रविवार, 9 अगस्त 2026

गीत

यहाँ इसी भाव और लय पर आधारित, गंभीर ज्ञान और भक्ति से परिपूर्ण तीन अंतराओं वाला संशोधित भजन प्रस्तुत है:


​(मुखड़ा)
​घनश्याम मुरली वाले, हम हैं तेरे हवाले
अरदास तुझ से करते, तू ही हमें संभाले
तू ही हमें संभाले,
तेरे भजनों को गाएंगे, सजदे में सर झुकाएंगे।

​(अंतरा 1)
​माया का यह प्रपंच, जग झूठी शान दिखाता है
जो दिखता है चोले में, मन में नहीं वो पाता है
यह झूठा जगत मुसाफिरखाना, हर शख्स यहाँ धोखा खाता है
किसने यहाँ पर क्या है पाया, खाली हाथ सब जाता है
ज्ञान की ज्योति को हम जलाएंगे, अज्ञान का तम मिटाएंगे
तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर  झुकाएंगे।

​(अंतरा 2)
​सुख और दुःख की इन लहरों में, मन क्यों घबराता है पगले।
जो आया है वो जाएगा, चलते रहे सदा काफिले।
कर्मों की इस पावन शाला में, हर जीव है अपनी उलझन  में
तू धीरज धर, विश्वास बढ़ा, प्रभु नाम का सिमरन कर ले मन में 
कर्म की डोरी थाम के हम तो, भवसागर तर जाएंगे
तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर  झुकाएंगे।
​(अंतरा 3)

​घट-घट वासी वो अंतर्यामी, हर कोने में वो रहता है।
बिन पग के वो सब जग चलता, बिन कानन सब कुछ सुनता है।
जो शरणागत हो जाता है, उसके सारे कष्ट वो हरता है
अब भेद मिटा द्वैत भाव का, उस मोहन से चित्त को जोड़ ले
प्रेम की धारा में बह कर हम, प्रभु चरणन में मिल जाएंगे
तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर को झुकाएंगे।

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यहाँ इसी भाव और लय पर आधारित, गंभीर ज्ञान और भक्ति से परिपूर्ण तीन अंतराओं वाला संशोधित भजन प्रस्तुत है:
​(मुखड़ा)
​घनश्याम मुरली वाले, हम हैं तेरे हवाले
अरदास तुझ से करते, तू ही हमें संभाले
तू ही हमें संभाले,
तेरे भजनों को  गाएंगे, सजदे में सर  झुकाएंगे।

​(अंतरा 1)
​माया का यह प्रपंच सारा, जग झूठी शान दिखाता है
जो दिखता है चोले में अपने, मन में नहीं वो पाता है
यह झूठा जगत मुसाफिरखाना, हर शख्स यहाँ धोखा खाता है
किसने यहाँ पर क्या है पाया, खाली हाथ सब को जाना है
ज्ञान की ज्योति को हम जलाएंगे, अज्ञान का तम मिटाएंगे
तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर  झुकाएंगे।

​(अंतरा 2)
​सुख और दुःख की इन लहरों में, मन क्यों घबराता है पगले
जो आया है वो जाएगा, यह नियम अटल चलते हैं काफिले।
कर्मों की इस पावन शाला में, हर जीव है अपनी ही उलझन में
तू धीरज धर, विश्वास बढ़ा, प्रभु नाम का सिमरन कर ले
कर्म की डोरी थाम के हम तो, भवसागर तर जाएंगे
तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर  झुकाएंगे।
​(अंतरा 3)

​घट-घट वासी वो अंतर्यामी, हर कोने में वो रहता है
बिन पग के वो सब जग चलता, बिन कानन सब कुछ सुनता है
जो शरणागत हो जाता है, उसके सारे कष्ट वो हरता है
अब भेद मिटा द्वैत भाव का, उस मोहन से चित्त को जोड़ ले
प्रेम की धारा में बह कर हम, प्रभु चरणन में मिल जाएंगे
तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर  झुकाएंगे।


उद्घोष करे:

यह भक्ति गीत व संगीत यादव योगेश कुमार रोहि के द्वारा प्रस्तुत है ! एक नवीन अन्दाज में - राग बद्ध होकर..


मुखड़ा)

​घनश्याम मुरली वाले, हम हैं तेरे हवाले

अरदास तुझ से करते, तू ही हमें संभाले

तू ही हमें संभाले,

तेरे भजनों को गाएंगे, सजदे में सर झुकाएंगे।

उद्गार हमारे सुन ले ओ भक्तों के रखवाले।


​(अंतरा 1)

तृतीय व पञ्चम स्वर को अनुपात में)


"​माया का यह प्रपंच, जग झूठी शान दिखाता है

जो दिखता है चोले में, मन में नहीं वो पाता है

यह झूठा जगत मुसाफिर खाना,  मतलब का सब नाता है ।

किसने करके  पाया यहाँ, खाली  वो  जाता है।

उम्र से हम गुजर जाएंगे,तब पढाब अनुभव के पाऐंगे।

ज्ञान की ज्योति को हम जलाएंगे, अज्ञान का तम मिटाएंगे

तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर को झुकाएंगे।

​घनश्याम मुरली वाले, हम हैं तेरे हवाले

अरदास तुझ से करते, तू ही हमें संभाले

तू ही हमें संभाले,

तेरे भजनों को गाएंगे, सजदे में सर झुकाएंगे।


​(अंतरा 2)

​सुख और दुःख की लहरों में, मन क्यों घबराता है पगले।

जो आया है वो जाएगा,कितने आये गये  काफिले।

जीवन की प्रयोग शाला में, हर जीव है अपनी उलझन में,

तू धीरज धर, विश्वास बढ़े, प्रभु का सिमरन कर ले मन में ,

कर्म की डोरी थाम के हम तो, भवसागर तर जाएंगे

तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर को झुकाएंगे।

​घनश्याम मुरली वाले, हम हैं तेरे हवाले

अरदास तुझ से करते, तू ही हमें संभाले

तू ही हमें संभाले,

तेरे भजनों को गाएंगे, सजदे में सर झुकाएंगे।


​(अंतरा 3)


​घट-घट वासी वो अंतर्यामी, हर कोने में वो रहता है।

बिन पग के वो सब जग चलता, बिन कानन के बह सुनता है।

जो शरणागत हो जाता है, उसके सारे कष्ट वो हरता है

अब भेद मिटे द्विविधाओं के, उस मोहन से चित्त को जोड़ ले

प्रेम की धारा में बह कर, प्रभु चरणन में मिल जाएंगे

तेरे भजनों को हम गाएंगे, सजदे में सर को झुकाएंगे।

​घनश्याम मुरली वाले, हम हैं तेरे हवाले

अरदास तुझ से करते, तू ही हमें संभाले

तू ही हमें संभाले,

तेरे भजनों को गाएंगे, सजदे में सर झुकाएंगे।


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