गुरुवार, 16 जुलाई 2020

ओ श्याम रे --- हम बाबरे ! तर्ज -- ओ शाहिबा !

ओ  श्याम रे ~~ओ श्याम रे  
 हम  बाबरे  ~~ नहीं हैं बुरे 
 ओ श्याम रे ~~ओ श्याम रे  
 हम  बाबरे  ~~ नहीं हैं बुरे 
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ओ  श्याम रे ~~ओ श्याम रे  
 हम  बाबरे  ~~ नहीं हैं बुरे 
 ओ श्याम रे ~~ओ श्याम रे  
 हम  बाबरे  ~~ नहीं हैं बुरे 
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खोजते तुमको कब मिल पाओगे !
कितने युगों का है क्रम!

खोजते तुमको कब मिल पाओगे !
कितने युगों का है क्रम!

ओ  श्याम रे ~~ओ श्याम रे  
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तुझसे गुजारिश है ,होती नहीं बारिश है ।

लपटें सी उठती हैं हवाओं में 
विष है ।

हम कितने प्यासे हैं ।भक्तों से क्यों रिस  है ।

तुझको मानने की अपनी ये कोशिश है ।

ओ  श्याम रे ~~ओ श्याम रे! 
 हम बाबरे ~~  नहीं हैं बुरे !
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जीवन के ये पल ,आते -जाते कल 
बन के गुजर जाते , नहीं पाते हैं सम्हल ।। 

राहें हुईं धूमिल , दूर कहीं मंजिल 
यहाँ पड़े पढ़ाबों पर , प्रभु यही मुश्किल ।।

ओ श्याम रे --ओ श्याम रे ।
हम बाबरे ~~~ नहीं हैं बुरे !!

खोजते तुमको कब मिल पाओगे
 कितने युगों का है क्रम ।

खोजते हैं तुमको कब मिल पाओगे ।
कितने युगों का है क्रम।

ओ श्याम रे --ओ श्याम रे--
हम बाबरे नहीं हैं बुरे ।।

खोजते हैं तुमको कब मिल पाओगे । 
कितने युगों का है क्रम !

खोजते हैं तुमको कब मिल पाओगे । कितने युगों का है क्रम।

ओ श्याम रे --ओ श्याम रे 
हम बाबरे -- नहीं है बुरे .....
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गीत यादव योगेश कुमार 'रोहि' 

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