होली गीत स्क्रिप्ट
मुखड़ा
होली खेलन आये श्याम, आज व्रज में होली रे रसिया।
राधा संग फाग मचायो, रंग उड़े झोली रे रसिया॥
अन्तरा १
नंदगाँव की गलियों में आज धूम मची है भारी,
श्याम सलोने का रूप देख सुध- भूली गयी सारी।
भर-भर पिचकारी केसर की, सब पर रंग डारें,
गोपिन संग कन्हैया मिलकर गीत उच्चारे ।
नाचे मगन तमाम, आज व्रज में होली रे रसिया॥
अन्तरा २
राधा रानी के महलन में रंग गुलाल उड़ायो,
सांवरे रंग में आज सासारा ब्रज रंग मँगवायो।
चंग ढोल और मंजीरों की गूँजे मधुर फुहार,
फागुन की इस मस्त रुत में झूमे सब संसार।
दसों दिशा अभिराम, आज व्रज में होली रे रसिया॥
अन्तरा ३
छल-कपट सब दूर भगाकर हँस-हँस गले लगें सब,
जात-पात का भेद मिटाकर झूम रहे हैं सब।
'रोहि' कहे प्रभु ब्रज की महिमा तीनों लोक में न्यारी,
चरण कमल पर बलिहारी भक्तों की दुनिया सारी।
पूरण हुए सब काम, आज व्रज में होली रे रसिया॥
ब्रज-फाग लोकगीत (अहीर, गूजर और जाट संस्कृति के नाम सहित)
मुखड़ा
फागुन की आयो रे रुत रंगीली, आई होली त्योहार की।
ब्रज में मची धूम भारी है, बही बयार प्यार की।
अहीर, गूजर और जाट मिले हैं, ले पिचकारी हाथ में।
आज मचेगी ऐसी होली, व्रजवासिन की जमात में॥
अन्तरा १ (अहीरों का उल्लास)
गोकुल की इन गलियन भीतर, ग्वाल-बाल सब धावें रे।
बंशी वाले की टेर सुनके, अहीर उमंग में आवें रे॥
भर-भर झोली गुलाल उड़ावें, गावें गीत मल्हार के।
बछड़े और गईयन के संग में, खेलें रंग बहार के॥
नन्दगाँव की कुंज गलिन में, गूंज उठी है तान रे।
नाच रहे सब ग्वाल मगन हो,यही किशानों की शान रे॥
अन्तरा २ (गूजरों की मस्ती)
दूध-दही के मटके फोड़ें, मची हुड़दंग निराली है।
गूजर आये फागन खेलन, मटकी तेल की काली है॥
ढोल नगाड़े और मंजीरे, जोर-जोर से बाजें रे।
देख छटा ब्रज के छोरो की, देवता भी सरताजें रे॥
हर घर से पकवान बने हैं, आई उमंग जवार की।
सब मिलि झूम रहे मदमाते, महिमा सब कर्तार की ॥
अन्तरा ३ (जाटों का जोश और समापन)
आन-बान औ शान अनोखी, जाट भी जोश दिखाए हैं।
केसर और गुलाल की वर्षा, चौपालों पर छाए हैं॥
वैर-भाव सब भूल के प्यारे, गले मिलें जब आपस में।
ऐसी होली कहीं न देखी, जोश खरोश है नश नश में।
'रोहि कहें यह रंग प्रेम कौ, कभी न फीका होवे रे।
जीवन की खुशीयाँ होली है क्यों गुमान मान में खोवे रे॥
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