भाग 3: नैतिकता का संकट - अवतार या प्रतिशोधी?
नैरेटर: अवतार की परिभाषा है—'धर्म की स्थापना' । लेकिन महाभारत के शांतिपर्व के अध्याय -अड़तालीस के श्लोक बासठ- त्रेसठ में परशुराम के कृत्यों का वर्णन विचलित करने वाला है। निर्दोष गर्भस्थ शिशुओं और स्त्रियों की निर्मम हत्या क्या किसी दैवीय अवतार के लक्षण हो सकते हैं ? कदापि नहीं
विश्लेषण: यदि अवतार का उद्देश्य धर्म की रक्षा है, तो यह 'अधर्म' की श्रेणी में आने वाले कृत्य क्यों किए गए ? यहाँ परशुराम एक 'धर्म-संस्थापक' के बजाय एक 'अत्यधिक क्रोधी और प्रतिशोधी' के रूप में उभरते हैं। क्या हम परशुराम को एक अवतार के रूप में पूजते हैं, या हमने उनके आक्रोश को ही धर्म का नाम दे दिया है?
भाग 4: मातृहंता का कलंक और वर्णाश्रम की विसंगति
नैरेटर: कालिका पुराण और महाभारत का वनपर्व अध्याय एक सौ सत्रह- एक ऐसे कृत्य को सामने लाता है जिसे समाज कभी स्वीकार नहीं कर पाया—मातृ-वध। पिता की आज्ञा का पालन करना क्या इतना बड़ा हो सकता है कि वह मानवता और मातृत्व की हत्या को उचित ठहरा सके ?
परशुराम से श्रेष्ठ तो यदु का चरित्र है जो अपने पिता के कहने पर भी माताओं का वध नहीं करते हैं ।
नैरेटर: इसके अतिरिक्त 'वर्णसंकर' की स्थिति देखिए। अनुशासनात्मक ग्रंथों और मनुस्मृति के नियमों का पालन करें, तो ब्राह्मण-क्षत्रिय संयोग से उत्पन्न संतान की जाति पर भारी विसंगति उत्पन्न होती है। यदि विधवा क्षत्राणीयाँ परशुराम द्वारा क्षत्रियों का वध करने पर ब्राह्मणों के पास ऋतुदान के लिए आयीं तो उनसे उत्पन्न संतान ब्राह्मण ही मानी जाएगी- क्योंकि ब्राह्मणी और क्षत्राणी ब्राह्मण कि मान्य पत्नियों में से हैं जिनकी सन्तान पिता के वर्ण व जाति की होती है।
वर्ण व्यवस्था के नियम इतने कठोर थे, तो परशुराम की कथा में यह 'घालमेल' क्यों ब्राह्मणों से क्षत्रिय उत्पन्न कैसे हुए ? क्या यह तार्किक विफलता यह नहीं दर्शाती कि यह कथा किसी विशेष सामाजिक एजेंडे के तहत गढ़ी गई थी ?
निष्कर्ष
नैरेटर: परशुराम के चरित्र पर उठने वाले ये प्रश्न हमें सोचने पर मजबूर करते हैं। क्या यह केवल एक पौराणिक कथा है ? या यह प्राचीन काल के उन सामाजिक-सांस्कृतिक संघर्षों का एक दस्तावेज है, जिसे 'अवतारवाद' का आवरण ओढ़ा दिया गया ?
नैरेटर: निष्कर्ष यह नहीं कि परशुराम को नकारा जाए, बल्कि यह कि उनके चरित्र का पुनर्पाठ (Re-reading) किया जाए। उन्हें 'देवता' के सांचे से बाहर निकालकर एक 'ऐतिहासिक योद्धा' के रूप में देखना, शायद सत्य के अधिक निकट होगा।
(संगीत तीव्र होता है और धीरे-धीरे शांत हो जाता है)
सिंथ व ट्रम्पेट वाद्य के स्वर के साथ स्पीचशैली में मध्य वाचन लय में बिना ताल मृदंग के ऑडियो जनरेट करें
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