- १-श्रीकृष्ण-साराङ्गिणी: मुख्य स्थान पर रखी एक अलंकृत प्रति।
- २-श्रीकृष्णेतिहासम् (६ खण्ड): छह भारी जिल्दों की एक श्रृंखला, जो प्राचीन इतिहास को संजोए हुए है।
- ३-यदुवंश परिशिष्ट कथाकोश (५ खण्ड): यदुवंश की गाथाओं का पाँच भागों में विस्तृत संग्रह।
- ४-श्रीकृष्णस्य वार्ताणि: भगवान कृष्ण के संवादों और वार्तालापों का संकलन जो आध्यात्मिक महत्व का है।।
- ५-गोपेश्वरश्रीकृष्णस्य- पञ्चंवर्णम्( ३ खण्डों में) यह चतुर्थ वर्णों के अतिरिक्त पाँचवे वर्ण की विद्यमानता को प्रमाणित करती है तथा यह भक्ति और स्तुति से ओत-प्रोत ग्रन्थ है।
- ६-व्रज-वंश-प्रकाशिका - यह नन्द और वृषभानु के वंश को प्रकाशित करती है।
- ७-व्रज-रज-भ्राजिका: ब्रज की महिमा और व्रज के अहीरों के इतिहास को दर्शाती पुस्तक है।
- ८-जात्याभीरम्महावीरम्: अहीर/आभीर जाति की उत्पत्ति व उसके शौर्य को समर्पित एक विशेष ग्रंथ।
- ९-भाषा की उत्पत्ति और विस्तार (५ खण्ड): भाषा विज्ञान पर आधारित पाँच खंडों का एक गंभीर शोध कार्य है।
- १०- आभीरजाति शास्त्रम् - अहीर जाति की वैश्विक उत्पत्ति तथा उसकी प्राचीनतम उपस्थिति को दर्शाता है।
१-श्रीकृष्ण-साराङ्गिणी:
२-श्रीकृष्णेतिहासम् (६ खण्ड):
३-यदुवंश परिशिष्ट कथाकोश (५ खण्ड में):
४-श्रीकृष्णस्य वार्ताणि
५-गोपेश्वरश्रीकृष्णस्य पञ्चंवर्णम् (३ खण्डों में)
६-व्रज-वंश-प्रकाशिका
७-व्रज-रज-भ्राजिका
८-जात्याभीरम्महावीरम्
९-भाषा की उत्पत्ति और विस्तार (५ खण्ड में)
१०- आभीरजाति शास्त्रम् -
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