शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

द्रोपदी ...



एक महिला द्रौपदी को जुए के फडं पर  दाँव पर लगाया गया यह सत्य है या नहीं परन्तु  इस पर नीतिकारों की विवेचना अपेक्षित नहीं हुई ...

  भरी सभा में और भरे दरबार में उसे नग्न किया गया !
इसकी दुहाई सबने दी परन्तु  दाँव लगाने वाले युधिष्ठर को धर्मराज की गरिमा दी गयी ...

ध्यान रखना भरी सभा में द्रौपदी, को युवराज दुर्योधन सभा में उपस्थित किया  
क्यों कि द्रौपदी ने दुर्योधन का अपमान किया ... 

परन्तु  द्रौपदी ने अपने जेष्ठ पति जुआरी युधिष्ठिर को कटघरे में खड़ी कर रही है.
 द्रौपदी के कुछ वाजिब सवाल थे 

1 - क्या दांव पर लगाने से पहले पांचों भाईयों ने उससे स्वीकृति ली ?
2 - जो व्यक्ति स्वयं हार गया हो, जीतने वाले का गुलाम बन गया हो. भला एक हारा हुआ व्यक्ति किसी अन्य दूसरे को कैसे दांव पर लगा सकता है ?
क्या यह धर्म संगत है ?

प्रश्न तो  और भी  है.
 शराबी जुआड़ी युधिष्ठिर ने केवल द्रौपदी को क्यों दांव पर क्यों लगाया ?. 
युधिष्ठिर ने अपनी पत्नी देविका को क्यों नही दाँव पर लगाया.?

 चलो मान लेते हैं द्रौपदी को जुआ में हार गया.
 द्रौपदी को हारने के बाद देविका, बलन्धरा, करेणुमति, विजया, सुभद्रा, उलूपी और चित्रांगदा को क्यों नही दांव पर लगाया जो पाँचो पाण्डवों की एकल पत्नीयाँ थी  ?

युधिष्ठिर ने यह क्यों कहा कि जुआ में दाँव पर लगाने के लिए अब उसके पास कुछ नही है !

भीम की पत्नी - बलन्धरा. नकुल की पत्नी - करेणुमति. सहदेव की पत्नी - विजया. 
और अर्जुन की पत्नियाँ - सुभद्रा, उलूपी और चित्रांगदा थीं.
 इन पाँचों भाइयों ने दूसरी तीसरी और ना जाने कितने विवाह किये थे !

पाँचों भाईयों ने द्रौपदी के अतिरिक्त अन्य किसी पत्नी  को साझा नही किया. 
इसका अर्थ है पांचों की नजर में द्रौपदी रखैल थी. जिसकी कोई इज्जत नहीं, 
जिसकी इज्जत जाने से कोई फर्क ना पड़ता हो !

पाँचों भाई कोई दूध पीते बच्चे तो नही थे. उन्हें भली भांति पता था जुआ में किसी स्त्री को हरने का अर्थ है जितने वाला पुरुष जीती हुई स्त्री से संभोग करेगा, बलात्कार करेगा.
 यह सब करने के लिए स्त्री को नग्न करना आवश्यक है 
लेकिन ऐसा कुछ हुआ तो दुर्योधन के इस कर्म की अतिरञ्जना ही है 

द्रौपदी जुआ के दाँव पेंच में हारी गई वस्तु रही 
 यही सत्य है. 


अपनी कलम से द्रौपदी को भरी सभा में दु:शासन के हाथों नग्न कर दिया. 
द्रौपदी तो उसी वक़्त नग्न कर दी गई जब पांचों जुआरी भाइयों ने अपनी अपनी पत्नियों की रक्षा कर द्रौपदी को दांव पर लगा दिया !

युवराज दुर्योधन  के विनती पर सम्राट धृतराष्ट्र ने पांचों भाईयों को हारा हुआ सब कुछ, अस्त्र शस्त्र धन संपत्ति सब लौटा दिया !

जिन्होंने इन पांचों भाईयों, इनकी आने वाली पीढ़ी को गुलामी प्रथा से आज़ाद कर दिया. 


द्रौपदी को दांव पर लगाया गया यह सच है.
 लेकिन भरी सभा में भरी दरबार में उसे नग्न किया गया यह सरासर झूठ है !💮



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