मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

गोपजातिप्रतिच्छन्नौ देवा गोपालरूपिणः।ईडिरे कृष्णरामौ च नटा इव नटं नृप ॥१९।। कृष्ण और बलराम या जन्म गोपों में

श्रीमद्भागवत महापुराण दशम स्कन्ध (पूर्वाद्ध) 
अथाष्टादशोऽध्यायः (अध्याय- 18) श्लोक १९ से 
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व्याकरणिक टिप्पणी-१-गोपजाति=गोपेषुजाति(जन्म)अधिकरण तत्पुरुष समास को द्वारा "गोपो में जन्म" यह अर्थ।
जायतेऽस्यामिति । जन् + अधिकरणे क्तिन् । )  गोत्रम् ।


अर्थः परीक्षित् ! उस समय नट जैसे अपने नायक की प्रशंसा करते हैं वैसे ही देवतालोग ग्वालबालोंका रूप धारण करके वहाँ आते और गोपों  में ही जन्म  लेकर छिपे हुए =( प्रतिच्छन्न) बलराम और श्रीकृष्णकी स्तुति करने लगते॥११॥

भागवत पुराण में स्पष्टत: लिखा है कि बलराम और कृष्ण या जन्म गोलों( अहीरों) मैं हुआ।

1 टिप्पणी:

  1. Kuchh bhi bkwas mat kiya kro... Gop ek pauranik vyavsay suchak shabd hai jo ki us samay ke Kisan aur pashupalak logo ke liye istemal kiya jaata tha.Inhe vaishya varna ka mana jata tha.
    Aheer/Heer/Ahar/Aveer aadi Abhira vansh ke hain jo ki ek alag kabila tha aur bharat me uttar-pashchim kshrtra se aaya tha.Ye log Anava ya Anuvanshi the na ki koi Yaduvanshi.Anuvanshiyo me Madra,kekaiya,kkamboj,parsi,prithu adi kabile the jo ki uttar-pashchim kr ilake me prabhavi the.Kisi purabiye/Bihari se gyan lekr aaye ho kya..???Ye log aise hi murkh hote hai jo ki Aheer ko ek vyavsay smjhte hai vaha ke local gwale apne ko Aheer mzn ne lge hain.🥴

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