महाभारत का सभापर्व का वर्णन हैं अध्याय -(३८) में राधा जी का वर्णन श्रीजी के रूप में है।
संस्कृत श्लोक:
ततः सर्वदशार्हाणामाहुकस्य च याः स्त्रियः।नन्दगोपस्य महिषी यशोदा लोकविश्रुता।।
रेवती च महाभागा रुक्मिणी च पतिव्रता। सत्या जाम्बवती चोभे गान्धारी शिंशुमापि वा।।
विशोका लक्ष्मणा साध्वी सुमित्रा केतुमा तथा।वासुदेवमहिष्योऽन्याः श्रिया सार्धं ययुस्तदा।।
विभूतिं द्रष्टुमनसः केशवस्य वराङ्गनाः। प्रीयमाणाः सभां जग्मुरालोकयितुमच्युतम्।।
हिन्दी अनुवाद:
तदनन्तर सब दशार्हकुलकी स्त्रियाँ, राजा उग्रसेनकी रानियाँ, नन्दगोपकी विश्वविख्यात रानी यशोदा, महाभागा रेवती (बलभद्र-पत्नी) तथा पतिव्रता रुक्मिणी, सत्या, जाम्बवती, गान्धारराजकन्या शिंशुमा, विशोका, लक्ष्मणा, साध्वी सुमित्रा, केतुमा तथा भगवान् वासुदेवकी अन्य रानियाँ—वे सब-की-सब श्रीजीके साथ भगवान् केशवकी विभूति एवं नवागत सुन्दरी रानियोंको देखनेके लिये और श्रीअच्युतका दर्शन करनेके लिये बड़ी प्रसन्नताके साथ सभाभवनमें गयीं।
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