मंगलवार, 25 अगस्त 2026

कब्बाली-

कव्वाली: "जीवन की नैया और प्रभु का सहारा"

  • मुख्य गायक (लीड सिंगर): उस्ताद / मुख्य फनकार
  • कोरस (साथी गायक): "वा वाह!..." और हर मुखड़े को दोहराने के लिए।
  • ساز (संगीत): ढोलक, हारमोनियम, और तालियों की गूँज।

1. आहिस्ता-आहिस्ता / आमद (Aamad & Alap)

(संगीत की धीमी और गहरी धुन बजती है। मुख्य गायक दर्द भरे स्वर में अलाप लेता है...)

मुख्य गायक:

नैया पुरानी... भँवर बेहिसाब है !

ऐ जिंदगी, ये कायनाती अजाव हैं। ...

डूबने को है कश्ती, मगर क्या मजाल है...

कोई थामने वाला पतवार परमानुभाव है!

2. महफिल की शुरुआत (Introductory Couplet / Sher)

(हारमोनियम पर तेज सुर और तबले की थाप के साथ)

अन्तरा-(​मुख्य गायक:)

हवाओं का रुख बदल रहा है, पर मेरा यकीन नहीं डगमगाया! 

जुल्म जमाने में  हैं कायनात में जुल्मतों का साया !!

ज़रा गौर फरमाइगा इस शेर पर...

तुफानों की ज़िद है जहाँ आंधियां चलें,

हमारा भी ये फैसला है कि कश्तीयों में  दीपक जले !

​आइए, इस दिल की दास्तां को सुरों में पिरोते हैं!

3. स्थाई (Main Refrain)

(पूरी कव्वाली पार्टी मिलकर ऊंचे स्वर में गाती है, ढोलक की तेज थाप के साथ)

कोरस + मुख्य गायक:

गहरी नदीयाँ ये नाव पुरानी, भँवरों में आरोहि अथाह पानी!

तूफानों का वेग प्रबल है, लहरों की है तेज़ रवानी...

सुन लो इस जीवन की कहानी!

(संगीत का एक छोटा और तेज़ अंतरा — ताली की थाप के साथ)

4. अंतरा 1 (अंधेरा और नादानी)

(गायक थोड़ा संभलकर, दर्द और तड़प के साथ)

मुख्य गायक:

उठ रही काली घटाऐं, तेज चलती ये हवाऐं...

हर तरफ है अब अंधेरा, हम जाएं तो किधर जाएं?

अरे भंवर के बीच में कश्ती है...

खेवटिया है नादानी, और कभी मंजिल नहीं जानी!

(कोरस इसे दोहराता है)

कोरस: गहरी नदीयाँ ये नाव पुरानी...

5. अंतरा 2 (संसार का मायाजाल)

(लय थोड़ी तेज और संवादात्मक होती है — दर्शकों को समझाते हुए)

मुख्य गायक:

ज़रा सोचिए दोस्तों! ये दुनिया क्या है?

संसार की नदिया अजब, इच्छा लहरों का काफ़िला है...

अरे बुलबुलों सी जिंदगी ये, पानी में पानी मिला है!

यहाँ सब छलावा है...

मोह के भँबर लोभ के गोते, मृत्यु पथ की है निशानी!

(पूरी पार्टी जोश के साथ दोहराती है)

कोरस: गहरी नदीयाँ ये नाव पुरानी, भँवरों में ये अथाह पानी...

6. कव्वाली का मुख्य मोड़: रंग / पुकार (The Climax / Tarannum)

(यहाँ संगीत बिल्कुल धीमा हो जाता है, सिर्फ हारमोनियम की हल्की गूँज और फुसफुसाहट जैसा स्वर रहता है)

मुख्य गायक:

थक गए हाथ, टूट गए पतवार... अब जाएं तो कहाँ जाएं?

तभी याद आता है वो बंसीवाला!

ज़रा तड़प के साथ सुनिएगा...

दु:ख सुख यहाँ जीवन के किनारे,

नाव पड़ी मेरी है मझधारे!

भक्ति के लेकर पतवारे,

ये भक्त प्रभु तुझको ही पुकारे...

खबर लेलो वंशी वारे!!

(यहाँ ढोलक की एक जोरदार थाप लगती है और माहौल भक्तिमय हो जाता है)

मुख्य गायक (ऊंचे सुर में):

थक जाएं हम कभी न हारें, सदियों से तेरी बाट निहारें!

खिंजा-फिजा सब आनी-जानी...


7. महा-अंतिम समापन (Grand Finale)

(सभी कलाकार पूरी ताकत और ऊर्जा के साथ मिलकर इस अंतिम पंक्ति को गाते हैं, तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कव्वाली समाप्त होती है)

कोरस + मुख्य गायक (एक स्वर में):

गहरी नदीयाँ ये नाव पुरानी, भँवरों में ये अथाह पानी!

तूफानों का वेग प्रबल है, लहरों की है तेज़ रवानी...

सुन लो इस जीवन की कहानी!!

सुन लो... इस जीवन की... कहानी!!!

(ढोलक की लंबी रोल और अंतिम तीव्र थाप के साथ अंत)


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