अवश्य - इस मेरे द्वारा लिखित गीत को संगीतबद्ध करके प्रस्तुत करो
जिन्दगी है-- सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाव-- यहांँ अभी हैं कई
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाव-- यहांँ अभी हैं कई हैं
___________
रास्ते मिट गये कहीं अपने सभी ।
मंजिलो से बडी ये दूरी है ।
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ....
_________________________
पास एहशास, तजुरुबों-- की सदा
होके रहता है जो किस्मत में बदा--

पास एहशास, तजुरुबों ---की सदा ।
होके रहता है जो किस्मत में बदा
।।
किस्मतें भी बनी कर्मों से तेरे ।
जिन्दगी पे भार जन्मों से लदा ।।
जिन्दगी पे भार जन्मों से लदा ।।
__________________________
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाव यहांँ अभी हैं कई ।
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
_________________________
कहीं संचित कहीं प्रारब्ध-- है ये ।
कर्म क्रियमाण के दो शब्द हैं ये।।
______
कहीं संचित कहीं प्रारब्ध है ये ।
कर्म क्रियमाण के दो शब्द हैं ये।।
श्वाँस धड़कन से यो मिलके के चले ...
अक्श परछाँइयों सा उपलब्ध है ये
अक्श परछाँइयों सा उपलब्ध है ये
________________________
जिन्दगी है ---सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाव यहांँ अभी हैं कई
___________
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
_________________
मेरे चहरे पे जो मुस्कराहट है ।
ये न समझो सुखों की आहट है ।
मेरे चहरे पे जो मुस्कराहट है ।
ये न समझो सुखों की आहट है ।
हम ग़मों को दबा के तौर पिऐं
अन्यथा द़िल में छटपटाहट है ।
अन्यथा द़िल में छटपटाहट है ।
जिन्दगी है- सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाब यहांँ अभी हैं कई ।
जिन्दगी है- सफर ---तन्हाई का ,
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
गीतका शीर्षक जो कर्म किए हैं तूने
"जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा
दुख-सुख की लहरों में, तुझको डूब जाना पड़ेगा
जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा।
दु:ख-सुख की लहरों में, तुझे डूब जाना पड़ेगा
जो कर्म किए हैं तूने
फल पाना पड़ेगा ।
दुनिया में कहीं ग़मी है, गफलत में आदमी है।
बड़ावों को ही मंजिल समझे, उसकी यह वहमी है।
खुद खो गया जो आखिर, उसकी रज़ा है क्या फिर ।
कुछ पल के हैं ये मेले, सूनी-सूनी ये जमीं है।।
तन्हाइयों के पथ पर, तुझे चलते जाना पड़ेगा
कोई साथ नहीं है तेरे, ये ग़म छुपाना पड़ेगा
जो कर्म किए हैं तूने।
फल पाना पड़ेगा ।
कुछ पल के हैं ये मेले, हर पल के हैं झमेले।
जो साथ-साथ खेले, वो भी रह गए अकेले।
कुछ पल के हैं ये मेले, हर पल के हैं झमेले
अपने गमों को इंसान, खुद आप-आप झेले।
तुझे अपने मन को आखिर, समझाना पड़ेगा।
जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा
जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा ।
सुनसान तेरी राहें, साथी हैं तेरी आहें,
धुआं-धुआं ये जीवन, फिर क्या खोजती निगाहें।
साँसों की लय में ढाले, ले धड़कनों की तालें
आहों के आलापों में, तू गम-ए-जिंदगी गाले ।
लम्बे सफर में तुझको, रोहि गीत गाना पड़ेगा
जो कर्म किए हैं तूने, उसका फल पाना पड़ेगा
दु:ख-सुख की लहरों में, तुझको डूब जाना पड़ेगा।
जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा
जो कर्म किए हैं तूने फल पाना पड़ेगा ।...
यादव योगेश कुमार रोहि की प्रस्तुति-
नाम से
कहकर गीत का इण्ट्रो म्यूज़िक बनाकर फिर गीत को सूफी कब्बाली उत्तर भारतीय लोक धुन में गाकर प्रस्तुत करें जिसमें तेज ढोलक की थापों, और हारमोनियम के रिदम के या साथ हो -
अवश्य - इस मेरे द्वारा लिखित गीत को संगीतबद्ध करके प्रस्तुत करो
जिन्दगी है-- सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाव-- यहांँ अभी हैं कई
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाव-- यहांँ अभी हैं कई हैं
___________
रास्ते मिट गये कहीं अपने सभी ।
मंजिलो से बडी ये दूरी है ।
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ....
_________________________
पास एहशास, तजुरुबों-- की सदा
होके रहता है जो किस्मत में बदा--

पास एहशास, तजुरुबों ---की सदा ।
होके रहता है जो किस्मत में बदा
।।
किस्मतें भी बनी कर्मों से तेरे ।
जिन्दगी पे भार जन्मों से लदा ।।
जिन्दगी पे भार जन्मों से लदा ।।
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जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाव यहांँ अभी हैं कई ।
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
_________________________
कहीं संचित कहीं प्रारब्ध-- है ये ।
कर्म क्रियमाण के दो शब्द हैं ये।।
______
कहीं संचित कहीं प्रारब्ध है ये ।
कर्म क्रियमाण के दो शब्द हैं ये।।
श्वाँस धड़कन से यो मिलके के चले ...
अक्श परछाँइयों सा उपलब्ध है ये
अक्श परछाँइयों सा उपलब्ध है ये
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जिन्दगी है ---सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाव यहांँ अभी हैं कई
___________
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
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मेरे चहरे पे जो मुस्कराहट है ।
ये न समझो सुखों की आहट है ।
मेरे चहरे पे जो मुस्कराहट है ।
ये न समझो सुखों की आहट है ।
हम ग़मों को दबा के तौर पिऐं
अन्यथा द़िल में छटपटाहट है ।
अन्यथा द़िल में छटपटाहट है ।
जिन्दगी है- सफर ---तन्हाई का ,
आश के पढ़ाब यहांँ अभी हैं कई ।
जिन्दगी है- सफर ---तन्हाई का ,
जिन्दगी है सफर ---तन्हाई का ,
यादव योगेश कुमार रोहि की प्रस्तुति-
सभी दूध के धुले भी कहाँ निर्विवाद होते हैं ।
नियमों में भी रोहि अक्सर अपवाद होते हैं ।।
कार्य कारण की बन्दिशें , उसके भी निश्चित दायरे।
नियम भी सिद्धान्तों का तभी,अनुवाद होते हैं ।।
महानताऐं घूमती हैं "रोहि" गुमनाम अँधेरों में
चमत्कारी तो लोग प्रसिद्धियों के बाद ही होते हैं ।।
उपर्युक्त महावाक्यों को उपदेशात्मक प्रेरणात्मक ऑडियो में बदलें
भव सागर है, कठिन डगर है ।
हम कर बैठे, खुद से समझौते !
डूब न जाए जीवन की किश्ती ।
यहाँ मोह के भंवर लोभ के गोते।
मन का पतवार बीच की धार।
रोही उम्र बीत गई रोते-रोते।
प्रवृत्तियों के वेग प्रबल हैं।
लहरों के भी कितने छल हैं।
बस बच गए हैं हम खोते खोते।
सद्बुद्धि केवटिया बन जा ।
इन लहरों पर सीधा तंजा ।
प्रायश्चित के फेनिल से चमकेगा।
रोही अन्तर घट ये धोते-धोते।।
मधुर संगीत में उपर्युक्त काव्यात्मक पक्तियों का संगीत में म्यूज़िक ट्रेक तैयार करो -
जीवन ये बीते पल-पल,
भक्ति की राह में,
प्रभु का ही अक्स छाए,
तेरी निगाह में,
प्रभु को आ में समाए रखना,
रटना हरे कृष्णा,
रटना हरे कृष्णा।
मन को निर्मल कर,
प्रभु के तू भजन से,
प्रभु मिल पाते हैं,
केवल तप और मनन से,
तप और मनन से ही मन का संयम करो,
पापों को मन से ही अब तुम तो कम करो,
प्रभु को बसा लो अपने दिल की बारगाह में,
उसके ही सपने देखो मन के प्रवाह में,
नजरों से ओझल उसे मत रखना,
रटना हरे कृष्णा,
रटना हरे कृष्णा।
भक्ति की राहों पर जीवन का सफर हो,
रुकना वहाँ पर जहाँ भक्तों का घर हो,
इसके सिवा दूजा कोई पड़ाव नहीं,
मंजिल से पहले आगे कोई ठहराव नहीं,
चलते रहना है तुझको पड़े छाले पांव में,
बहती दरिया को देखो, देखो हवाओं में,
दर्द में तुमको और नहीं भटकना,
रटना हरे कृष्णा,
रटना हरे कृष्णा।
जीवन ये बीते पल-पल,
भक्ति की राह में,
प्रभु का ही अक्स छाए,
तेरी निगाह में,
प्रभु को आ में समाए रखना,
रटना हरे कृष्णा,
रटना हरे कृष्णा।
मन को निर्मल कर,
प्रभु के तू भजन से,
प्रभु मिल पाते हैं,
केवल तप और मनन से,
तप और मनन से ही मन का संयम करो,
पापों को मन से ही अब तुम तो कम करो,
प्रभु को बसा लो अपने दिल की बारगाह में,
उसके ही सपने देखो मन के प्रवाह में,
नजरों से ओझल उसे मत रखना,
रटना हरे कृष्णा,
रटना हरे कृष्णा।
यह गीत हमारे द्वारा लोकल डिवाइस पर गाया गया है ये गीत लिखा भी हमने है ।
परन्तु तर्ज फिल्म की है। अखियों के झरोखे से ..
हम चाहते हैं कि आप गीत टेक और अन्तरा को स्वर का ध्यान रखते हुए गाकर बनाऐ संगीत बद्ध करके
सिनैमाटिक आबाज में कहें -
यादव योगेश कुमार रोहि के भक्ति भावों कि अनुभूति जन्य अभिव्यंजना है।
[मुखड़ा]
आलाप !!- ओ३म् हरि बोल...
ओ३म् हरि बोल, ओ३म् हरि बोल, हरि बोल !!!
मेरे कान्हा, तेरी महिमा, अपरम्पार है! तू मेरा सरकार है, तू मेरा सरकार है तू मेरा सरकार है, तू मेरा सरकार है।
[अंतरा 1]
तेरी बातें, हैं सौगातें, जीवन का ही सार है तू मेरा सरकार है, तू मेरा सरकार है तू मेरा सरकार है, तू मेरा सरकार है !
हरी बोल!
[अंतरा 2]
मेरे प्रभु, तेरा वजूद, मन में जो भी संजोता ! मेरे प्रभु, तेरा वजूद, मन में जो भी संजोता !
मोह ना कल, जीवन सफल, मायूस कभी नहीं होता।
तेरा स़मा, कभी ना थमा, रौनक भी बेशुमार है। तू मेरा सरकार है, तू मेरा सरकार है
तू मेरा सरकार है, तू मेरा सरकार है।
[अंतरा 3]
ज्ञानामृत का लेकर जल, मन का दर्पण धोले! ज्ञानामृत का लेकर जल, मन का दर्पण धोले!
ज़हालत है, ये बुरी लत है, मत गर्दिश में डोले
ये बीते पल, मन तू संभल, कान्हा से ही पुकार है। वो मेरा सरकार है, वो मेरा सरकार है।
वो मेरा सरकार है, वो मेरा सरकार है।
आलाप.... ट्यून ..
[अंतरा 4]
कर के जतन,जीत के मन, ज्ञान के पट तो खोलो !
कर के जतन,जीत के मन, ज्ञान के पट तो खोलो !
मंदिर मस्जिद, नहि तीरथ, प्रभु को दिल में टटोलो!
मालुम नहीं, वो गुम कहीं, थक जाना, ना ही हार है।
वो मेरा सरकार है, वो मेरा सरकार है वो मेरा सरकार है,वो मेरा सरकार है
[आउट्रो]
वो मेरा सरकार है, वो मेरा सरकार है
तेरी बातें, हैं सौगातें, जीवन का ही सार है
तू मेरा सरकार है, तू मेरा सरकार है...
(तू मेरा सरकार है...)
आलाप ट्यून ..... के साथ गीत की समाप्ति.
मुखड़ा और अन्तरा के स्वर में तारतम्य बनते हुए
डीजे फोक्स के साथ नये संस्करण में ऑडियो ट्रैक जनरेट करें
यह गीत यादव योगेश कुमार रोहि की प्रस्तुति -
धड़कनों की ताल पर ,
श्वाँसों की लय में ढ़ाल कर ।
स्वर बनाकर प्रीत को तब गाओ जीवन गीत को।।
साज़ लेकर संवेदनाओं का ।
दु:ख सुख की ये सरग़में ।
आहों के आलाप में ।
कुछ सुनाती हैं हम्हें ।।
सुने पथ के ओ पथिक !
तुम सीखो जीवन रीत को ।।
स्वर बनाकर प्रीत को
तब गाओ जीवन गीत को ।।
सिसकियों की तान जिसमें
एक राग है अरमान का ।।
प्राणों के झँकृत तार पर ।
चिर- निनादित गान का ।।
विस्मृत मत कर देना तुम ,
इस दायित पुनीत को ।।
स्वर बनाकर प्रीत को तब गाओ जीवन गीत को।।
ताप न तड़पन रहेगी।
जब श्वाँस से धड़कन कहेगी ।।
हो जोश में तनकर खड़ा।
विद्युत - प्रवाह सी प्रेरणा ।
बनती हैं सम्बल बड़ा ।।
किसी से प्रेम या उससे घृणा।
तुम्हेें जीना है अपने ही बल पर ।
तुम लक्ष्य बनाओं जीत को ।।
स्वर बनाकर प्रीत को तब गाओ जीवन गीत को।।
- खो गये कहीं बेख़ुदी में ।
हम ख़ुद को ही तलाशते ।।
लापता हैं मञ्जिलें अब ।
मिट गये सब रास्ते ।।
न तो होश है न ही जोश है ।।
ये जिन्द़गी बड़ी खामोश है ।।
बिखर गये हैं अरमान मेरे सब बदनशीं के वास्ते।।
ये दूरियाँ ये फासिले , बेतावीयों के सिलसिले !!
एक साद़गी की तलाश में ,
हम परछाँयियों से आमिले ।।
दूर से भी काँच हमको।
मणियों जैसे भासते ।।
सज़दा किया मज्दा किया ।।
कुर्बान जिसके वास्ते।।
हम मानते उनको ख़ुदा ।।
जो कभी न हमारे ख़ास थे ।।
किश्ती किनारा पाएगी, कहाँ मिल पाया ना ख़ुदा।।
वो खुद होकर हमसे ज़ुदा ।
ओझल हो गया फिर आस्ते ।।
खो गये कहीं बेख़ुदी में ।
हम ख़ुद को ही तलाशते ।।
- जिन्द़गी की किश्ती ! आशाओं के सागर ।।
बीच में ही डूब गये ; कुछ लोग तो घबराकर ।।
किसी आश़िक को पूछ लो ।
अरे तुम द़िल का हाल जाकर ।।
दुपहरी सा जल रहा है ; बैचारा तमतमाकर ।।
किसी कँवारी से मत पूछना
सहानुभूति थोड़ी भी दिखाकर ।।
तड़फड़ाती फिरती है '
वह जैसे खोई प्यासी लहर ।।
असीमित आशाओं के डोर में ।
बँधी पतंग है जिन्द़गी कोई ।।
मञ्जिलों से पहले ही यहाँं ,
भटक जातों हैं अक्सर बटोही
क्यों कि ! बख़्त की राहों पर !
जिन्द़गी वो मुसाफिर है ।।
जिसकी मञ्जिल नहीं "रोहि" ।
और न कोई सफ़र ही आखिर है ।।
आशाओं के कुछ पढ़ाब जरूर हैं ।
'वह भी हमसे बहुत दूर हैं ।।
बस ! चलते रहो चलते रहो " चरैवेति चरैवेति !
___________
- अपनों ने कहा पागल हमको ।
ग़ैरों ने कहा आवारा है ।
जिसने भी देखा पास हम्हें ।
उसने ही फटकारा है ।।
सुन्दर गढ़वाली संगीत शैली में ओडियो पूर्ण सॉंग बनाऐं
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