तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू
तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू
ये देखा ज़माना, मतलब से आना
हर गम खुद ही सहूँ!
मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू
तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू।
पहला अन्तरा
तीरथ बहुत कर लिए, मूरत में तुझको ढूँढा , उम्र बीतती चली गयी, तन भी हो चला बूढ़ा।
फिर भी ना तेरा पता मिला
अब मन के भीतर ही...
अब मन के भीतर ही, ज्योत जलाऊंगा
देखुँगा तेरा बजूह !...
मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू।
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ये देखा ज़माना, मतलब से आना
इसको भुला दूँगा
तेरे लिए प्रभु...
मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू
मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू।
दूसरा अन्तरा
प्रवृत्तियों के वेग निरन्तर सबकी रूह को छलते हैं।
लोभी मोही बन करके पापों में मन ये चलते हैं।
ईमान ही सच्चा धन है रोहि यही जिन्दगी का बजूह !
सजदा करूँ मजदा करूँ अश्कों से करूँ बजू !
तेरे दरश को तरह रहे हम, हमको तेरी जुस्तजू!
मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू।
मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू।
गीत को हिमाचली व राजस्थानी शैली में मिक्स लोक धुन में
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