सोमवार, 31 अगस्त 2026

कब्बाली २-

मुख्य कव्वाल (आलाप):

सुन ऐ रब्बे-कायनात, ऐ नूर-ए-अज़ल!

तू ही मकां, तू ही ला-मकां तेरी फ़जल!

मैं हूँ मुसाफिर, मैं हूँ एक राही,

ढूँढ रहा हूँ तुझे अम्बर और जल-थल !

कोरस:

ढूँढ रहा हूँ तुझे अम्बर और जल-थल

(!)

मुख्य कव्वाल:

मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!

कोरस (तालियों के साथ):

(बता दे कहाँ है तू!)

मुख्य कव्वाल:

मैं दर-ब-दर फिरा, मैं थक कर गिरा , ता उम्र करता रहूँ मैं तेरा ही तजिकिरा।

मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!

कोरस:

(मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!)

मुख्य कव्वाल (तेज़ लय में):

ये देखा ज़माना, मतलब से आना,

ग़रज़ के बज़ार में,! गधों को मनाना ।

सिक्कों की खनक में, ईमान डिग गया,

दौलत की बस्ती से, इन्सान बिक गया!

मुख्य कव्वाल (धीमे, दर्द भरे स्वर में):

तीरथ बहुत कर लिए, मूरत में तुझको ढूँढा,

पत्थर के इन टुकड़ों में, क्या मैंने तुझको पाया?

उम्र बीतती चली गयी, तन भी हो चला बूढ़ा,

सांसों की माला टूटी, तुझसे मैं फिर भी न जुड़ा।

मुख्य कव्वाल (ऊंचे स्वर में):

तुझसे मैं फिर भी न जुड़ा।

कोरस:

(तुझसे मैं फिर भी न जुड़ा...)

मुख्य कव्वाल (जोश के साथ):

अब मन के भीतर ही, ज्योत जलाऊंगा, देखुँगा तेरा वजूद!

कोरस:

(तेरा वजूद!)

मुख्य कव्वाल (तेज़ सरगम के साथ):

प्रवृत्तियों के वेग निरन्तर सबकी रूह को छलते हैं!

लोभी मोही बन करके पापों में मन ये चलते हैं!

माया का ये जाल, ये सोने का कंकाल,

कैसा ये तमाशा, कारीगरी  बे मिसाल!

मुख्य कव्वाल (चरम/क्लाइमैक्स):

ईमान ही सच्चा धन है रोहि, यही रूह की आबरू ! सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से मैं  करूँ वज़ू!

मैं गिरूँ तो सजदा, उठूँ तो इबादत !

सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से करूँ वज़ू!

कोरस (ज़ोरदार आवाज़ में):

सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से करूँ वज़ू!

मुख्य कव्वाल (ठहरी हुई, शांत आवाज़ में):

तेरे दरश को तरश रहे हम, हमको तेरी जुस्तजू!

कोरस (गूंजती हुई आवाज़ में):

(हमको तेरी जुस्तजू!)

मुख्य कव्वाल (धीरे-धीरे मद्धम होते हुए):

मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!

हे मेरे प्रभू हे मेरे प्रभू ! बता दे कहाँ है तू!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें