शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

स्वाभिमान का गीत-

देना  हमको केवल ज्ञान और धनधान।
जिन्दा रहने को रोटी चलने को स्वाभिमान।
ये सपनों सी दुनियाँ यहाँ स्थाई नहीं पहचान। तेरा ध्यान हम्हें रहे भगवान ! मन पर रहे कमान!
कभी भरोसा मत करना तू मन पर हे इन्सान!
इन्सान की काली करतूतें,उसके मन की पैदांइस है। यही महापापी है मन बस पाप ही इसकी ख्वाइश है। 


मन की चंचलता, ईश्वर-भक्ति और स्वाभिमान पर आधारित कव्वाली के अंदाज में यह भक्ति गीत:

​मत्ला (प्रस्तावना)

देना हमको इतना मालिक, ज्ञान और धन-धान, जीवन की सार्थकत हो जाए और तेरी पहचान! 

दो वक्त की  रोटी मिल , चलने को स्वाभिमान।सपनों सी दुनिया में हैं ,सब आते जाते इन्सान   ,

तेरा ध्यान रहे ऐ दाता, और मन पर रहे कमान !

​अंतरा 1

यह जग एक मुसाफ़िरख़ाना, कोई न टिकने पाया,  माटी का यह पुतला बंदे, पल भर में मुरझाया।

क्षणभंगुर इस दुनियाँ का तू कभी न करना अभिमान,

नश्वर है पहचान यहाँ की, केवल ईश्वर महान।   तेरा ध्यान रहे ऐ दाता, मन पर रहे कमान!

​अंतरा 2

धोखेबाज़ बड़ा यह मन है, मत करना कभी विश्वास,! लोभ लालच की दुनियाँ में होता नहीं कोई खास।

इस कारण भटक रहा मानव, कैसे होगा उद्धार। मौज मस्ती  जिन्दगी सस्ती करता लेकर उधार।

काली करतूतें इनसां की, रोहि मन की ही पैदाईश हैं,

पाप जगाए अपने जेहन में  पहली और आखिरी ख़्वाहिश हैं।

तेरा ध्यान रहे ऐ  दाता, मन पर रहे कमान ! देना हमको इतना मालिक, ज्ञान और धन-धान, जीवन की सार्थकत हो जाए और तेरी पहचान! 

​अंतरा 3

महापापी इस मन को वश में , करने की तू कोई दबा दे। कदम डिगें ना कभी सफर में ! तू ऐसा दबदबा दे।

सच्चाई और नेक डगर का,दिल में उजियारा भर दे। सर्दी, बरसा और गर्मी सहले हमको ऐसा घर दे । नियम संयम जीवन में पल पल, करूँ तेरे भजनों का गान !

तेरा ध्यान रहे ऐ दाता, मेरा मन पर रहे कमान!

देना हमको इतना मालिक, ज्ञान और धन-धान, जीवन की सार्थकत हो जाए  और तेरी पहचान! 

दो वक्त की  रोटी मिल , चलने को स्वाभिमान।सपनों सी दुनिया में हैं ,सब आते जाते इन्सान   ,

तेरा ध्यान रहे ऐ दाता, और मन पर रहे कमान !

अंतरा 4 

साहस, शर्म और चरित्र रोहि ,नहीं मिलता है  सबको । पूर्व जन्म के हैं तपसंस्कार ,जानो इसी सबब को। जैसी जिसकी मनो-मति परिवेश मिले उसे वैसा। तुम्हारें कर्म तुम्हारे पीछे बनाते जीवन का नक्शा। जन्मों जन्मों तक चलते कर्मों के यही विधान 

दो वक्त की  रोटी मिले , चलने को स्वाभिमान।सपनों सी दुनिया में हैं ,सब आते जाते इन्सान   ,

तेरा ध्यान रहे ऐ दाता, और मन पर रहे कमान !


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