मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

योग के नाम पर संभोगासन !

ज़रा इस पाखंड का गणित देखिए—हॉल में सफेद कपड़े पहनकर मैट पर बैठने का नाटक सिर्फ इसलिए किया जाता है ताकि माहौल थोड़ा 'पवित्र' लगे,

लेकिन अंदर का खेल ऐसा है कि अच्छे-अच्छे आशिक भी शरमा जाएं। पहले लोग प्यार या अपनी हवस मिटाने के लिए छुप-छुपकर मिलते थे, और समाज उन्हें कोसा करता था।

पर आज का यह मॉडर्न स्कैम देखिए—कुछ शातिर 'लाइफ कोच' या ढोंगी गुरु बीच में धंधा खोलकर बैठ जाते हैं,


और लोग हज़ारों-लाखों रुपये की टिकट खरीदकर हॉल में आते हैं ताकि अनजान लोगों या दूसरों के पार्टनर को सरेआम कसकर जकड़ सकें!

इसे नाम दिया जाता है 'ऊर्जा का आदान-प्रदान' (Energy Exchange)... अरे भाई, जो काम लोग छुपकर करते थे, उसे अब 'मेडिटेशन वर्कशॉप' का बोर्ड लगाकर खुलेआम किया जा रहा है!

मतलब गजब का बिजनेस मॉडल है—नाम अध्यात्म योग का, और हरकतें पूरी नाइटक्लब की 

अगर यही सब करने से दिमाग की शांति और मिलता है, तो फिर हमारे देश के पार्कों और नुक्कड़ों पर घूमने वाले बेशर्म प्रेमी जोड़े तो सदियों पहले से ही ये क्रिया कर रहे है।

बात यह है कि यह पश्चिमी देशों से आयातित 'लीगल हगिंग क्लब' या 'सामूहिक नजदीकी केंद्र' है, जहाँ अकेलेपन के मारे रईस लोग अपनी कुंठाओं और हवस को 'आध्यात्मिक हीलिंग' और 'चक्रा अलाइनमेंट' का चोला पहनाकर बाहर निकालते हैं,,,सब (.) का चक्कर है बाबू भाई .

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