आत्मानन्द जी:
अध्याय(9)
प्रान्तिय या स्थानीय स्तर पर यादवों के प्रमुख सरनेम।
इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य यादवों के सरनेम को बताना है कि अलग-अलग प्रान्तों में यादवों के सरनेम क्या हैं। किन्तु ये सब जानने से पहले यह जान लेना अति आवश्यक है कि आजकल बिना अहीर और गोप बने ही एका एक (Direct)) यादव बनने की होड़ मची हुई है। ऐसे में यादव समाज को बहुत ही सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि आजकल ऐसे लोग यादव बनने का भरसक प्रयास कर रहे हैं जिनको अपनी मूल जाती और अपनी मूल उत्पत्ति के बारे में कुछ अता पता नहीं है।
आजकल ऐसे ही लोग यादवों की मूल जाती अहीर को दरकिनार करके अकेले ही यादव बनने की कोशिश कर रहें हैं। जबकि उन्हें पता होना चाहिए कि "यादव बनने से पहले अहीर होना अनिवार्य होता है। क्योंकि अहीर जाती में बहुत समयं बाद यादव वंश की उत्पत्ति हुई है। इसलिए बिना अहीर हुए कोई भी यादव नहीं हो सकता। इस बात को हम पहले ही अध्याय(1) के भाग (क/2)- में बता चुका हूँ।
फिर भी यहाँ पर कुछ बताना चाहूँगा कि- भगवान श्रीकृष्ण भी पहले गोप यानी अहीर ही हैं उसके बाद यादव हैं, और जब भी वे गोलोक से भू-लोक पर आते हैं तो वे अपनी ही जाती के अहीर (गोपों) में ही आते हैं अन्य किसी दूसरी जाती में नहीं। इस बात की पुष्टि- ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्मखण्ड के अध्याय (दो) के श्लोक २१ से होती है जिसमें बताया गया है कि -
स्वेच्छामयं सर्वबीजं सर्वाधारं परात्परम्।
किशोरवयसं शश्वद्गोपवेषविधायकम् ।२१।
अनुवाद - वे ही प्रभु (श्रीकृष्ण) स्वेच्छामयी सभी के मूल- (आदि-कारण) सर्वाधार तथा परात्पर- परमात्मा हैं। उनकी नित्य किशोरावस्था रहती है और वे प्रभु गायों के उस लोक (गोलोक) में सदा गोप (अहीर)- वेष में रहते हैं।२१।
कुछ इसी तरह की बात ब्रह्मवैवर्तपुराण के ब्रह्मखण्ड के अध्याय- (२८) के श्लोक- ६५ में लिखी गई है कि -
गोपवेषश्च गोपालैः पार्षदैः परिवेष्टितः।।
परिपूर्णतमः श्रीमान् श्रीकृष्णो राधिकेश्वरः।६५।
अनुवाद - उनकी (श्रीकृष्ण) वेशभूषा भी ग्वालों (अहीरों) के समान होती है और वे अपने पार्षद गोपालों (गोपों) से घिरे रहते हैं। उन परिपूर्णतम भगवान को श्रीकृष्ण कहते हैं। वे सदा श्रीजी (श्रीराधा) के साथ रहने वाले और श्रीराधिका के प्राणेश्वर हैं।६५।
और इस सम्बन्ध सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गोपेश्वर श्रीकृष्ण जब भी भू-तल पर अवतरित होते हैं तो वे गोपजाति में ही अवतरित होते हैं। इस बात की पुष्टि-हरिवंश पुराण के विष्णु पर्व के ग्यारहवें अध्याय के श्लोक संख्या -५८ से होती है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहे हैं कि-
एतदर्थं च वासोऽयंव्रजेऽस्मिन् गोपजन्म च।
अमीषामुत्पथस्थानां निग्रहार्थं दुरात्मनाम्।।५८।
अनुवाद - इसीलिए ब्रज में मेरा यह निवास हुआ है ; और इसीलिए मैंने गोपों में अवतार ग्रहण किया है।
ज्ञात हो की भगवान श्रीकृष्ण के बारे में जिस तरह से बताया गया है कि वे अहीर जाती में अवतरित होते हैं उसी तरह से उनके बारे में यह भी बताया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण अहीर जाती के यादव वंश में ही अवतरित होते हैं। इस बात की पुष्टि- श्रीमद्भागवत पुराण के ग्यारहवें स्कन्ध के अध्याय -४ के श्लोक संख्या- २२ से होती है जिसमें लिखा गया है कि-
भूमेर्भरावतरणाय यदुष्वजन्मा जातः करिष्यति सुरैरपि दुष्कराणि।
वादैर्विमोहयति यज्ञकृतोऽतदर्हान् शूद्रान कलौ क्षितिभुजो न्यहनिष्यदन्ते।।२२।
अनुवाद - अजन्मा होने पर भी पृथ्वी का भार उतारने के लिए वे ही भगवान यदुवंश में जन्म लेंगे और ऐसे-ऐसे कर्म करेंगे, जिन्हें बड़े-बड़े देवता भी नहीं कर सकते।
अतः उपर्युक्त सभी सन्दर्भों से सिद्ध होता है कि जिस तरह से भगवान श्रीकृष्ण सबसे पहले अहीर (गोप) हैं उसके बाद यादव हैं। उसी तरह से आज भी समस्त यादव सबसे पहले अहीर हैं उसके बाद यादव हैं। अतः यह ध्रुव सत्य है कि बिना अहीर हुए कोई यादव नहीं हो सकता।
अब हमलोग जानेंगे कि भारत के अलग-अलग प्रान्तों में यादवों के सरनेम क्या हैं। किन्तु इस बात का ध्यान रहे कि मेरे द्वारा दी गई जानकारी अभी सम्पूर्ण नहीं है क्योंकि अहीर जाती एक विशाल समुद्र के समान है। उस समुद्र में से कुछ ही जानकारी दे पाया हूँ। अभी बहुत से यादवों के उपनामों को खोजने का सतत प्रयास जारी हैं। फिर भी अबतक जो मेरे संज्ञान में है उसका वर्णन निम्नलिखित है-
1- उत्तर प्रदेश-
उत्तर प्रदेश के यादवों को प्रमुख रूप से- यादव, अहीर, राय, चौधरी, गोप, ग्वाला, महतो, मण्डल, ढढोर, डाबल, नाहर, घोषी, कमरिया, इत्यादि उपनामों से जाना जाता है।
2- बिहार-
बिहार के यादवों को प्रमुख रूप से- यादव, अहीर, राय, रंजन, चौधरी, गोप, ग्वाला, महतो, मण्डल, कृष्णौत, मझरौट, ठाकुर, गोल्ला, लक्ष्मी नारायण इत्यादि उपनामों से जाना जाता है।
2- हरियाणा
हरियाणा क्षेत्र के यादवों को प्रमुख रूप से- राव, राय, कृष्णौत, मझरौट, यादव, अहीर, अहीरवाल। इत्यादि नामों से जाना जाता है।
3- पंजाब और दिल्ली
पंजाब और दिल्ली के यादवों को प्रमुख रूप से- राव, राय साहब अहीर, और यादव इत्यादि नामों से जाना जाता है।
4- राजस्थान-
राजस्थान के यादवों को प्रमुख रूप से- ढढोर, अहीर, यादव, राव, चौधरी इत्यादि नामों से जाना जाता है।
5- मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के यादवों को प्रमुख रूप से- यादव, अहीर, ग्वाला, राव, राय, चौधरी, ढढोर इत्यादि नामों से जाना जाता है।
6- बुन्देलखण्ड
बुन्देलखण्ड के यादवों को प्रमुख रूप से- कमरिया, बनाफर अहीर, नागिल, पवार, भट्टी, जाटव, तोमर, ढढोर इत्यादि नामों से जाना जाता है।
7- गुजरात-
गुजरात के यादवों को प्रमुख रूप से-अहीर और यादव नाम से जाना जाता है।
8- महाराष्ट्र-
महाराष्ट्र के यादवों को प्रमुख रूप से- जाधव, गवली, धनगर, गायकवाड़, और खेदकर इत्यादि नामों से जाना जाता है।
9- तमिलनाडु-
तमिलनाडु के यादवों को प्रमुख रूप से- कोनार, आयर, इडैयर, और पिल्लई इत्यादि नामों से जाना जाता है।
10-आंध्र प्रदेश और तेलंगाना-
आंध्र प्रदेश के यादवों को प्रमुख रूप से- गोल्ला, कुरुबा, और यादवुलु इत्यादि नामों से जाना जाता है।
11- कर्नाटक
कर्नाटक के यादवों को प्रमुख रूप से- कुरुबा, गोल्ला, और वाडियार इत्यादि नामों से जाना जाता है।
12- केरल
केरल के यादवों को प्रमुख रूप से- मणियानी और एरुमकर इत्यादि नामों से जाना जाता है।
13- बंगाल
बंगाल में यादवों को घोष और सदगोप इत्यादि नामों से जाना जाता है।
14- ओडिशा
ओडिशा के यादवों को प्रमुख रूप से- बेहेरा, गोपाल, गौड़ा, महाकुल, राउत इत्यादि नामों से जाना जाता है।
विशेष- यादवों का सरनेम अभी शोध का विषय है। क्योंकि अधिकांश प्रान्तों में यादवों के कुछ ऐसे सरनेम हैं जिनको हम और आप अभी तक नहीं जानते हैं।
इस प्रकार से यह अध्याय यादवों के सरनेम की जानकारी के साथ समाप्त हुआ। अब इसके अगले अध्याय (10) में प्रमुख यादव राजनेताओं के बारे में जानकारी दी गई है।
अध्याय(10)
प्रमुख यादव राजनेता
इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य भारत के प्रमुख यादव राजनेताओं के बारे जानकारी देना है। इसको अच्छी तरह से समझने के लिए इस अध्याय को क्रमशः A, B और C भागों में विभाजित किया गया है।
(A)- उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनेता
1- रामनरेश यादव 2- मुलायम सिंह यादव
3- प्रो० राम गोपाल यादव 4- शिवपाल सिंह यादव
5- रामगोविन्द चौधरी 6- अम्बिका चौधरी
7- शरद यादव 8- अखिलेश सिंह यादव
9- डिम्पल यादव
(B)- बिहार के प्रमुख राजनेता
1- बिंदेश्वरी प्रसाद मण्डल 2- रामलखन सिंह यादव (शेरे बिहार)
3- लालू प्रसाद यादव 4- श्रीमती रावड़ी देवी
5- तेजस्वी यादव 6- पप्पू यादव (राजेश रंजन)
7- नित्यानंद राय
(C)- अन्य राज्यों के यादव राजनेता
1- डॉ. प्रफुल्ल चन्द्र घोष
2- मोहन यादव
3- अन्नपूर्णा देवी
4- राव इंद्रजीत सिंह और राव बीरेंद्र सिंह
5- राव बिजेंद्र सिंह
(A)- उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनेता
1- रामनरेश यादव
राम नरेश यादव का जन्म सन् 1 जुलाई 1928 को आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) के आजमगढ़ जिला में हुआ था।उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से एम.ए. और एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त की थी और पेशे से वकील थे।
इसके साथ ही वे भारत के एक वरिष्ठ राजनेता थे। शुरुआत में वे समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे और जनता पार्टी में रहे, लेकिन बाद में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए थे। ये 1977 में प्रथम बार आजमगढ़ से लोकसभा सदस्य चुने गए थे। इसके अलावा वह राज्यसभा सदस्य और उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य भी रहे।
ये जनता पार्टी की सरकार में उत्तर प्रदेश के 10 वें मुख्यमन्त्री के तौर पर 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक रहे। इसके बाद 8 सितंबर 2011 से 7 सितंबर 2016 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी सम्हाला।
विशेष- ये अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे। मुख्यमन्त्री चुने जाने के बाद वे दिल्ली से लखनऊ ट्रेन से आए और रेलवे स्टेशन से रिक्शे पर बैठकर राज्यपाल को अपना पत्र सौंपने राजभवन पहुँचे थे।
22 नवंबर 2016 को लखनऊ के एसजीपीजीआई (SGPGI) में लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन हुआ।
2- मुलायम सिंह यादव
नेताजी मुलायम सिंह यादव का जन्म- सन् 22 नवंबर 1939 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। इनके पिता सुघर सिंह यादव और माता मूर्ति देवी थीं। वे राजनीति विज्ञान में एम.ए. और बी.टी. (टीचिंग) की डिग्री प्राप्त करने के उपरान्त 1963 में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के जैन इण्टर कॉलेज, करहल में एक सहायक शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, जिसमें वे मुख्य रूप से हिंदी और सामाजिक विज्ञान पढ़ाते थे। 1974 में राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री (MA) पूरी करने के बाद, उन्हें उसी कॉलेज में लेक्चरर (प्रवक्ता) के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। उस समय उनका वेतन मात्र 120 रुपये था। वे अपना सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा और राजनीति में लाने के लिए 1984 में शिक्षक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। आगे चलकर 4 अक्टूबर 1992 को समाजवादी पार्टी की नींव रखकर अपनी बुलन्दियों का परचम लहराया और भारतीय राजनीति के एक दिग्गज नेता के रुप में उभरे। उनके समर्थक उन्हें प्यार से "नेताजी" और "धरतीपुत्र" कहकर बुलाते थे।
मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक कैरियर लगभग छह दशकों तक चला। वे पहली बार 1967 में जसवन्तनगर से विधायक चुने गए और कुल 10 बार विधानसभा सदस्य रहे तथा तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री के रहे। इसके अतिरिक्त वे 7 बार लोकसभा सांसद चुने गए, जिसमें मैनपुरी, आजमगढ़ और सम्भल जैसे निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया। इसके साथ ही वे 1996 से 1998 तक भारत के केंद्रीय रक्षा मन्त्री रहे।
उन्हें सामाजिक न्याय, पिछड़ों, दलितों और किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले नेता के रूप में याद किया जाता है। उनकी इसी विशेषता के कारण भारत सरकार ने मरणोपरान्त वर्ष 2023 में पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया।
अन्ततोगत्वा 10 अक्टूबर 2022 को 82 वर्ष की आयु में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लम्बी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया।
विशेष-
(1) जब मुलायम सिंह यादव 1996 से 1998 के बीच रक्षा मन्त्री थे, तब उन्होंने यह ऐतिहासिक नियम बनाया कि शहीद का पार्थिव शरीर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके गाँव या घर पहुँचाया जाएगा। इस नियम के तहत डीएम (DM) और एसपी (SP) का भी शहीद के अन्तिम संस्कार में शामिल होना अनिवार्य किया गया। उनके इस फैसले की प्रसंशा समाज के प्रत्येक वर्गों द्वारा की गई।
(2) मुलायम सिंह यादव कुस्ती में 'चरखा' और धोविया दांव के लिए मशहूर थे। 1960 के दशक में जसवन्तनगर में एक बार कुश्ती का दंगल हो रहा था, जिसमें मुलायम सिंह ने अपने से कहीं बड़े और तगड़े पहलवान को चित कर दिया। उस दंगल को स्थानीय विधायक नथू सिंह देख रहे थे। वे मुलायम के दांव-पेंच और फुर्ती से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने वहीं तय कर लिया कि यह लड़का राजनीति का भी कुशल खिलाड़ी बनेगा। नथू सिंह ने उन्हें अपना राजनीतिक शिष्य बना लिया और 1967 के चुनाव में अपनी सीट छोड़कर मुलायम सिंह को टिकट दिलवाया।
(3) जब मुलायम सिंह ने अपना पहला चुनाव लड़ा, तो उनके पास न संसाधन थे और न ही पैसे। उनके दोस्त दर्शन सिंह साइकिल चलाते थे और मुलायम पीछे कैरियर पर बैठकर गाँव-गाँव प्रचार करने जाते थे। इसी संघर्ष के कारण बाद में जब उन्होंने अपनी पार्टी (समाजवादी पार्टी) बनाई, तो उसका चुनाव चिह्न भी 'साइकिल' ही रखा।
उनके हुनर, कद, और राजनीतिक रणनीति को देखते हुए पूर्व प्रधानमन्त्री चौधरी चरण सिंह उन्हें प्यार से 'नन्हा नेपोलियन' कहकर बुलाते थे।
(4) यह ध्रुव सत्य है कि मुलायम सिंह यादव जी की ही देन रही कि आज यादव समाज- आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, ऊँचाइयों को प्राप्त कर सका। इसके पहले यादवों की बहुत ही दैनीय दशा थी, ये लोग मनुवादी व्यवस्था के उच्चवर्णों के सामने चारपाई पर नहीं बैठ सकते थे।
3- प्रो० राम गोपाल यादव
प्रोफेसर राम गोपाल यादव का जन्म 29 जून 1946 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गाँव में हुआ था। प्रोफेसर राम गोपाल यादव के पिता का नाम स्वर्गीय बच्ची लाल यादव और माता का नाम श्रीमती फूलवती था। ये दिवंगत मुलायम सिंह यादव के चचेरे भाई, और पार्टी के मुख्य रणनीतिकारों में से एक माने जाते हैं। प्रो० राम गोपाल यादव एक वरिष्ठ भारतीय राजनीतिज्ञ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं।
प्रोफेसर राम गोपाल यादव 1992 से (वर्तमान में अपने पाँचवें कार्यकाल में) राज्यसभा सांसद हैं। इन्होंने 2004 से 2008 तक संभल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।
इन्हें समाजवादी पार्टी का थिंक-टैंक और संविधान विशेषज्ञ माना जाता है। 2017 में सपा के पारिवारिक विवाद के दौरान उन्होंने अखिलेश यादव का पुरजोर समर्थन किया था।
उनके बेटे, अक्षय यादव, भी राजनीति में सक्रिय हैं और फिरोजाबाद से सांसद रह चुके हैं।
ये वर्तमान में राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के संसदीय दल के नेता हैं और सितंबर 2024 में उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। ये राजनीति विज्ञान और भौतिकी में एम.ए. और एम.एससी. तथा आगरा विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
राजनीति में आने से पहले वे इटावा के चौधरी चरण सिंह डिग्री कॉलेज में लेक्चरर और प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत थे।
4- शिवपाल सिंह यादव
शिवपाल सिंह यादव का जन्म: 16 फरवरी 1955 को बसन्त पञ्चमी के दिन को इटावा जिले के सैफई गाँव में हुआ। इनके पिता सुघर सिंह यादव और माता मूर्ति देवी थीं। ये स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के सबसे छोटे भाई और अखिलेश यादव के चाचा हैं। इनका विवाह 1981 में सरला यादव से हुआ। उनके दो बच्चे हैं—पुत्र आदित्य यादव (राजनीति में सक्रिय) और पुत्री डॉ. अनुभा यादव हैं।
ये 1976 में कानपुर विश्वविद्यालय के के.के. डिग्री कॉलेज से स्नातक (बी.ए.) किया और 1977 में लखनऊ विश्वविद्यालय से शारीरिक शिक्षा में स्नातक (बी.पी.एड.) की डिग्री प्राप्त की।
राजनीति में आने से पहले वे अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के लिए चुनाव प्रबन्धन और सुरक्षा का कार्य देखते थे।शिवपाल सिंह यादव उत्तर प्रदेश के एक प्रभावशाली राजनेता और समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। वे वर्तमान में सपा के राष्ट्रीय महासचिव और जसवन्तनगर (इटावा) से विधायक हैं। 1996 में वे पहली बार जसवन्तनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए, जहाँ से वे अब तक लगातार 6 बार विधायक चुने जा चुके हैं।
ये सपा की पिछली सरकार में उत्तर प्रदेश सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण मन्त्रालयों के कैबिनेट मन्त्री रहे तथा 2007 से 2012 तक, मायावती सरकार के दौरान, उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई।
2016-17 में अखिलेश यादव के साथ वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों के चलते उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़ दी और 2018 में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन किया। हालांकि, मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद वे फिर से समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और अपनी पार्टी का सपा में विलय कर दिया।
वर्तमान में वे सपा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में पार्टी के रणनीतिक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये अक्सर भाजपा सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार करते हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की नसीहत देते हैं।
शिवपाल सिंह यादव को राजनीति का एक मंझा हुआ खिलाड़ी और "जमीनी नेता" माना जाता है, जिनकी पकड़ उत्तर प्रदेश के पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में काफी मजबूत है।
5- रामगोविन्द चौधरी
गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1953 को बलिया जिले के गोसाईपुर में हुआ था। प्रो० रामगोविन्द चौधरी भारत के एक वरिष्ठ समाजवादी नेता और उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा हैं।
गोविंद चौधरी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की और 1971-72 में बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय के अध्यक्ष रहे। वे पूर्व प्रधानमन्त्री चन्द्रशेखर के अत्यन्त करीबी रहे हैं और उन्हीं के सानिध्य में राजनीति सीखी।
ये 2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में कार्य किया है। वे अखिलेश यादव की सरकार में बेसिक शिक्षा, बाल विकास और पुष्टाहार मन्त्री भी रह चुके हैं।
इनका निर्वाचन क्षेत्र बलिया जिले की बांसडीह विधानसभा है। ये इस सीट से कई बार विधायक चुने गए हैं। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें इस सीट से हार का सामना करना पड़ा था।
वर्तमान में ये समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में सक्रिय हैं और पार्टी के एक मजबूत वैचारिक स्तम्भ माने जाते हैं।
विशेष - बलिया के गोविंद चौधरी के बारे में विशेष जानकारी निम्नलिखित है-
(1) ये जयप्रकाश नारायण के JP आन्दोलन की उपज हैं। 1975 में आपातकाल (Emergency) के दौरान, उन्होंने भूमिगत होकर 'प्रतिरोध' नामक पत्रिका निकाली थी, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर मेरठ जेल में सात महीने रखा गया था।
(2) पूर्व पीएम चन्द्रशेखर के सबसे विश्वसनीय पात्र (Man Friday) माने जाते थे। वे चन्द्रशेखर की समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) के टिकट पर भी चुनाव लड़ चुके हैं और चंद्रशेखर की सहमति के बाद ही वे आधिकारिक तौर पर समाजवादी पार्टी के पाले में आए।
(3) आठ बार के विधायक: वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के 8 बार सदस्य (MLA) रहे हैं। उन्होंने बलिया की चिलकहर सीट से 1977 में पहली बार जीत दर्ज की थी और बाद में बांसडीह सीट का प्रतिनिधित्व किया।
(4) 2020 में उन्होंने तब चर्चा बटोरी थी जब वे बयान दिया था कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में आती है, तो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को पेंशन दी जाएगी।
(5) संसदीय ज्ञान के धनी: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्हें विधानसभा की नियमावली और संसदीय परम्पराओं का प्रकाण्ड विद्वान माना जाता है, यही कारण है कि अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव की जगह उन्हें नेता प्रतिपक्ष चुना था।
6- अम्बिका चौधरी
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मन्त्री अम्बिका चौधरी के पिता का नाम स्व. सीताराम चौधरी है।
अम्बिका चौधरी का जन्म 1 जुलाई 1955 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के हसनपुरा गाँव में हुआ था। ये काशी हिंदू विश्वविद्यालय से (L.L.B) की डिग्री प्राप्त की है। उनके बेटे आनन्द चौधरी भी राजनीति में सक्रिय हैं और बलिया के जिला पञ्चायत अध्यक्ष रहे हैं।
अम्बिका चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक प्रमुख नेता और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। वे उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मन्त्री रह चुके हैं और उन्हें बलिया जिले की राजनीति का 'चाणक्य' माना जाता है।
ये 1993 से 2012 तक लगातार चार बार विधायक रहे। उन्होंने बलिया के कोपाचीट (अब फेफना) विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
ये मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव दोनों की सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इन्होंने राजस्व, पिछड़ा वर्ग कल्याण और विकलांग कल्याण जैसे मन्त्रालयों का कार्यभार सम्हाला।
ये 2012 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी निर्वाचित हुए थे। तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
समाजवादी पार्टी के आन्तरिक कलह के दौरान, उन्हें शिवपाल यादव का करीबी माना गया और अखिलेश यादव द्वारा टिकट न दिए जाने के कारण उन्होंने 2017 के चुनाव से ठीक पहले सपा छोड़ दी और बहुजन समाज पार्टी में शामिल होकर 2017 का चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन वे चुनाव हार गए।
पुनः 2021 अगस्त में उन्होंने फिर से समाजवादी पार्टी में वापसी की। इस दौरान वे अखिलेश यादव के सामने भावुक भी हुए थे।
7- शरद यादव
स्व० शरद यादव भारत के एक वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व केन्द्रीय मन्त्री थे, जिन्हें भारतीय राजनीति में 'मण्डल मसीहा' के रूप में जाना जाता है। उनके पिता का नाम नन्द किशोर यादव तथा माता का नाम सुमित्रा था। वे मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई गाँव के एक किसान थे। शरद यादव का जन्म 1 जुलाई 1947 को होशंगाबाद जिले के बाबई गाँव में हुआ था। उनकी पत्नी का नाम रेखा यादव है।
उन्होंने जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल के साथ डिग्री प्राप्त की थी।
12 जनवरी 2023 को 75 वर्ष की आयु में गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में शरद यादव का निधन हुआ।
शरद यादव भारत के इकलौते ऐसे नेता थे जिन्होंने तीन अलग-अलग राज्यों से लोकसभा चुनाव जीता-
मध्य प्रदेश (जबलपुर) 1974 के उपचुनाव में पहली बार जीत (जेपी आन्दोलन के समय)। उत्तर प्रदेश (बदायूं) 1989 में जीत। तथा बिहार (मधेपुरा) यहाँ से वे चार बार (1991, 1996, 1999 और 2009) सांसद चुने गए।
वे कुल 7 बार लोकसभा और 3 बार राज्यसभा के सदस्य रहे। इसके साथ ही वे मण्डल आयोग 1990 में वी.पी. सिंह सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण लागू करवाने में उनकी निर्णायक भूमिका थी। वे जनता दल (यूनाइटेड) के संस्थापक अध्यक्ष थे और 2003 से 2016 तक इस पद पर रहे। उन्होंने नागरिक उड्डयन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, कपड़ा और उपभोक्ता मामलों जैसे महत्वपूर्ण मन्त्रालयों का कार्यभार सम्हाला।
वे एनडीए (NDA) के संयोजक रहे, लेकिन बाद में वैचारिक मतभेदों के कारण उन्होंने अपनी पार्टी 'लोकतान्त्रिक जनता दल' (LJD) बनाई, जिसका बाद में आरजेडी (RJD) में विलय कर दिया।
उन्हें राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के विचारों का सच्चा उत्तराधिकारी माना जाता था, जिन्होंने आजीवन सामाजिक न्याय और गैर-कांग्रेसवाद की राजनीति की।
8- अखिलेश सिंह यादव
अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 सन् को इटावा जिले के सैफई गाँव में मुलायम सिंह यादव और मालती देवी के गर्भ से हुआ था। श्री अखिलेश यादव की पत्नी का नाम डिम्पल यादव है। इनके एक पुत्र- अर्जुन यादव तथा दो पुत्रियाँ- अदिति यादव और टीना यादव हैं। जिसमें अर्जुन और टीना जुड़वां हैं। इन तीनों में अदिति यादव उनकी सबसे बड़ी बेटी हैं।
इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा धौलपुर मिलिट्री स्कूल, राजस्थान से पूरी की। इसके बाद मैसूर विश्वविद्यालय से सिविल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग (पर्यावरण) की डिग्री प्राप्त की।
भारतीय राजनीतिज्ञ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वे 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के 20वें मुख्यमन्त्री रहे, जहाँ 38 वर्ष की आयु में शपथ लेकर उन्होंने राज्य के सबसे युवा मुख्यमन्त्री बनने का गौरव प्राप्त किया।
राजनीतिक सफर
श्री अखिलेश यादव अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत साल 2000 में कन्नौज लोकसभा उपचुनाव जीतकर की। वे अब तक कई बार लोकसभा सांसद (2000, 2004, 2009, 2019 और 2024) और उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। ये 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री बने। तथा मार्च 2022 से जून 2024 तक यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई, जिसके बाद वे 18वीं लोकसभा में कन्नौज से सांसद चुने गए।
2024 के भारतीय आम चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की और 18वीं लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
अखिलेश यादव की प्रमुख उपलब्धियाँ और योजनाएँ-
अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में उन्होंने कई निम्नलिखित महत्वपूर्ण ढांचागत और कल्याणकारी कार्य किए
(1) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे- यह देश का सबसे आधुनिक और लंबे एक्सप्रेसवे में से एक है। यह एक्सप्रेसवे 302 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सप्रेसवे उनकी सरकार की सबसे प्रमुख उपलब्धि मानी जाती है, जिसे रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। जिसपर फाइटर विमान उतार कर अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठ को दिखाया जिसकी सराहना अपने देश में खूब हुई।
(2) लखनऊ मेट्रो रेल: लखनऊ में मेट्रो रेल परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया और ट्रायल रन हुआ।
(3) यूपी 100- अखिलेश यादव तीसरा महत्वपूर्ण कार्य पुलिस को आधुनिक बनाने और सुरक्षा बढ़ाने का था। इसके लिए उन्होंने आपातकालीन सेवा शुरू की जो यूपी डायल 100 के नाम से जानी गई किन्तु योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उसका नाम बदल कर यूपी 112 कर दिया।
(4) महिला सुरक्षा 1090- अखिलेश यादव की सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतें दर्ज करने के लिए एक विशेष हेल्पलाइन शुरू की गई, जो अपनी तरह की पहली पहल थी।
(5) स्वास्थ्य सेवाएं 108 और 102- अखिलेश यादव की सरकार ने 108 एम्बुलेंस सेवा पूरे राज्य में 'समाजवादी स्वास्थ्य सेवा' के तहत नि:शुल्क आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई। इसके पहले ऐसी सेवाएं उत्तर प्रदेश में नहीं थी। इसी तर्ज पर 102 एम्बुलेंस सेवा को सर्वप्रथम इन्होंने ने ही प्रारम्भ किया जो मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए शुरू की गई थी।
(6) शिक्षा और रोजगार- अखिलेश यादव की सरकार ने 10वीं और 12वीं पास छात्रों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर लैपटॉप वितरित किए गए। जो अपने आप में मिशाल है। इसी तर्ज पर उन्होंने कन्या विद्या धन योजना को लागू किया जो कक्षा 12वीं पास करने वाली लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
(7) सामाजिक कार्य- अखिलेश यादव ने सामाजिक कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जिसके तहत उनकी सरकार में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए समाजवादी पेंशन योजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के लिए लोहिया आवास योजना का प्रारम्भ किया।
श्री अखिलेश यादव ने 07 जनवरी 2026 को मेरी पहली पुस्तक "श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" का सर्वप्रथम विमोचन किया। उनको ऐसा करने से लेखकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। उनके द्वारा पुस्तक "श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" के विमोचन का विडियो यादव सम्मान चैनल पर विडियो शीर्षक- अखिलेश यादव ने किया श्रीकृष्ण साराङ्गिणी पुस्तक का विमोचन। को देखा जा सकता है।
विशेष - कुल मिलाकर देखा जाए तो कम समय में जितना काम अखिलेश यादव ने किया अबतक के राजनीतिक इतिहास में कोई नहीं किया।
9- डिम्पल यादव
डिम्पल यादव का जन्म 15 जनवरी 1978 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता कर्नल राम चन्द्र सिंह रावत भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। उनका परिवार मूल रूप से उत्तराखण्ड का रहने वाला है। डिम्पल यादव पुणे, बठिंडा और अण्डमान-निकोबार में स्कूली शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की है। इनका विवाह 24 नवंबर 1999 को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव से हुआ।
डिम्पल यादव का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश की राजनीति से शुरू हुई। उन्होंने अपना पहला चुनाव 2009 फिरोजाबाद लोकसभा उपचुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पुनः 2012 में वह कन्नौज लोकसभा उपचुनाव में निर्विरोध चुनी गईं। उत्तर प्रदेश के इतिहास में निर्विरोध चुनी जाने वाली वह पहली महिला सांसद बनीं। तब से वे (2012 से 2019) तक कन्नौज से सांसद रहीं।
पुनः 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने मैनपुरी सीट से लडीं और बड़े अन्तर से जीत दर्ज की। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे दोबारा मैनपुरी से सांसद चुनी गईं।
प्रमुख उपलब्धियाँ
1- रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष: उन्होंने संकटग्रस्त महिलाओं और एसिड अटैक पीड़ितों की मदद के लिए 100 करोड़ रुपये से रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई।
2- महिलाओं की सुरक्षित यात्रा के लिए लखनऊ में 'पिंक ऑटो' और दिल्ली-लखनऊ के बीच 'पिंक एक्सप्रेस' बस सेवा शुरू करने का श्रेय उन्हें दिया जाता है।
3- उन्होंने स्कूल जाने वाली लड़कियों को निशुल्क सैनिटरी नैपकिन वितरित करने और मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए किशोरी सुरक्षा योजना की शुरुआत की।
4- राज्य पोषण मिशन: डिम्पल यादव ने कुपोषित बच्चों और गर्भवती माताओं की मदद के लिए राज्य पोषण मिशन को गति दी और अधिकारियों को गाँवों में कुपोषित बच्चों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
(B)- बिहार के प्रमुख राजनेता
1- बिंदेश्वरी प्रसाद मण्डल
बिंदेश्वरी प्रसाद मण्डल का जन्म 25 अगस्त 1918 को वाराणसी में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। उनका पैतृक गाँव बिहार के मधेपुरा जिले में स्थित मुरहो था।
इनके पिता बाबू रासबिहारी लाल मण्डल जो एक धनी जमींदार और बिहार के एक प्रमुख नेता थे, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारम्भिक वर्षों में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
BP मण्डल का राजनीतिक सफर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से शुरू हुआ। वे 1952 में बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए। और 1967 और 1977 में लोकसभा सांसद भी रहे।और 1968 में वे मात्र 30 दिनों के लिए बिहार के मुख्यमन्त्री बने।
1979 में तत्कालीन प्रधानमन्त्री मोरारजी देसाई ने उन्हें "पिछड़ा वर्ग आयोग" का अध्यक्ष नियुक्त किया। तब उन्होंने आयोग से सम्बन्धित निम्नलिखित प्रमुख सिफारिशें और घोषणा की जिसे आज मण्डल आयोग के नाम से जाना जाता है
(क) आयोग ने सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक आधार पर 11 संकेतकों का उपयोग कर 3,743 जातियों को पिछड़ा घोषित किया।
(ख) 27% आरक्षण: आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि देश की लगभग 52% आबादी ओबीसी है, और उनके लिए सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में 27% आरक्षण की सिफारिश की।
फिर तो 7 अगस्त 1990 को प्रधानमन्त्री वी.पी. सिंह ने संसद में इस रिपोर्ट को लागू करने की घोषणा की।
लाख विरोध और प्रदर्शन के बाद 1992 के प्रसिद्ध इंदिरा साहनी केस में सर्वोच्च न्यायालय ने इस आरक्षण को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया।
इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए बिंदेश्वरी प्रसाद मण्डल को पिछडो़ का मसीहा कहा जाता है।
2- रामलखन सिंह यादव (शेरे बिहार)
रामलखन सिंह यादव का जन्म 9 मार्च 1920 को बिहार के पटना जिले के हरिरामपुर या अंबारी गाँव में हुआ था। ये यादव लालू प्रसाद यादव से पहले बिहार में यादवों और पिछड़े वर्गों के निर्विवाद नेता थे। ये बिहार में शिक्षा व बुनियादी ढांचे के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया। उनके इस योगदान से उन्हें 'शेरे बिहार' के नाम से जाना जाता है। बिहार के एक कद्दावर स्वतन्त्रता सेनानी, दूरदर्शी राजनेता और महान शिक्षाविद थे। उनको बिहार में शिक्षा के प्रसार का श्रेय दिया जाता है क्योंकि उन्होंने राज्य भर में 100 से अधिक शिक्षण संस्थानों (स्कूल और कॉलेज) की स्थापना की। औरंगाबाद का रामलखन सिंह यादव कॉलेज इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
वे यादव समाज के एक अत्यन्त शक्तिशाली नेता माने जाते थे। उन्होंने वंचित वर्गों और किसानों के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। वे कई वर्षों तक 'अखिल भारतीय यादव महासभा' के अध्यक्ष भी रहे।
शेरे बिहार का राजनीतिक सफर-
छात्र जीवन से ही वे भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय रहे और ब्रिटिश सरकार ने उन्हें "खतरनाक छात्र" घोषित कर जेल भेज दिया था। वे 1952 से 1991 तक लगातार बिहार विधानसभा के सदस्य रहे।
1963 में कृष्ण वल्लभ सहाय की सरकार में वे पहली बार कैबिनेट मन्त्री बने और राज्य में लोक निर्माण (PWD) और भूमि सुधार जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले।
1991 में वे आरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए।
उन्होंने केंद्र सरकार में 1994 से 1996 तक रसायन और उर्वरक मन्त्री के रूप में कार्य किया।
3- लालू प्रसाद यादव
लालू प्रसाद यादव (जन्म 11 जून 1948) भारतीय राजनीति के एक अत्यन्त प्रभावशाली और चर्चित व्यक्तित्व हैं। वे बिहार के पूर्व मुख्यमन्त्री, भारत के पूर्व रेल मन्त्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संस्थापक अध्यक्ष हैं।
इनका जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम स्वर्गीय कुन्दन राय तथा माता का नाम मरछिया देवी है। इन्होंने पटना विश्वविद्यालय से कानून (LLB) और राजनीति विज्ञान में मास्टर (MA) की डिग्री प्राप्त की।
उनके राजनीतिक सफर का सिलसिला 1970 के दशक में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में हुई। वे जयप्रकाश नारायण के जेपी आन्दोलन के प्रमुख छात्र नेताओं में से एक थे। 1977 में मात्र 29 वर्ष की आयु में वे जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार लोकसभा सदस्य चुने गए और 1990 से 1997 तक दो बार बिहार के मुख्यमन्त्री रहे। उनके कार्यकाल को पिछड़ों और दलितों के सशक्तिकरण के लिए जाना जाता है, हालांकि इसे "जंगल राज" के आरोपों और विवादों का भी सामना करना पड़ा।
(UPA-1) सरकार के दौरान 2004 से 2009 तक उन्होंने रेल मन्त्री के रूप में कार्य किया। भारतीय रेलवे को घाटे से उबारने और मुनाफे में लाने के लिए उन्हें भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIM) में "मैनेजमेंट गुरु" के रूप में व्याख्यान देने के लिए बुलाया गया था।
जमीन के बदले नौकरी (Land-for-Jobs): हाल के वर्षों में वे और उनका परिवार रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन लिखवाने के आरोपों की जांच का सामना कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति में लालू यादव लम्बे समय से किडनी और हृदय सम्बन्धी बीमारियों से जूझ रहे हैं। दिसंबर 2022 में सिंगापुर में उनका किडनी ट्रांसप्लान्ट हुआ था, जिसमें उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने अपनी किडनी दान की थी। स्वास्थ्य कारणों से वे अब सक्रिय राजनीति से थोड़ा पीछे हट गए हैं। जनवरी 2026 में, तेजस्वी यादव को राजद का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, जो पार्टी की कमान सम्हाल रहे हैं।
4- तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव का जन्म 9 नवंबर 1989 को बिहार के गोपालगंज में हुआ था। ये बिहार के दो पूर्व मुख्यमन्त्रियों, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के सबसे छोटे बेटे हैं। उनकी पत्नी का नाम राजश्री यादव है और उनकी एक बेटी है जिसका नाम कात्यायनी है।
तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति के एक प्रमुख युवा चेहरा और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के शीर्ष नेता हैं। 25 जनवरी 2026 को उन्हें आधिकारिक तौर पर राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
तेजस्वी यादव ने दिल्ली पब्लिक स्कूल (आर.के. पुरम) से पढ़ाई की, लेकिन क्रिकेट में करियर बनाने के लिए उन्होंने 9वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। और वे आईपीएल (IPL) में दिल्ली डेयरडेविल्स टीम का हिस्सा रहे (हालांकि उन्हें मैच खेलने का मौका नहीं मिला) और उन्होंने झारखणड की ओर से घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) भी खेला है।
तेजस्वी यादव का राजनीतिक सफर 2010 से अपने पिता के साथ चुनाव प्रचार शुरू किया और 2015 में पहली बार राघोपुर सीट से विधायक चुने गए। और दो बार बिहार के उपमुख्यमन्त्री रह चुके हैं। वे 2015-2017 में पहली बार 26 साल की उम्र में वे बिहार के सबसे युवा उपमुख्यमन्त्री बने।
2022-2024: जब नीतीश कुमार ने एनडीए छोड़कर महागठबंधन के साथ सरकार बनाई तब तेजस्वी यादव वर्तमान में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।
वे मुख्य रूप से बेरोजगारी, सरकारी नौकरी और विकास के मुद्दों पर केंद्रित राजनीति कर रहे हैं। फरवरी 2026 में बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान वे स्वास्थ्य कारणों से व्हीलचेयर पर सदन पहुँचे थे।
6- पप्पू यादव (राजेश रंजन)
पप्पू यादव का असली नाम राजेश रंजन है। इनका जन्म 24 दिसंबर 1967 को बिहार के मधेपुरा जिले के खुर्दा में हुआ। उनकी पत्नी रंजीता रंजन वर्तमान में कांग्रेस की राज्यसभा सांसद हैं। उनका एक बेटा सार्थक रंजन और एक बेटी है। इन्हें सीमांचल और कोसी क्षेत्र में एक 'मसीहा' के रूप में देखा जाता है, विशेष रूप से बाढ़ और कोरोना काल के दौरान उनकी सक्रियता के लिए। ये राजनीति विज्ञान से स्नातक (BA) किया है।
पप्पू यादव प्रारम्भ में राजद (RJD) और समाजवादी पार्टी में रहे हैं किन्तु 2015 में उन्होंने अपनी खुद की पार्टी जन अधिकार पार्टी (L) बनाई। वे 1990 में पहली बार निर्दलीय विधायक बने और 6 बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं जिसमें वे पूर्णिया से 4 बार और मधेपुरा से 2 बार सांसद रहे हैं।
2024 से ठीक पहले अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया था। हालांकि, सीट बंटवारे में पूर्णिया सीट राजद के पास जाने के कारण उन्हें कांग्रेस का टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। ये आधिकारिक तौर पर निर्दलीय सांसद हैं लेकिन खुद को कांग्रेस की विचारधारा के हैं।
पप्पू यादव को 2015 में संसद में 'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन' करने वाले सांसदों में से एक के रूप में सम्मानित किया गया था
उपलब्धियाँ
पप्पू यादव को बिहार में अक्सर 'संकटमोचक' के रूप में देखा जाता है। उनके प्रमुख समाजसेवी कार्य निम्नलिखित हैं-
(क) 2019 में पटना में आई भयानक बाढ़ के दौरान उन्होंने खुद नाव पर सवार होकर लोगों तक दूध, पानी और खाना पहुँचाया था। 2025 की बाढ़ में भी उन्होंने प्रभावित इलाकों में राशन के पैकेट और सीधे नकद (₹500 प्रति महिला) बांटे।
(ख) कोरोना काल के महामारी के दौरान उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाइयाँ और एम्बुलेंस की व्यवस्था की। उन्होंने कथित तौर पर अपनी 90 कट्ठा जमीन बेचकर राहत कार्यों के लिए फण्ड जुटाया था।
(ग) दिल्ली में इलाज कराने जाने वाले बिहार के गरीब मरीजों के लिए उन्होंने 'सेवा आश्रम' (28 कमरों का आवास) की व्यवस्था की है।
(घ) वे अक्सर गरीबों की शादियों, पढ़ाई और इलाज के लिए सीधे आर्थिक मदद देने के लिए चर्चा में रहते हैं।
इस प्रकार से पप्पू यादव राजनिति के साथ साथ एक सफल समाजसेवी हैं।
7- नित्यानंद राय
नित्यानंद राय (यादव) का जन्म 1 जनवरी 1966 को बिहार के वैशाली जिले के कर्णपुरा गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के आर.एन. कॉलेज, हाजीपुर से बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की। ये अपने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक कार्यों की शुरुआत की और आज भारत सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मन्त्री के रूप में कार्यरत हैं। वे बिहार की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक महत्वपूर्ण चेहरा माने जाते हैं। इनको बिहार में भाजपा के यादव चेहरे के रूप में भी देखा जाता है, जिन्होंने पार्टी के आधार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
नित्यानंद राय वैशाली जिले की हाजीपुर विधानसभा सीट से लगातार चार बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2014 में वे पहली बार उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2019 और 2024 के आम चुनावों में भी उन्होंने इसी क्षेत्र से जीत दर्ज की। 2016 से 2019 तक बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में 2019 के लोकसभा चुनाव में NDA ने बिहार की 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की थी।
मई 2019 में वे पहली बार केंद्रीय गृह राज्य मन्त्री बने और 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी उन्हें इसी पद की जिम्मेदारी दी गई। गृह मन्त्रालय में वे आन्तरिक सुरक्षा, सीमा प्रबन्धन और वामपंथी उग्रवाद (LWE) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्य कर रहे हैं।
(C)- अन्य राज्यों के यादव राजनेता
1- डॉ. प्रफुल्ल चन्द्र घोष
1- मोहन यादव 2- अन्नपूर्णा देवी
4- राव इंद्रजीत सिंह और राव बीरेंद्र सिंह
5- राव बिजेंद्र सिंह
1- डॉ. प्रफुल्ल चन्द्र घोष
डॉ. प्रफुल्ल चन्द्र घोष पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमन्त्री और स्वतन्त्रता सेनानी थे। वे एक प्रखर विद्वान और गांधीवादी नेता के रूप में जाने जाते हैं।
उनके जीवन और करियर के प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित हैं-
1. प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा
डॉ. प्रफुल्ल चन्द्र घोष का जन्म 24 दिसंबर 1891 को ब्रिटिश भारत के ढाका जिले (अब बांग्लादेश) के मलिकंदा गाँव में एक यादव (सद्गोप) परिवार में हुआ था। वे शिक्षा में अत्यन्त मेधावी थे। उन्होंने 1913 में ढाका कॉलेज से केमिस्ट्री में प्रथम श्रेणी में स्नातक और 1916 में मास्टर डिग्री प्राप्त की। 1920 में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त की।
2. स्वतन्त्रता संग्राम में योगदान
गांधीवादी प्रभाव: 1920 में ढाका में महात्मा गांधी का भाषण सुनने के बाद वे उनसे अत्यधिक प्रभावित हुए और स्वतन्त्रता आन्दोलन में कूद पड़े।
सरकारी पद का त्याग-
वे कलकत्ता मिन्ट (टक्साल) में 'डिप्टी एसे मास्टर' के रूप में नियुक्त होने वाले पहले भारतीय थे, लेकिन गांधीजी के आह्वान पर उन्होंने इस उच्च पद से इस्तीफा दे दिया।
जेल यात्रा-
उन्होंने असहयोग आन्दोलन और भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके कारण उन्हें कई बार (1930, 1932, 1940, और 1942-44) जेल जाना
पड़ा।
3. राजनीतिक करियर और मुख्यमन्त्री पद-
डॉ. घोष ने तीन बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमन्त्री के रूप में कार्य किया-
पहला कार्यकाल- (15 अगस्त 1947 – 14 अगस्त 1948) आजादी के बाद वे राज्य के प्रथम मुख्यमन्त्री बने। उनके कार्यकाल में मुख्य चुनौती पूर्वी बंगाल से आने वाले शरणार्थियों का पुनर्वास था।
दूसरा कार्यकाल- (2 नवंबर 1967 – 20 फरवरी 1968): उन्होंने प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (PDF) सरकार का नेतृत्व किया।
तीसरा कार्यकाल- (2 अप्रैल 1971 – 28 जून 1971): वे कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के मुख्यमन्त्री रहे।
4. अन्य महत्वपूर्ण पद
वे भारतीय संविधान सभा के सदस्य भी थे, जहाँ वे बंगाल प्रेसीडेंसी का प्रतिनिधित्व करते थे।
वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य रहे और बाद में कांग्रेस छोड़कर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) में भी शामिल हुए।
डॉ. प्रफुल्ल चन्द्र घोष का निधन 1983 में हुआ। उनकी सादगी और गांधीवादी मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा आज भी याद की जाती है।
1- मोहन यादव
डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965, को उज्जैन में हुआ है। इनके पिता का नाम पूनमचद्र यादव है। उनकी पत्नी का नाम सीमा यादव है और उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। ये एक कुश्ती प्रेमी हैं और राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी रहे हैं।
मोहन यादव एक शिक्षित नेता हैं। उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से B.Sc, LLB, MA (राजनीति विज्ञान), MBA और PhD की डिग्रियाँ प्राप्त की हैं।
मोहन यादव ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से किया जिसमें वे 1982 में उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय के छात्र संघ के सह-सचिव और 1984 में अध्यक्ष चुने गए। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
वे लम्बे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं और 1993-95 के दौरान उज्जैन में खण्ड कार्यवाह के पद पर रहे। वे 2013 में पहली बार उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक बने। इसके बाद 2018 से 2023 तक लगातार तीसरी बार इसी सीट से चुनाव जीता। और शिवराज सिंह चौहान की सरकार (2020-2023) में वे उच्च शिक्षा मन्त्री थे। उनके कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश में 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू किया गया था। ये वर्तमान में BJP से 13 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमन्त्री पद की शपथ ली।
मोहन यादव अन्य पिछड़ा वर्ग के यादव समुदाय से आते हैं, जो मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा वोट बैंक है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद, बीजेपी आलाकमान ने शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को मुख्यमन्त्री चुनकर सभी को हैरान कर दिया था।
अन्नपूर्णा देवी (यादव)
अन्नपूर्णा देवी (यादव) का जन्म 2 फरवरी 1970 को वर्तमान झारखण्ड (तत्कालीन बिहार) के दुमका जिले के एक छोटे से अजमेरी गाँव में एक बंगाली भाषी किसान परिवार में हुआ था। वर्तमान में भारत सरकार में महिला एवं बाल विकास कैबिनेट मन्त्री हैं। वे झारखण्ड के कोडरमा संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद हैं।
उनका राजनीतिक सफर 1998 में उनके पति रमेश प्रसाद यादव (RJD नेता) के आकस्मिक निधन के बाद हुआ। वे राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर कोडरमा विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहीं और अविभाजित बिहार व झारखंड सरकारों में मन्त्री भी रहीं। वे झारखण्ड RJD की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले वे भाजपा में शामिल हुईं और भारी मतों के अन्तर से जीतकर पहली बार सांसद बनीं। उन्हें झारखण्ड में OBC के एक बड़े और प्रभावशाली चेहरे के रूप में देखा जाता है। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की है।
4- राव इंद्रजीत सिंह और राव बीरेंद्र सिंह
राव इंद्रजीत सिंह का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी में 11 फरवरी 1950 को हुआ था। इनके पिता राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा की राजनीति के एक अत्यन्त प्रभावशाली स्तम्भ माने जाते हैं। ये दोनों (पिता-पुत्र) ऐतिहासिक रूप से अहीर शासक व स्तंवतन्त्रता सेनानी राव तुलाराम के वंशज हैं। राव इंद्रजीत सिंह के पिता राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के दूसरे मुख्यमन्त्री (1967) हुए और राज्य के पहले निर्वाचित मुख्यमन्त्री बने तथा हरियाणा राज्य के गठन के बाद, वे विधानसभा के पहले पुरुष अध्यक्ष भी रहे। इसके साथ ही वे भारतीय यादव महासभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। और अहीर रेजिमेंट' के गठन की पुरानी माँग के प्रमुख समर्थकों में से एक रहे हैं।
वर्तमान में राव बीरेंद्र सिंह के पुत्र इंद्रजीत सिंह केंद्र सरकार में राज्य मन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) के रूप में कार्यरत हैं। तथा योजना मन्त्रालय राज्य मन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) हैं
राव इंद्रजीत सिंह अबतक 6 बार सांसद (MP) और 4 बार हरियाणा विधानसभा के सदस्य (MLA) रह चुके हैं।
खेल: राजनीति के अलावा, वे एक अन्तरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज (Shooter) रहे हैं और उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स व अन्य प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं。
शिक्षा: उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से स्नातक और लॉ फैकल्टी से LL.B. की डिग्री प्राप्त की है।
हाल ही में (फरवरी 2026), उन्होंने हरियाणा के मुख्यमन्त्री से गुरुग्राम और रेवाड़ी के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्य के आगामी बजट में अधिक आवंटन की माँग की है।
राव बिजेंद्र सिंह
रेवाड़ी स्टेट की रानी की ड्योढ़ी (रानी महल) के राव बिजेंद्र सिंह के पिता का नाम राव लाल सिंह है जो अहीरवाल के महान क्रान्तिकारी राव गोपाल देव के प्रत्यक्ष वंशज हैं।
इस समय राव बिजेंद्र सिंह रेवाड़ी स्टेट की रानी की ड्योढ़ी (जिसे रानी महल या रानी निवास भी कहा जाता है) उसके संरक्षक और निवासी हैं।
ऐतिहासिक महत्व- रानी की ड्योढ़ी लगभग 200 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत है। राव विजेंद्र सिंह के अनुसार, इसके जीर्णोद्धार के दौरान 225 ईस्वी तक के अवशेष मिले हैं, जो रेवाड़ी के प्राचीन इतिहास को दर्शाते हैं। उन्होंने महल के भीतर एक निजी संग्रहालय भी स्थापित किया है जहाँ रेवाड़ी राज्य से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुएं संरक्षित हैं।
राव बिजेंद्र सिंह इस रेवाड़ी की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए सदैव सक्रिय रहते हैं। उन्होंने नगर परिषद द्वारा महल के आसपास सड़क ऊंची करने और जलभराव की समस्या के खिलाफ आवाज़ उठाई है ताकि इस प्राचीन विरासत को नुकसान न पहुँचे।
राव विजेंद्र सिंह वर्तमान में राजनीति में भी सक्रिय हैं। जनवरी 2026 में उन्हें समाजवादी पार्टी का हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। ये अहीरवाल क्षेत्र में 'समाजवादी चिंतन' और किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। वे हरियाणा में समाजवादी पार्टी के संगठन को और मजबूत करने और राज्य की राजनीति में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
विशेष - 'रानी की ड्योढ़ी' और 'रामपुरा हाउस' रेवाड़ी के दो अलग-अलग ऐतिहासिक ठिकाने हैं। जहाँ रामपुरा हाउस का नेतृत्व राव इंद्रजीत सिंह (राव बीरेंद्र सिंह के पुत्र) करते हैं, वहीं रानी की ड्योढ़ी की विरासत को राव विजेंद्र सिंह सम्हाल रहे हैं।
अध्याय(11)
प्रमुख यादव सामाजिक कार्यकर्ता।
इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित भारत के प्रमुख यादव सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज सेवको के बारे में जानकारी देना है
(1)- राजित सिंह यादव (2)- गोपाचार्य हंस श्री आत्मानन्द जी महाराज (3)- गोपाचार्य श्री माता प्रसाद यादव (4)- गोपाचार्य श्री योगेश कुमार रोही
(5)- राव विजेन्द्र सिंह यादव (5)- जाहल बेन अहीर (6)- शैलेन्द्र सिंह यादव (इटावा) (7)- मनोज कुमार यादव (बिहार) (8)- सुनील यादव सुल्तानपुरिया
(9) कालीशंकर यदुवंशी
(1)- राजित सिंह यादव
चौधरी राजित सिंह यादव का जन्म 15 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद के बरहज क्षेत्र स्थित नरसिंह डांड गाँव में हुआ था। जहाँ आज भी उनकी स्मृति में 'राष्ट्रीय यादव दिवस' का बड़ा आयोजन किया जाता है।
स्व. चौधरी राजित सिंह यादव एक प्रभावशाली सामाजिक सुधारक और विचारक थे, जिन्हें मुख्य रूप से यादव समुदाय को एक नई पहचान देने के लिए जाना जाता है।
उनकी ख्याति तब हुई जब उन्होंने 1897 के आसपास अहीर समुदाय को 'यादव' उपनाम अपनाने के लिए गाँव, शहर, और कस्बों में पैदल चलकर प्रेरित किया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप 1910 के बाद देश भर में 'यादव' उपनाम का चलन तेजी से बढ़ा। इसके पहले यादव समाज अपनी मूल पहचान को भूल गया था। इसका मुख्य कारण था, भारत का लम्बे समय से गुलाम होना तथा अचानक कुछ चाटुकार जातियों का राजाओं की चाटुकारिता करके अचानक आगे हो जाना। उन चाटुकारों के आगे यादव लोग अत्यन्त पीछे हो गये, क्योंकि यादवों का जन्मगत स्वभाव होता है कि- यादव अपने मान और स्वाभिमान के लिए कभी झुक नहीं सकते। जिसका परिणाम यह हुआ कि यादव समाज अत्यन्त पिछड़ गया और धीरे धीरे अपनी मूल पहचान को भी खोता गया।
किन्तु चौधरी राजित सिंह यादव अपने भूले बिसरे यादवों को पुनः उनकी मूल पहचान को वापस लाने के लिए स्वयं कमर कसी और भारत के प्रत्येक प्रान्तों के लगभग प्रत्येक गाँवों, शहरों और कस्बों में पैदल चलकर यादवों को जगाने का कार्य किया। यादव समाज उनके इस कृत्य का सदैव ऋणी रहेगा। किन्तु दुर्भाग्य है कि जिसने यादवों को जगाया आज यादव समाज उसे ही भूल गया।
प्रमुख उपलब्धियाँ
चौधरी राजित सिंह यादव अखिल भारतीय यादव महासभा के प्रारम्भिक विचारकों और संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए निरन्तर कार्य किया।
उन्होंने 'यादव' नाम से एक पत्रिका भी निकाली थी। उनकी वैचारिक स्पष्टता इतनी प्रभावी थी कि भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर जैसे बड़े नेता भी उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते थे।
उन्होंने यादवों की ऐतिहासिक और क्षत्रिय उत्पत्ति को रेखांकित करने वाले साहित्य के लेखन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(2)- गोपाचार्य हंस श्री आत्मानन्द जी महाराज-
गोपाचार्य हंस श्री आत्मानन्द जी महाराज का जन्म- 25 जुलाई सन् 1972 को उत्तर प्रदेश के (गाजीपुर जिला) में एक किसान परिवार में हुआ है। इनके पिता स्वर्गीय श्री रामाधार सिंह यादव हनुमान सिंह इण्टर कालेज देवकली में संस्कृत के प्रवक्ता पर रहे हैं। इनकी माता स्वर्गीय श्रीमती कौशल्या देवी हैं।
इनके माता-पिता दोनों ही श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे। जिनका प्रभाव आत्मानन्द जी महाराज पर भी पडा़ और ये भी श्रीकृष्ण भक्त हो गये। ये श्रीकृष्ण की अनन्य भक्ति और साधना में सदैव लीन होकर पौराणिक एवं आध्यात्मिक ग्रन्थों का अध्ययन करके परमेश्वर श्रीकृष्ण के समस्त गूढ़ रहस्यों और सम्पूर्ण आध्यात्मिक चरित्रों को गहराई से जाना और परमेश्वर श्रीकृष्ण के स्वरूप को अपने अन्तर्मन में देखा और अनुभव भी किया। इसके बाद इन्होंने यह संकल्प लिया कि परमेश्वर श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके उपदेशों को जन-जन तक पहुँचाना है। इसके लिए उन्होंने अबतक निम्नलिखित कार्य किया।
उपलब्धियाँ-
(क)- गोपाचार्य हंस श्री आत्मानन्द जी महाराज ने श्रीकृष्ण के उपदेशो और उसके वंश विस्तार को जन-जन तक पहुँचाने के लिए 10 जनवरी 2019 को यूट्यूब पर "यादव सम्मान" नाम से एक चैनल बनाकर परमेश्वर श्रीकृष्ण के उपदेशों, उसके गूढ़ रहस्यों और उनके द्वारा सृष्टि सर्जन तथा उनके वंश विस्तार को विडियो के माध्यम से बतान प्रारम्भ किया। इनके चैनल के विडियो को अबतक (आज इस किताब के इस अध्याय के लिखने तक - 07-03-2026) भारत सहित अन्य देशों के कुल- 4 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा और श्रीकृष्ण के गूढ़ रहस्यो को गहराई से जाना और समझा। इनके चैनल से सबसे ज्यादा लाभ यह हुआ कि यादव समाज के बहुत से लोग एक दूसरे जुड़े सके, जिससे आपसी विचारों का आदान-प्रदान होना और आसान हुआ।
इस सम्बन्ध में लेखक- गोपाचार्य हंस श्री माता प्रसाद जी का कहना है कि "आत्मानन्द जी महाराज द्वारा यादवों के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को जगाने के लिए जो प्रयास किया गया, वह अद्वितीय है"।
(ख)- इनकी दूसरी महत्वपूर्ण उपलब्धि- गोपेश्वर श्रीकृष्ण सर्वस्वम् कथा संस्था (G.S.S.K.S) की स्थापना है। इन्होंने 20 नवंबर 2023 को गोपाष्टमी के दिन अपने दो सहयोगी साथियों (मता प्रसाद और योगेश कुमार रोही) को लेकर इस महत्वपूर्ण संस्था की स्थापना किया। उसी समय उन्होंने (मता प्रसाद और योगेश कुमार रोही) दोनों को एक ही साथ औपचारिक घोषणा करते हुए संस्था के गोपाचार्य हंस पद अभिषिक्त किया और अपने स्वयं गोपाचार्य हंस पद पर आसीन हुए। तभी से इन तीनों को गोपाचार्य हंस पदनाम नाम से जाना जाता है।
इस महत्वपूर्ण संस्था के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी इस पुस्तक की परिशिष्ट कथा भाग-(7) में दी गई है।
(ग)- इनका तीसरा सबसे महत्वपूर्ण कार्य श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" और "यदुवंश संहिता" जैसी दो महत्वपूर्ण किताब को लिखवाने का है। इनके ही मार्गदर्शन में "श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" और "यदुवंश संहिता" नाम की महत्वपूर्ण किताब को दो विद्वान लेखकों- गोपाचार्य श्री माता प्रसाद यादव और गोपाचार्य श्री योगेश रोही द्वारा लिखी गई है, जो श्रीकृष्ण पर लिखी गई अबतक की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक मानी जाती हैं।
अब यहाँ पर कुछ लोगों को यह संशय अवश्य हुआ होगा कि "श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" पुस्तक में परमेश्वर श्रीकृष्ण के बारे में ऐसा क्या लिखा गया है वह अबतक की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक हो गई। तो इस सम्बन्ध में ज्यादा तो नहीं किन्तु उसकी विषय सूची को अवश्य बताना चाहूँगा जिससे आप स्वयं निर्णय कर सकते हैं कि यह श्रीकृष्ण पर लिखी गई "श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" अबतक की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक क्यों है।
"श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" की विषय सूची-
अध्याय-
(१)- पूजा-अर्चना के विधि- विधान एवं गलत कथाओं को सुनने व कहने के दुष्परिणामों का वर्णन।
[क] - परमेश्वर की सार्थकता व पहचान।
[ख] - तैंतीस (३३) कोटि देवता में किसकी पूजा करें ?
[ग] - श्रीकृष्ण पूजा के लाभ। [घ] - शिव पूजा के लाभ
[ङ] - विष्णु पूजा के लाभ। [च] - श्रीराम पूजा के लाभ।
[छ] - देवी सावित्री व सरस्वती पूजा के लाभ।
[ज] - श्रीकृष्ण कथा कौन कह सकता हैं ?
[झ] - गलत कथा कहने व सुनने के दुष्परिणामों का वर्णन
[ञ] - सच्चे गुरु की पहचान।
(२)- श्रीकृष्ण का स्वरूप एवं उनके गोलोक का वर्णन।
(३)- श्रीकृष्ण के अतिरिक्त और कोई दूसरा परमेश्वर या परमशक्ति नही है।
(४)- गोलोक में गोप-गोपियों सहित नारायण, शिव, ब्रह्मा आदि देवताओं की उत्पत्ति तथा सृष्टि का विस्तार।
(५)- भगवान श्रीकृष्ण का सदैव गोप होना तथा गोपकुल में उनका अवतरण।
(६)- गोप-कुल के श्रीकृष्ण सहित कुछ महान पौराणिक व्यक्तियों का परिचय।
भाग- (१) गोपेश्वर श्रीकृष्ण का परिचय।
भाग- (२) श्रीराधा का परिचय।
भाग- (३) पुरुरवा और उर्वशी का परिचय।
भाग- (४) आयुष, नहुष, और ययाति का परिचय।
(७)- गोप कुल के यादव वंश का उदय एवं उसके प्रमुख सदस्यपतियों का परिचय।
भाग- (१) महाराज यदु का परिचय।
भाग- (२) हैहय वंशी यादवों का परिचय।
भाग- (३) यदु पुत्र- क्रोष्टा और उनके वंशज।
(८)- यादवों का मौसल युद्ध तथा श्रीकृष्ण का गोलोक गमन।
भाग- (१)- यादवों के सम्पूर्ण विनाश की वास्तविकता एवं श्रीकृष्ण को बहेलिए से मारे जाने का खण्डन
भाग- (२)- श्रीकृष्ण का गोलोक गमन।
(९)- यादवों की जाति, वर्ण, वंश, कुल एवं गोत्र।
भाग- (१) जातियों की मौलिकता (Originality) एवं आभीर जाति की उत्पत्ति।
भाग- (२) भारतीय समाज में पञ्च-प्रथा की संकल्पना।
[क]- पञ्चमवर्ण वर्ण की उत्पत्ति।
[ख]- ब्रह्माजी के चातुर्वर्ण्य की उत्पत्ति।
[ग] - वैष्णव वर्ण और चातुर्वर्ण्य में अन्तर-
[१]- जन्मगत एवं कर्मगत अन्तर।
[२]- यज्ञमूलक एवं भक्तिमूलक अन्तर।
[३]- भेदभाव एवं समतामूलक अन्तर-
भाग- (३) यादवों का वंश।
भाग- (४) यादवों का कुल।
भाग- (५) यादवों का गोत्र।
(१०)- यादवों का वास्तविक गोत्र कार्ष्ण है या अत्रि ?
(११)- वैष्णव वर्ण के सदस्यों के प्रमुख कार्य एवं दायित्व।
भाग- [१] गोपों का ब्राह्मणत्व (धर्मज्ञ) कर्म-
(क)- सत्यनारायण व्रत कथा के मुख्य पात्र अहीर हैं।
(ख)- अहीर कन्या वेदमाता गायत्री का परिचय
(ग)- यज्ञों में हवन को ग्रहण करने वाली गोपी स्वाहा और स्वधा का परिचय।
(घ)- ब्रह्माण्ड विदुषी गोपी शतचन्द्रानना का परिचय।
भाग- [२] गोपों का क्षत्रित्व कर्म।
भाग- [३] गोपों का वैश्य कर्म।
भाग- [४] गोपों का शूद्र कर्म।
(१२)- वैष्णव वर्ण" के गोपों की पौराणिक ग्रन्थों में प्रशंसा एवं सांस्कृतिक विरासत-
भाग [१]- गोपों की पौराणिक प्रशंसा।
भाग [२]- भारतीय संस्कृति में गोपों का योगदान।
(क)- हल्लीसं एवं 'रास' नृत्य। (ख)- गोपों की देन "पञ्चम वर्ण"। (ग)- किसान और कृषि शब्द कृष्ण सहित गोपों की देन है। (घ)- आर्य व ग्राम संस्कृति के जनक गोप हैं। (ङ)- आभीर छन्द और आभीर राग।
अतः "श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" की विषय सूची को देखने से ही समझ में आता है कि यह किताब अद्भुत, एवं अद्वितीय है।श्रीकृष्ण साराङ्गिणी को मंगवाने के लिए - मोबाइल नंबर- 919452533334 तथा 918077160219 पर कोई भी सम्पर्क कर सकता है। ये दोनों मोबाइल नंबर उन दो विद्वान लेखकों के हैं जिन्होंने दोनों किताबों को लिखा है।
(3)- गोपाचार्य श्री माता प्रसाद यादव
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(4)- गोपाचार्य हंस श्री योगेश कुमार रोही-
भारतीय अध्यात्म- दर्शन व उपनिषद तथा वेद एवं पुराणों के सम्यक अध्येता योगेश कुमार रोहि- का जन्म- 10 मार्च 1983 ईस्वी सन् को ग्राम- दभारा, पत्रालय- फरिहा, जिला- फिरोजाबाद में हुआ। परन्तु ग्राम आजादपुर पत्रालय पहाड़ीपुर ज़िला अलीगढ़ इनकी कर्मभूमि और साधना स्थली रही, जो कि इनकी माता जी का जन्म स्थान और इनकी ननिहाल भी है। पिता श्रीपुरुषोतम सिंह" कृषक होने के साथ साथ एक प्राइमरी जूनियर अध्यापक भी रहे, जो गणित, इतिहास, साहित्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समन्वित थे।
श्रीमद्भगवद्गीता का सांख्ययोग और भक्तियोग मूलक तथ्यो की व्याख्या तथा मन बुद्धि और आत्मा के स्वरूप की अर्थ समन्वित व्याख्या योगेश कुमार रोहि जी को जीवन के निर्माण की प्रक्रिया के यथार्थ बोध के सन्निकट प्रतीत हुई। परिणाम स्वरूप आपको श्रीमद्भगवद्गीता के अनुशीलन से जीवन की एक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई।
प्राचीन भारतीय संस्कृति के अन्वेषक, अध्येता होने के साथ साथ आप भारतीय शास्त्रों में विशेषतः भारतीय दर्शन वैशेषिक, सांख्य, योग और वेदान्त के सैद्धान्तिक विवेचक के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करने में सफल हुए। इसके लिए आपने भारतीय पुराणों का सम्यक् अनुशीलन करना ही उचित समझा तथा महाभारत" वाल्मीकि रामायण आदि महाकाव्यो के अतिरिक्त आपने भारतीय आध्यात्मिकता के दिग्दर्शन उपनिषदों के सम्यक अध्येता के रूप में जीवन का अधिकांश समय व्यतीत किया है।
श्री योगेश रोहि जी अध्ययन और ज्ञानार्जन कार्य अपने गृह क्षेत्र में ही रहकर किया और भारतीय संस्कृति के अतिरिक्त विश्व की भारोपीय संस्कृतियों के समता मूलक तथ्यों के शोध का कार्य प्रशस्त किया।
भाषा विज्ञान के क्षेत्र में आपकी पकड़ अधिक प्रसंशनीय है। आपके भाषा अध्ययन के विषय भारत और यूरोप की प्राचीन सांस्कृतिक भाषाएँ रहीं जिसमे संस्कृत ,ग्रीक, लैटिन, और फ्रॉञ्च आदि की शब्द व्युत्पत्ति (Etymology) में गहन रूचि थी।
एक मध्यम किसान परिवार में जन्म, फिर सत्संग से जुड़ाव, फिर लगातार अध्ययन,और समाज के साथ आपके अनवरत वैचारिक विमर्श ने जीवन को अनुभवों की एक नव्यता प्रदान की और गोपाचार्य हंस श्री आत्मानन्द जी महाराज के मार्गदर्शन में "श्रीकृष्ण साराङ्गिणी" और "यदुवंश संहिता" जैसी (दो) महत्वपूर्ण किताबों को लिखकर श्रीकृष्ण भक्तों के लिए भक्ति का एक उत्तम मार्ग प्रशस्त किया।
आप वर्तमान में गोपेश्वर श्रीकृष्ण सर्वस्वम् कथा संस्था के गोपाचार्य हंस पद को सुशोभित कर रहे हैं। इसके साथ आप इस महत्वपूर्ण संस्था के राष्ट्रीय इकाई उत्तर प्रदेश- का अध्यक्ष पद भी सम्हाल रहे हैं।
(5)- जाहल बेन अहीर
जाहर बेन अहीर का जन्म गुजरात के भावनगर जिले में हुआ है। ये देवा भाई अहीर की सुपुत्री हैं। जाहल बेन अहीर वर्तमान में गुजरात की एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और वक्ता हैं, जो मुख्य रूप से यदुवंशी अहीर समाज के इतिहास, संस्कृति और एकता के लिए कार्य करती हैं। ये यादव समाज सेवा विकास ट्रस्ट (YSSVT) गुजरात की वर्तमान अध्यक्षा हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य- समाज की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना तथा फिजूलखर्ची और दहेज प्रथा को रोकना है। इनके द्वारा किए जाने वाले प्रमुख सामाजिक कार्य निम्नलिखित है-
(1)- जाहल बेन पूरे भारत में घूम-घूम कर अहीर समाज को उनके गौरवशाली इतिहास और क्षत्रिय परम्पराओं से परिचित कराती हैं।
(2)- ये दहेज मुक्त शादियों और सामूहिक विवाह सम्मेलनों के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उन्होंने पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से गुजरात के तलाजा (भावनगर) में सामूहिक विवाह सम्मेलनों का सफल आयोजन कर रही हैं। उनके वैवाहिक आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त दहेज प्रथा को समाप्त करना और सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना है। उनका कहना है कि-"शादियों में दहेज देने के बजाय अपनी बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश करें ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें"।
(3)- ये अहीर समाज को उनके क्षत्रिय गौरव और भगवान श्रीकृष्ण के वंशज होने के इतिहास से परिचित कराती हैं और एकजुट होने की अपील करती हैं। तथा अहीर/यादव समुदाय से अपनी खुद की पहचान और संस्कृति को बचाने की सदैव अपील करती रहती हैं।
(4)- ये सोशल मीडिया और सार्वजनिक सभाओं के माध्यम से अहीर/यादव समुदाय से अपनी पहचान और संस्कृति को बचाने की सदैव अपील करती रहती हैं।
(5)- ये सितंबर 2024 में भावनगर में बहनों की आत्मरक्षा के लिए 151 अहिराणियो को कटार वितरण करने का एक विशिष्ट कार्यक्रम आयोजित किया था। और कहा कि- देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अहीर रेजिमेंट' का गठन अति आवश्यक है।
(5)- ये *रास* को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का मुख्य साधन मानतीं हैं और इसे जन-जन तक पहुँचाना भी चाहतीं हैं। इसके लिए इन्होंने सितंबर 2023 को द्वारका में 37,000 से अधिक अहिराणियों को लेकर महारास का आयोजन कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
(6)- शैलेन्द्र सिंह यादव (इटावा)
समाजसेवी श्री शैलेन्द्र सिंह यादव का जन्म- उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के मल्हूपुर (किशनपुरा) गांव के एक कृषक परिवार में हुआ है। इनके पिता स्व० बाबू राम यादव भारतीय सेना में एक सैनिक थे। समाजसेवी श्री शैलेन्द्र सिंह यादव बकेवर इटावा के जनता कॉलेज से एम० कॉम०, एल एल बी० की डिग्री हासिल किया तथा शिक्षा के दौरान इन्होने समय-समय पर फुटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी, कबड्डी और कुश्ती में अच्छा प्रदर्शन किया। ये अपने जीवन के प्रारम्भिक 28 साल की उम्र से ही यादव समाज के इतिहास की खोज कर रहे हैं। इसके साथ ही इन्होंने विगत कई वर्षों से "अखिल भारतीय प्रबुद्ध यादव संगम " नाम के संगठन में प्रदेश सचिव के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इन्होंने कुछ वर्षों तक सामाजिक पत्रिका "यादव -शक्ति" का इटावा और औरैया जिले का प्रतिनिधित्व भी किया किन्तु पत्रिका के सम्पादक मण्डल से वैचारिक मतभेद होने के कारण अलग हो गये। समाजसेवी श्री शैलेन्द्र सिंह यादव वर्तमान में भरथना तहसील में वकालत कर रहे हैं। विशेष सूत्रों से पता चला है कि इन्हें "श्रीकृष्ण सर्वस्वम् कथा संस्था" के इटावा जिले का अध्यक्ष चुन लिया गया है।
(7)- मनोज कुमार यादव (बिहार)
समाजसेवी व श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त श्री मनोज कुमार यादव का जन्म 05 फरवरी 1973 को बिहार की राजधानी पटना के ढेकवाहाचक (परसावां) में हुआ है। इनके पिता का नाम श्री देवेन्द्र नाथ यादव तथा माता का नाम इन्दुमुनि यादव है। श्री मनोज कुमार यादव राजनिति विज्ञान से B.A की डिग्री हासिल करके समाज सेवा में जुट गए।
आप पटना के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में हर साल बाढ़ से होने वाली क्षति से बचाव के लिए जनता को जागरूक करने का काम किया, तथा गरीब व मलीन बस्तियों के बच्चों को पढ़ने के लिए जागरुकता अभियान चलाया। इससे प्रभावित होकर आपके क्षेत्र की जनता ने पिछली पञ्चायत चुनाव में पटना के शहरी क्षेत्र का सरपञ्च चुना। आप सदैव श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहकर गोपेश्वर श्रीकृष्ण की भक्ति का प्रचार-प्रसार करते हैं। वर्तमान में आप "गोपेश्वर श्रीकृष्ण सर्वस्वम् कथा संस्था" (G.S.S.K.S) के बिहार राज्य के प्रदेश अध्यक्ष हैं।
(8)- सुनील यादव सुल्तानपुरिया
श्रीकृष्ण भक्त एवं समाज सेवी श्री सुनील यादव का जन्म 01 जनवरी 1993 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिला के ग्राम साढ़ापुर में एक किसान परिवार में हुआ है। इनके पिता का नाम मुनेलाल यादव हैं। सुनील यादव एक सफल कृषक और पशुपालक होने के साथ ही श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त हैं। चट्टी-चौराहे या किसी विशेष मौके पर श्रीकृष्ण भक्ति का प्रचार-प्रसार करने में आपको विशेष महारत हासिल है। जब श्रीकृष्ण साराङ्गिणी पुस्तक लिखी जा रही थी उस समय आपने किसी प्रसंग विशेष पर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया था।
आप यादव समाज की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए अपने क्षेत्र में विशेष रूप जाने जाते हैं। आप वर्तमान में "गोपेश्वर श्रीकृष्ण सर्वस्वम् कथा संस्था" (G.S.S.K.S) के उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के जिला अध्यक्ष हैं।
(9) कालीशंकर यदुवंशी
काली शंकर यदुवंशी का जन्म 14 अप्रैल 1981 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा (ब्रह्मपुर) क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित यादव परिवार में हुआ है। इसके पिता स्वर्गीय मोतीलाल यादव हैं। काली शंकर यदुवंशी की शिक्षा गोरखपुर के गवर्नमेंट जुबली इंटर कॉलेज से हुई है। आप एक राजनेता के साथ साथ एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। आप अपनी स्वयं पार्टी (वन भारत सिटीजन पार्टी) के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। आप मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं और यदुवंश (यादव समाज) की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।
आप पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहते हैं। इसी को ध्यान में रखकर आपने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पिछड़ा वर्ग और दलित समाज के सहयोग से एक मजबूत विकल्प बनने का जो लक्ष्य रखा है वह आपके सक्रिय राजनीतिक पहल का सराहनीय कदम है। इसके साथ ही आपने भारतीय सेना में अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपे हैं इसके लिए यादव समाज आपका सदैव आभारी रहेगा।
आपके द्वारा गोरखपुर के चौरी-चौरा (ब्रह्मपुर) में 'श्री यदुधाम पीठ' का निर्माण और वहाँ पर यदुवंश के आदिपुरुष महाराज यदु की पहली भव्य प्रतिमा स्थापित करने का जो संकल्प लिया गया है वह निश्चय ही समस्त यदुवंशियों की अस्मिता और गौरव का प्रतीक होगा इसमें कोई संशय नहीं है।
आपके द्वारा सर्वप्रथम चौधरी राजित सिंह यादव की स्मृति में उनके जन्म दिवस (15 अप्रैल) को राष्ट्रीय यादव दिवस' के रूप मनाने का जो सफल अभियान चलाया गया वह हमारे यादव समाज को जागरूक करने का एक सफल अभियान रहा। इसके साथ ही आपने यादवों द्वारा उत्कृष्ट कार्य किये जाने पर उनको श्रीकृष्ण सम्मान देने की जो योजना बनाई है वह भी एक सराहनीय कदम है।
आप श्रीकृष्ण धर्म ट्रस्ट के अध्यक्ष रहकर सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्जागरण के कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान (CSC) में राज्य समन्वयक के रूप में भी कार्य किया तथा आप यूपी को-ऑपरेटिव बैंक, लखनऊ के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं।
अध्याय (12)
संगीत जगत के प्रमुख यादव
इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य- खेल, सिने एवं संगीत जगत के प्रमुख यादवों के बारे में जानकारी देना है। इसको सम्पूर्ण रूप से जानने के लिए- (क,ख,और ग) तीन भागों तथा कई उपभागों में विभाजित किया गया है। जो निम्नलिखित है -
(क)- खेल जगत के प्रमुख यादव
(A) - क्रिकेट
1- सूर्यकुमार यादव 2- कुलदीप यादव 3- उमेश यादव
4- पूनम यादव 5- राधा यादव
(B)- कुस्ती
1- नरसिंह पंचम यादव 2- वीरेंद्र सिंह यादव
3- गुरु हनुमान (विजय पाल यादव)
(ख)- सिने जगत के प्रमुख यादव
1- खेसारी लाल यादव 2- राजपाल यादव 3- लीना यादव 4- पारुल यादव 5- नरसिंह यादव 6- बाबा यादव
(ग)- वाद्य एवं संगीत जगत के प्रमुख यादव
1- हीरालाल यादव 2- काशीनाथ यादव
2- राम कैलाश यादव 4- विहारी लाल यादव
5- निरहुआ 6- संजय यदुवंशी (अवधी गायक)
भाग (A) क्रिकेट
1- सूर्यकुमार यादव
भारतीय क्रिकेट टीम के टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव का जन्म 14 सितंबर 1990 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ है, लेकिन उनका पैतृक मूल निवास उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के हथौड़ा गाँव है। उनके पिता का नाम अशोक कुमार यादव तथा माता का नाम सपना यादव है।। पिता जी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में एक वैज्ञानिक/इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे अब मई 2025 में सेवानिवृत्त (Retire) हुए हैं।
सूर्यकुमार यादव वाराणसी में अपने चाचा विनोद कुमार यादव के मार्गदर्शन में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। जब वे लगभग 10 वर्ष के थे, तब उनके पिता की नौकरी मुंबई में लगने के कारण उनका पूरा परिवार गाजीपुर से मुंबई स्थानांतरित हो गया।
इन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत शिक्षा से किया। वे मुंबई के पिल्लई कॉलेज ऑफ आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस से बीकॉम किया है और मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट खेलकर अपना करियर शुरू किया।
प्रमुख उपलब्धियाँ
(1)- सूर्यकुमार को मैदान के चारों ओर शॉट खेलने की क्षमता के कारण 'मिस्टर 360' के रूप में जाना जाता है।
(2)- सूर्यकुमार यादव गेंदों के मामले में सबसे तेज़ 3,000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज़ हैं जिन्होंने मात्र 1822 में यह रिकॉर्ड बनाया।
(3)- सूर्यकुमार यादव के नाम T-20 में 4 शतक हैं, जो किसी भी भारतीय द्वारा दूसरे सबसे अधिक हैं। 2024 टी20 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा थे और फाइनल में उन्होंने डेविड मिलर का ऐतिहासिक कैच पकड़कर जीत पक्की की थी
(4)- सूर्यकुमार यादव लंबे समय तक ICC T20I रैंकिंग में शीर्ष पर रहे हैं और 912 रेटिंग पॉइंट्स हासिल करने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज हैं।
(5)- रोहित शर्मा के संन्यास के बाद, इनको जुलाई 2024 में उन्हें टी20 टीम का पूर्णकालिक कप्तान नियुक्त किया गया। उनकी कप्तानी में भारत ने एशिया कप 2025 (T20 फॉर्मेट) जीता और श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका एवं इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में जीत दर्ज की।
(6)- सूर्यकुमार यादव (IPL 2025) में 717 रन बनाकर मुंबई इण्डियंस के लिए एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया। जिसमें लगातार 16 मैचों में 25 से अधिक रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया और सीजन के MVP (मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर) चुने गए। ये भविष्य में और भी रिकॉर्ड बना सकते हैं।
(7)- आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 में सूर्यकुमार यादव की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण रही, क्योंकि उन्होंने न केवल भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में नेतृत्व किया, बल्कि मध्यक्रम के मुख्य स्तम्भ के रूप में भी योगदान दिया। उनकी कप्तानी में भारत ने 8 मार्च 2026 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर अपना तीसरा टी20 विश्व कप खिताब जीता।
टूर्नामेंट में उनकी प्रमुख भूमिकाएँ और प्रदर्शन इस प्रकार रहे-
नेतृत्व (कप्तान): सूर्यकुमार यादव ने रोहित शर्मा और विराट कोहली के संन्यास के बाद टीम की कमान सम्हाली और भारत को लगातार दूसरा (बैक-टू-बैक) टी20 विश्व कप खिताब जिताने वाले कप्तान बने। वह कपिल देव, एमएस धोनी और रोहित शर्मा के बाद विश्व कप जीतने वाले चौथे भारतीय कप्तान बने।
बल्लेबाजी: उन्होंने भारतीय बल्लेबाजी के "इंजन रूम" के रूप में काम किया। 9 पारियों में 30.25 की औसत से 242 रन बनाए।प्रमुख पारियाँ उन्होंने अमेरिका के खिलाफ पहले मैच में 49 गेंदों पर 84 रनों की कप्तानी पारी खेली।
सुपर 8 और सेमीफाइनल: सुपर 8 चरणों के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण 30+ के स्कोर बनाकर टीम की लय बनाए रखी और सेमीफाइनल तक 230 से अधिक रन जुटा लिए थे।
रणनीतिकार: फाइनल में उन्होंने अपनी चतुर कप्तानी का परिचय दिया, जैसे कि फिलीपींस (मिसप्रिंट सम्भवतः न्यूजीलैंड के फिन एलन) जैसे आक्रामक बल्लेबाजों के खिलाफ पावरप्ले में स्पिनर (अक्षर पटेल) का उपयोग करना, जिससे मैच का रुख भारत के पक्ष में मुड़ गया।
2- कुलदीप यादव
भारतीय क्रिकेटर कुलदीप यादव का जन्म 14 दिसंबर, 1994 को उन्नाव जिले में हुआ है। इनके पिता का नाम राम सिंह यादव एक ईंट भट्ठे के मालिक हैं। तथा इनकी माता का नाम उषा यादव है।
कुलदीप यादव एक ऐसे भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं, जो बाएँ हाथ के अपरम्परागत (चाइनामैन) स्पिनर के रूप में खेलते हैं। ये घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में दिल्ली कैपिटल्स का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुलदीप भारतीय टीम के उन प्रमुख सदस्यों में से एक रहे हैं जिन्होंने 2024 टी20 विश्व कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रमुख उपलब्धियाँ
(1)- ये अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट (वनडे) में दो हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज हैं।
(2)- कुलदीप यादव, अनिल कुंबले को पीछे छोड़ते हुए 150 वनडे विकेट तक पहुँचने वाले सबसे तेज भारतीय स्पिनर हैं। 2026 की शुरुआत में, वनडे गेंदबाजी रैंकिंग में 8 वें और टेस्ट रैंकिंग में 14 वें स्थान पर काबिज हैं।
(3)- कुलदीप यादव को उनकी अनूठी गेंदबाजी शैली के कारण 'चाइनामैन' कहा जाता है, जिसमें गेंद बाएँ हाथ की कलाई के स्पिनर द्वारा दाएँ हाथ के बल्लेबाज से दूर की ओर घूमती है। वह अपनी गुगली और फ्लिपर जैसी विविधताओं के लिए जाने जाते हैं।
3- उमेश यादव
क्रिकेटर उमेश यादव का जन्म 25 अक्टूबर 1987 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला में हुआ है और नागपुर में पले-बढ़े हैं। उनके पिता तिलक यादव कोयला खदान मजदूर थे। इनकी पत्नी तान्या वाधवा है। क्रिकेट में आने से पहले, उमेश यादव पुलिस या सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन वे परीक्षाओं में असफल रहे। ये भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज हैं, जो मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में अपनी 140-150 किमी/घण्टा की गति और घरेलू परिस्थितियों में घातक गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। 2015 विश्व कप में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। इनका टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में उच्चतम स्ट्राइक रेट (10 गेंदों में 31 रन) का रिकॉर्ड भी दर्ज है, जो उन्होंने 2019 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाया था।
4- पूनम यादव
क्रिकेटर पूनम यादव का जन्म 24 अगस्त 1991 को उत्तर प्रदेश के जिला मैनपुरी में हुआ है। इनके पिता रघुवीर सिंह यादव एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं तथा इनकी माँ मुन्ना देवी एक गृहिणी हैं। पूनम यादव एक अनुभवी भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेटर हैं, जो मुख्य रूप से अपनी घातक लेग-ब्रेक गुगली गेंदबाजी के लिए जानी जाती हैं। ये टी20 अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की ओर से सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हैं।
प्रमुख उपलब्धियाँ
पूनम यादव ने 2013 में अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और तब से वह भारतीय स्पिन गेंदबाजी का एक प्रमुख हिस्सा रही हैं। पूनम यादव भारत के लिए महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय (WT20I) में 98 विकेट के साथ दूसरी सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज हैं।
2017 महिला वनडे विश्व कप और 2020 टी20 विश्व कप के फाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं।
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पूनम यादव को 2019 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
5- राधा यादव
राधा यादव का जन्म 21 अप्रैल 2000 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ। हांलांकि इनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के अजोशी गाँव से है। राधा यादव का प्रारंभिक जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उनके पिता ओमप्रकाश यादव मुंबई में सब्जी और दूध की एक छोटी दुकान चलाते थे और उनका परिवार 225-250 वर्ग फुट के एक छोटे से घर में रहता था।
राधा यादव एक प्रमुख भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं, जो मुख्य रूप से बाएँ हाथ की स्पिनर के रूप में खेलती हैं। 2026 तक, वह भारतीय महिला टीम की एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं और उन्होंने हाल ही में 2025 महिला क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रमुख उपलब्धियाँ
राधा यादव ने 13 फरवरी 2018 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 (T20I) में और 14 मार्च 2021 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ही वनडे (ODI) में पदार्पण किया।
राधा यादव 2025 महिला क्रिकेट विश्व कप विजेता भारतीय टीम की सदस्य रहीं। तथा 2018 टी20 विश्व कप में वह भारत के लिए संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट (8 विकेट) लेने वाली गेंदबाज थीं। वह इस टूर्नामेंट में 5 विकेट लेने वाली पहली खिलाड़ी बनीं। इन्हें भारतीय टीम की सबसे बेहतरीन फील्डर्स में से एक माना जाता है।
(B)- कुस्ती
1- नरसिंह पंचम यादव
नरसिंह पंचम यादव का जन्म 6 अगस्त 1989 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के चोलापुर ब्लॉक के नीमा गाँव में हुआ है। इनके पिता का नाम पंचम यादव है तथा माता का नाम भुलना देवी है। नरसिंह के पिता स्वयं एक अच्छे पहलवान थे। उन्होंने ही नरसिंह को कुश्ती के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। नरसिंह के बड़े भाई, विनोद यादव, भी एक पहलवान हैं और वर्तमान में भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं।
नरसिंह पंचम यादव मुख्य रूप से 74 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं। इन्हें अप्रैल 2024 में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के एथलीट आयोग के अध्यक्ष चुना गया। वर्तमान में ये मुंबई पुलिस उपायुक्त के पद पर तैनात हैं।
प्रमुख उपलब्धियाँ
नरसिंह पंचम यादव एक विशिष्ट भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान हैं, जिन्होंने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों (74 किग्रा) में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। उन्होंने 2015 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक के साथ रियो ओलंपिक 2016 के लिए कोटा हासिल किया और लगातार तीन बार (2011-2013) 'महाराष्ट्र केसरी' का प्रतिष्ठित खिताब जीता। उन्हें 2012 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
2- वीरेंद्र सिंह यादव
पहलवान वीरेंद्र सिंह यादव हरियाणा के झज्जर जिले के एक प्रसिद्ध मूक-बधिर भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान हैं। इनका जन्म: 1 अप्रैल 1986 को ससरोली गाँव, झज्जर (हरियाणा) में हुआ है। इनके पिता अजीत सिंह यादव हैं जो (CISF) में अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हैं। इनकी माता का नाम मन्ना देवी है। इन्हें गूंगा पहलवान' के नाम से भी जाना जाता है जो भारत के सबसे सफल बधिर (Deaf) एथलीटों में से एक हैं। उनके जीवन और संघर्ष पर 'गूंगा पहलवान' नाम से एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनी है।
प्रमुख उपलब्धियाँ
वीरेंद्र सिंह यादव ने बधिर ओलंपिक- 2005 (मेलबर्न), 2013 (सोफिया), और 2017 (सैमसन) में स्वर्ण पदक और 2009 (ताइपे) में कांस्य पदक जीता।
भारत सरकार द्वारा चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म श्री (2021) तथा खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें 2015 में अर्जुन पुरस्कार मिला।
3- गुरु हनुमान (विजय पाल यादव)
गुरु हनुमान जिनका नाम विजय पाल यादव था, का जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले के चिड़ावा (Chirawa) कस्बे में हुआ था। इनके पिता का नाम ईश्वर दत्त यादव था। विजय पाल यादव आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया और भारतीय कुश्ती को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार और पद्म श्री जैसे सम्मान प्राप्त किया।
उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने और ब्रह्मचर्य का पालन किया। वे अक्सर कहते थे, "मैंने कुश्ती से शादी की है"।
गुरु हनुमा का निधन 24 मई 1999 को हरिद्वार जाते समय मेरठ के पास एक कार दुर्घटना में हुआ था। उनकी याद में नई दिल्ली के कल्याण विहार स्टेडियम में उनकी एक प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
प्रमुख उपलब्धियाँ
इनके मार्गदर्शन में दारा सिंह, गुरु सतपाल, सुशील कुमार, करतार सिंह और योगेश्वर दत्त जैसे दिग्गज पहलवानों ने प्रशिक्षण लिया।
इनके तीन शिष्य (सुदेश कुमार, प्रेम नाथ और वेद प्रकाश) ने 1972 के कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीते थे।
इनको भारत सरकार द्वारा 1983 में पद्मश्री से सम्मानित तथा 1987-88 में खेल प्रशिक्षकों के लिए सर्वोच्च पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया।
(ख)- सिने जगत के प्रमुख यादव
1- खेसारी लाल यादव
समाजसेवी, राजनेता, गायक और एक्टर श्री खेसारी लाल यादव उर्फ शत्रुघ्न कुमार यादव का जन्म 15 मार्च 1986 को बिहार के छपरा जिले में हुआ है। खेसारी लाल यादव के पिता का नाम मंगरू लाल यादव है। खेसारी के सुपरस्टार बनने से पहले, उनके पिता ने परिवार चलाने के लिए बहुत मेहनत की। वे दिल्ली में सुबह सड़क किनारे चना बेचते थे और रात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। खेसारी लाल अपनी मेहनत और बेहतरीन एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं, जो भोजपुरी के सबसे महंगे सितारों में से एक हैं।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक लोक गायक के रूप में की थी और पहला हिट एल्बम "माल भेटाई मेला" था। 2012 में "साजन चले ससुराल" से उन्हें फिल्मों में बड़ी पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने 'मेहंदी लगा के रखना', 'संघर्ष', 'लिट्टी चोखा' जैसी कई हिट फिल्में दीं।
उन्होंने बॉलीवुड में भी काम किया और 'कोयलांचल' फिल्म के लिए गाना गाया। इसके अलावा, उन्होंने रियलिटी शो 'बिग बॉस 13' में भी भाग लिया था। उनके गाने बहुत लोकप्रिय होते हैं, इस वजह से उन्हें 'ट्रेंडिंग स्टार' के रूप में जाना जाता है। यूट्यूब पर उनके गाने हमेशा ट्रेंड में रहते हैं।
उन्होंने 2025 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बिहार विधानसभा चुनाव में राजद (RJD) के उम्मीदवार के रूप में छपरा से चुनाव लड़े किन्तु हार गए।
प्रमुख उपलब्धियाँ
2011 में 'साजन चले ससुराल' से उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
खेसारी लाल यादव ने अपने करियर में 70 से अधिक फिल्में और 5000 से ज्यादा गाने गा कर महारत हासिल किया।
इनको 2018 में फिल्म 'मेहंदी लगा के रखना के लिए सबरंग फिल्म अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का पुरस्कार मिला।
2017 में इनको दादा साहेब फाल्के अकादमी प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
भोजपुरी अवार्ड' के तहत उन्हें 2021 और 2022 में सोशल मीडिया किंग' का खिताब दिया गया।
2023 में फिल्म 'बोल राधा बोल' के लिए उन्हें एक बार फिर बेस्ट एक्टर और बेस्ट सिंगर चुना गया।
प्रसिद्ध रैपर बादशाह के साथ मिलकर उन्होंने सुपरहिट गाने "पानी पानी" का भोजपुरी वर्जन बनाया, जो काफी वायरल हुआ।
उन्होंने 2022 में फिल्म 'आशिकी' के माध्यम से पटकथा लेखक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। इसके साथ ही उन्होंने रियलिटी शो 'बिग बॉस 13' में एक प्रतियोगी के रूप में भाग लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
खेसारी लाल यादव कई सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं उन्होंने एक सार्वजनिक विवाह कार्यक्रम में भाग 11 गरीब लड़कियों की शादी करवाई और दुल्हन को एक-एक मोटरसाइकिल दिया।
2- राजपाल यादव
राजपाल उर्फ नौरंग यादव का जन्म 16 मार्च 1971 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के कुंडरा गाँव में हुआ था। छोटे कद (लगभग 5 फुट 2 इंच) को अपनी कमजोरी न मानकर उन्होंने इसे अपनी पहचान बनाया। वे अब भी हिंदी सिनेमा में एक सक्रिय और प्रिय हास्य अभिनेता हैं। राजपाल यादव का पहला विवाह करुणा से हुआ था, जिनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उन्होंने राधा से शादी की, जो उनसे उम्र में काफी छोटी हैं।
भारतीय सिनेमा के एक प्रख्यात अभिनेता और हास्य कलाकार हैं, जो अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और ऊर्जावान अभिनय के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1999 में फिल्म दिल क्या करे से किया।
उन्हें असली पहचान राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'जंगल' (2000) में 'सिप्पा' नामक नकारात्मक भूमिका (विलेन) से मिली, जिसके लिए उन्हें 'सेंसुई स्क्रीन बेस्ट एक्टर' (नेगेटिव रोल) का पुरस्कार भी मिला।
उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया है। जिसमें प्रमुख रूप से कॉमेडी फ़िल्में- हंगामा, वक़्त: द रेस अगेंस्ट टाइम, चुप चुप के, गरम मसाला, फिर हेरा फेरी, ढोल, और भूल भुलैया (छोटा पंडित) काफी फेमस हैं।
फिल्म "मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूँ" के लिए उनको यश भारती पुरस्कार मिला है।
कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें जनपद रत्न अवार्ड दिया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें फिल्मफेयर और स्क्रीन अवार्ड्स के लिए कई बार नामांकित किया गया है।
बड़े दुःख की बात है कि राजपाल यादव वर्तमान में तिहाड़ जेल में हैं। कारण यह है कि 2010 की उनकी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए लिए गए 5 करोड़ रुपये के लोन के चेक बाउंस से जुड़ा है, जो अब ब्याज के साथ लगभग 9 करोड़ रुपये हो चुका है। इस दुःख की घड़ी में यादव समाज सहित सोनू सूद और गुरमीत चौधरी जैसे कई फिल्मी सितारों ने उनका सहयोग करने की इच्छा जताई है।
4- लीना यादव
लीना यादव का जन्म 6 जनवरी 1971 को मध्य प्रदेश में एक भारतीय सेना के जनरल के घर हुआ था। उन्होंने दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज से इकोनॉमिक्स में स्नातक और मुंबई के सोफिया कॉलेज से मास कम्युनिकेशन किया है। और जाने-माने सिनेमैटोग्राफर असीम बजाज से शादी की है। लीना ने अपने करियर की शुरुआत- लीना ने टेलीविजन उद्योग में एक सम्पादक के रूप में करियर शुरू किया और लगभग 12 वर्षों तक शो का निर्देशन किया। उनकी पहली फीचर फिल्म 'शब्द' (2005) थी। इसके बाद 'तीन पत्ती' (2010) आई, जिसमें अमिताभ बच्चन और बेन किंग्सले ने अभिनय किया।
लीना यादव की सबसे सफल फिल्म 'पार्च्ड' है, जो पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं के संघर्षों को उजागर करती है। इस फिल्म ने दुनिया भर के 57 फिल्म समारोहों में भाग लिया और 30 से अधिक अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते।
4- पारुल यादव
पारुल यादव एक प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय सिनेमा, विशेषकर कन्नड़ फिल्मों में उनके काम के लिए जाना जाता है।
उन्होंने 2004 में तमिल फिल्म 'ड्रीम्स' से अभिनय की शुरुआत की थी। इससे पहले उन्होंने मॉडलिंग और टेलीविजन (जैसे 'भाग्य विधाता') में काम किया था। उन्हें 2012 की कन्नड़ फिल्म 'गोविंदाया नमः' के गाने 'प्यारगे आगबिट्टाइते से जबरदस्त लोकप्रियता मिली।
उनकी फिल्म 'आतगारा' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ कन्नड़ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
5- नरसिंह यादव
भारतीय अभिनेता और हास्य कलाकार नरसिंह यादव का जन्म 15 मई, 1963 को भारत के एकोठी, हैदराबाद, तेलंगाना में हुआ था। उनके पिता का नाम रजैया और माता का नाम लक्ष्मी नरसम्मा था।
नरसिंग यादव एक दिग्गज भारतीय अभिनेता थे, जिन्होंने 300 से अधिक तेलुगु फिल्मों के साथ-साथ हिंदी और तमिल सिनेमा में मुख्य रूप से हास्य और खलनायक की भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने 1979 में 'हेमा हिमीलू' से शुरुआत की और क्षणक्षणम और पोकिरी जैसी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध थे। 31 दिसंबर 2020 को गुर्दे (किडनी) संबंधी बीमारी के कारण हैदराबाद में उनका निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी चित्रा यादव और एक बेटा है।
उन्होंने रामगोपाल वर्मा की फिल्मों के माध्यम से भी हिंदी सिनेमा में पहचान बनाई। उनकी प्रमुख फिल्मों में बाशा (1995), मास्टर (1997), टैगोर (2003), मास (2004) और अला वैकुंठपुरमूलु (2020) शामिल हैं।
6- बाबा यादव
बाबा यादव उर्फ राजेश कुमार यादव का जन्म 18 फरवरी को हुआ था। ये भारतीय फिल्म उद्योग, विशेष रूप से बंगाली सिनेमा (टॉलीवुड) के एक जाने-माने कोरियोग्राफर और निर्देशक हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1997 में फिल्म 'मोहब्बत' से एक कोरियोग्राफर के रूप में की थी और बाद में निर्देशन की दुनिया में कदम रखा।
उन्होंने 'लगान' (2001) और 'देवदास' (2002) जैसी बड़ी बॉलीवुड फिल्मों में कोरियोग्राफर के रूप में काम किया है। उनके काम को उनकी सटीकता और आधुनिक व पारम्परिक शैलियों के मिश्रण के लिए सराहा जाता है।
उन्होंने 2013 में फिल्म 'बॉस: बॉर्न टू रूल' के साथ निर्देशन की शुरुआत की। उनकी अन्य चर्चित निर्देशित फिल्मों में 'गेम' (2014), 'बादशाह द डॉन' (2016) और 'विलेन' (2018) शामिल हैं।
बाबा यादव ने कई रियलिटी शो में जज और मेंटर की भूमिका भी निभाई है, जहाँ वे युवा डांसरों का मार्गदर्शन करते हैं।
(ग)- संगीत जगत के प्रमुख यादव
1- हीरालाल यादव 2- काशीनाथ यादव
3- राम कैलाश यादव 4- विहारी लाल यादव
5- निरहुआ 6- संजय यदुवंशी (अवधी गायक)
7- आधार सिंह यादव
1- हीरालाल यादव
बिरहा सम्राट हीरालाल यादव का जन्म 7 मार्च 1936 को वाराणसी के सरायगोवर्द्धन (चेतगंज) में एक गरीब परिवार में हुआ था। उन्होंने बिरहा की बारीकियाँ लोक गायक रमन दास, होरी और गाटर खलीफा जैसे गुरुओं से सीखीं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत का पुट था, जिसने बिरहा को एक विशिष्ट विधा के रूप में स्थापित किया। वे गायकी में 'हीरा-बुल्लू' की प्रसिद्ध जोड़ी के रूप में सात दशकों तक सक्रिय रहे।
वे भोजपुरी लोक संगीत के एक स्तम्भ थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध धुनों और गीतों में "सुई के छेदा में हाथी" अत्यंत लोकप्रिय है, जो उनके प्रसिद्ध 'जौनपुर काण्ड' बिरहा संग्रह का हिस्सा है।
उनका निधन 12 मई 2019 को 93 वर्ष की आयु में वाराणसी में हुआ। प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया था।
प्रमुख उपलब्धियाँ
भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
उन्हें 2015 में उत्तर प्रदेश सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान यश भारती दिया गया और 1993-94 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिया गया।
2011 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा सम्मानित किया गया।
2- काशीनाथ यादव
प्रसिद्ध बिरहा गायक और पूर्व मंत्री काशीनाथ यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के कासिमबाद क्षेत्र के पास स्थित सरौरा गाँव में 11 अक्टूबर 1958 को हुआ था। उन्हें भोजपुरी लोक विधा 'बिरहा' में महारत हासिल करने के कारण 'बिरहा सम्राट' के नाम से भी जाना जाता है।
प्रमुख उपलब्धियाँ
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से की थी और संस्थापक कांशीराम के करीबी माने जाते थे, जिन्होंने उन्हें पहली बार एमएलसी बनने का मौका दिया था। बाद में वे मुलायम सिंह यादव के सम्पर्क में आए और सपा में शामिल हो गए।
वर्तमान में वे समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता हैं। मार्च 2021 में उन्हें समाजवादी पार्टी के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
वे उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मन्त्री रह चुके हैं और तीन बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य (MLC) के रूप में कार्य किया है।
संगीत के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें 2016 में राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'यश भारती पुरस्कार' से सम्मानित किया था।
3- राम कैलाश यादव
स्वर्गीय राम कैलाश यादव जी का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जसवा गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम रघुवीर था। राम कैलाश यादव एक साधारण किसान परिवार से थे और बचपन में भैंस चराने के साथ-साथ गुनगुनाने का शौक रखते थे, आगे चलकर वे 'बिरहा सम्राट' और बिरहा शिरोमणि बने। उन्होंने अपनी जादुई आवाज और कला के जरिए बिरहा को न केवल देश में, बल्कि विदेशों तक भी पहचान दिलाई।
उनके लोकप्रिय एल्बम और गाने-
उन्होंने कई प्रसिद्ध बिरहा एल्बम दिए, जिनमें 'राम कलेवा', 'सईया गवनवा ले जाई', और 'धनुष यज्ञ' प्रमुख हैं।
धार्मिक और निर्गुणी भजन: उन्होंने धार्मिक कथाओं जैसे 'शिव भक्त महिमा', 'धर्मी हरिश्चंद्र' और 'हरिद्वार की कहानी' को अपनी आवाज दी। इसके अलावा वे निर्गुणी भजनों के लिए भी प्रसिद्ध थे।
गीतकार व संगीतकार: गायन के साथ-साथ वे एक प्रतिभाशाली संगीतकार और गीतकार भी थे, जो खुद के गानों की रचना भी करते थे।
5- निरहुआ
दिनेश लाल यादव उर्फ 'निरहुआ' का जन्म 2 फरवरी 1979 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के टंढवा गाँव में हुआ था। उनकी शादी साल 2000 में मंशा देवी से हुई थी। उनके दो बेटे (आदित्य और अमित) और एक बेटी (अदिति) हैं।
दिनेश लाल यादव, जिन्हें दुनिया "निरहुआ" के नाम से जानती है, भोजपुरी फिल्म जगत के सबसे बड़े सुपरस्टार्स, गायक और राजनेता हैं। उनके बारे में मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:
2003 में आए उनके सुपरहिट संगीत एल्बम 'निरहुआ सटल रहे' की अपार सफलता के बाद उन्हें 'निरहुआ' के नाम से घर-घर में पहचान मिली।
उन्होंने 2006 में फिल्म 'हमका ऐसा वैसा ना समझा' से अभिनय की शुरुआत की। उनकी फिल्म 'निरहुआ रिक्शावाला', 'निरहुआ हिंदुस्तानी' (सीरीज), 'पटना से पाकिस्तान' और 'बॉर्डर' जैसी फिल्में उनकी बड़ी सफलताओं में गिनी जाती हैं।
निरहुआ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सक्रिय नेता हैं।उन्होंने 2022 के उपचुनाव में आजमगढ़ लोकसभा सीट से जीत हासिल की और 2024 तक वहाँ के सांसद रहे।
6- संजय यदुवंशी (अवधी गायक)
संजय यदुवंशी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के रहने वाले एक प्रसिद्ध लोक गायक और यूट्यूबर हैं। उन्हें अवधी गानों का पहला सुपरस्टार माना जाता है क्योंकि उन्होंने अवधी भाषा को एक नई पहचान और लोकप्रियता दिलाई है। इनकी लोकप्रियता को इसी से समझ सकते हैं कि- एक बार गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह के एक कार्यक्रम (राष्ट्र कथा) के दौरान संजय यदुवंशी को देखने के लिए इतनी भारी भीड़ उमड़ पड़ी कि सुरक्षा कारणों से पुलिस को उन्हें कुछ समय के लिए नजरबंद करना पड़ा था, ताकि अव्यवस्था न फैले।
संजय एक साधारण परिवार से आते हैं; उनके पिता हरियाणा में ऑटो चलाते थे। कभी वे सेना में जाने और UPSC की तैयारी करने का सपना देखते थे, लेकिन आज अपनी गायकी और कॉमेडी के लिए करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। वे मुख्य रूप से अवधी में गाते हैं, लेकिन उनके गीतों में हिंदी और भोजपुरी का भी पुट होता है। वे अपने जोशीले और 'रंगबाजी' शैली के गीतों के लिए जाने जाते हैं।
उन्हें असली पहचान (108 पे लदके जाओ) गाने से मिली, जो युवाओं के बीच काफी चर्चित और विवादित भी रहा।
7- आधार सिंह यादव (स्वामी आधार चैतन्य)
संगीत और लोक-कला के क्षेत्र में स्वामी आधार चैतन्य जिन्हें आधार सिंह यादव के नाम से भी जाना जाता है का नाम अत्यन्त महत्वपूर्ण है। वे उत्तर प्रदेश के ब्रज और बुंदेलखंड क्षेत्र के एक प्रसिद्ध कथावाचक और लोक गायक हैं।
संगीत जगत में उनके योगदान और परिचय के मुख्य बिन्दु निम्नलिखित हैं-
1- वे मुख्य रूप से भागवत कथा, देहाती किस्से, लोकगीत और भजनों के गायन के लिए जाने जाते हैं।
2- उनके कई किस्से और एलबम जैसे नरसी का भात, गंगा अवतार, और 'आज के बाबा' ग्रामीण अंचलों में बहुत लोकप्रिय हैं। नरसी का भात: यह उनका सबसे प्रसिद्ध किस्सा है, जिसमें उन्होंने भक्त नरसी की कहानी और भगवान कृष्ण द्वारा उनकी सहायता का भावपूर्ण वर्णन है।
3- उन्हें 'स्वर सम्राट' की उपाधि से भी सम्बोधित किया जाता है। वे न केवल गायक हैं, बल्कि एक कुशल संगीतकार और गीतकार भी हैं।
4- वे यादव कुल से सम्बन्धित हैं और पिछले 50-60 वर्षों से अपनी गायन शैली के माध्यम से लोक संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
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