शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

वेदों में भी राधा कृष्ण को गोप रूप में वर्णन किया गया ।

आर्य समाजीयों ने वेदों को अपौरुषेय स्वीकार करते हुए
उसमें इतिहास नहीं माना !

उन्होंने वैदिक ऋचाओं का अन्वय अपने पूर्व दुराग्रह से प्रेरित होकर किया !


और पुराणों में व्याप्त अन्ध-विश्वास आदि विकृतियों का भी पूर्ण परिमार्जन अपेक्षित रूप में नहीं किया !

 
जैसे कींचड़ को साफ तो  कर दें परन्तु उसे समूल रूप से मिटाऐं या वहाँ से दूर नहीं हटाऐं ।

बरसात में फिर वह कींचड़ वहीं पहुँचेगी ?

परन्तु यह केवल कींचड़ को साफ ही करना है ! कींचड़ हठाना नहीं हुआ है ।


आर्य समाजीयों ने जिस महाभारत को प्रमाणित माना है  उसमें भी अनेक कल्पनाओं का समावेश है ।
उसके भीष्म-पर्व में महात्मा बुद्ध का वर्णन है ।

कल्कि अवतार का वर्णन आदि भी हैं !


और वाल्मीकि रामायण क भी ये प्रमाणित मानते हैं ! अयोध्या काण्ड में महात्मा  बुद्ध का वर्णन है।

 महाभारत और पुराणों की कथाऐं समान हैं ।
महाभारत में श्रीमद्भागवत् गीता को पाँचवीं सदी में अलग से समायोजित किया गया है । 

क्यों कि गीता के श्लोक उपनिषदों में भी हैं ।. 👇
आत्मा शाश्वत तत्व है !

आत्मा अवनाशी है ये बातें 
श्रीमद्भगवत् गीता तथा कठोपोनिषद कुछ साम्य के साथ हैं दौंनों का यह उद्घोष है ⬇
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न जायते म्रियते वा कदाचित् न
अयम् भूत्वा भविता वा न भूयः | 


अजो नित्यः शाश्वतोSयम् पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे ||

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     (श्रीमद्भागवत् गीता .)..

कृष्ण का उल्लेख महाभारत से प्राचीन ग्रन्थों छान्दोग्य उपनिषद, कौषीतकी ब्राह्मण तथा ऋग्वेद के अष्टम मण्डल में भी है ।

कृष्ण का स्पष्ट प्रमाण हमें छान्दोग्य उपनिषद के एक श्लोक में मिलता है।
छान्दोग्य उपनिषद  :--(3.17.6 ) 👇

कल्पभेदादिप्रायेणैव “तद्धैतत् घोर आङ्गिरसः कृष्णाय देवकीपुत्रायोक्त्वोवाच” इत्युक्तम् ।
वस्तुतस्तस्य भगवदवतारात् भिन्नत्वमेव तस्य घोरा- ङ्गिरसशिष्यत्वोक्ते:
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कहा गया है कि देवकी पुत्र श्रीकृष्ण को महर्षि  घोर- आंगिरस् ने निष्काम कर्म रूप यज्ञ उपासना की शिक्षा दी थी !
जिसे ग्रहण कर श्रीकृष्ण 'तृप्त' अर्थात पूर्ण पुरुष हो गए थे।
श्रीकृष्ण का जीवन, जैसा कि महाभारत में वर्णित है, इसी शिक्षा से अनुप्राणित था ; और गीता में उसी शिक्षा का प्रतिपादन उनके ही माध्यम से किया गया है।

परन्तु पुष्यमित्र सुंग ई०पू०१४८ के अनुयायी ब्राह्मणों ने कुछ बातें जोड़ दी हैं।
👇
पुराणों में यमुना ओर यम को अंशुमान् के सन्तति रूप में वर्णित किया है ।
ऋग्वेद के अष्टम् मण्डल के सूक्त संख्या 96के श्लोक- (13,14,15,)पर असुर अथवा दास कृष्ण का युद्ध इन्द्र से हुआ ऐसी वर्णित है :-👇

आवत् तमिन्द्र: शच्या धमन्तमप स्नेहितीर्नृमणा अधत्त । 

द्रप्सम पश्यं विषुणे चरन्तम् उपह्वरे नद्यो अंशुमत्या: न भो न कृष्णं अवतस्थि वांसम् इष्यामि ।
वो वृषणो युध्य ताजौ ।14। 


अध द्रप्सम अंशुमत्या उपस्थे८धारयत्
तन्वं तित्विषाण: विशो (अदेवीरभ्या )
चरन्तीर्बृहस्पतिना युज इन्द्र: ससाहे ।।15।।

ऋग्वेद में वर्णन मिलता है ---" कि कृष्ण जो  देवों को न मानने वाला है वह अंशुमती अर्थात् यमुना नदी के तटों पर दश हजार सैनिको (ग्वालो)के साथ गायें चराता हुआ रहता है । 

उसे अपने बुद्धि -बल से इन्द्र ने खोज लिया ,
और उसकी सम्पूर्ण सेना तथा गोओं का हरण कर लिया 
इन्द्र कहता है कि कृष्ण  को मैंने देख लिया है जो देवों को न मानने वाला है  ।
जो यमुना के एकान्त स्थानों पर गायें चराता रहता है
 इस उपर्युक्त ऋचा में (चरन्तम् )  क्रिया  पद कृष्ण के    गोप होने का सशक्त प्रमाण है ।

पुराणों में भी इन्द्र और कृष्ण का सांस्कृतिक विरोध सर्ववविदित है !

वेदों में राधा , कृष्ण , वृषभानु , गोप, और व्रज आदि का वर्णन भी बहुतायत से आया है !

वेदों में भी राधा कृष्ण को गोप रूप में वर्णन किया गया ।

जिसका प्रमाण हम नीचे देते है ।

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आ नः स्तुत उप वाजेभिरूती इन्द्र याहि हरिभिर्मन्दसानः। तिरश्चिदर्यः सवना पुरूण्याङ्गूषेभिर्गृणानः सत्यराधाः ॥१॥

👇

आ। नः। स्तुतः। उप। वाजभिः। ऊती। इन्द्र। याहि। हरिभिः। मन्दसानः। तिरः। चित्। अर्यः। सवना। पुरूणि। आङ्गूषेभिः। गृणानः। सत्यराधाः ॥१॥

(ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:29» ऋचा :1 )|

अन्वय:👇

  स्तुतो मन्दसान आङ्गूषेभिर्गृणानः सत्यराधा अर्य्यस्त्वं पुरूणि सवना प्राप्तः तिरश्चित्सन्नूती वाजेभिर्हरिभिश्च सह न उपायाहि ॥१॥

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हे इन्द्र  राधा  सत्य हैं -स्तोत्रों के द्वारा प्रसन्न  आनन्दित होते हुए पूर्ण यज्ञों के प्राप्त करने वाली हैं ।

राधा ही हरि के अनेक रूपों के साथ संसार से पार करने के लिए हमारी यज्ञों में आऐं  ! हम उन्हें बुलाते हैं !इन्द्र तुम हमारी सहायता करो ! ________________________

पदार्थान्वयभाषाः -हे राधा तुम सत्य हो  (स्तुतः) प्रशंसित (वाजेभिः)यज्ञों के द्वारा (मन्दसानः) तुमारी आराधना करते हुए (आङ्गूषेभिः) स्त्रोतों के 

(गृणानः) गायन करते हुए 

(अर्य्यः) स्वामी आप (पुरूणि) बहुत से  (सवना)  यज्ञों वाली

  (तिरः) पार करने वाली (चित्) भी होते हुए (सह हरिभिः) हरि के अनेक रूपों साथ  (नः) हम लोगों के

 ( ऊती) रक्षण आदि के लिये (उप, आयाहि) आइए ॥१॥

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आ हि ष्मा याति नर्यश्चिकित्वान्हूयमानः सोतृभिरुप यज्ञम्। 

स्वश्वो यो अभीरुर्मन्यमानः सुष्वाणेभिर्मदति सं ह वीरैः ॥२॥

आ। हि। स्म। याति। नर्यः। चिकित्वान्। हूयमानः। सोतृऽभिः। उप। यज्ञम्। सुऽअश्वः। यः। अभीरुः। मन्यमानः। सुस्वानेभिः। मदति। सम्। ह। वीरैः ॥२॥

ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:29» ऋचा:2 | 

अन्वय:

हे मनुष्या ! योऽभीरुर्मन्यमानः स्वश्वश्चिकित्वान् हूयमानो नर्य्यो हि सोतृभिः सह यज्ञमुपायाति ष्मा स सुष्वाणेभिवीरैस्सह सम्मदति ह ॥२॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्यो ! (यः) जो (अभीरुः)  अभीर के घर    (चिकित्वान्)  कित-- निवासे -निवास करने करते हुए (मन्यमानः)माने जाते हुए

 (स्वश्वः) अपने घोड़े से साथ (हूयमानः) आह्वान किये जाते हुए।

  (नर्य्यः) मनुष्यों में श्रेष्ठ (हि)

 (यज्ञम्) यज्ञ के सोतृभिः) 

अनुष्ठान करने वालों के साथ  

(उप, आ, याति, स्म) 

 उनके समीप आते हैं ।

(सुष्वाणेभिः) तीक्ष्ण वाणों वाले (वीरैः) वीरों के द्वारा (सम्, मदति, ह)

उनके कारनामों से आप प्रसन्न होते हैं अथवा एैसा कार्य आपको आनन्दित करता है ।२।।

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श्रावयेदस्य कर्णा वाजयध्यै जुष्टामनु प्र दिशं मन्दयध्यै। उद्वावृषाणो राधसे तुविष्मान्करन्न इन्द्रः सुतीर्थाभयं च ।३।।

श्रवय। इत्। अस्य। कर्णा। वाजयध्यै। जुष्टाम्। अनु। प्र। दिशम्। मन्दयध्यै। उत्ऽववृषाणः। राधसे। तुविष्मान्। करत्। नः। इन्द्रः। सुऽतीर्था। अभयम्। च ॥३॥

अन्वय:

 त्वमस्य कर्णा वाजयध्यै जुष्टामनु श्रावय येनाऽयं दिशं मन्दयध्यै उद्वावृषाणस्तुविष्मानिन्द्रो राधसे नःसुतीर्थाभयञ्चेदेव प्र करत् ॥३॥

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पदार्थान्वयभाषा:-

(राधसे नः )हे राधे हम आपके लिए  स्तुति करते हैं । (सुतीर्थाभयञ्चेदेव प्र करत)-हम सब अच्छे तीर्थों में  (अस्य) इसके (कर्णा)- दौंनों कानों को स्तुत करते हुए प्रसन्न करें ।

 (वाजयध्यै) -यज्ञ करें और (जुष्टाम्) -जिन्हें प्रसन्न करें 

 (अनु, श्रावय) हे राधे तुम जहाँ हो  अपने कानों से सुनलो (दिशम्) दिशा को (मन्दयध्यै)  गुञ्जायमान करें  हे राधे इन्द्र तुम्हारे प्रशंसक हैं ।

(उद्वावृषाणः) बरस कर बहने वाले (तुविष्मान्) वेगयुक्त इन्द्र भी ॥३॥

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अच्छा यो गन्ता नाधमानमूती इत्था विप्रं हवमानं गृणन्तम्। 

उप त्मनि दधानो धुर्या३शून्त्सहस्राणि शतानि वज्रबाहुः 

॥४॥

अच्छ। यः। गन्ता। नाधमानम्। ऊती। इत्था। विप्रम्। हवमानम्। गृणन्तम्। उप। त्मनि। दधानः। धुरि। आशून्। सहस्राणि। शतानि। वज्रऽबाहुः ॥४॥

ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:29» मन्त्र:4 | 

अन्वय:

हे मनुष्या ! यो गन्तोती इत्था नाधमानं हवमानं गृणन्तं विप्रं त्मन्युप दधानः सहस्राणि शतान्याशून् धुरि दधानोऽच्छ गन्ता वज्रबाहू राजा भवेत् सोऽस्मानभयङ्कर्त्तुमर्हेत् ॥४॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्यो ! (यः) जो (गन्ता) चलनेवाला (ऊती) रक्षण आदि के लिये (इत्था) इस प्रकार से (नाधमानम्) ऐश्वर्य्यवान् प्रशंसित (हवमानम्) ईर्ष्या करनेवाले (गृणन्तम्) स्तुति करते हुए (विप्रम्) बुद्धिमान् को (त्मनि) आत्मा में (उप, दधानः) धारण करता हुआ (सहस्राणि) सहस्रों और (शतानि) सैकड़ों (आशून्) शीघ्र चलनेवाले घोड़ों को (धुरि) रथ के जुए में धारण करता हुआ (अच्छ) उत्तम प्रकार चलनेवाला (वज्रबाहुः) शस्त्र हाथों में लिये राजा हों वह हम लोगों को भयरहित करने योग्य हो ॥४!

त्वोतासो मघवन्निन्द्र विप्रा वयं ते स्याम सूरयो गृणन्तः। भेजानासो बृहद्दिवस्य राय आकाय्यस्य दावने पुरुक्षोः

 ॥५॥

त्वाऽऊतासः। मघऽवन्। इन्द्र। विप्राः। वयम्। ते। स्याम। सूरयः। गृणन्तः। भेजानासः। बृहत्ऽदिवस्य। रायः। आऽकाय्यस्य। दावने। पुरुऽक्षोः ॥५॥

ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:29» ऋचा :5 | 

अन्वय:

हे मघवन्निन्द्र ! त्वोतासो भेजानासो गृणन्तो विप्राः सूरयो वयं बृहद्दिवस्याकाय्यस्य पुरुक्षोः ते रायो दावने स्थिराः स्याम ॥५॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (मघवन्) श्रेष्ठ धनयुक्त (इन्द्र) उत्तम गुणों के धारण करनेवाले राजन् !

 (त्वोतासः) आप से रक्षा और वृद्धि को प्राप्त (भेजानासः) सेवन और (गृणन्तः) स्तुति करते हुए (विप्राः) ज्ञानवपन करने वाला (सूरयः) प्रकाशित विद्यावाले (वयम्) हम लोग (बृहद्दिवस्य) प्रकाशमान (आकाय्यस्य) सब प्रकार शरीर में उत्पन्न (पुरुक्षोः) बहुत अन्नादि से युक्त (ते) आपके (रायः) धन के और (दावने) देनेवाले के लिये स्थिर (स्याम) हो जाऐं ॥५॥

अन्वय भेद से अर्थ भेद  हो जाता है और अनेक भाष्य कारों ने यही किया !

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राधा वस्तुतः प्रेम अर्थात् भक्ति की अधिष्ठात्री देवी थी ।

यह गोप शब्द वेदों में भी आया है ।

 (यथा, ऋग वेद में गोप शब्द आभीर अथवा गोपालन करने वाले का वाचक है ।। १० । ६१ । १० 👇

 द्विबर्हसो य उप गोपम्  आगुरदक्षिणासो अच्युता दुदुक्षन् 

बर्ह--स्तुतौ असुन् । आस्तरणे ऋ० १ । ११४ । १० ।

आ + गुर्--क्विप् । प्रतिज्ञायाम् “अस्य यज्ञस्यागुर उदृचमशीय” श्रुतिः ।

अर्थात् जो दो वार  स्तुति युक्त होकर प्रतिज्ञा कर विना गिरे हुए   दक्षिणा देने के लिए गाय दुहने की इच्छा से पास आता है वह गोप धन्य है ।

वैदिक संहिताओं में राधा शब्द वृषभानु गोप की पुत्री का वाचक है

व्युत्पत्ति-मूलक दृष्टि से राधा:- स्त्रीलिंग शब्द है👇

(राध्नोति साधयति सर्वाणि कार्य्याणि साधकानिति राधा कथ्यते" 

(राध् + अच् । टाप् ):- राधा -

अर्थात् जो साथकों के समस्त कार्य सफल करती है वह ईश्वरीय सत्ता।

वेदों में राधा का वर्णन पवित्र भक्ति के रूप में है ।

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इदं ह्यन्वोजसा सुतं राधानां पते |

पिबा त्वस्य गिर्वण : ।।

(ऋग्वेद ३. ५ १. १ ० )

  अर्थात् :- हे  ! राधापति श्रीकृष्ण ! यह सोम ओज के द्वारा निष्ठ्यूत किया ( निचोड़ा )गया है । वेद मन्त्र भी तुम्हें जपते हैं, उनके द्वारा  तुम सोमरस पान करो।

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विभक्तारं हवामहे वसोश्चित्रस्य  राधस : सवितारं नृचक्षसं 

(ऋग्वेद १ .  २ २.  ७) 

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सब के हृदय में विराजमान सर्वज्ञाता दृष्टा ! 

जो राधा को गोपियों में से ले गए वह सबको जन्म देने वाले प्रभु  हमारी रक्षा करें। 

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त्वं नो अस्या उषसो व्युष्टौ त्वं सूरं उदिते  बोधि गोपा: 

जन्मेव नित्यं तनयं जुषस्व स्तोमं मे अग्ने तन्वा सुजात।। 

(ऋग्वेद -मण्डल-३/सूक्त-१५/ऋचा-२)

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अर्थात् :- गोपों में रहने वाले तुम इस उषा काल के पश्चात् सूर्य उदय काल में हमको जाग्रत करें ।

जन्म  के समान नित्य  तुम  विस्तारित होकर प्रेम पूर्वक

स्तुतियों का सेवन करते हो  ,तुम अग्नि के समान सर्वत्र उत्पन्न हो ।

त्वं नृ चक्षा वृषभानु पूर्वी : कृष्णाषु अग्ने अरुषो विभाहि ।  

वसो नेषि च पर्षि चात्यंह: कृधी नो राय उशिजो यविष्ठ ।।  

(ऋग्वेद - -मण्डल-३/सूक्त-१५/ऋचा-३ )

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अर्थात् तुम मनुष्यों को देखो वृषभानु ! 

पूर्व काल में  कृष्ण ही अग्नि के सदृश् गमन करने वाले थे !

ये सर्वत्र दिखाई देते हैं ,  ये कृष्ण अग्नि रूप हमारे लिए धन उत्पन्न करें 

इस  दोनों ऋचाओं  में श्री राधा के पिता वृषभानु गोप और कृष्ण का उल्लेख किया गया है ।

 जो अन्य सभी प्रकार के सन्देह को भी निर्मूल कर देता है ,क्योंकि वृषभानु गोप ही राधा के पिता हैं। 

यस्या रेणुं  पादयोर्विश्वभर्ता धरते मूर्धिन प्रेमयुक्त : 

-(अथर्व वेदीय राधिकोपनिषद )

राधा वह व्यक्तित्व है , जिसके कमल वत्  चरणों की रज श्रीकृष्ण अपने माथे पे लगाते हैं। 

पुराणों में श्री राधा जी का वर्णन कर पुराण कारों ने उसे अश्लीलताओं से पूर्ण कर अपनी 

काम प्रवृत्तियों का ही प्रकाशित किया है   

श्रीमद्भागवत पुराण के रचयिता के अलावा १७ और अन्य पुराण रचने वालों ने राधा का वर्णन नहीं किया है ।

विदित हो कि भागवत महात्मय में ही राधा का वर्णन है । भागवत पुराण में नहीं !

जो पद्म पुराण से संग्रहीत है !

इनमें से केवल छ :  पुराणों में श्री राधा का उल्लेख है। 

जैसे 

" राधा प्रिया विष्णो : (पद्म पुराण ) 

राधा वामांश सम्भूता महालक्ष्मीर्प्रकीर्तिता 

(नारद पुराण ) 

तत्रापि राधिका शाश्वत (आदि पुराण )

रुक्मणी द्वारवत्याम 

तु राधा वृन्दावन वने ।

(मत्स्य पुराण १३. ३७ 

(साध्नोति साधयति  सकलान् कामान् यया  राधा प्रकीर्तिता: )

(देवी भागवत पुराण )

राधोपनिषद में श्री राधा जी के २८ नामों का उल्लेख है।

गोपी ,रमा तथा "श्री "राधा के लिए ही प्रयुक्त हुए हैं। 

कुंचकुंकु मगंधाढयं मूर्ध्ना वोढुम गदाभृत : 

(श्रीमदभागवत )

हमें राधा के चरण कमलों की रज चाहिए जिसकी रोली  श्रीकृष्ण के पैरों से संपृक्त  है (क्योंकि राधा उनके चरण अपने ऊपर रखतीं हैं ).

यहाँ "श्री "राधा के लिए ही प्रयुक्त हुआ है ।

महालक्ष्मी के लिए नहीं। 

क्योंकि द्वारिका की रानियाँ तो महालक्ष्मी की ही वंशवेल हैं। 

वह महालक्ष्मी के चरण रज के लिए उतावली क्यों रहेंगी ? 

रेमे रमेशो व्रजसुन्दरीभिर्यथार्भक : स्वप्रतिबिम्ब विभाति "      (श्रीमदभागवतम १ ०/ ३३/१ ६ कृष्ण रमा के संग रास करते हैं।

 यहाँ रमा राधा के लिए ही आया है। रमा का मतलब लक्ष्मी  भी होता है लेकिन यहाँ इसका रास   प्रयोजन नहीं है.लक्ष्मीपति रास नहीं करते हैं।

रास तो लीलापुरुष घनश्याम ही करते हैं। 

आक्षिप्तचित्ता : प्रमदा रमापतेस्तास्ता विचेष्टा सहृदय तादात्म्य                              -(श्रीमदभागवतम १ राधा वस्तुतः प्रेम अर्थात् भक्ति की अधिष्ठात्री देवी थी 

यह शब्द वेदों में भी आया है ।

व्युत्पत्ति-मूलक दृष्टि से राधा:- स्त्रीलिंग(राध्नोति साधयति सर्वाणि कार्य्याणि साधकानिति राधा कथ्यते" (राध् + अच् । टाप् ):-

अर्थात् जो साथकों के समस्त कार्य 

सफल करती है ।

वेदों में राधा का वर्णन पवित्र भक्ति रूप में है ।

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त्वं नृ चक्षा वृषभानु पूर्वी : कृष्णाषु अग्ने अरुषो विभाहि ।

वसो नेषि च पर्षि चात्यंह: कृधी नो राय उशिजो यविष्ठ ।।  (ऋग्वेद - -मण्डल-३/सूक्त-१५/ऋचा-३ )

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अर्थात् तुम मनुष्यों को देखो वृषभानु ! पूर्व काल में  कृष्ण अग्नि के सदृश् गमन करने वाले है । ये सर्वत्र दिखाई देते हैं , ये अग्नि भी हमारे लिए धन उत्पन्न करें  

इस  दोनों मन्त्रों में श्री राधा के पिता वृषभानु गोप  का उल्लेख किया गया है । 

जो अन्य सभी प्रकार के सन्देह को भी निर्मूल कर देता है ,क्योंकि वृषभानु गोप ही राधा के पिता हैं|

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यस्या रेणुं  पादयोर्विश्वभर्ता धरते मूर्धिन प्रेमयुक्त :

-(अथर्व वेदीय राधिकोपनिषद )

राधा वह व्यक्तित्व है , जिसके कमल वत्  चरणों की रज श्रीकृष्ण अपने माथे पे लगाते हैं। 

उपनिषदों में कृष्ण का उल्लेख है ! 👇

कृष्ण का स्पष्ट प्रमाण हमें छान्दोग्य उपनिषद के एक श्लोक में मिलता है। 

छान्दोग्य उपनिषद  :--(3.17.6 ) 

कल्पभेदादिप्रायेणैव “तद्धैतत् घोर आङ्गिरसः कृष्णाय देवकीपुत्रायोक्त्वोवाच” इत्युक्तम् ।

 वस्तुतस्तस्य भगवदवतारात् भिन्नत्वमेव तस्य घोरा- ङ्गिरसशिष्यत्वोक्ते:

कहा गया है कि देवकी पुत्र श्रीकृष्ण को महर्षि  घोर- आंगिरस् ने निष्काम कर्म रूप यज्ञ उपासना की शिक्षा दी थी ! जिसे ग्रहण कर श्रीकृष्ण 'तृप्त' अर्थात पूर्ण पुरुष हो गए थे। 

श्रीकृष्ण का जीवन, जैसा कि महाभारत में वर्णित है, इसी शिक्षा से अनुप्राणित था ; और गीता में उसी शिक्षा का प्रतिपादन उनके ही माध्यम से किया गया है।

पुराणों में श्री राधा जी का वर्णन कर पुराण कारों ने उसे अश्लीलताओं से पूर्ण कर अपनी काम प्रवृत्तियों का ही प्रकाशन किया है

श्रीमद्भागवत पुराण के रचयिता के अलावा १७ और अन्य पुराण रचने वालों ने राधा का वर्णन नहीं किया है ।

इनमें स केवल छ : पुराणों में श्री राधा का उल्लेख है। 

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यथा " राधा प्रिया विष्णो : (पद्म पुराण )

राधा वामांश सम्भूता महालक्ष्मीर्प्रकीर्तिता 

(नारद पुराण ) 

तत्रापि राधिका शश्वत (आदि पुराण 

रुक्मणी द्वारवत्याम तु राधा वृन्दावन वने 

(मत्स्य पुराण १३. ३७)

 "साध्नोति साधयति  सकलान् कामान् यया  राधा प्रकीर्तिता: "

(देवी भागवत पुराण )

राधोपनिषद में श्री राधा जी के 28 नामों का उल्लेख है।

गोपी ,रमा तथा "श्री "राधा के लिए ही प्रयुक्त हुए विशेषण हैं। 

कुंचकुंकु मगंधाढयं मूर्ध्ना वोढुम गदाभृत : (श्रीमदभागवत )

हमें राधा के चरण कमलों की रज चाहिए जिसकी रोली  श्रीकृष्ण के पैरों से संपृक्त  है (क्योंकि राधा उनके चरण अपने ऊपर रखतीं हैं ).

यहाँ "श्री "राधा के लिए ही प्रयुक्त हुआ है 

महालक्ष्मी के लिए नहीं। 

क्योंकि द्वारिका की रानियाँ तो महालक्ष्मी की ही वंशवेल हैं। 

वह महालक्ष्मी के चरण रज के लिए उतावली क्यों रहेंगी ? 

रेमे रमेशो व्रजसुन्दरीभिर्यथार्भक : स विभाति                    

-(श्रीमदभागवतम १ ०. ३३.१ ६ कृष्ण रमा के संग रास करते हैं। 

यहाँ रमा राधा के लिए ही आया है। रमा का मतलब लक्ष्मी  भी होता है लेकिन यहाँ इसका रास   प्रयोजन नहीं है.लक्ष्मीपति रास नहीं करते हैं।

रास तो लीलापुरुष घनश्याम ही करते हैं। 

आक्षिप्तचित्ता : प्रमदा रमापतेस्तास्ता विचेष्टा सहृदय तादात्म्य                             -(श्रीमदभागवतम १०. ३०.२ )

जब श्री कृष्ण महारास के मध्यअप्रकट(दृष्टि ओझल ,अगोचर ) हो गए गोपियाँ प्रलाप करते हुए मोहभाव को प्राप्त हुईं। 

वे रमापति (रमा के पति ) के रास का अनुकरण करने लगीं।  स्वांग भरने  लगीं। यहाँ भी रमा का अर्थ  राधा ही है  लक्ष्मी नहीं हो सकता क्योंकि  विष्णु रास रचाने वाले  नहीं रहे हैं।

वस्तुत यह अति श्रृंगारिकता कृष्ण के पावन चरित्र को लाँछित भी करती है । 

परन्तु ये सब काल्पनिक उड़ाने मात्र ही  हैं  

यां गोपीमनयत कृष्णो (श्रीमद् भागवत १०/३०/३५ )

श्री कृष्ण एक गोपी को साथ लेकर अगोचर (अप्रकट )हो गए।

महारास से विलग हो गए। 

गोपी राधा का भी एक रूप है।

जब श्री कृष्ण महारास के मध्य अप्रकट (दृष्टि ओझल ,अगोचर ) हो गए गोपियाँ प्रलाप करते हुए मोहभाव को प्राप्त हुईं। 

वे रमापति (रमा के पति ) के रास का अनुकरण करने लगीं।  

स्वांग भरने  लगीं।

 यहाँ भी रमा का अर्थ  राधा ही है । लक्ष्मी नहीं हो सकता क्योंकि  विष्णु रास रचाने वाले  नहीं रहे हैं।

वस्तुत यह अति श्रृंगारिकता कृष्ण के पावन चरित्र को लाँछित भी करती है । परन्तु ये सब काल्पनिक उड़ाने मात्र ही  हैं ।

यां गोपीमनयत कृष्णो (श्रीमद् भागवत १०/३०/३५ )

श्री कृष्ण एक गोपी को साथ लेकर अगोचर (अप्रकट )

हो गए।

महारास से विलग हो गए ।

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मोहनजोदाड़ो सभ्यता के विषय में 1929 में हुई। पुरातत्व वेत्ता मैके द्वारा मोहनजोदाड़ो में हुए उत्खनन में एक पुरातन टैबलेट(भित्तिचित्र) मिला है !

जिसमें दो वृक्षों के बीच खड़े एक बच्चे का चित्र बना हुआ था, जो भागवत आदि पुराणों के कृष्ण से सम्बद्ध थे।

पुराणों में लिखे कृष्ण द्वारा यमलार्जुन के उद्धार की कथा की ओर ले जाता है।

 इससे सिद्ध होता है कि कृष्ण 'द्रविड संस्कृति से सम्बद्ध हैं ।

वैसे भी अहीरों (गोपों)में कृष्ण का जन्म हुआ ; और द्रविडों में अय्यर (अहीर) तथा द्रुज़ Druze नामक यहूदीयों में अबीर (Abeer) समन्वय स्थापित करते हैं।

 इसके अनुसार महाभारत का युद्ध 950 ई०पूर्व तक होता रहा होगा जो पुरातात्विक सबूत की गणना में सटीक बैठता है। 

द्रविड अथवा सिन्धु घाटी की संस्कृतियाँ 5000 से 950 ई०पू०  समय तक निर्धारित हैं। 

इससे कृष्ण जन्म का सटीक अनुमान मिलता है। ऋग्वेद -में कृष्ण नाम का उल्लेख दो रूपों में मिलता है—एक कृष्ण आंगिरस, जो सोमपान के लिए अश्विनी कुमारों का आवाहन करते हैं (ऋग्वेद 8।85।1-9) 

और दूसरे कृष्ण नाम का एक असुर, जो अपनी दस सहस्र सेनाओं के साथ अंशुमती अर्थात् यमुना नदी के  तटवर्ती प्रदेश में रहता था ।

और इन्द्र द्वारा पराभूत हुआ था ऐसा वर्णन है ।

परन्तु इन्द्र उपासक देव संस्कृति के अनुयायी ब्राह्मणों ने   इन्द्र को पराजयी कभी नहीं बताया।

 विदित हो कि अंशुमान् सूर्य का वाचक है  देखें--- अंशु + अस्त्यर्थे मतुप् । सूर्य्ये, अंशुशाल्यादयोप्यत्र ।

सूर्य्यवंश्ये असमञ्जःपुत्रे दिलीपजनके राजभेदे तत्कथा रा० आ० ४३ अ० । अंशुमति पदार्थमात्रे त्रि० । 

पुराणों में यमुना ओर यम को अंशुमान् के सन्तति रूप में वर्णित किया है ।

ऋग्वेद के अष्टम् मण्डल के सूक्त संख्या 96के श्लोक- (13,14,15,)पर असुर अथवा दास कृष्ण का युद्ध इन्द्र से हुआ ऐसी वर्णित है।

 :-आवत् तमिन्द्र: शच्या धमन्तमप स्नेहितीर्नृमणा अधत्त ।

 द्रप्सम पश्यं विषुणे चरन्तम् उपह्वरे नद्यो अंशुमत्या: न भो न कृष्णं अवतस्थि वांसम् इष्यामि । 

वो वृषणो युध्य ताजौ ।14। 

अध द्रप्सम अंशुमत्या उपस्थे८धारयत् तन्वं तित्विषाण: विशो अदेवीरभ्या चरन्तीर्बृहस्पतिना युज इन्द्र: ससाहे ।।15।। 

 ऋग्वेद कहता है ---" कि कृष्ण नामक असुर अंशुमती अर्थात् यमुना नदी के तटों पर दश हजार सैनिको (ग्वालो)के साथ रहता था । 

उसे अपने बुद्धि -बल से इन्द्र ने खोज लिया , और उसकी सम्पूर्ण सेना तथा गोओं का हरण कर लिया । 

इन्द्र कहता है कि कृष्ण नामक असुर को मैंने देख लिया है ।

जो यमुना के एकान्त स्थानों पर गाऐं चराता हुआ रहता है ।  

चरन्तम् क्रिया पद देखें !

 कृष्ण का जन्म वैदिक तथा हिब्रू बाइबिल में वर्णित यदु के वंश में हुआ था ।

वेदों में यदु को दास अथवा असुर कहा गया है ,तो यह तथ्य रहस्य पूर्ण ही है । यद्यपि ऋग्वेद में असुर शब्द पूज्य व प्राण-तत्व से युक्त  वरुण , अग्नि आदि का वाचक है-'असुर' शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में लगभग 105 बार हुआ है। 

उसमें 90 स्थानों पर इसका प्रयोग 'श्रेष्ठ' अर्थ में किया गया है और केवल 15 स्थलों पर यह 'देवताओं के शत्रु' का वाचक है।

'असुर' का व्युत्पत्तिलब्ध अर्थ है- प्राणवन्त, प्राणशक्ति संपन्न 

('असुरिति प्राणनामास्त: शरीरे भवति, निरुक्ति ३.८) 

और इस प्रकार यह वैदिक देवों के एक सामान्य विशेषण के रूप में व्यवहृत किया गया है। 

विशेषत: यह शब्द इंद्र, मित्र तथा वरुण के साथ प्रयुक्त होकर उनकी एक विशिष्ट शक्ति का द्योतक है।

इन्द्र के तो यह वैयक्तिक बल का सूचक है, परन्तु वरुण के साथ प्रयुक्त होकर यह उनके नैतिक बल अथवा शासनबल का स्पष्टत: संकेत करता है।

असुर शब्द इसी उदात्त अर्थ में पारसियों के प्रधान देवता 'अहुरमज़्द' ('असुर: महत् ') के नाम से विद्यमान है। यह शब्द उस युग की स्मृति दिलाता है जब वैदिक आर्यों तथा ईरानियों (पारसीकों) के पूर्वज एक ही स्थान पर निवास कर एक ही देवता की उपासना में निरत थे। यह स्थान सुमेर बैबीलॉन तथा मैसॉपोटमिया ( ईराक- ईरान के समीपवर्ती क्षेत्र थे । 

अनन्तर आर्यों की इन दोनों शाखाओं में किसी अज्ञात विरोध के कारण फूट पड़ी गई।

फलत: वैदिक आर्यों ने 'न सुर: असुर:' यह नवीन व्युत्पत्ति मानकर असुर का प्रयोग दैत्यों के लिए करना आरम्भ किया और उधर ईरानियों ने भी देव शब्द का ('दएव' के रूप में) अपने धर्म के विरोधीयों के लिए प्रयोग करना शुरू किया।

फलत: वैदिक 'वृत्रघ्न' (इन्द्र) अवस्ता में 'वेर्थ्रेघ्न' के रूप में एक विशिष्ट दैत्य का वाचक बन गया तथा ईरानियों का 'असुर' शब्द पिप्रु आदि देवविरोधी दानवों के लिए ऋग्वेद में प्रयुक्त हुआ जिन्हें इंद्र ने अपने वज्र से मार डाला था। (ऋक्. १०।१३८।३-४)  

शतपथ ब्राह्मण की मान्यता है कि असुर देवदृष्टि से अपभ्रष्ट भाषा का प्रयोग करते हैं ।

(तेऽसुरा हेलयो हेलय इति कुर्वन्त: पराबभूवु:) 

ये लोग पश्चिमीय एशिया असुर लोग असीरियन रूप सुमेरियन पुराणों में वर्णित हैं ।

परन्तु ऋग्वेद के दशम् मण्डल के ६२वें सूक्त के दशम् ऋचा में गोप जन-जाति के पूर्व प्रवर्तक एवम् पूर्वज यदु को दास अथवा असुर के रूप में वर्णित किया गया है। _

 " उत् दासा परिविषे स्मद्दिष्टी गोपरीणसा यदुस्तुर्वश्च च मामहे ।   (10/62/10ऋग्वेद )

अर्थात् यदु और तुर्वसु नामक दौनो दास गायों से घिरे हुए हैं । 

अत: सम्मान के पात्र हैं |

 यद्यपि पौराणिक कथाओं में यदु नाम के दो राजा हुए । 

एक हर्यश्व का पुत्र यदु तथा एक ययाति का पुत्र और तुर्वसु का सहवर्ती यदु । 

आभीर जन जाति का सम्बन्ध

 तुर्वसु के सहवर्ती यदु से है । 

जिसका वर्णन हिब्रू बाइबिल के जेनेसिस खण्ड  में भी है। 

यदुवंशीयों का गोप अथवा आभीर विशेषण ही वास्तविक है।

हरिवंश पुराण में आभीर,गोप और यादव शब्द परस्पर पर्याय वाची हैं 
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यादव योगेश कुमार 'रोहि' 8077160219

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

दाह-संस्कार पृथा नॉर्स कथाओं में -

नॉर्स प्राचीन पुरा-कथाओं में मृतक का दाह-संस्कार किया जाता था !
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इस छवि को आमतौर पर वाल्कीरी के रूप में व्याख्या किया जाता है ; जो स्टॉकहोम में राष्ट्रीय पुरातनता के स्वीडिश संग्रहालय में गॉटलैंड से टजेन्वाइड छवि पत्थर पर एक मृत व्यक्ति या ओडिन का स्वागत करता है।

नोर्स मूर्तिपूजा में मृत्यु अलग-अलग रीति-रिवाजों और मान्यताओं से जुड़ी थी। न केवल वाइकिंग अन्तिम संस्कार को कई तरीकों से किया जा सकता है, आत्मा का विचार विभिन्न विचारों से जुड़ा हुआ था, साथ ही साथ मृतक अपने बाद के जीवन में, जैसे वालहल्ला, फोल्कवंगर, हेल और हेलगाफेल के साथ जुड़े थे।

आत्मा का स्वरूप --- नॉर्स प्राचीन संस्कृतियों में

आत्मा की नोर्स अवधारणा में कहा गया है कि यह कई अलग-अलग हिस्सों से बना था:

हैमर (उपस्थिति, एक आध्यात्मिक तत्व होने की कल्पना की गई जिसे जादुई तरीके से छेड़छाड़ की जा सकती है)
गले (दिमाग, भावनाएं, इच्छा)
Fylgja (परिचर भावना)
हम्मेजा (क्षमता या भाग्य)
हमिंगजा जीवन के दौरान व्यक्ति को छोड़ सकता है
और मृत्यु के बाद वंशावली के किसी अन्य सदस्य द्वारा विरासत में मिलाया जा सकता है।
फ़िल्जा भी जीवन के दौरान शरीर से दूर यात्रा कर सकता है। स्पा या सीडर जैसे जादुई प्रथाओं के माध्यम से, मन के कुछ पहलू शरीर को बेहोशी, उत्साह, ट्रान्स या नींद के क्षणों के दौरान छोड़ सकते हैं।

आमतौर पर गले को शरीर को मौत पर छोड़ने के रूप में माना जाता था, संभावित रूप से केवल शरीर को क्षय या ( immolation )के माध्यम से पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। जब शरीर टूट गया था, आत्मा मृतकों के दायरे में अपनी यात्रा शुरू कर सकती थी।

आखिरी सांस लेने वाले व्यक्ति को जीवन सिद्धांत के जीवन में एक सिद्धांत के रूप में समझा जाता था जो कि प्राचीन और सामान्य था, और जो देवताओं, प्रकृति और ब्रह्मांड की दुनिया में था।

अंतिम संस्कार की नॉर्स पृथा ---

मुख्य लेख: नोर्स अंतिम संस्कार-
गंभीर वस्तुओं को शरीर के समान उपचार के अधीन किया जाना चाहिए, अगर वे मृत व्यक्ति के साथ बाद के जीवन में थे।
यदि एक व्यक्ति को अलग कर दिया गया था, तो गंभीर वस्तुओं को भी जला दिया जाना चाहिए, और यदि मृतक को हस्तक्षेप किया जाना था, तो वस्तुओं को उसके साथ एक साथ जोड़ा गया था।

एक थ्रॉल के लिए सामान्य कब्र शायद जमीन में एक छेद से ज्यादा नहीं था।
उन्हें शायद इस तरह से दफन किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह अपने स्वामी को परेशान करने के लिए वापस नहीं लौटे और वह मरने के बाद अपने स्वामी के लिए उपयोग कर सके। गुलामों को कभी-कभी अगले जीवन में उपयोगी होने के लिए त्याग दिया जाता था।

एक स्वतंत्र व्यक्ति को आमतौर पर सवार होने के लिए हथियार और उपकरण दिए जाते थे। एक कारीगर, जैसे कि लोहार, अपने पूरे उपकरण का सेट प्राप्त कर सकता था।
महिलाओं को अपने गहने और अक्सर महिला और घरेलू गतिविधियों के लिए उपकरण प्रदान किए जाते थे। अब तक का सबसे शानदार वाइकिंग अंतिम संस्कार ओसेबर्ग जहाज दफन है, जो कि एक महिला के लिए था, जाहिर है कि 9वीं शताब्दी सीई में रहने वाले उच्च सामाजिक स्थिति की थी।

मस्तिष्क और कबूतरों को एक पायर पर जला देना आम था, जिसमें तापमान 1,400 डिग्री सेल्सियस (1,670 के) तक पहुंच गया, जो आधुनिक श्मशान भट्टियों के लिए उपयोग की तुलना में काफी अधिक है (लगभग 920 डिग्री सेल्सियस (1,1 9 0 के))। जो कुछ भी रहेगा वह कुछ धातु के टुकड़े और कुछ जानवरों और मानव हड्डियों के टुकड़े थे। अजगर का निर्माण किया गया था ताकि मृतक को बाद के जीवन में उठाने के लिए धुएं का खंभा जितना संभव हो सके उतना बड़ा हो। [5]

व्यक्ति की मृत्यु के सातवें दिन, लोगों ने सिजुंड, या अंतिम संस्कार मनाया कि दावत को भी एक रस्म पीने के बाद बुलाया गया था। अंतिम संस्कार एले मौत के मामले को सामाजिक रूप से निर्धारित करने का एक तरीका था। अंतिम संस्कार के बाद ही वारिस सही ढंग से अपनी विरासत का दावा कर सकते थे। [6] यदि मृतक विधवा या घर के मालिक थे, तो सही वारिस उच्च सीट ग्रहण कर सकता था और इस प्रकार प्राधिकरण में बदलाव को चिह्नित करता था। [7]

पूर्वजों की पूजा संपादित करेंअंतिम संस्कार संपादित करें
मस्तिष्क और कबूतरों को कब्र पर जला देना आम था। केवल धातु और जानवरों और मानव हड्डियों के कुछ भस्म किए गए टुकड़े बने रहेंगे। मृतक को बाद के जीवन में उठाने के लिए, जितना संभव हो सके धूम्रपान के खंभे को बनाने के लिए पियर का निर्माण किया गया था। [34] प्रतीकात्मकता यंग्लिंग गाथा में वर्णित है: [35]

"इस प्रकार वह (ओडिन) कानून द्वारा स्थापित किया गया था कि सभी मृत पुरुषों को जला दिया जाना चाहिए, और उनके सामान ढेर पर रखे गए हैं, और राख को समुद्र में डाला जाना चाहिए या पृथ्वी में दफन किया जाना चाहिए। इस प्रकार, उन्होंने कहा, हर कोई आ जाएगा वालहल्ला को उसके साथ धन के साथ धन के साथ, और वह जो कुछ भी उसने धरती पर दफनाया था उसका भी आनंद उठाएगा। परिणामस्वरूप पुरुषों के लिए एक माउंड उनकी स्मृति में उठाया जाना चाहिए, और अन्य सभी योद्धाओं के लिए जिन्हें प्रतिष्ठित किया गया था मानवता एक स्थायी पत्थर; ओडिन के समय के बाद कौन सा रिवाज लंबे समय तक बना रहा। "

स्टॉकहोम में राष्ट्रीय पुरातनता के स्वीडिश संग्रहालय में गॉटलैंड, स्वीडन से एक छवि पत्थर पर एक पेय दृश्य।
अंतिम संस्कार और विरासत के उत्तीर्ण संपादन
व्यक्ति की मृत्यु के सातवें दिन, लोगों ने सजुंड मनाया (अंतिम संस्कार एले और दावत के लिए शब्द, क्योंकि इसमें एक अनुष्ठान पीने शामिल था)। अंतिम संस्कार एले मौत के मामले को सामाजिक रूप से निर्धारित करने का एक तरीका था। यह अंतिम संस्कार एले पीने के बाद ही था कि उत्तराधिकारी सही ढंग से अपनी विरासत का दावा कर सकते थे। [4] यदि मृतक विधवा या घर के मालिक थे, तो सही उत्तराधिकारी उच्च सीट ग्रहण कर सकता था और इस प्रकार प्राधिकरण में बदलाव को चिह्नित करता था। [5]

स्कैंडिनेविया में बड़े पैमाने पर कई हिस्सों में विरासत की अधिसूचना है, [5] जैसे कि हिलर्सजो पत्थर, जो बताता है कि कैसे एक महिला न केवल अपने बच्चों की संपत्ति के उत्तराधिकारी बनती है बल्कि उसके पोते [36] और होग्बी रनस्टोन, जो बताती है कि उसके सभी चाचाओं की मौत के बाद एक लड़की एकमात्र उत्तराधिकारी थी। [37] वे ऐसे समय से महत्वपूर्ण स्वामित्व दस्तावेज हैं जब कानूनी निर्णय अभी तक कागज़ में नहीं डाले गए थे। ऑस्टफोल्ड से ट्यून रनस्टोन की एक व्याख्या से पता चलता है कि लंबे समय तक चलने वाला शिलालेख घर के मालिक के सम्मान में अंतिम संस्कार के साथ संबंधित है और यह तीन बेटियों को सही उत्तराधिकारी घोषित करता है। यह 5 वीं शताब्दी के लिए दिनांकित है और इसके परिणामस्वरूप, स्कैंडिनेविया का सबसे पुराना कानूनी दस्तावेज है जो मादा के विरासत के अधिकार को संबोधित करता है। [5]

यह भी देखें देखें

नोर्स मूर्तिपूजा में मौत
संदर्भ

दाह-संस्कार भाग २

Oकैथोलिक माउंट ओलिवेट कब्रिस्तान, कुंजी पश्चिम (ग्रामीण Dubuque), आयोवा में सेंट जोसेफ चैपल मकबरे के पक्ष में बनाया columbarium niches।
आज, श्मशान मृतक का निपटान करने का एक तेजी से लोकप्रिय रूप है। यह ईसाई दुनिया में भी सच है, जो कई सालों से श्मशान का विरोध कर रहा था लेकिन पिछले शताब्दी में श्मशान की अधिक स्वीकृति के लिए आया है।

ईसाई देशों में, शरीर के शारीरिक पुनरुत्थान में ईसाई विश्वास के कारण श्मशान पक्षपात से बाहर हो गया और लौह युग यूरोपीय पूर्व-ईसाई मूर्तिपूजक धर्मों से अंतर के निशान के रूप में, जो आम तौर पर अपने मृतकों को संस्कार करता था। इस वजह से शारलेमेन ने 78 9 में मौत के साथ दंडनीय अपराध भी किया था। [1] मध्य युग में शुरुआत, तर्कवादियों और क्लासिकिस्टों ने श्मशान की वकालत करना शुरू कर दिया। मध्ययुगीन यूरोप में, श्मशान केवल विशेष मौकों पर किया जाता था जब युद्ध के बाद एक महामारी या अकाल के दौरान कई शवों का निपटारा किया जाता था, और बीमारी फैलाने का एक संभावित खतरा था। बहुत बाद में, सर हेनरी थॉम्पसन, रानी विक्टोरिया के सर्जन, 1873 में वियना प्रदर्शनी में इटली के पदुआ के प्रोफेसर लुडोविको ब्रुनेटी के श्मशान तंत्र को देखने के बाद स्वास्थ्य कारणों के अभ्यास की सिफारिश करने वाले पहले व्यक्ति थे। 1874 में, थॉम्पसन ने द क्रिमेशन की स्थापना की सोसाइटी ऑफ इंग्लैंड। समाज ने चर्च से विपक्ष से मुलाकात की, जो पवित्र भूमि पर श्मशान की अनुमति नहीं देगी, और सरकार से, जो इस अभ्यास को अवैध मानते थे।

संस्कार को इंग्लैंड और वेल्स के कानून में मजबूर कर दिया गया था जब विलक्षण वेल्श डॉक्टर विलियम प्राइस ने जनवरी 1884 में लान्द्रिसेंट में अपने मृत बच्चे बेटे, इसु ग्रिस्ट को अंतिम संस्कार करने का प्रयास किया था और स्थानीय लोगों द्वारा आगे बढ़ने से रोका गया था। बाद में कार्डिफ़ को इस बात पर आश्वस्त किया गया कि इस पर श्मशान कानून के विपरीत नहीं था, वह 14 मार्च 1884 को मूर्तिपूजक प्रार्थनाओं के साथ समारोह (आधुनिक समय में यूके में पहली बार) करने में सक्षम था। [2] 26 मार्च 1885 को इंग्लैंड में पहला आधुनिक कानूनी श्मशान लंदन के श्रीमती जेनेट पिकर्सगिल, "साहित्यिक और वैज्ञानिक मंडलियों में अच्छी तरह से जाना जाता है", [3] वोकिंग, सरे में क्रिमेशन सोसाइटी द्वारा किया गया था। रवैये के इस बदलाव ने यूके में श्मशान कंपनियों के गठन को प्रेरित किया, 18 9 5 में मैनचेस्टर में पहली बार स्थापित किया गया था, इसके बाद 18 9 5 में मैरीहिल, ग्लास्गो के साथ मिलकर काम किया गया। मानव में जलने के विनियमन के लिए ब्रिटेन में संसद का एक अधिनियम बनी हुई है, और दफन अधिकारियों को स्थापित श्मशान के लिए सक्षम करने के लिए, "श्मशान अधिनियम" अंततः 1 9 02 में पारित किया गया था, जिससे सभी अस्पष्टताएं दूर हो गईं।

रोमन कैथोलिक चर्च संपादित करें

यह भी देखें: श्मशान § कैथोलिक धर्म
इसके अधिकांश इतिहास के लिए, रोमन कैथोलिक चर्च के पास श्मशान के खिलाफ प्रतिबंध था। इसे ईसाई और ईश्वर की ओर सबसे पवित्र कृत्य के रूप में देखा गया था, न कि केवल निंदा करने के लिए बल्कि शारीरिक रूप से शरीर के पुनरुत्थान में अविश्वास की घोषणा। 1 9 63 में, पोप ने श्मशान पर प्रतिबंध हटा लिया और 1 9 66 में कैथोलिक पुजारियों को श्मशान समारोहों में कार्य करने की इजाजत दी। चर्च अभी भी आधिकारिक तौर पर मृतक के पारंपरिक हस्तक्षेप को पसंद करता है। इस वरीयता के बावजूद, श्मशान को तब तक अनुमति दी जाती है जब तक कि यह शरीर के पुनरुत्थान में विश्वास करने से इंकार करने के लिए नहीं किया जाता है। [1] 1 99 7 तक, चर्च नियमों ने यह निर्धारित करने के लिए प्रयोग किया कि संस्कार अंतिम संस्कार सेवा के बाद किया जाना चाहिए। इस तरह की अंतिम संस्कार सेवाओं को उसी तरह से आयोजित किया जाता है जैसे परंपरागत दफन कमेटी के बिंदु तक, जहां शरीर को दफनाने के बजाय श्मशान में ले जाया जाता है। श्मशान पूरा होने के बाद एक दफन सेवा की जाती है।

1 99 7 में, अंतिम संस्कार संस्कार को संशोधित किया गया था ताकि चर्च के अंतिम संस्कार तब हो सकते हैं जब राख को चर्च में लाए जाने से पहले शरीर को पहले ही संस्कार किया जा सके। ऐसे मामलों में, राख को एक मुर्गी या एक अन्य योग्य पोत में रखा जाता है, जो चर्च में लाया जाता है और ईस्टर मोमबत्ती के पास खड़े हो जाता है। चर्च सेवा और कमिटिट संस्कार के दौरान, शरीर के संदर्भ में प्रार्थनाओं को संशोधित किया जाता है, मृतकों के "शरीर" के संदर्भ में "पृथ्वी पर अवशेष" के संदर्भों को प्रतिस्थापित किया जाता है।

प्रतिबंध को उठाने के बाद भी, दफन के लिए आधिकारिक वरीयता के साथ, चर्च श्मशान के विचार के लिए अधिक से अधिक खुला हो गया है। कई कैथोलिक कब्रिस्तान अब आवास संस्कार के अवशेषों के साथ कोल्म्बियमियम निकस प्रदान करते हैं और साथ ही साथ संस्कारित अवशेषों के दफन के लिए विशेष अनुभाग भी प्रदान करते हैं। कोलंबियाम नाखूनों को भी चर्च की इमारतों का हिस्सा बना दिया गया है। लॉस एंजिल्स, कैलिफ़ोर्निया में एंजल्स ऑफ़ द एंजल्स के कैथेड्रल में क्रिप्ट मकबरे में कई निचोड़ हैं। हालांकि, चर्च के अधिकारी अभी भी इस अभ्यास को हतोत्साहित करते हैं क्योंकि इस तरह के पैरिश वर्तमान इमारत को बदलने या बंद करने का फैसला करते हैं, तो निचोड़ के साथ क्या होगा।

चर्च को राखों के आदरणीय स्वभाव की आवश्यकता होती है जिसका अर्थ है कि राख को दफनाया जाना चाहिए या उचित कंटेनर में घुमाया जाना चाहिए, जैसे कि मुर्गी। चर्च राख की बिखरने की अनुमति नहीं देता है। उन्हें घर पर रखने की अनुमति है, लेकिन एक बिशप की अनुमति की आवश्यकता है, हालांकि कुछ कैथोलिकों ने इसे खोजे बिना ऐसा किया है। [4] समुद्र में दफन की अनुमति है, बशर्ते राख को एक सीलबंद कंटेनर में सागर में रखा जाए।

पारंपरिक कैथोलिकों ने श्मशान की अनुमति देने के अभ्यास पर आक्षेप किया है, जो sedewacantists कई कारणों में से एक माना जाता है क्यों बाद में वेटिकन द्वितीय चर्च सच कैथोलिक चर्च नहीं है।

पूर्वी रूढ़िवादी चर्च पूर्वी रूढ़िवादी चर्च श्मशान को मना करता है। अपवाद उन परिस्थितियों के लिए किए जाते हैं जहां महामारी या अन्य समान मामलों के दौरान सिविल अथॉरिटी की मांग की जाती है, जहां से इसे टाला नहीं जा सकता है। जब किसी श्मशान को चर्च द्वारा अच्छा मानने के लिए जानबूझकर चुना जाता है, तो उसे चर्च में अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं है और इसे [उद्धरण वांछित] के लिए liturgical प्रार्थनाओं से स्थायी रूप से बाहर रखा जा सकता है। रूढ़िवादी में जबकि श्मशान और सामान्य पुनरुत्थान के सिद्धांत के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है, इसे मृत्यु के बाद शरीर के हिंसक उपचार के रूप में देखा जाता है और इस तरह को कठोर रूप से देखा जाता है। [उद्धरण वांछित]

प्रोटेस्टेंट चर्च संपादित करें

प्रोटेस्टेंट चर्चों ने कैथोलिक चर्चों की तुलना में पहले श्मशान स्वीकार कर लिया और अपनाया और कैथोलिक देशों की तुलना में प्रोटेस्टेंट में श्मशान भी अधिक आम है। आम तौर पर कस्बों को कस्बों और शहरों में पसंद किया जाता है, जहां भूमि दुर्लभ होती है और कब्रिस्तान भीड़ में होते हैं, जबकि परंपरागत दफन ग्रामीण इलाकों में अनुकूल होता है जहां दफन के भूखंड आसानी से उपलब्ध होते हैं। ईयू में उच्चतम आवृत्ति पोलैंड के पड़ोसी चेक गणराज्य में पाई जाती है, जहां साम्यवाद के पतन के बाद इसके विपरीत श्मशान लगभग गायब हो गया है। ईसाई धर्म के कैथोलिक बनाम लूथरन संस्करण के बीच का अंतर श्मशान के संबंध में स्पष्ट है। कैथोलिक भागों की तुलना में जर्मनी के प्रोटेस्टेंट भागों में श्मशान कुछ और आम है। नाजी जर्मनी में, हेनरिक हिमलर ने "नाज़ी-अंतिम संस्कार समारोह" का आविष्कार किया, जो श्मशान के साथ समाप्त हुआ। उदाहरण के लिए इसका इस्तेमाल फील्ड मार्शल इरविन रोमेल के राज्य अंतिम संस्कार में किया गया था (जिसे युद्ध के बाद प्रकट किया गया था, क्योंकि इसे अपना जीवन लेने के लिए मजबूर किया गया था)।

प्रोटेस्टेंट चर्चों ने प्रथम विश्व युद्ध और स्पेनिश फ्लू के बाद धीरे-धीरे श्मशान को मंजूरी दे दी। विश्व युद्धों के बीच के समय के दौरान, आधुनिक श्मशान के विकास ने शरीर पर जलने के मूर्तिपूजक संस्कारों से ईसाई श्मशानों को अलग करने में भी मदद की। स्टॉकहोम, स्वीडन में पहला श्मशान, 1874 का निर्माण किया गया था। फिनलैंड में, हेलसिंकी लूथरन पैरिश यूनियन ने 1 9 26 में अपना पहला आधुनिक श्मशान बनाया जो अभी भी उपयोग में है।

स्कैंडिनेविया में, मृतकों के लगभग 30 से 70 प्रतिशत (90 प्रतिशत तक बड़े शहरों में) को 1 9 80 के दशक के मध्य में संस्कार किया गया था। हालांकि, बाद के वर्षों में उच्च आवृत्ति चरम और गिर गया है; मुस्लिम, कैथोलिक और रूढ़िवादी राष्ट्रों से आप्रवासन एक व्याख्या है।

स्कैंडिनेवियाई लूथरन सिद्धांत में, राख को किसी भी सांसारिक अवशेष के समान सम्मान के साथ निपटाया जाना चाहिए। उन्हें या तो कब्रिस्तान में एक मंथन में घुमाया जाता है या पवित्र जमीन पर छिड़क दिया जाता है, "धूल पर लौटने वाली धूल," और घर पर संग्रहित नहीं होती है या एक अपरिचित तरीके से निपटाया जाता है। कई लिटलोर पैरिश ने समुद्री क्षेत्रों को भी पवित्र किया है जहां राख को छिड़क दिया जा सकता है। यह भी याद किया जाता है कि "यादों के ग्रोव" (एक आम स्मारक के साथ 10-50 आम कब्रों के क्षेत्र में दफन किए गए हजारों लोग) दफन का एक आम तरीका बन गए हैं। अक्सर उपदेशक शोक करने वालों को श्मशान की सलाह देते हैं। श्मशान ने परंपरागत स्कैंडिनेवियाई परिवार कब्रों की पुन: उपस्थिति को भी देखा है, जहां कई पीढ़ियों में एक भी गंभीर साजिश में परिवार के सदस्यों के दर्जनों आड़ियां हो सकती हैं। कई स्कैंडिनेवियाई अपनी राख को अपने परिवार के सदस्यों और प्रियजनों के साथ बातचीत करने के लिए पसंद करते हैं।

फिनिश भाषा में, ईसाई श्मशान के लिए शब्द तुहकौस (भूकंप) का उपयोग किया जाता है, जबकि पोल्टोहाउथौस (जलने से दफन) का मतलब पाग पर पागन अनुष्ठान को संदर्भित करता है।

अमेरिकन एपिस्कोपल चर्च में, श्मशान इतना स्वीकार कर लिया गया है कि कई पारिशियों ने कोलंबिया को अपने चर्चों, चैपल और बगीचों में बनाया है।

चर्च ऑफ जीसस क्राइस्ट ऑफ़ लेटर-डे संतों (मॉर्मोनिज्म) संपादित करें

चर्च ऑफ जीसस क्राइस्ट ऑफ लैटर-डे संतों (एलडीएस) के नेताओं ने कहा है कि श्मशान "प्रोत्साहित नहीं किया गया" है; हालांकि चर्च श्मशान से पहले मृतक को ठीक से तैयार करने के निर्देश प्रदान करता है। [5] 5] अतीत में, प्रेषित ब्रूस आर। मैककोन्की [6] ने लिखा था कि "केवल सबसे असाधारण और असामान्य परिस्थितियों में" श्मशान एलडीएस शिक्षाओं के अनुरूप होगा।

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आयरलैंड में श्मशान
1 9 82 से आयरलैंड गणराज्य में अंतिम संस्कार संस्कार के हिस्से के रूप में श्मशान किया गया है, जब देश का पहला श्मशान, ग्लासनेविन क्रेमेटोरियम खोला गया था। हालांकि, आयरलैंड में श्मशान पाषाण युग के रूप में अब तक की तारीख है।

इतिहास संपादित करें

आयरलैंड में सबसे पुरानी श्मशान 7000-2000 ईसा पूर्व के बीच पाषाण युग के लोगों द्वारा की गई थी। संस्कारित अवशेषों को पत्थर के ढांचे जैसे पत्थर के कब्रों के साथ-साथ छोटे पत्थर घाटी के पत्थर की संरचनाओं में रखा गया था, जिन्हें माना जाता है कि मृतकों के लिए आराम करने वाले स्थान के रूप में कार्य किया गया है। मूर्तिपूजक आयरलैंड में, राख और हड्डी के टुकड़े एक सजावटी आर्न में जमा किए जाते थे, आमतौर पर बेक्ड मिट्टी से बने होते थे, लेकिन कभी-कभी पत्थर के बजाय। मूर्तिपूजक आयरलैंड में श्मशान का व्यापक रूप से अभ्यास किया गया था। देश के हर हिस्से में कब्रों में राख और जली हुई हड्डियों वाले Urns पाए गए हैं। 432 ईस्वी में आयरलैंड के लिए ईसाई धर्म की शुरूआत ने दफन को आदर्श बना दिया क्योंकि पुरानी मूर्तिपूजक तरीकों को बदलते हुए ईसाई संस्कार स्वीकृत और लगातार दफन कर दिया गया। श्मशान और दफन का अभ्यास एक साथ किया जाता था, उसी कब्र में राख और जली हुई हड्डियों वाले आर्नों के साथ पूर्ण कंकाल मिलते थे। श्मशान एक परेशानी और महंगी प्रक्रिया थी, और वंचित लोगों द्वारा इसका अभ्यास नहीं किया जा सकता था, जिसने शरीर को जितना संभवतः दफनाया था। [1]

काउंटी मीथ में न्यूग्रेंज आयरलैंड में एक मार्ग मकबरे का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। ऐसा माना जाता है कि अवशेषों को धार्मिक समारोह के रूप में न्यूग्रेंज में पत्थर घाटी में रखा गया हो सकता है। कुछ इतिहासकार [कौन?] मानते हैं कि जब सूर्य शीतकालीन संक्रांति पर न्यूग्रेंज में चमकता है, तो यह सूर्य के प्रकाश द्वारा अगली जिंदगी में जाने वाले आत्माओं की आत्माओं का प्रतिनिधित्व करता है।

जब 1 9 02 में यूनाइटेड किंगडम में श्मशान अधिनियम पारित किया गया था, तो यह आयरलैंड तक नहीं बढ़ा था, जो उस समय यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा था।

सुविधाएं संपादित करें

ग्लासनेविन कब्रिस्तान
आयरलैंड द्वीप पर पहला श्मशान 1 9 61 में बेलफास्ट, उत्तरी आयरलैंड में खोला गया, [2] लेकिन आयरलैंड गणराज्य में आधुनिक श्मशान के लिए एक और बीस साल लग गया, जब ग्लासनेविन कब्रिस्तान ने मार्च 1 9 82 में अपना श्मशान खोला। 2000, माउंट जेरोम कब्रिस्तान ने अपना खुद का श्मशान स्थापित किया। अगले वर्ष, न्यूलैंड्स क्रॉस कब्रिस्तान, जो पिछले साल खोला गया, ने एक श्मशान स्थापित किया। [3] काउंटी कॉर्क में द्वीप Crematorium कंपनी फरवरी 2005 के आसपास स्थापित किया गया था। [4] 2015 के मध्य में काउंटी कैवन में श्मशान सुविधाएं खोली गईं। [5]

आयरलैंड में आज श्मशान संपादित करें

आयरलैंड में श्मशान तेजी से लोकप्रिय होने के विकल्प के रूप में लोकप्रिय है, लेकिन यह अभी भी बहुत लोकप्रिय नहीं है, खासतौर पर दफन की तुलना में। आयरलैंड में श्मशान की दर 6% है, [6] दफन की तुलना में 94% पर। प्रसिद्ध आयरिश लोगों का संस्कार किया गया जिनमें पिता टेड अभिनेता डर्मोट मॉर्गन और बॉयज़ोन गायक स्टीफन गेटली शामिल थे, जिनमें से दोनों ग्लासनेविन में संस्कारित थे।

"प्रॉस्पेक्ट कब्रिस्तान" यहां रीडायरेक्ट करता है। न्यूयॉर्क में कब्रिस्तान के लिए, प्रॉस्पेक्ट कब्रिस्तान (जमैका, न्यूयॉर्क) देखें।
ग्लासनेविन कब्रिस्तान (आयरिश: रीलीग घलस नायन) ग्लासनेविन, डबलिन, आयरलैंड में एक बड़ी कब्रिस्तान है जो 1832 में खोला गया था। [1] इसमें कई उल्लेखनीय आंकड़ों की कब्र और स्मारक हैं, और इसमें एक संग्रहालय है।

ग्लासनेविन कब्रिस्तान

आगंतुकों के केंद्र के बगल में माइकल कोलिन्स की कब्र

विवरण
1832 की स्थापना
स्थान फिंगलास रोड, ग्लासनेविन, डबलिन 11
देश आयरलैंड
समन्वय 53 डिग्री 22'20 "एन 6 डिग्री 16'40" डब्ल्यू
सार्वजनिक टाइप करें
ग्लासनेविन ट्रस्ट द्वारा स्वामित्व में
आकार 124 एकड़ (50 हेक्टेयर)
1.5 मिलियन हस्तक्षेप की संख्या
वेबसाइट glasnevintrust.ie
एक ग्रेव ग्लासनेविन कब्रिस्तान खोजें

ग्लासनेविन कब्रिस्तान (केंद्र में गोल टावर डैनियल ओ'कोनेल की कब्र पर खड़ा है)

राउंड टॉवर के नीचे क्रिप्ट के अंदर डैनियल ओ'कोनेल का मकबरा
इतिहास और विवरण संपादित करें

ग्लासनेविन कब्रिस्तान की स्थापना से पहले, आयरिश कैथोलिकों के पास अपनी मृत्यु का कोई कब्रिस्तान नहीं था, जिसमें अठारहवीं शताब्दी के दमनकारी दंड कानूनों ने कैथोलिक सेवाओं के सार्वजनिक प्रदर्शन पर भारी प्रतिबंध लगाए थे, यह सामान्य अभ्यास बन गया था कैथोलिक प्रोटेस्टेंट चर्चयार्ड या कब्रिस्तान में अपनी अंतिम संस्कार सेवाओं का एक सीमित संस्करण आयोजित करने के लिए। यह स्थिति तब तक जारी रही जब तक 1823 में सेंट केविन के चर्चयार्ड में आयोजित अंतिम संस्कार में हुई घटना ने सार्वजनिक उत्पीड़न को उकसाया जब एक प्रोटेस्टेंट सेक्स्टन ने अंतिम संस्कार द्रव्यमान के सीमित संस्करण को करने के लिए कैथोलिक पुजारी को ठुकरा दिया। [2] चिल्लाहट ने कैथोलिक अधिकारों के चैंपियन डैनियल ओ'कोनेल को एक अभियान शुरू करने और कानूनी राय तैयार करने के लिए प्रेरित किया कि वास्तव में कोई कानून कब्रिस्तान में मृत कैथोलिक के लिए प्रार्थना करने से मना कर रहा था। O'Connell एक दफन जमीन के उद्घाटन के लिए धक्का दिया जिसमें आयरिश कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट दोनों अपने मृत सम्मानित दफन दे सकते थे।

ग्लासनेविन कब्रिस्तान को 21 फरवरी 1832 को पहली बार जनता के लिए पवित्र और खोला गया था। डबलिन में फ्रांसिस स्ट्रीट से ग्यारह वर्षीय माइकल केरी का पहला दफन, कब्रिस्तान के एक खंड में अगले दिन हुआ था कुरान के स्क्वायर के रूप में। कब्रिस्तान को शुरुआत में प्रॉस्पेक्ट कब्रिस्तान के रूप में जाना जाता था, जो कि प्रॉस्पेक्ट के शहर से चुने गए नाम से घिरा हुआ था, जो कब्रिस्तान भूमि से घिरा हुआ था। मूल रूप से नौ एकड़ जमीन को कवर करते हुए, कब्रिस्तान का क्षेत्र अब लगभग 124 एकड़ तक बढ़ गया है। इसमें सेंट पॉल के नाम सेक्शन के साथ फिंगलास रोड के दक्षिणी किनारे पर इसका विस्तार शामिल है। मार्च 1 9 82 से श्मशान का विकल्प प्रदान किया गया है।

ग्लासनेविन कब्रिस्तान डबलिन कब्रिस्तान समिति की देखभाल में बना हुआ है। कब्रिस्तान का विकास वर्तमान समय में बड़े विस्तार और नवीनीकरण कार्य के साथ एक सतत कार्य है।

कैथोलिक मास हर रविवार को 9.45 बजे पैरिश पादरी के सदस्यों द्वारा मनाया जाता है। कब्रों का वार्षिक आशीर्वाद हर गर्मियों में होता है क्योंकि यह 1832 में कब्रिस्तान की नींव के बाद से किया गया है। [3]

स्थान संपादित करें

कब्रिस्तान दो भागों में ग्लासनेविन, डबलिन में स्थित है। मुख्य भाग, इसकी ट्रेडमार्क ऊंची दीवारों और चौकियों के साथ, फिंगलास से शहर के केंद्र तक सड़क के एक तरफ स्थित है, जबकि दूसरा भाग "सेंट पॉल्स" सड़क पर और हरी जगह से परे है दो रेलवे लाइनें

हाल के वर्षों में कब्रिस्तान के नजदीक राष्ट्रीय वनस्पति उद्यान में प्रवेश द्वार खोला गया था।एक अजवायन (प्राचीन ग्रीक: πυρά; pyrá, πῦρ, पायर, "आग" से), [1] [2] जिसे अंतिम संस्कार के रूप में भी जाना जाता है, एक संरचना है, जो आम तौर पर लकड़ी से बना है, शरीर को जलाने के लिए अंतिम संस्कार संस्कार या निष्पादन। श्मशान के रूप में, एक शरीर को पिरे पर या नीचे रखा जाता है, जिसे तब आग पर रखा जाता है।

प्राचीन यूनानी धर्म पर चर्चा करते हुए, "पायरे" (आग के लिए सामान्य यूनानी शब्द) का उपयोग भी वेदियों पर पवित्र आग के लिए किया जाता है, जिस पर पशु बलि के कुछ हिस्सों को देवता की भेंट के रूप में जला दिया जाता था।

सामग्री संपादित करें

पाइर्स लकड़ी का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं। [3] एक पायर की संरचना चारकोल विश्लेषण के उपयोग के माध्यम से निर्धारित किया जा सकता है। चारकोल विश्लेषण अध्ययन के चारकोल के ईंधन और स्थानीय वानिकी की संरचना की भविष्यवाणी करने में मदद करता है। [4]

आयरलैंड संपादित करें
विशेष रूप से कांस्य युग में, स्थानीय बहुतायत और लकड़ी तक पहुंच की आसानी के आधार पर पाइरे सामग्रियों को इकट्ठा किया गया था, हालांकि विशिष्ट गुणों, संभावित पारंपरिक उद्देश्य या आर्थिक कारणों के कारण सामग्रियों का भी चयन किया गया था। Templenoe में, pyres आम तौर पर ओक और फल लकड़ी की रचनाओं से मिलकर बना है। [4]

पोलैंड संपादित करें
कोकोटोव, Pawłowice और Korytnica में, तीन necropolises का विश्लेषण करने से, ऐसा लगता है कि पोलिश [कब?] Pyres मुख्य रूप से स्कॉट्स पाइन, बर्च, और ओक पेड़ शामिल थे, क्योंकि पाइन, बर्च, और ओक स्थानीय वुडलैंड्स में घने थे। पेड़ के सभी हिस्सों का इस्तेमाल ट्रंक, शाखाओं, टहनियों और यहां तक ​​कि पाइन शंकु सहित किया जाता था। [5]

WWII के दौरान, पोलिश क्षेत्र में जर्मन मृत्यु शिविरों में पेरेज़ का इस्तेमाल ट्रेब्लिंका जैसे किया जाता था। [6]

ब्रिटेन में पियर बनी हुई है
कामकाजी एंटीलर और हड्डी की वस्तुओं, फ्लिंट और फ्लेक टूल्स के साथ, और तांबा-मिश्र धातु आमतौर पर पायर श्मशान अवशेषों में पाए जाते हैं। तांबा-मिश्र धातु एक नीले-हरे रंग के दाग छोड़ देते हैं और आमतौर पर पसलियों, बाहों और अन्य क्षेत्रों में फंस जाते हैं जहां गहने आमतौर पर पहने जाते हैं। [7]

हड्डी के टुकड़े के आकार का विश्लेषण संपादित करें
श्मशान के हड्डियों के टुकड़ों पर एक अध्ययन किया गया ताकि यह दिखाया जा सके कि न केवल हड्डियों के टुकड़ों का आंदोलन टूट जाएगा बल्कि पर्यावरणीय कारक भी एक भूमिका निभाएंगे। श्मशान का अध्ययन करने के बाद उन कणों में बनी रहती है जिन्हें कसकर सील कर दिया गया था और पर्यावरण में अशांति का कोई सबूत नहीं था, यह पाया गया कि औसतन बड़ी हड्डी के टुकड़े के आकार का अर्थ यह हुआ कि कम हड्डी टूटना हुआ था। यह निष्कर्ष निकाला गया था कि यदि अंतिम हड्डी के टुकड़े के आकार को दफनाने से पहले संस्कारित हड्डी को एक मुर्गी में रखा जाता है तो संरक्षित किया जाएगा। इस अध्ययन का उद्देश्य यह बताने के लिए किया गया था कि किसी भी श्मशान के दौरान और बाद में अधिक सावधानी पूर्वक कदम उठाए जाने चाहिए और उन लोगों को शिक्षित करने के लिए जो संस्कारित हड्डी का अध्ययन कर रहे हैं कि टुकड़ों का आकार श्मशान के ठीक बाद से छोटा होगा। [8]

उपयोग

पायर के पर्यावरणीय प्रभाव

ओपन-एयर पेयर्स की वैधता

रोमन पाइर्स संपादित करें

उस समय दूसरी शताब्दी सीई की ओर अग्रसर, रोम में लोकप्रिय अंतिम संस्कार प्रथाओं में एक पायर के साथ श्मशान शामिल था। आदर्श अंतिम संस्कार प्रथाओं का मतलब मृतक के लिए एक सजावटी पायरे को जलाना था, जो पर्याप्त गर्मी के साथ जला देगा और केवल लंबे समय तक राख और छोटी हड्डी के टुकड़े छोड़ने के लिए पर्याप्त समय होगा। किसी और के रंग का उपयोग करने के लिए गरीबी या आपातकालीन मामलों का संकेत था। [20]

अंतिम संस्कार पियर बनाने और सही ढंग से जलाने की प्रक्रिया एक कुशल कार्य है। अक्सर, पाइरेस मानव अवशेषों को ठीक से संस्कार करने के लिए पर्याप्त गर्मी से जला नहीं जाता है। अच्छे ऑक्सीजन प्रवाह की अनुमति देने के लिए पाइरेस को आग लगाना और पायरे को पकाकर बनाए रखा जाना था। प्राचीन साहित्य एक ustor के कुशल नौकरी को संदर्भित करता है, जिसका मतलब लैटिन शब्द यूरो से लिया गया एक पेशेवर पायर बिल्डर है जिसका अर्थ है, जलाना। [20] हालांकि, पेशेवर निर्माण के बावजूद, पायरे अप्रत्याशित थे और नियमित आधार पर गलत हो जाएंगे। एल्डर प्लिनी चरम मामलों के बारे में लिखता है जिसमें अग्नि के बल से पाइरे से निकायों को फेंक दिया गया है। अन्य मामलों में, जहरीले पीड़ितों के जहरीले पीड़ितों को शामिल करने के परिणामस्वरूप, मानव शरीर खुले और पिराई को बिता रहा था।
कई मज़ेदार स्टेल मृतक को दिखाते हैं, आम तौर पर बैठे या कभी-कभी खड़े होते हैं, जो एक स्थायी जीवित व्यक्ति के हाथों को पकड़ते हैं, अक्सर पति / पत्नी। जब एक तिहाई दर्शक मौजूद होता है, तो यह आंकड़ा उनके वयस्क बच्चे हो सकता है।

अंतिम संस्कार संस्कार में महिलाओं ने एक प्रमुख भूमिका निभाई। वे शरीर की तैयारी करने के प्रभारी थे, जिसे धोया गया था, अभिषेक किया गया था और पुष्पांजलि के साथ सजाया गया था। मुंह को कभी-कभी टोकन या तालिज्मैन से सील कर दिया जाता था, जिसे एक सिक्का का इस्तेमाल किया गया था, "चेरन ओबोल" के रूप में जाना जाता है, और मृतकों के फेरमैन के लिए भुगतान के रूप में समझाया जाता है ताकि आत्मा को जीवित दुनिया से मृतकों की दुनिया में व्यक्त किया जा सके। । [6] रहस्य धर्मों में शुरूआत सोने के टैबलेट के साथ प्रस्तुत की जा सकती है, कभी-कभी होंठों पर रखी जाती है या अन्यथा शरीर के साथ तैनात होती है, जिसने अंडरवर्ल्ड, हेड्स और पर्सेफोन के शासकों को संबोधित करने और संबोधित करने के निर्देश दिए; जर्मन शब्द टोटेनैप, "मृतकों के लिए पासपोर्ट", कभी-कभी इनके लिए आधुनिक छात्रवृत्ति में उपयोग किया जाता है।

शरीर तैयार होने के बाद, इसे दूसरे दिन देखने के लिए रखा गया था। अंधेरे वस्त्रों में लिपटे Kinswomen, बायर के चारों ओर खड़ा था, मुख्य शोक करने वाला, या तो मां या पत्नी, सिर पर था, और दूसरों के पीछे। [7] अंतिम संस्कार संस्कार के इस हिस्से को प्रोथेसिस कहा जाता था। महिलाओं ने शराब का जप करके, अपने बालों और कपड़ों पर फाड़कर शोक का नेतृत्व किया, और अपने धड़ को विशेष रूप से अपने स्तनों पर हमला किया। [6] प्रस्तुतियां पहले एक आउटडोर समारोह हो सकती थीं, लेकिन बाद में सोलन द्वारा पारित एक कानून ने फैसला सुनाया कि समारोह घर के अंदर होता है। [8] तीसरे दिन सुबह से पहले, अंतिम संस्कार जुलूस (एकोफोरा) शरीर को अपने आराम स्थान पर ले जाने के लिए बनाया गया था। [9]

अंतिम संस्कार के समय, मृतक को केवल एक रिश्तेदार और प्रेमी द्वारा चढ़ाया जाता था। Choai, या libation, और haimacouria, या रक्त प्रक्षेपण दो प्रकार के प्रसाद थे। शोक करने वाले ने पहले चोई के साथ बालों के ताले को समर्पित किया, जो विभिन्न मात्रा में मिश्रित शहद, दूध, पानी, शराब, इत्र और तेलों की मुक्ति थी। तब एक प्रार्थना ने इन मुक्तिों का पालन किया। तब enagismata आया, जो मृतकों के लिए पेशकश कर रहे थे जिसमें दूध, शहद, पानी, शराब, अजवाइन, अजवायन (भोजन, शहद, और तेल का मिश्रण), और kollyba (फसलों के पहले फल और सूखे ताजे फल) । [7] एक बार दफन पूरा हो जाने के बाद, घर और घरेलू वस्तुओं को पूरी तरह से समुद्री जल और घास के साथ साफ किया गया था, और मृतकों से सबसे करीबी से संबंधित महिलाओं ने साफ पानी में अनुष्ठान धोने में हिस्सा लिया था। इसके बाद, पेरिडेपोन नामक एक अंतिम संस्कार समारोह था। मृत व्यक्ति मेजबान था, और यह त्यौहार उन लोगों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था जिन्होंने उसे दफनाने में हिस्सा लिया था।

Funerary steles से दृश्य संपादित करें

एथेनियन शॉमेकर (430-420 ईसा पूर्व)

 
माता-पिता को नर्स की देखभाल में शिशु सौंपना (425-400 ईसा पूर्व)

 
घोड़े के साथ (370 ईसा पूर्व)

 
विदाई हैंडशेक (350-325 ईसा पूर्व)

 
सैन्य विषय (4 वीं शताब्दी ईसा पूर्व)

 
हंस (310 ईसा पूर्व) के साथ चाइल्ड होल्डिंग गुड़िया और पक्षी

 
पुष्पांजलि का प्रस्तुति (बिथिनियन, 150-100 ईसा पूर्व)

स्मरणोत्सव और बाद के जीवन संपादित करें

हिप्पोनियन (4 वीं शताब्दी ईसा पूर्व) में एक नेक्रोपोलिस से, मोनोमोनी ("मेमोरी") को संबोधित करते हुए अंकित सोने का टैबलेट
यद्यपि यूनानियों ने अंडरवर्ल्ड, इसकी स्थलाकृति और निवासियों की एक विस्तृत पौराणिक कथाओं का विकास किया, लेकिन वे और रोमन मिथकों की कमी में असामान्य थे, जो बताते थे कि मरे हुओं के लिए मृत्यु और अनुष्ठान कैसे मौजूद थे। अंडरवर्ल्ड का शासक हेड्स था, मृत्यु की मृत्यु / मृत्यु के व्यक्तित्व, थानाटोस, जो अपेक्षाकृत मामूली आंकड़ा था। [10]

मरे हुओं के लिए सही अनुष्ठान करना आवश्यक था, हालांकि, बाद के जीवन में उनके सफल मार्ग को आश्वस्त करने के लिए, और दुखी राजस्व को जीवित रहने की विफलताओं से गुजरने के लिए या कब्रिस्तान की मुक्ति और प्रसाद के माध्यम से निरंतर रखरखाव के लिए उचित रूप से भाग लेने के लिए उकसाया जा सकता था, निकटतम बचे हुए लोगों से बाल कतरनों सहित। जीनसिया जैसे वर्ष के कुछ समय में मृतकों का जश्न मनाया गया। [11] असाधारण व्यक्तियों को नायकों के रूप में शाश्वतता में पंथ रखरखाव प्राप्त करना जारी रख सकता है, लेकिन अधिकांश व्यक्तियों के बाद फीका हुआ है अंडरवर्ल्ड की यात्रा में दो सिक्के लेते हैं, दूसरा उसकी वापसी या प्रतीकात्मक पुनर्जन्म को सक्षम बनाता है। "चेरॉन ओबोल" का साक्ष्य पूरे पश्चिमी रोमन साम्राज्य में ईसाई युग में अच्छी तरह से दिखाई देता है, लेकिन किसी भी समय और जगह पर यह लगातार और सभी का अभ्यास नहीं किया जाता था।

शरीर का निपटान संपादित करें

सिसिओस का मकबरा, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से 1 शताब्दी ईस्वी तक उपयोग में
यद्यपि पुरातन रोम में नियमित रूप से अस्वस्थता का अभ्यास किया गया था, लेकिन मिड-टू लेट रिपब्लिक और साम्राज्य में पहली और दूसरी शताब्दी में श्मशान सबसे आम दफन अभ्यास था। मृत और शोक के विषय पर लैटिन कविता में संस्कार छवियां दिखाई देती हैं। शोक के सबसे प्रसिद्ध शास्त्रीय लैटिन कविताओं में से एक में, कैटुलस अपने भाई के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए अपनी लंबी यात्रा के बारे में लिखता है, जो विदेश में मर गया, और केवल चुप राख को संबोधित करने में अपने दुःख व्यक्त करता है। [13] जब प्रोफियसियस अपने मृत प्रेमी सिंथिया को एक सपने में देखकर वर्णन करता है, तो राजकुमार की पोशाक पक्ष के नीचे फिसल जाती है और पायर की आग ने पहनने वाली परिचित अंगूठी को खराब कर दिया है। [14]

आखिरकार, श्वसन श्मशान को प्रतिस्थापित करेगा; शहरीकरण के घटते स्तर और बाद के जीवन के दृष्टिकोण में परिवर्तन सहित विभिन्न कारक, लोकप्रिय दफन प्रथाओं में इस चिह्नित बदलाव में योगदान देंगे।

मरे हुओं की देखभाल और खेती शोक की अंतिम संस्कार और औपचारिक अवधि के साथ खत्म नहीं हुई, लेकिन यह एक सतत दायित्व था। लिबरेशन को कब्र में लाया गया था, और कुछ कब्रिस्तान डिलीवरी की सुविधा के लिए "फीडिंग ट्यूब" से लैस थे। (निचे देखो।)

Arpagi संपादित करें
रोमनों ने उन शिशुओं को संदर्भित किया जो पागल में अर्पगी (एकवचन अर्पगस) के रूप में मर गए थे। रोमनों ने अर्पागी के लिए अंतिम संस्कार नहीं किया था। उनके शरीर को संस्कार नहीं किया गया था, या हस्तक्षेप नहीं किया गया था, और उनके लिए कोई स्मारक या epitaphs नहीं बनाया गया था। [15] आखिरकार, शिशु जो 40 या उससे अधिक दिनों तक जीवित रहे थे और उनकी मृत्यु से पहले दांतों काट दिया था, उन्हें अर्पागी से अलग किया गया था; उन्हें राप्ती के रूप में जाना जाता था, और उनका संस्कार किया गया था। [15]

अंतिम संस्कार संपादित करें

अंतिम संस्कार घर पर और दफन के स्थान पर हुआ, [16] जो जीवित प्रदूषण से बचने के लिए शहर के बाहर स्थित था। [17] अंतिम संस्कार जुलूस (पोम्पा funebris) दोनों के बीच की दूरी पारगमन।

संगीतकारों का एक पेशेवर गिल्ड (कॉलेजियम) अंतिम संस्कार संगीत में विशिष्ट है। [18] होरेस ने अंतिम संस्कार में ट्यूबा और कॉर्नू, दो कांस्य तुरही-जैसे यंत्रों का उल्लेख किया है। [1 9]

स्तवन संपादित करें
यह भी देखें: अंतिम संस्कार (प्राचीन ग्रीस)

मृतक के जीवन के चरणों को दर्शाते हुए एक कर्कश से राहत का टुकड़ा: धार्मिक दीक्षा, सैन्य सेवा, और शादी (द्वितीय शताब्दी ईस्वी)
स्तुति (laudatio funebris) मृत की प्रशंसा में एक औपचारिक संभोग या panegyric था। यह रोमन अंतिम संस्कार में व्याख्यान के दो रूपों में से एक था, दूसरा मंत्र (नेनिया) था। [20] यह अभ्यास महान परिवारों से जुड़ा हुआ है, और सामान्य व्यक्ति के अंतिम संस्कार में बोली जाने वाले शब्दों के सम्मेलन असुरक्षित होते हैं। जबकि केवल पुरुषों द्वारा रोम में व्याख्यान का अभ्यास किया जाता था, एक कुलीन महिला को भी एक स्तुति से सम्मानित किया जा सकता था।

सामाजिक रूप से प्रमुख व्यक्तियों के लिए, रोस्ट्रा से स्तुति की सार्वजनिक वितरण के लिए अंतिम संस्कार जुलूस मंच पर रुक गया। [21] इस प्रकार एक अच्छी तरह से वितरित अंतिम संस्कार एक युवा राजनेता के लिए खुद को प्रचारित करने का एक तरीका हो सकता है। [22] चाची जूलिया की युलॉजी (लॉडाटियो जूलिया अमिता), युवा जूलियस सीज़र द्वारा बनाई गई एक भाषण, अपनी चाची के सम्मान में, गाईस मारियस की विधवा ने अपने राजनीतिक करियर को एक जनवादी के रूप में लॉन्च करने में मदद की। [23]

मृतक का प्रतीक स्पष्ट और स्थायी बनायी गई स्तुति का एक पाचन था, [24] और इसमें ऐसे व्यक्ति के करियर (कर्सर सम्मान) शामिल हो सकते थे, जिन्होंने सार्वजनिक कार्यालय आयोजित किए थे। पिछले कर्मों को याद करते हुए, स्तुति रोमन इतिहासलेखन के लिए एक अग्रदूत थी।

बलिदान संपादित करें
शरीर कब्रिस्तान में ले जाने के बाद, मस्तिष्क की उपस्थिति में एक बलिदान किया गया था। सेसेरो के समय तक, सेरेज़ को बोने की परंपरागत थी, एक बो भी चतुर देवताओं को एक विशेष पेशकश प्रदान करता था। बलिदान पीड़ित को तब उपभोग के लिए आवंटित किया गया थाचूंकि "छवियों" के सन्दर्भ अक्सर स्मारक चित्रों के बीच अंतर करने में विफल रहते हैं, जिनमें से मौजूदा उदाहरण प्रचुर मात्रा में हैं, या अधिक विनाशकारी सामग्रियों से बने अंतिम संस्कार मास्क, कोई भी नहीं हो सकता हैएक ऐसे समाज के रूप में जो कला, अन्वेषण और संस्कृति की भावना का प्रतीक है, यह आश्चर्यजनक नहीं है कि ग्रीक अंतिम संस्कार का इतिहास उन लोगों के रूप में मनोरंजक और प्रबुद्ध है जो वे सम्मान करते हैं। प्रोथेसिस से स्मारक उत्सव तक, ग्रीक अंतिम संस्कार के एक संक्षिप्त इतिहास के लिए पढ़ें।

Prothesis

प्राचीन यूनानियों के लिए, आत्मा (या मनोदशा) ने शरीर को हवा की सांस में छोड़ दिया। वहां से प्रोथेसिस शुरू हुआ, हाल ही में प्रस्थान की अंतिम यात्रा की तैयारी। सबसे पहले, महिला परिवार के सदस्यों ने शरीर को स्नान करने के लिए इकट्ठा किया, इसे साधारण कपड़े में पहनने से पहले तेल से अभिषेक किया। स्टाइक्स नदी में सफल मार्ग सुनिश्चित करने के लिए, मृतक के मुंह में एक सिक्का नौका के लिए भुगतान करने के लिए रखा गया था।

आंखें और मुंह बंद हो गया, शरीर को घिरा हुआ था और एक अंतिम संस्कार बिस्तर पर रख दिया गया था, दरवाजे का सामना करने वाले पैर, शोक करने वालों को अपने अंतिम सम्मान का दौरा करने और भुगतान करने के इरादे से प्राप्त करने के लिए। पूरे प्रोथेसिस के दौरान, अंतिम संस्कार की शोक की आवाज़ सुनी जा सकती थी, जिसे पहले परिवार द्वारा गाया जाता था और बाद में पेशेवरों ने थ्रेंसो करने के लिए किराए पर लिया था।

Ekphora

सुबह के शुरुआती घंटों में प्रोथेसिस के बाद, मृतकों को या तो सड़कों के साथ कब्रिस्तान के लिए अपना रास्ता बनाने के लिए सड़कों के साथ पलबीर या घुड़सवार गाड़ी चलाया जाता था। इस जुलूस, जिसे एकोफोरा कहा जाता है, में संगीतकार, मित्र और परिवार शामिल थे, जो सभी शोकपूर्ण गीत और दु: ख के शारीरिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से अपने दुख व्यक्त करते थे। समकालीन सेवाओं के विपरीत जो अक्सर दुःख की बाहरी अभिव्यक्ति को झुकाते हुए शोक करने वाले शोकियों को पाते हैं, प्राचीन यूनानियों को सार्वजनिक रूप से शोक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।

एक बार जब जुलूस कब्रिस्तान पहुंचा, तो मृतक को एक छोटे, अक्सर विस्तृत नक्काशीदार बॉक्स में लार्नेक्स में रखा गया था। वहां से, यह या तो एक अंतिम संस्कार या हस्तक्षेप पर संस्कार किया गया था, एक स्मारक स्टीले द्वारा चिह्नित कब्र को यह सुनिश्चित करने के लिए कि जल्द ही भुलाया नहीं जाएगा।

स्मारक पर्व

दफन या श्मशान के बाद, मृतकों के नाम पर आयोजित एक त्यौहार उन लोगों को धन्यवाद देने के लिए किया गया था जिन्होंने अंतिम संस्कार संस्कार में भाग लिया था। चूंकि मरे हुओं के निरंतर यादों पर महत्वपूर्ण महत्व रखा गया था, इसलिए कब्र का दौरा करने पर जोर दिया गया था, खासतौर पर तीसरे, 9वीं, 13 वें और दफन के 30 दिनों बाद। मकबरा सजाया गया था और भोजन और शराब के रूप में प्रसाद किए गए थे।

ग्रीक अंतिम संस्कार समकालीन अनुष्ठान

आज, ग्रीक अंतिम संस्कार उन सेवाओं से कुछ प्रेरणा आकर्षित करते हैं जो उनके पहले थे। आमतौर पर दौरे दफन से पहले दिन और शाम को आयोजित करते हैं और कहानियों और यादों को साझा करने के लिए परिवार और दोस्तों के लिए एक समय के रूप में कार्य करते हैं। अक्सर, एक पुजारी एक सेवा आयोजित करने के लिए यात्रा करेगा जहां वह प्रार्थना और भजन पैदा करेगा।

अंतिम संस्कार एक चर्च में आयोजित होता है और इसमें एक त्रिसैगियन सेवा भी शामिल होती है। कैस्केट बंद होने से पहले मृतक को अपने अंतिम सम्मान का भुगतान करने के लिए श्रमिकों को आमंत्रित किया जाता है और दफन के लिए कब्रिस्तान में ले जाया जाता है। एक बार कब्रिस्तान, एक छोटा प्रार्थना समारोह आयोजित किया जाता है, कब्र पर फूल रखा जाता है, और कास्केट में हस्तक्षेप होता है। सेवा के बाद, शोक करने वाले शोक करने वाले परिवार को अपनी शोक की पेशकश करने और मकरिया में भाग लेने के लिए जाते हैं, यह भोजन प्राचीन ग्रीस में अंतिम संस्कार के बाद नहीं है।

अंतिम संस्कार सेवा के बाद, शोक की 40 दिन की अवधि का पालन करना प्रथागत है। रविवार को 40 वें दिन मृत्यु के बाद निकटतम, मृतक की याद में चर्च में एक स्मारक सेवा आयोजित की जाती है। व्यक्ति के उत्तीर्ण होने की सालगिरह पर, उसके बाद हर साल एक समान सेवा होती है।

नॉरसे अंतिम संस्कार, या वाइकिंग एज उत्तरी जर्मनिक नॉर्समेन (प्रारंभिक मध्ययुगीन स्कैंडिनेवियाई) के दफन रिवाज, पुरातात्विक और ऐतिहासिक खातों जैसे आइसलैंडिक सागा, पुरानी नॉर्स कविता, और शायद अहमद इब्न फडलान के खाते से ज्ञात हैं।

स्कैंडिनेविया के दौरान, वाइकिंग राजाओं और सरदारों के सम्मान में कई शेष तुमुली हैं, जो रनस्टोन और अन्य स्मारकों के अलावा हैं। इनमें से कुछ उल्लेखनीय हैं नॉर्वे में बोरे माउंड कब्रिस्तान, स्वीडन में बिरका और लिनहोल्म होजे और डेनमार्क में जेलिंग में हैं।

जहाज की दफन की एक प्रमुख परंपरा है, जहां मृतक को नाव, या एक पत्थर के जहाज में रखा गया था, और कभी-कभी बलि चढ़ाए गए दासों सहित उसकी पृथ्वी की स्थिति और पेशे के अनुसार गंभीर प्रसाद दिए गए थे। इसके बाद, ट्यूमुलस बनाने के लिए पत्थरों और मिट्टी के ढेर आमतौर पर अवशेषों के शीर्ष पर रखे जाते थे।

कब्र माल संपादित करें

कोप्पिंगविक, ओलैंड, स्वीडन में वोल्वा की कब्र से कब्र के सामान। कांस्य विवरण के साथ 82 सेंटीमीटर (32 इंच) लोहे की छड़ी और शीर्ष पर एक घर का एक अद्वितीय मॉडल है। खोज स्वीडिश इतिहास संग्रहालय, स्टॉकहोम में प्रदर्शित हैं।
मृतकों के साथ उपहार छोड़ना आम था। पुरुषों और महिलाओं दोनों को गंभीर सामान प्राप्त हुए, भले ही मस्तिष्क को लाश पर जला दिया जाए। एक नरसंहार को किसी प्रियजन या घर के थ्रिल के साथ भी दफनाया जा सकता है, या अंतिम संस्कार में एक साथ संस्कार किया जा सकता है। माल की मात्रा और मूल्य इस बात पर निर्भर करता है कि मृत व्यक्ति किस सामाजिक समूह से आया था। [1] मृतकों को सही तरीके से दफन करना महत्वपूर्ण था ताकि वह जीवन के जीवन में उसी सामाजिक स्थिति के साथ बाद में जीवन में शामिल हो सकें, और एक बेघर आत्मा बनने से बचें जो हमेशा के लिए घूमती है। [2]

एक थ्रॉल के लिए सामान्य कब्र शायद जमीन में एक छेद से ज्यादा नहीं था। [1] उन्हें शायद इस तरह से दफन किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह अपने स्वामी को परेशान करने के लिए वापस नहीं लौटे और वह मरने के बाद अपने स्वामी के लिए उपयोग कर सके। गुलामों को कभी-कभी अगले जीवन में उपयोगी होने के लिए त्याग दिया जाता था। [2] एक स्वतंत्र व्यक्ति को आमतौर पर सवार होने के लिए हथियार और उपकरण दिए जाते थे। एक कारीगर, जैसे कि लोहार, अपने पूरे उपकरण का सेट प्राप्त कर सकता था। महिलाओं को अपने गहने और अक्सर महिला और घरेलू गतिविधियों के लिए उपकरण प्रदान किए जाते थे। अब तक की सबसे भव्य वाइकिंग अंतिम संस्कार ओसेबर्ग शिप दफन है, जो 9वीं शताब्दी में एक महिला (शायद एक रानी या पुजारी) के लिए थी। [1] [3]

Funerary स्मारक संपादित करें

मृतक को पत्थर के जहाज के अंदर भस्म किया जा सकता है। यह तस्वीर स्वीडन के वास्टरस के पास बैडेलुंडा में दो पत्थर जहाजों को दिखाती है।
एक वाइकिंग अंतिम संस्कार एक काफी खर्च हो सकता है, लेकिन बैरो और गंभीर वस्तुओं को बर्बाद नहीं माना जाता था। मृतक को श्रद्धांजलि के अलावा, बैरो वंशजों की सामाजिक स्थिति के लिए एक स्मारक के रूप में बनी रही। विशेष रूप से शक्तिशाली नोर्स समूह विशाल कब्र क्षेत्रों के माध्यम से अपनी स्थिति का प्रदर्शन कर सकते हैं। वेस्टफोल्ड में बोरे माउंड कब्रिस्तान उदाहरण के लिए यनलिंग राजवंश से जुड़ा हुआ है, और इसमें बड़ी तुमुली थी जिसमें पत्थर के जहाजों थे। [3]

डेनमार्क में जेलिंग, वाइकिंग एज से सबसे बड़ा शाही स्मारक है और इसे अपने माता-पिता गोर्म और टायरा की याद में हेराल्ड ब्लूटूथ द्वारा बनाया गया था, और खुद के सम्मान में। यह केवल दो बड़े तुमुली में से एक था जिसमें एक कक्ष मकबरा था, लेकिन दोनों बाड़, चर्च और दो जेलिंग पत्थरों ने यह प्रमाणित किया कि मूर्तिपूजक युग और सबसे शुरुआती ईसाई काल के दौरान मौत को चिह्नित करना कितना महत्वपूर्ण था। [3]

स्कैंडिनेविया में तीन स्थानों पर, बड़े कब्र के खेतों का उपयोग किया जाता है जिनका उपयोग पूरे समुदाय द्वारा किया जाता था: माल्रेन में बिर्का, श्लेस्विग में हेडेबी और आल्बॉर्ग में लिंडहोल्म होजे। [3] लिंडहोल्म होजे में कब्रें आकार और आकार दोनों में एक बड़ी भिन्नता दिखाती हैं। पत्थर के जहाज हैं और कब्रों का मिश्रण है जो त्रिभुज, चतुर्भुज और परिपत्र हैं। इस तरह के गंभीर खेतों का उपयोग कई पीढ़ियों के दौरान किया जाता है और गांवों के निपटारे की तरह होता है। [4]

रसम रिवाज

समारोह संक्रमणकालीन संस्कार होते हैं जिसका उद्देश्य मृतक को अपनी नई स्थिति में एक ही समय में देना है क्योंकि वे अपने जीवन के साथ शोक करने के लिए शक्ति प्रदान करते हैं। [4]

वाइकिंग्स के युद्धपोतों के रीति-रिवाजों के बावजूद, मौत के आस-पास डर का एक तत्व था और इसका क्या संबंध था। यदि मृतक एक प्रतिद्वंद्वी या भयावह था, तो ऐसी दृष्टि भयभीत और अशुभ थी और आमतौर पर इसे एक संकेत के रूप में व्याख्या किया गया था कि अतिरिक्त परिवार के सदस्य मर जाएंगे। भूख के समय में यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण था, जब समुदायों को दुर्भाग्य की एक श्रृंखला के साथ मारा गया था, कि अफवाहों के बारे में अफवाहें बढ़ने लगीं। Sagas एक revenant दिखाई देने के बाद भारी सावधानी बरतने के बारे में बताते हैं। मृत व्यक्ति को फिर से मरना पड़ा; मस्तिष्क के माध्यम से एक हिस्सेदारी लगाई जा सकती है, या मृतक को जीवित रहने के लिए अपना रास्ता खोजने से रोकने के लिए उसके सिर काटा जा सकता है। [5]

अन्य अनुष्ठानों में मस्तिष्क की तैयारी शामिल थी। प्रोस एडीडा में स्नोरी स्टर्लुसन ने चिंता की अंतिम संस्कार का जिक्र किया जिसमें नाखूनों काटने शामिल है [6] न कि मृतकों से अप्रत्याशित नाखून नागलगार के निर्माण के पूरा होने के लिए उपलब्ध हैं, जहाज रग्ग्नोक में जोतुन की सेना को परिवहन करने के लिए उपयोग किया जाता है। [7 ]

इब्न फडलान का खाता संपादित करें
दसवीं शताब्दी के अरब मुस्लिम लेखक अहमद इब्न फडलान ने एक सरदार के वोल्गा नदी के पास एक अंतिम संस्कार का वर्णन किया, जिसे उन्होंने रूसियाह नामक लोगों से संबंधित माना। विद्वानों ने आम तौर पर बाल्टिक से काले समुद्र तक वोल्गा व्यापार मार्ग पर स्कैंडिनेवियाई रस के रूप में इन लोगों को व्याख्या की है, हालांकि अन्य सिद्धांतों का सुझाव दिया गया है: [8] एंडर्स विनरोथ ने टिप्पणी की है कि 'रस की सटीक पहचान पर बहस हुई है, और हमें सावधान रहना चाहिए कि बस इब्न फडलान के रस को किसी भी तरह से वाइकिंग एज स्कैंडिनेवियाई रीति-रिवाजों के प्रतिनिधि के रूप में नहीं लेना चाहिए। [9]

एक सर्वसम्मति है कि अंतिम संस्कार के कुछ तत्व नर्स डायस्पोरा के लिए विशिष्ट अंतिम संस्कार की विशेषताओं से मेल खाते हैं, विशेष रूप से यह एक जहाज दफन है।
स्कैंडिनेविया में कुछ विशेषताएं समान नहीं हैं, जैसे कि तुलसी का उपयोग, जो स्कैंडिनेविया में उपलब्ध होने की संभावना नहीं है।
स्कैंडिनेविया में कुछ विशेषताएं समान हैं, लेकिन तुर्किक बोलने वाले लोगों के बीच भी अधिक व्यापक रूप से समान हैं, जिनमें इब्न फडलान द्वारा वर्णित घटनाएं हुईं, इसलिए जरूरी नहीं कि स्कैंडिनेवियाई संस्कृति को प्रतिबिंबित किया जाए। इस प्रकार इब्न फडलैन का खाता आइसलैंडिक लघु कहानी वोल्सा आर्टर में एक विवरण की याद दिलाता है, जहां दो मूर्तिपूजक नार्वेजियन पुरुष घर के एक महिला को एक दरवाजे के फ्रेम पर उठाते हैं ताकि वह अपने कुत्ते को फेंकने वाले पवित्र घोड़े के लिंग को ठीक करने की कोशिश कर सके, [10] लेकिन तुर्किक लोगों के बीच अन्य समानताएं मौजूद हैं। [11]
इस प्रकार कुछ हालिया छात्रवृत्ति ने इस मामले को अधिकतम करने की मांग की है कि इब्न फडलान हमें दसवीं शताब्दी स्कैंडिनेविया में अभ्यास के बारे में सूचित करते हैं, [12] [13] [14] जबकि अन्य कार्यों ने इसे कम करने के लिए प्रेरित किया है। [15] [16]

सारांश संपादित करें
इब्न फडलान कहते हैं कि यदि कोई गरीब व्यक्ति मर जाता है, तो उसके साथियों ने आग लगाए जाने से पहले एक छोटी सी नाव बनाई जिससे उन्होंने शरीर को रखा। उसके बाद वह एक महान व्यक्ति के दफन का एक विस्तृत विवरण देता है। ऐसे मामले में, इब्न फडलान कहते हैं कि उनकी संपत्ति का एक तिहाई अपने परिवार द्वारा विरासत में मिलता है, तीसरा अंतिम संस्कार कपड़ों के लिए भुगतान करता है, और तीसरा नबीद (शराब पीने वाला) श्मशान में शराब पीता है। [17] [ 13]

मृत सरदार को नाबिद, फल और एक ड्रम के साथ एक अस्थायी कब्र में रखा गया था, जो दस दिनों तक कवर किया गया था जब तक कि उन्होंने उसके लिए नए कपड़े नहीं छोड़े। इब्न फडलान कहते हैं कि मृत व्यक्ति का परिवार अपने दास लड़कियों और युवा दास लड़कों से उनके साथ मरने के लिए एक स्वयंसेवक के लिए पूछता है; "आमतौर पर, यह दास लड़कियां हैं जो मरने की पेशकश करती हैं"। [18] एक महिला ने स्वयंसेवी की और लगातार दो दास लड़कियों के साथ, मृत्यु के एंजेल की बेटियों के साथ, खुशी से गाए जाने पर बहुत नशे की लत पीने के लिए दिया गया। जब श्मशान के लिए समय आ गया था, तो उन्होंने नदी से अपनी नाव खींच लिया और लकड़ी के मंच पर रख दिया। [1 9] [13]
इसके बाद, राख पर एक गोल बैरो बनाया गया था, और चक्कर के केंद्र में उन्होंने बर्च लकड़ी की एक पोस्ट बनाई, जहां उन्होंने मृत सरदार और उसके राजा के नामों को बनाया। तब वे चले गए। [27] [28]

व्याख्या संपादित करें
दास लड़की के साथ यौन संस्कार को मृत सरदार को जीवन शक्ति के संचरण के लिए एक पोत के रूप में अपनी भूमिका का प्रतीक बनाने के लिए कल्पना की गई है। [2 9] जबकि विद्वानों की आम सहमति मानती है कि दास लड़की को मारने से पहले बहुत से लोगों के साथ यौन संबंध रखने के बारे में खुशी और विशेषाधिकार महसूस होता, हाल के काम ने सुझाव दिया है कि हमें इसे बलात्कार और "क्रूर अत्याचार" के रूप में देखना चाहिए। [30]

यह सुझाव दिया गया है कि, नशे में पीने वाले पेय का उपयोग करके, शोक करने वालों ने दास लड़की को एक उत्साही ट्रान्स में डाल दिया, जिसने उसे मानसिक बना दिया, और दरवाजे के फ्रेम के साथ प्रतीकात्मक कार्रवाई के माध्यम से, वह मृतकों के दायरे में दिखाई देगी। [31]

मानव बलिदान संपादित करें
 
मिडविनटरब्लॉट के लिए कार्ल लार्सन द्वारा एक मूर्तिपूजक नोर्स बलिदान के दौरान निष्पादक का स्केच।
अंतिम संस्कार के दौरान रोमांचों का त्याग किया जा सकता है ताकि वे अगली दुनिया में अपने गुरु की सेवा कर सकें। [2] Sigurðarkviða हिन skamma में कई stanzas शामिल हैं जिसमें वाल्कीरी Brynhildr नायक सिगुर्द के अंतिम संस्कार के लिए दासों की संख्या के लिए बलिदान की संख्या के लिए निर्देश देता है, और कैसे उनके शरीर को पिरे पर व्यवस्थित किया जाना चाहिए, जैसा कि निम्नलिखित stanza में:

हनम फ़िलगजा में .ví
fimm ambáttir,
átta þjónar,
eðlum góðir,
फोस्ट्रमैन मिट
ठीक है faðerni,
erat er Buðli gaf
बरनी सिनु। [32]

बॉन्ड-महिला पांच
उसका पालन करेंगे,
और मेरे आठ रोमांच,
वे पैदा हुए हैं वे,
मेरे साथ बच्चे,
और मेरा वे थे
बुद्धली के उपहार के रूप में
उसकी बेटी ने दिया। [33]

कभी-कभी वाइकिंग युग में, एक विधवा को उसके पति के अंतिम संस्कार में त्याग दिया गया था।

दाह संस्कार संपादित करें
मस्तिष्क और कबूतरों को कब्र पर जला देना आम था। केवल धातु और जानवरों और मानव हड्डियों के कुछ भस्म किए गए टुकड़े बने रहेंगे। मृतक को बाद के जीवन में उठाने के लिए, जितना संभव हो सके धूम्रपान के खंभे को बनाने के लिए पियर का निर्माण किया गया था। [34] प्रतीकात्मकता यंग्लिंग गाथा में वर्णित है: [35]

"इस प्रकार वह (ओडिन) कानून द्वारा स्थापित किया गया था कि सभी मृत पुरुषों को जला दिया जाना चाहिए, और उनके सामान ढेर पर रखे गए हैं, और राख को समुद्र में डाला जाना चाहिए या पृथ्वी में दफन किया जाना चाहिए। इस प्रकार, उन्होंने कहा, हर कोई आ जाएगा वालहल्ला को उसके साथ धन के साथ धन के साथ, और वह जो कुछ भी उसने धरती पर दफनाया था उसका भी आनंद उठाएगा। परिणामस्वरूप पुरुषों के लिए एक माउंड उनकी स्मृति में उठाया जाना चाहिए, और अन्य सभी योद्धाओं के लिए जिन्हें प्रतिष्ठित किया गया था मानवता एक स्थायी पत्थर; ओडिन के समय के बाद कौन सा रिवाज लंबे समय तक बना रहा। "

स्टॉकहोम में राष्ट्रीय पुरातनता के स्वीडिश संग्रहालय में गॉटलैंड, स्वीडन से एक छवि पत्थर पर एक पेय दृश्य।
अंतिम संस्कार और विरासत के उत्तीर्ण संपादन
व्यक्ति की मृत्यु के सातवें दिन, लोगों ने सजुंड मनाया (अंतिम संस्कार एले और दावत के लिए शब्द, क्योंकि इसमें एक अनुष्ठान पीने शामिल था)। अंतिम संस्कार एले मौत के मामले को सामाजिक रूप से निर्धारित करने का एक तरीका था। यह अंतिम संस्कार एले पीने के बाद ही था कि उत्तराधिकारी सही ढंग से अपनी विरासत का दावा कर सकते थे। [4] यदि मृतक विधवा या घर के मालिक थे, तो सही उत्तराधिकारी उच्च सीट ग्रहण कर सकता था और इस प्रकार प्राधिकरण में बदलाव को चिह्नित करता था। [5]

स्कैंडिनेविया में बड़े पैमाने पर कई हिस्सों में विरासत की अधिसूचना है, [5] जैसे कि हिलर्सजो पत्थर, जो बताता है कि कैसे एक महिला न केवल अपने बच्चों की संपत्ति के उत्तराधिकारी बनती है बल्कि उसके पोते [36] और होग्बी रनस्टोन, जो बताती है कि उसके सभी चाचाओं की मौत के बाद एक लड़की एकमात्र उत्तराधिकारी थी। [37] ,

वे उस समय से महत्वपूर्ण स्वामित्व दस्तावेज हैं जब कानूनी निर्णय अभी तक कागज़ में नहीं डाले गए थे। ऑस्टफोल्ड से ट्यून रनस्टोन की एक व्याख्या से पता चलता है कि लंबे समय तक चलने वाला शिलालेख घर के मालिक के सम्मान में अंतिम संस्कार के साथ संबंधित है और यह तीन बेटियों को सही उत्तराधिकारी घोषित करता है। यह 5 वीं शताब्दी के लिए दिनांकित है और इसके परिणामस्वरूप, स्कैंडिनेविया का सबसे पुराना कानूनी दस्तावेज है जो मादा के विरासत के अधिकार को संबोधित करता है। [5]

यह भी देखें देखें

नोर्स मूर्तिपूजा में मौत
संदर्भ संपादित करें

उद्धरण संपादित करें
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