दृश्य - २: पात्रों का क्लोज-अप और भाव
[कैमरा मूवमेंट]
धीमे से ज़ूम इन (Zoom In) होता है नन्द बाबा और माता यशोदा पर।
नन्द बाबा: वे गौर वर्ण के हैं, उनके चेहरे पर एक शांत और तेजवान मुस्कान है। वे अपने मित्र श्री वृषभानु जी के साथ हुई किसी मधुर चर्चा में मग्न प्रतीत होते हैं।
माता यशोदा: आभीक जाति को यश प्रदान करने वाली माँ यशोदा की अंग कान्ति श्यामल वर्ण की है। वे साक्षात वात्सल्य की प्रतिमूर्ति लग रही हैं। उन्होंने इन्द्रधनुष के रंगों के समान सुंदर और सतरंगी वस्त्र धारण किए हैं, जो उनके व्यक्तित्व को और भी दिव्य बनाते हैं।
दृश्य - ३: बाल-कृष्ण की नटखट लीला
[मध्य दृश्य]
नन्द और यशोदा के ठीक बीच में चार वर्ष के कन्हैया बैठे हैं।
कन्हैया कभी अपनी मैया यशोदा के सतरंगी आंचल को खींचते हैं, तो कभी बाबा नन्द की दाढ़ी से खेलने लगते हैं।
यशोदा जी उन्हें स्नेह से अपने पास खींचती हैं और उनके माथे पर प्यार से हाथ फेरती हैं।
दृश्य - ४: संवाद एवं समापन
(प्रांगण में पक्षियों की चहचहाहट और पृष्ठभूमि में मंद बाँसुरी की धुन बजती है)
माता यशोदा: (बाल-कृष्ण को लाड़ करते हुए, प्रेम भरे स्वर में) "ऐ कान्हा! चुपचाप बैठ जा मेरे लाल, वरना अभी तेरी मैया तुझसे रूठ जाएगी।"
नन्द बाबा: (ठहाका लगाकर हंसते हुए, गर्वित नेत्रों से कान्हा को देखकर) "अरे यशोदा, इसे मत डाँट! ये तो पूरे गोकुल की आँख का तारा है। भला आज तक कोई इसे रोक पाया है?"
[कैमरा एक्शन]
बाल-कृष्ण दोनों की ओर देखते हैं और अपनी किलकारियों के साथ खिलखिलाकर हँसते हैं। उनके मुख की मधुर मुस्कान से पूरा प्रांगण आलोकित हो उठता है।
[दृश्य समाप्त]
कैमरा धीरे-धीरे वाइड शॉट की ओर वापस जाता है और स्क्रीन धीरे से ब्लैक आउट (Fade to Black) हो जाती है।
गुरुवार, 23 जुलाई 2026
नन्द परिवार की अन्तिम पटकथा -
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