स्वयं ब्रह्मा गोपों में गोप बनकर जन्म लेने की कामना करते हैं।
यह तथ्य इस बात को प्रमाणित करता है कि गोप ब्रह्मा की सृष्टि नहीं हैं।
वे स्वराट विष्णु की सृष्टि हैं
गर्गसंहिता और भागवत पुराण आदि ग्रन्थ इस बात की तस्दीक करते हैं।
ब्रह्मा द्वारा गोपकुल में जन्म की कामना-
श्लोक- "घोषेषु वासिनामेषां भूत्वाऽहं त्वत्पदाम्बुजम्। यदा भजेयं सुगतिस्तदा भूयान्न चान्यथा ॥43॥"
वर्णन- ब्रह्मा गोपकुल में जन्म की कामना करते हैं (गर्गसंहिता, वृन्दावन खण्ड, अध्याय-9)।
श्लोक-
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तद्भूरिभाग्यमिह जन्म किमप्यटव्यां ।
यद्गोकुलेऽपि कतमाङ्घ्रिरजोऽभिषेकम् ।
यज्जीवितं तु निखिलं भगवान् मुकुन्दः
त्वद्यापि यत्पदरजः श्रुतिमृग्यमेव ॥ ३४ ॥
वर्णन- ब्रह्मा गोकुल में जन्म की कामना करते हैं (श्रीमद्भागवत पुराण, स्कन्ध 10, अध्याय 14)।
व्याख्या दर्शाती है कि अहीर समाज की पवित्रता ब्रह्मा को भी आकर्षित करती है, जो समाज की दिव्यता को सकारात्मक रूप से चित्रित करती है।
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