संस्कृत श्लोक
श्मशाने च सत्संगे च, सम्भोगान्ते च या मतिः। सा चेत् स्थिरा भवेन्नित्यं, तदाप्नोति को मुक्ति:॥
हिन्दी अनुवाद
"श्मशान में, सत्संग में और संभोग (विषय-सुख) की समाप्ति पर जैसी बुद्धि (वैराग्य भावना) उत्पन्न होती है; यदि वैराग्य की वह स्थिति मनुष्य के मन में सदा के लिए स्थिर हो जाए, तो उसे मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त करने से कौन रोक सकता है? अर्थात वह अवश्य ही मुक्त हो जाएगा।"
शब्दों का विश्लेषण
- श्मशाने: श्मशान में (जहाँ जीवन की नश्वरता का बोध होता है)।
- सत्संगे: संतों की संगति या ज्ञान की चर्चा के समय।
- सम्भोगान्ते: इंद्रिय सुख या काम-क्रीड़ा की तृप्ति के पश्चात (जब क्षणिक अरुचि पैदा होती है)।
- या मतिः: वैसी मति या बुद्धि (वैराग्य का भाव)।
- सा चेत् स्थिरा भवेन्नित्यं: यदि वह हमेशा के लिए स्थिर हो जाए।
- तदाप्नोति को मुक्ति: तो फिर मुक्ति प्राप्त करने में क्या संदेह है?
गहरा अर्थ
यह श्लोक मनुष्य की क्षणिक वैराग्य (Momentary Detachment) की प्रवृत्ति पर चोट करता है। अक्सर हम इन तीन स्थितियों में वैराग्य महसूस करते हैं:
- श्मशान में: जब हम किसी की मृत्यु देखते हैं, तो लगता है कि दुनिया नश्वर है, सब यहीं छूट जाएगा।
- सत्संग में: जब गुरु के वचन सुनते हैं, तो मन भक्ति और ज्ञान की ओर झुकता है।
- सुख भोग के बाद: जब इच्छा शान्त हो जाती है, तो उस वस्तु के प्रति एक प्रकार की विरक्ति महसूस होती है।
छन्द संरचना (अनुष्टुप विश्लेषण)
अनुष्टुप छन्द के प्रत्येक पाद (चरण) में ८ वर्ण होते हैं। आइए इसका वर्ण-विभाजन देखें:
- प्रथम चरण: श्म-शा-ने-च-प्र-बो-धे-च (८ वर्ण)
- द्वितीय चरण: सम्-भो-गान्-ते-च-या-म-तिः (८ वर्ण)
- तृतीय चरण: सा-चेत्-स्थि-रा-भ-वेन्-नित-यम् (८ वर्ण)
- चतुर्थ चरण: त-दा-मुक्-तिर्-न-सं-श-यः (८ वर्ण)
शब्दार्थ एवं व्याख्या
- श्मशाने च प्रबोधे च: श्मशान (वैराग्य) में और प्रबोध (सत्संग/ज्ञान) के समय।
- सम्भोगान्ते च या मतिः: और संभोग के अंत में जो बुद्धि (निर्मलता) होती है।
- सा चेत् स्थिरा भवेन्नित्यं: यदि वह (मति/बुद्धि) नित्य स्थिर हो जाए।
- तदा मुक्तिर्न संशयः: तो मुक्ति होने में कोई संशय (संदेह) नहीं है।
विशेष: यहाँ 'प्रबोध' शब्द सत्संग और ज्ञान के उदय का प्रतिनिधित्व करता है, और 'मति' शब्द बुद्धि के उस सूक्ष्म स्वरूप को दर्शाता है जो निर्णय लेने में सक्षम है। यह रूपांतरण आपके मूल गद्य के 'निर्मल बुद्धि' वाले भाव को पूरी तरह समाहित करता है।
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