सारस पक्षी स्वर हैं सरवत, वैराग्य भरे पुरवइया।
आजादपुर है थान तुम्हारों, तुम जग की रखवइया!
हृदय भावों की शुद्धि करदे, और विचार निर्मल कर मइया !
अन्तरा~(१)
(भक्ति भाव में बहता हुआ देहाती लोक-स्वर)
मुख्य गायिका:
मोह माया के चक्र निरन्तर, जो चला रहे इस दुनियाँ को,
कर्म हैं इच्छा , मन की परीक्षा। लाभ लोभ का कारण है ये पता नहीं सगुनियाँ को!
मन के धोखे बड़े अनोखे, इस पे विश्वास करो मत भइया।
हृदय भावों की शुद्धि करदे, और विचार निर्मल कर मइया !
जय आजादपुरववाली मइया ।
हृदय भावों की शुद्धि करदे, और विचार निर्मल कर मइया !
सारस पक्षी स्वर हैं सरवत, वैराग्य भरे पुरवइया।
अन्तरा-२
लोभ के भँबर, मोह के गोते ।
उमर बीत गई तेरी रोते रोते।
भव सागर है कठिन डगर है।
गंगा मैली हुई पाप धोते धोते ।
तृष्णा की लहरों पर नइया। पार करे आजादपुर वाली मइया। ये ही खिवैया ये ही करवइया।
चित्र चरित्र बिके नहीं अपना ! बड़ा विचित्र लोभ मोह परखना। वरद हस्त माता तुम रखना! मन का ना हो कभी भटकना। अपनी कृपा की करना छँइया। बडी पुरातन आजादपुर की मइया!
हृदय भावों की शुद्धि करदे, और विचार निर्मल कर मइया !
सारस पक्षी स्वर हैं सरवत, वैराग्य भरे पुरवइया।
आजादपुर है थान तुम्हारों, किन्तु तुम जग की रखवइया!
*****
अन्तरा-(२)
इस जीवन में जितनी वाधाऐं ! आदमी ने खुद ही बनायी हैं।
उसके इरादे उसके वादे और नीयत में खोट समायीं हैं।
ये भाग्य कर्म का लेख नियत है कर्म सही तो सही तबीयत है न कोई बाको मरबइया।
बोलो जय आजादपुर वाली मइया।
बोलो जय आजादपुर वाली मइया।
अन्तरा(३)-
हेरा फेरी या बेईमानी से जो लोग दौलत कमाऐं! सब लोगों का अनुभव हैं वह व्याजसहित चला जाऐ।
इन हाथों में पैसा बहुत आया
और गया भी !
पर ईमान से बड़ा कोई
धन नहीं वह खजाने की चाबी।
जय आजाद पुर वाली मइया। जिसने जो भी मांगा है मिला वही है भइया।
हृदय भावों की शुद्धि करदे, और विचार निर्मल कर मइया !
सारस पक्षी स्वर हैं सरवत, वैराग्य भरे पुरवइया।
आजादपुर है थान तुम्हारों, तुम जग की रखवइया!
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