स्वरसाधना- संगीत मण्डली की विशेष प्रस्तुति-
परिकल्पना एवं निर्देशन: यादव योगेश कुमार रोही
राग: मिश्र मेघ-शिवरंजनी (राजस्थानी एवं पर्वतीय लोक धुनों का सम्मिश्रण)
ताल: द्रुत कहरवा / तीनताल का तीव्र द्रुत रूप
शैली: द्रुपद एवं लोक आरती शैली
महा आरती: द्रुत ताल एवं द्रुपद शैली
[प्रस्तावना - युवा कन्याओं का दूरदेशीय सरगमी आलाप]
अन्तराओं पर उत्तर-भारतीय कब्बाली का गायन अंदाज-
(पर्वतीय और राजस्थानी लोक धुनों के मेल से गूंजता हुआ धीमा, सात्विक और कर्णप्रिय सरगमी आलाप)
युवा कन्या स्वर (समूह में):
"नी... सा... रे... ग... प... ध... नि... सा..."
(आलाप का विस्तार: पर्वतीय गढ़वाली गूँज के साथ राजस्थानी मांड की महक लेते हुए द्रुतलय की ओर प्रवेश)
[ध्रुवपद शैली में महा आरती का मुखड़ा]
सब स्वर (कोरस - ताल द्रुत कहरवा):
जय मइया आजादपुर वाली,
पहाड़ीपुर से भी आते सबाली ।
काली नदी तट रम्य वसेरा,
पावनभूमि आजादपुर डेरा। भक्तों रहे भीड़ निराली। जय मइया आजादपुर वाली
(इंट्रो म्यूज़िक)
[अन्तरा 1: द्रुपद एवं राजस्थानी लोक धुन का सम्मिश्रण]
(मृदंग और ढोलक की तीव्र थाप के साथ)
मुख्य गायक / स्वरसाधना मण्डली:
सूती साड़ी श्वेत रंग है। मइया का बड़ा सुन्दर ढ़ंग है। अति प्रोढावस्था बड़ी पावन रस्ता।मइया सदा भक्तों के संग है। करती भक्तों की रखवाली।
जय मइया आजादपुर वाली,
पहाड़ीपुर से भी आते सबाली ।
काली नदी तट रम्य वसेरा,
पावनभूमि आजादपुर डेरा। भक्तों रहे भीड़ निराली। जय मइया आजादपुर वाली
अन्तरा- २)
मइया का अद्भुत बड़ा स्वरूप है। एक हाथ में झाडू लगी है! दूसरे हाथ में लगा सूप है।
अगर तगर की महक है मोहक! और मोगरा की जलती धूप है। भक्तों लिए आरती की थाली।
जय मइया आजादपुर वाली,
पहाड़ीपुर से भी आते सबाली ।
काली नदी तट रम्य वसेरा,
पावनभूमि आजादपुर डेरा। भक्तों रहे भीड़ निराली। जय मइया आजादपुर वाली
३- बड़ा सत्व तेरी बड़ी है महिमा ! दूर दूर तक छायी गरिमा। भक्तों से हो जाएं गलती अगर ! उनको कर देती है तू माक्षमा।
चोर डकैट सरप्पा मवाली, जो जान बूझ कर देते गाली। उनकी दुर्गति और कंगाली। उनपर कहर बुरपाने वाली
जय मइया आजादपुर वाली, तेरे दर से कोई गया न खाली!
जय मइया आजादपुर वाली,
पहाड़ीपुर से भी आते सबाली ।
(जयकारा गूंजता है: "बोल आजादपुर वाली मइया की जय !")
यह आरती स्क्रिप्ट स्वरसाधना- संगीत मण्डली के कलाकारों द्वारा यादव योगेश कुमार रोही के निर्देशन में मंचन और गायन हेतु पूर्णतः आजादपुर वाली मइया को समर्पित है।
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