सोमवार, 7 सितंबर 2026

जीवन ये बीते पल पल -



गीत का शीर्षक: रटना हरे कृष्णा
गायक एवं रचयिता: यादव योगेश कुमार रोहि

​स्थाई
​जीवन ये बीते पल पल भक्ति की राह में,
प्रभु का ही अक्श छाहे तेरी निगाह में,
प्रभु को चाह में बसाए रखना—
रटना हरे कृष्णा, रटना हरे कृष्णा!
रटना हरे कृष्णा, रटना हरे कृष्णा!
(आलाप)

​अन्तरा-१
​मन को निर्मल कर तू प्रभु के भजन से...
प्रभु मिल पाते हैं केवल तप और मनन से,
तप और मनन से ही मन का संयम कर।
पापों के भारो को मन से  कम कर,
प्रभु को बसालो अपने दिल की बारगाह में।
प्रत्येक आह में, प्रत्येक चाह में, उसके ही सपने देखों मन के प्रवाह में,
जमाने से घबराकर पीछे मत हटना —
रटना हरे कृष्णा! रटना हरे कृष्णा!

​अन्तरा-२
​भक्ति की राहों पर जीवन का सफर हो,
रुकना वहाँ तुझे जहाँ भक्तों का घर हो।
इसके सिवाह दूजा कोई पढाब नहीं,
मंजिल से पहले  रोहि ठहराब नहीं।
चलते रहना है तुझको पड़े छाले पाँव में,
बहती नदियां को देखो देखो हवाओं में।
गर्दिश में तुझको अब नाहीं भटकना—
रटना हरे कृष्णा! रटना हरे कृष्णा! रटना हरे कृष्णा!

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अन्तरा-३
​सांसों की  सरगम धड़कन की लाल में ,
प्रभु का भजन गाते रहना हर हाल में !
सूनी इस दुनिया में बस उसी का ही सहारा हो।
उलझ ना जाए यादव  रोहि जंलाल में,
आदमी जिन्दा है अभी तक अपनी एक आश में,

मंजिलों की तलाश में , चाहत की प्यास में! दरख्तो से जैसे लताओं का लिपटाना ,आदमी का बजूद है परछाइयों सिमटना-

रटना हरे कृष्णा! रटना हरे कृष्णा! रटना हरे कृष्णा!

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