जीवन की कश्तियाँ जहाँ, आशाओं का सागर हैं,।
लहरों के उमड़ने के ये फलसफे उजागर हैं।
मंझधार की लहरों से, डरना कहाँ सीखा है,
वो बीच ही में डूब गये रोहि जो चले घबराकर हैं।
जीवन की कश्तियाँ जहाँ, आशाओं का सागर हैं,।
(अंतरा १)
नसीब और ये हालाते, जमाने भर की बाते
मौत, मुसीबत, मुफ़लिसी; निश्चित नहीं रातें।
मायूसी में छिपी छुपी हुईं हैं। मरी हुई जज्बातें।
वक्त को आंके यहीं कहाँ वो दिवाकर है।
उम्र का पैमाना नहीं, तजुर्बों की ये रवानी है,
कोई नादान क्या जाने, क्या ज़िन्दगानी है?
मिट्टी के खिलौनों से, हकीकत तराशकर निकाली, है।
तजुर्बो का जीवन हर धड़कन सबाली है। तजुर्बों के बिना जिन्दगी खाली है।
जीवन के सब पक्ष उजागर है।
जीवन की कश्तियाँ, आशाओं का सागर हैं।
(अंतरा
अनुभवों के उन पलों को, संभलकर जो कहे होंगे।
थपेड़े वक़्त के जिसने, मुस्कुराकर सहे होंगे,
उनके हरे जख्मों पर राहत की दवा कर है
जीवन की कश्तियाँ, आशाओं का सागर हैं।
( सागर हैं।
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