब  आयशा  को पता  चला  कि  रसूल  चुपचाप  खौला  के साथ  सम्भोग  कर रहे  हैं तो उसने  खौला को  धिक्कारा और उसकी  बेशर्मी   के  लिए फटकारा  यह  बात इस हदीस  में  दी  गयी  है ,
“हिशाम  के  पिता  ने  कहा  कि  खौला  एक ऎसी  औरत थी  जिसने  सम्भोग  के लिए  खुद  को रसूल  के सामने  प्रस्तुत  कर  दिया था .इसलिए आयशा  ने उस  से  पूछा ,क्या तुझे एक पराये  मर्द  के सामने खुद  को पेश  करने  में  शर्म  नही  आयी ? 
तब रसूल  ने  कुरान  की  सूरा  अहजाब 33:50  की  यह  आयत सुना दी , जिसमे  कहा  था  ” हे नबी  तुम सम्भोग  के  लिए  अपनी  पत्नियों  की  बारी ( Turn )  को  टाल  सकते  हो .इस  पर आयशा  बोली  लगता  है  तुम्हारा अल्लाह  तुम्हें  और  अधिक  मजे  करने  की इजाजत  दे  रहा  है .”( I see, but, that your Lord hurries in pleasing you)
“حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلاَمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَتْ خَوْلَةُ بِنْتُ حَكِيمٍ مِنَ اللاَّئِي وَهَبْنَ أَنْفُسَهُنَّ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ عَائِشَةُ أَمَا تَسْتَحِي الْمَرْأَةُ أَنْ تَهَبَ نَفْسَهَا لِل

1–मौसी  के साथ कुकर्म
मुहम्मद  साहब  की  हवस  की शिकार  होने  वाली  पहली  औरत  का  नाम  ” खौला बिन्त  हकीम अल सलमिया  – خولة بنت حكيم السلمية  ”  था  . और  उसके  पति  का  नाम “उसमान  बिन  मजऊम –  عثمان بن مظعون‎ “  था  . खौला  मुहम्मद  साहब  की  माँ  की  बहिन  यानि  उनकी  सगी  मौसी  ( maternal aunt ) थी  . इसको  मुहम्मद  साहब  ने अपना  सहाबी  बना  दिया  था . मदीना  की  हिजरत  में मुहम्मद आयशा  के साथ  खौला को  भी  ले गए  थे .यह  घटना  उसी  समय  की  है इस  औरत  ने  अय्याशी  के  लिए  खुद  को  मुहम्मद   के  हवाले  कर  दिया  था .यह बात  मुसनद   अहमद  में   इस प्रकार दी  गयी  है .
“खौला बिन्त  हकीम  ने रसूल  से पूछा  कि जिस औरत  को सपने में  ही स्खलन   होने  की  बीमारी  हो , तो  वह औरत  क्या  करे  , रसूल  ने  कहा  उसे  मेरे  पास लेटना  चाहिए “
“Khaula Bint Hakim al-Salmiya,asked the prophet about the woman having a wet dream, he said she should lay with    me “

محمد بن جعفر قال حدثنا شعبة وحجاج قال حدثني شعبة قال سمعت عطاء الخراساني يحدث عن‫حدثنا “””‬ ‫سعيد بن المسيب أن خولة بنت حكيم السلمية وهي إحدى خال ت النبي صلى ال عليه وسلم سألت النبي صلى ال‬ ‫عليه وسلم عن المرأة تحتلم فقال رسول ال صلى ال عليه وسلم لتغتسل‬Translation:26768 –

Musnad Ahmad (‫مسند أدحمد‬  )hadith-26768

तब  खौला  मुहम्मद  साहब  के पास  सो  गयी  , और  मुहम्मद  साहब  ने उसके  साथ सम्भोग  किया .2-आयशा  ने खौला  को  धिक्कारा
जब  आयशा  को पता  चला  कि  रसूल  चुपचाप  खौला  के साथ  सम्भोग  कर रहे  हैं तो उसने  खौला को  धिक्कारा और उसकी  बेशर्मी   के  लिए फटकारा  यह  बात इस हदीस  में  दी  गयी  है ,
“हिशाम  के  पिता  ने  कहा  कि  खौला  एक ऎसी  औरत थी  जिसने  सम्भोग  के लिए  खुद  को रसूल  के सामने  प्रस्तुत  कर  दिया था .इसलिए आयशा  ने उस  से  पूछा ,क्या तुझे एक पराये  मर्द  के सामने खुद  को पेश  करने  में  शर्म  नही  आयी ? 
तब रसूल  ने  कुरान  की  सूरा  अहजाब 33:50  की  यह  आयत सुना दी , जिसमे  कहा  था  ” हे नबी  तुम सम्भोग  के  लिए  अपनी  पत्नियों  की  बारी ( Turn )  को  टाल  सकते  हो .इस  पर आयशा  बोली  लगता  है  तुम्हारा अल्लाह  तुम्हें  और  अधिक  मजे  करने  की इजाजत  दे  रहा  है .”( I see, but, that your Lord hurries in pleasing you)
“حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلاَمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ كَانَتْ خَوْلَةُ بِنْتُ حَكِيمٍ مِنَ اللاَّئِي وَهَبْنَ أَنْفُسَهُنَّ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ عَائِشَةُ أَمَا تَسْتَحِي الْمَرْأَةُ أَنْ تَهَبَ نَفْسَهَا لِلرَّجُلِ فَلَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏تُرْجِئُ مَنْ تَشَاءُ مِنْهُنَّ‏}‏ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا أَرَى رَبَّكَ إِلاَّ يُسَارِعُ فِي هَوَاكَ‏.‏ رَوَاهُ أَبُو سَعِيدٍ الْمُؤَدِّبُ وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ وَعَبْدَةُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ يَزِيدُ بَعْضُهُمْ عَلَى بَعْضٍ‏.‏

बुखारी -जिल्द 7 किताब  62  हदीस 48
3-आयशा  को ईर्ष्या  हुई

कोई  भी  महिला  अपने  पति की दूसरी   महिला  से अय्याशी  को  सहन   नहीं  करेगी  . आयशा  ने  रसूल से  कहा  कि  मुझे  इस औरत से ईर्ष्या  हो  रही  है . यह  बात  इस  हदीस  में  इस प्रकार  दी  गयी  है👇
आयशा ने  कहा  कि  मैं  रसूल से  कहा मुझे  उस  औरत   से  जलन  हो रही  है जिसने  सम्भोग  के लिए खुद  को तुम्हारे  हवाले  कर  दिया . क्या एसा  करना  गुनाह  नहीं  है . तब रसूल ने   सूरा अहजाब  की 33:50 आयत  सुना  कर  कहा  इसमे  कोई  पाप  नहीं  है  ,क्योंकि  यह अल्लाह  का  आदेश  है . तब  आयशा ने  कहा  लगता  है , तुम्हारे  अल्लाह  को तुम्हें  खुश  करने  की  बड़ी  जल्दी  है “(It seems to me that your Lord hastens to satisfy your desire. )

सही मुस्लिम -किताब 8  हदीस 3453

4-चचेरी  बहिन  से सहवास 👇

मुहम्मद  साहब  के  चाचा अबू  तालिब  की बड़ी    लड़की  का  नाम “उम्मे  हानी  बिन्त  अबू तालिब – أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ  “  था  .जिसे   लोग “फकीतः और  ” हिन्दा ”  भी  कहते  थे .यह  सन 630  ईसवी  यानि  8   हिजरी  की  बात  है . जब  मुहम्मद साहब  तायफ़  की  लड़ाई  में  हार  कर  साथियों  के साथ जान  बचाने  के  लिए  काबा  में  छुपे  थे .लकिन  मुहम्मद  साहब   चुपचाप  सबकी  नजरें   चुरा   कर   उम्मे  हानी  के घर  में  घुस  गए ,लोगों   ने  उनको  काबा  में  बहुत  खोजा  .और आखिर  वह उम्मे  हानी  के घर में  पकडे  गए  .इस  बात  को छुपाने  के  लिए मुहम्मद  साहब  ने एक कहानी  गढ़  दी  और  लोगों  से  कहा कि  मैं  यरुशलेम  और  जन्नत  की  सैर  करुँगा ।
नि: सन्देह भारतीयों के पुराणों की हालत तथा कुरान के बहुतायत अंश भी समान नारी भोग वाद का समर्थन करते हुए होते हैं ।👇
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बहन से सेक्स का फरमान :- कुरान सूरा 33 की आयत 50
2) पुत्रबधू / बहू से सेक्स जायज़ :- कुरान सूरा 33 की आयत 36 और 37
3) मुसलमानों को नई और अच्छी औरतें की आपूर्ति  करते अल्लाह :- 66 :5, 4 :34
4) जन्नत मे हूर और गिलीमा (लड़के)  आपूर्ति करते अल्ला :- 3 :28, 56 :17,
5) औरत तुम्हारी खेती हैं, जैसे मन करे जोतो :- कुरान सूरा 2 आयत 223
6) औरत की छड़ी से पिटाई का फरमान :- 38 :44 & 4:34
7) "हालला" से औरत को वेश्या बनाने का फरमान :- कुरान सूरा 2 आयत 230
8) युद्ध मे पकड़ी गईं काफिरों की औरतों को लौंडियाँ (Whore)बनाने का फरमान :- 33 :52 , 70 :30, 23:6,
9) पुरुषों को स्त्रियों से ऊंचा दर्जा प्राप्त है :- 2 :228, 4 :34
10) आस-पास के सभी काफिरों से लड़ते रहो-उन्हे घेरो, कत्ल करो :- 8:12,8:39, 8 :60, 9 :5, 2 :191-194
11) काफिरों से मुसलमान दोस्ती न रखे, वरना अल्लाह नाराज :- 3:28
12) काफिरों को नरक की आग मे जलाने,कष्ट देने वाला अल्ला :- 9 :73, 2:114
13) माँ बाप और भाइयों को अपना मित्र नहीं बनाना यदि वह मुसलमान नहीं बनते :- 9 :23, 58 :22
14) क्रिश्चियन और यहूदी से दोस्ती नहीं करने और हत्या का फरमान :- 5:51 & 9:29 अर्थात् यहूदीयों और ईसाई मुसलमान के दुश्मन हैं ।
और आखिर में जानिए की -- कुरान की आयतें अल्लाह जिस पिगअंबर के दिमाग मे नाजिल किया करते थे, वो खुद एक अंगूठाछाप जाहिल थे :- कुरान सूरा 29 की आयत 49, 62 :2 और 7 :157
(कुरान सुरह निसा आयत २०)

तलाक देकर या बिना तलाक दिए मर्दों को इच्छानुसार आपस में अपनी बीबियाँ बदल लेने का अधिकार कुरान ने इस शर्त पर दिया है की इसे दिया हुआ माल वापिस न लिया जावे |

इस शर्त का पालन करने वाले दो दोस्त आपस में अपनी बीबियाँ ऐसे ही बदल सकते हैं जैसे लोग अपनी बकरी या गाय, भेंस आदि बदल लेते हैं |

भारतीय समाज में पति-पत्नी का रिश्ता जीवन भर के लिए अटूट होता है, पर इस्लाम में मर्द जब चाहे तब अपनी पुरानी बीबी को अपनी पुराणी जूती की तरह नई नवेली बीबी से बदल सकता है |

इस्लाम में कोई बीबी नहीं जानती की उसका शौहर कब उसे किसी दूसरी नई बीबी से बदल लेवे | इसके लिए तलाक का आसान तरीका इस्लाम में चालु जो है |

मर्द सिर्फ तीन बार तलाक ! तलाक !! तलाक !!! औरत को बोल दे और तलाक जायज हो जाता है |

     देखिये:- कुरान में सूरते बकर रुकू २८ में आयत २२८ से २३७ तक तलाक का विधान मौजूद है | उस पर श्री अहमद बशीर साहब ऍम.ए. कामिल, तथा दवीर कामिल मौलवी अपने कुरान के भाष्य में पृष्ठ ५५ पर लिखते हैं की:-

तलाक का यह दस्तूर है की जब कोई मुसलमान मर्द अपनी औरत को तलाक देता है तो कम से कम दो आदमियों के सामने तलाक देता है, और एक महीनें के बाद दूसरी तलाक भी उसी तरह देता है |

    यहाँ तक तो मियाँ बीबी में सुलहनामाँ हो सकता है, परन्तु इसके एक महीने बाद तीसरी तलाक दी जाती है | इस तीसरी तलाक देने के बाद फिर मर्द उस औरत के पास नहीं जा सकता |
यह औरत तीन महीना दस दिन बाद दुसरा निकाह गैर आदमी से कर सकती है |

     दुसरे पति के साथ निकाह हो जाने पर अगर दुसरा पति तलाक दे दे तो सिर्फ इस हालत में की वह दुसरे पति के साथ सम्भोग कर चुकी हो अर्थात हमबिस्तर हो चुकी हो, तो तभी अपने पूर्व पति के साथ फिर निकाह कर सकती है |

    परन्तु जब तक किसी दुसरे आदमी के साथ निकाह करके विषयभोग न कर ले (यानी हमबिस्तर न हो ले ) तब तक कदापि अपने पहले खाविन्द अर्थात पति के साथ निकाह नहीं कर सकती |

इस तलाक के विधान में हम केवल यह बात नहीं समझ सके की तीसरी तलाक के बाद औरत को गैर आदमी से निकाह व् सम्भोग कराने के बाद ही उसे तलाक देकर आने के बाद ही पूर्व पति स्वीकार करेगा, बिना गैर आदमी से सम्भोग कराये नहीं करेगा ?

दुसरा शौहर करके उससे कुकर्म कराने पर औरत में ऐसा कौन सा जायका बढ़ जाता है ? मौलवी लोग इसका खुलासा करें तथा इस अजीबोगरीब फिलासफी को ज़रा सबकी भलाई के लिए विस्तार से समझाए |

हमारी निगाह में तो इस रिवाज के मुताबिक़ औरत और भी ज्यादा बेशर्म बनेगी |

कुरान की इस आयत के समर्थन में बुखारी शरीफ में एक कथा दी है, जो हदीस न० ६९२ पृष्ठ ३३१ व् ३३२ पर लिखी है, देखिये-

हजरत आयशा फरमाती हैं की-

        “रफाअकुरती की औरत रसूलल्लाह सलालेहु वलैहिअसल्लम (मुहम्मद साहब) की खिदमत में हाजिर हुई और अर्ज किया की में रफाअ के पास (यानी उसके निकाह में) थी |

   उसने मुझे तीन तलाक दे दी उसके बाद मैंने अब्दुल रहमान बिन जबीर से निकाह कर लिया | परन्तु उसके पास (उसका लिंग) कपडे के फुन्दने की तरह है ! यानी उअसका ऐजातमासुल ढीला और नरम है |

    तब आपने फरमाया ! “क्या तू रफाअ के पास फिर जाना चाहती है ? नहीं ( तू नहीं जा सकती ) जब तक तू अब्दुल रहमान बिन जबीर का शहद न चख ले और वह तेरा शहद न चख ले” |

तिरमिजी शरीफ में भी सफा २२५ हदीस ९८१ में यही कथा दी है बस! फर्क सिर्फ इतना है की –

वहां शहद की जगह “जायका” न चख ले और तेरा शहद वह न चख ले  ये शब्द लिखे है |

आश्चर्य है इस्लाम में ऐसी शर्नाक बात को बीबी आयशा के मुहँ से कहलवाया गया है जिसे कोई भी औरत अपने मुहँ से कहना अथवा बताना पसन्द नहीं कर सकती |

नि: सन्देह भारतीयों के पुराणों की हालत तथा कुरान के बहुतायत अंश भी समान नारी भोग वाद का समर्थन करते हुए होते हैं ।👇
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