सोमवार, 23 मार्च 2026

जो कर्म किए हैं तूने -

जो कर्म किए हैं तूने (गीत)

​(मुखड़ा)

जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा

दुख-सुख की लहरों में, डूब जाना पड़ेगा

जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा

​(अंतरा 1)

खुशियाँ कहीं गमी है, गफलत में आदमी है

पड़ावों को मंजिल समझे, उसकी यही बहमी है

खुद खो गया जो आखिर, उसकी रजा है क्या फिर

कुछ पल के हैं ये मेले, सूनी-सूनी जमी है

तन्हाइयों के पथ पर, चलते जाना पड़ेगा

कोई साथ नहीं है तेरे, गम छुपाना पड़ेगा

जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा

​(अंतरा 2)

कुछ पल के हैं ये मेले, हर पल के हैं झमेले

जो भी साथ-साथ खेले, वो भी रह गए अकेले

कुछ पल के हैं ये मेले, हर पल के हैं झमेले

अपने गमों को इंसान, खुद आप-आप झेले

तुझे अपने मन को आखिर, समझाना पड़ेगा

जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा

​(अंतरा 3)

सुनसान तेरी राहें, साथी है तेरी आहें

धुआं-धुआं है जीवन, क्या खोजती निगाहें

सांसों की लय में ढाले, ले धड़कनों की तालें

आहों के आलापों में, गमे जिंदगी तू गा ले

लंबे सफर में तुझको, गीत गाना पड़ेगा

जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा

दुख-सुख की लहरों में तुझको, डूब जाना पड़ेगा

जो कर्म किए हैं तूने, फल पाना पड़ेगा

​क्या आप इस गीत के गहरे अर्थ या इसके पीछे के संदेश के बारे में और जानना चाहेंगे?

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