शनिवार, 5 सितंबर 2026

मेरा गीत (३)

शेर- अर्जुन किया-

प्रभु की शरण में आके, सिर चरणों में झुका के

मन को तसल्ली मिलती है, प्रभु का भजन गा के

समय के पथ पर जिंदगी चली जा रही है यों ही

फिर कुछ हाशिल नहीं होगा, रोही पीछे पछताके


​कौन है बनाने वाला इस संसार का, कौन है बनाने वाला इस संसार का

कौन है खैवईया मेरी पतवार का, कौन है बनाने वाला इस संसार का

कौन है बनाने वाला इस संसार का, कौन है खि भईया मेरी पतवार का !

कौन है बनाने वाला... (हरि बोल)

********************

अन्तरा-

​धड़कन की तालों में, साँसों की लय में गाए, शिसकियों की तान में आलाप आह सुनाए

धड़कन की तालों में साँसों की लय में गाए, शिशकियों की तान में आलाप आह सुनाए

ये ह्रदय की वीणा  पीड़ाओं की झंकार का, ईश्वर सुनेगा जरूर राग मेरी पुकार का,

कौन है की भईया मेरी मझधार का, कौन है बनाने वाला इस संसार का,

कौन है बनाने वाला इस संसार का, कौन है खैबईया मेरी मझधार का

कौन है बनाने वाला...

****"

अन्तरा-

​हम बेकुसूरों पर ढाये जा के ग़मों पे, ईमान बिक जाते जहाँ सस्ते दामों पे,

हमने खुद को परखा है जाके उन मुकामों पे, ईमान बिक जाते जहाँ सस्ते दामों पे,

हमने खुद को परखा है जाके उन मुकामों पे, ईमान बिक जाते जहाँ सस्ते दामों पे,

बिकता हर सौदा इस दुनिया के बाज़ार का, बिकता हर सौदा इस दुनिया के बाज़ार का

कौन है खिबईया मेरी मझधार का, कौन है बनाने वाला इस संसार का

कौन है बनाने वाला इस संसार का, कौन है की भईया मेरी मझधार का

कौन है बनाने वाला... (हरि बोल)

अन्तरा-३

​दुनिया की भीड़ में अकेले हम आए, अकेले ही जाऐंगे कुछ पल को मेले पाए।

सपनों की दुनियाँ कोई महल न बनाऐं कल्पनाओं का झोका है जब आँख खुल जाऐ। 

जिन्दगी नाम रोहि सफर और इंतजार का ,  चलते रहो यों ही एक लय हो रफ्तार का -

थक गया हूँ राहों में, कोई उपहार नहीं मुझे हार का ! चलता रहुँगा योहीं,साथ मिल जाऐ परवर दिगार का !

जिन्दगी नाम रोहि सफर और इंतजार का ,  चलते रहो यों ही एक लय हो रफ्तार का -

कौन है की भईया मेरी मझधार का, कौन है बनाने वाला इस संसार का

कौन है बनाने वाला इस संसार का, कौन है की भईया मेरी मझधार का

कौन है की भईया मेरी मझधार का, कौन है की भईया मेरी मझधार का

(हरि बोल)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें