गीत का शीर्षक: गूंजता आभीर है
शैली: कव्वाली फ्यूजन (सूफी-रॉक और लोक-संगीत का मिश्रण)
म्यूजिक हिंट: हारमोनियम की तेज तान के साथ मॉडर्न बेस (Bass) और ड्रम बीट्स। बैकग्राउंड में कव्वाली की तालियों (Clapping) की लयबद्ध आवाज़।
(आलाप - ऊंचे और सूफी स्वर में)
हो....
धर्म की ध्वजा, और इस माटी का सम्मान,
युगों-युगों से गा रहा, यश जिनका वेद पुरान...
(मुखड़ा)
मुख्य गायक (Lead Singer):
रखना दिलों में 'यादव को', ये शौर्य की तासीर है,
रखना दिलों में 'यादव को', ये शौर्य की तासीर है!
कोरस (Humnawa):
(हाँ तासीर है, शौर्य की तासीर है!)
मुख्य गायक:
शौर्य इसकी धड़कनों में,रुकता नही जो अड़चनों में।
भारत की धरा पर, जिनकी अब तलक तासीर है !
कोरस (तालियों के साथ):
भारत की धरा पर, जिनकी अब तलक तासीर है
रखना दिलों में 'यादवों ' ये वीर हैं गम्भीर हैं। ..
(म्यूजिक ड्रॉप: कव्वाली की तालियों के साथ अचानक मॉडर्न ड्रम बीट्स और सिंथेसाइज़र का फ्यूजन)
(अंतरा 1: संस्कृति और पौराणिक योगदान)
मुख्य गायक:
गौ-माता के रक्षक हैं ये, प्रकृति के रखवाले हैं, इनके ही घर जन्में कन्हैया मुरली वाले हैं।
(कोरस: जो प्रकृति के रखवाले हैं , हाँ प्रकृति के रखवाले हैं)
बंसी की मधुरिम तानों से, जो अलख जगाने वाले हैं ।
दूध-दही की नदियों से ही, सींचा देश का भाल,
धर्म-कर्म की राहों रोहि " जिनके रुतवे बेमिसाल ।
मुख्य गायक (तेज लय में - तराना स्टाइल):
अरण्य और वेदों में... (कोरस: वाह वाह !)
अरण्य और वेदों में, इनकी ही तस्वीर है!
भारत की धड़कनों में, धड़कता 'आभीर' है!
कोरस:
(रखना दिलों में 'यादवों को ' रखना दिल में ..)
(अंतरा 2: शौर्य और मूल प्रवृत्ति)
मुख्य गायक:
सीधे-सच्चे मन के हैं, पर रण में हैं तूफान हैं,
(कोरस: रण में ये तूफान हैं , जी रण में हैं तूफान हैं)
न्याय की खातिर दे देते हैं, हंसकर हतेली इनका जान हैं।
करुणा का सागर बहता है, इनके गहरे सीने में,
अड़ जाएं तो ला दें सर्दी, दुश्मन को भी पसीने में।
मुख्य गायक:
इनके ही बाहुबल से... (तालियां तेज़ होती हैं)
इनके ही बाहुबल से, रक्षित देश की प्राचीर है!
संस्कृति की धड़कनों में, धड़कता 'आभीर' है!
कोरस:
(रखना दिलों में 'यादवों को ..)
(अंतरा 3: फ्यूजन क्लाइमैक्स - लोक परंपरा और कर्म)
मुख्य गायक (सूफी अंदाज़ में, बिना बीट के केवल हारमोनियम पर):
हल से माटी चीर के जिसने, सोना है उपजाया,
लोक-गीत और उत्सव को, सदियों तक गाया मनाया ।
त्याग, तपस्या, मेहनत ही, जिनका सच्चा ईमान,
इनके पसीने से ही महकता, अपना ये हिंदुस्तान।
मुख्य गायक (कव्वाली की तेज लय - बीट ड्रॉप के साथ):
ये वो मुकद्दर हैं... (कोरस: हाँ!)
ये वो सिकंदर हैं... (कोरस: हाँ!)
कौम ये ऐसी, जो माटी की तकदीर है !
भारत की धड़कनों में, धड़कता 'आभीर' है!
(समापन - तेज़ तालियों और फ्यूजन ढोलक के साथ)
सब एक साथ (Chorus & Lead in high energy):
रखना दिलों में 'यादव को ', ये शौर्य की तासीर है,
संस्कृति की धड़कनों में, धडकता 'आभीर' है!
धड़कता आभीर है... हाँ धड़कता आभीर है!
(हो... धड़कता आभीर है!)
(संगीत एक सूफी ईडीएम (Sufi EDM) बीट के साथ फेड आउट (Fade out) होकर समाप्त होता है...)
कब्बाली अन्दाज में गढ़वाली व राजस्थानी लोग संगीत शैली में यह भक्ति गीत- ऑडियो जनरेट करें
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