गुरुवार, 5 अप्रैल 2018

यादवों को शासन में करने के लिए पुरोहितों द्वारा पारित वैदिक विधान ---

यादवो को पलट वार करना ही पडेगा ! यादवो की हत्या मनोवैज्ञानिक दवाब बनाने के लिये हो रही है !
जब तक जवाब नही दोगे तो बाद मे बहुत बुरा हश्र होगा ; बहुत नुकसान उठाना पडेगा तुम्हें ! वही यादव मारे जायेंगे जो समाज से कटे हैं रिकार्ड देख लो पैसे वाले ही मारे जा रहे हैं सुधर जाओ तुम लोग सोच रहे हो पुरोहित यादवो की शक्ति को स्वीकार करेंगे तो यह गलतफ़हमी है तुम लोगो की ! पुरोहित तो वेद के कोड (विधान) का पालन करेंगे ,तुम्हारीे शक्ति को नियंत्रण में करेंगे तुम्हें क्षीण करेंगे तुम पर अंकुश लगायेंगे और तुम्हें अधीन करेंगे वेद मे तो यही लिखा है
    ना मानो तो स्वयं देख लो 👇
प्रियास इत् ते मघवन् अभीष्टौ
        नरो मदेम शरणे सखाय:।
नि तुर्वशं नि यादवं शिशीहि
        अतिथिग्वाय शंस्यं करिष्यन् ।।
(ऋग्वेद ७/१९/८ ) में भी यही ऋचा
अथर्ववेद में भी (काण्ड २० /अध्याय ५/ सूक्त ३७/ ऋचा ७)
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हे इन्द्र !  हम तुम्हारे मित्र रूप यजमान
अपने घर में प्रसन्नता से रहें; तथा
तुम अतिथिगु को सुख प्रदान करो ।
और तुम तुर्वसु और यादवों को क्षीण करने वाले बनो ।
अर्थात् उन्हें परास्त करने वाले बनो !
(ऋग्वेद ७/१९/८)

ऋग्वेद में भी  यथावत यही ऋचा है ; इसका अर्थ भी देखें :- हे ! इन्द्र तुम अतिथि की सेवा करने वाले सुदास को सुखी करो ।
और तुर्वसु और यदु को हमारे अधीन करो ।
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और भी देखें यदु और तुर्वसु के प्रति पुरोहितों की दुर्भावना अर्वाचीन नहीं अपितु प्राचीनत्तम भी है ।...
देखें---
अया वीति परिस्रव यस्त इन्दो मदेष्वा ।
अवाहन् नवतीर्नव ।१।
पुर: सद्य इत्थाधिये दिवोदासाय ,
शम्बरं अध त्यं तुर्वशुं यदुम् ।२
(ऋग्वेद ७/९/६१/ की ऋचा १-२)
हे  सोम ! तुम्हारे किस रस ने दासों के निन्यानवे पुरों अर्थात् नगरों) को तोड़ा था ।
उसी रस से युक्त होकर तुम  इन्द्र के पीने के लिए प्रवाहित हो ओ। १।
शम्बर के नगरों को तोड़ने वाले  ! सोम रस ने ही तुर्वसु की सन्तान तुर्को तथा यदु की सन्तान यादवों को शासन (वश) में किया ।

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