मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

तीन तरह के लोग

: बात, हालात और लात
​
शेर-
आदमी की ज़ाति में भी रोहि , रूप और रंग हज़ार हैं ।
किसी की बात, किसी की हालात,तो कुछ लातों के यार हैं।।

मुखड़ा)
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की एक सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते हैं सदा दिखाई !
एक बात दूजे हालात तीजे लातें बैशरमाई।
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की एक सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते हैं सदा दिखाई !

अन्तरा-१
​(रदीफ़ - कोरस)
दुनिया में होते लोग , रोहि तीन तरह की ज़ात के,
कुछ मारे हालात के , कुछ हैं दीवाने बात के ! 
कुछ नीचे इतने गिर जाते, यार हैं केवल लात के।
पिटें कुचें पर नहीं बदलें लादें बेशरमाई।
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की एक सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते हैं सदा दिखाई !
​अन्तरा २ (बात वाले - स्वाभिमानी)
​बात वाले हैं जो बंदे  स्वाभिमान से जीते हैं,
सत्य वचन की दवा पिलाकर,हँसकर के विष पीते हैं।
इन्द्रियाँ जिनकी बड़ी सुस्थिर,अपने मन को जीते हैं। दुश्मन भी समझ रहे हैं जिनकी ये अच्छाई
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की ये सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते सदा दिखाई 
-मर्यादा प्राणों  से प्यारी, वे रहते स्वाभिमान से।
सबका भला, न शिकवा गिला हमदर्दी हर इन्सान से। मिटती हुई मानवता इन्होंने लाज बनाई।
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की एक सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते हैं सदा दिखाई !

​चरण ४ (हालात वाले - मनमानी)
बात बात पर हाथ बदलते उनके बड़े भजीते हैं।
बेपैंदी के लोटा समझों ऐसे लोग बस रीते है
​हालात वाले जो बंदे हैं, अपनी मनमानी करते हैं,
जैसी बहे बयार जगत में ,वैसा ही वाना धरते हैं।
उन्हें गिरगिट के वंशज समझो, पल में रूप बदलते हैं, इनसे तो तुम बचके रहना दूर रहे परछाँई ! 
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की एक सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते हैं सदा दिखाई !

अपने तक ही सीमित रह करके स्वार्थ की रोटी सेकें हैं।
अपने झूँठे वर्चस्व की महिमा बस ऊँची ऊँची फेंकें हैं।
मतलब में चौकस रहने वाले लोग भी ऐसे देखें हैं।
तलब और लव जग मत पर ,बालक बच्चे बैकें हैं।
हॉटल में खाते हैं बैठकर चिकिन और भेजा फ्राई।
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की ये सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते सदा दिखाई !

​चरण ४ (लात वाले - गुमानी)
​लात वाले जो अज्ञानी हैं, अति गुमान में एंठे हैं,
बिना दंड के समझ न आए, सिर पर चढ़कर बैठें हैं।
व्यभिचारों में लिप्त रहें नित, ईमान मान सब मेंटें है।,
ये अय्यासी गुलछर्रे करते , हराम का माल समेंटे हैं।
अपनी दौलत के मद में अन्धे। कुछ देता नहीं दिखाई!
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की ये सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते सदा दिखाई !

इंसान वही श्रेष्ठ है जो स्वाभिमान को धार ले,
रूखी सूखी खाकर सोए ,न कभी किसी से उधार ले
कदम धरने से पहले  सोच ,समझ ले  विचार ले !
अपने रहवर को मालिक को मन मैं ही पुकार से।
समय बदलता, विचार बदलता बदलती है परछाईं
सुनो ध्यान से अर्ज़ हमारी, जग की ये सच्चाई,
तीन तरह के लोग जगत में देते सदा दिखाई !

​चरण ६ (फ़र्ज़, नीयत और बंदगी)
​कर्ज़ और मर्ज़ पनपने न दें, ये ज़िंदगी के हर्ज हैं,
नीयत हो तबीयत के माकूल, ये पुरानी लोगों की तर्ज हैं।
आज भी कुछ एक नेक ज़माने में इंसान, जिनके लिए सबसे पहले फ़र्ज़ है,
वाहयाती प्रभु! स्वार्थीयों के जहान में! उम्र बीत जाए मेरी, तेरे ध्यान और ज्ञान में,
तुमसे गुज़ारिशें हैं मेरी, तुमसे बस यही अर्ज़ है!
आज भी कुछ एक नेक ज़माने में, जिनके लिए  पहले फ़र्ज़ है,

​आभोग / समापन
​बात वाले हैं फूल चमन के, हालातों वाले पानी,
लातों वाले हैं धूल राह की, समझे रोहि  ज्ञानी!
आदमियत का भेद यही है, पहचानो एक नज़र से,
इंसान सूरत नहीं पुजता है तो अपने हुनर से !

भारतीय लोक संगीत धुन में  महिलाओं के स्वर में ऑडियो जनरेट करें !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें