गुरुवार, 28 मई 2026

कल के लिए -

यदुवंश संहिता भारतीय इतिहास में एक युगान्तकारी और क्रान्तिकारी शोधग्रन्ध हैं ,
जो यादवों के प्राचीन वेद से लेकर पुराण और आज-तक के इतिहास को प्रस्तुत करता है। इसे प्रत्येक बुद्धिजीवी को अवश्य पढ़ना चाहिए "

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(पृष्ठभूमि में गंभीर और प्रेरणादायक वाद्य संगीत शुरू होता है)

एपिसोड 1: प्रस्तावना

​"मेरे बंधुओं ! मैं यादव योगेश कुमार रोहि जिला अलीगढ़ ग्राम आजादपुर पहाड़ीपुर से ... आपके समक्ष एक  शोधकर्ता के रूप में उपस्थित हूँ। 

 मेरे यदुवंशी बंधुओं, आज का समय आत्म-चिन्तन का है। एक जुट होकर सांस्कृतिक और सामाजिक संघर्ष करने वस  है। इटावा या मध्य प्रदेश की घटनाएं केवल छिटपुट घटनाएं नहीं हैं, ये हमारे मान-सम्मान वर्चस्व पर होता आ रहा पुरातन प्रहार हैं। लेकिन याद रखिए, हमें घृणा का उत्तर घृणा से नहीं, बल्कि अपने प्रखर ज्ञान पौरुष तथा इतिहास की प्रमाणिकता से देना है।" हम भारतीय संस्कृति के धर्मग्रन्थों पुराणों और वेदों में एक गरिमामयी उपस्थिति में वर्णित हैं हमारी जड़े ईश्वरीय सत्ता से जुड़ी हैं हमारा वर्ण पञ्चम है।

एपिसोड 2: हमारी जड़ें - वैष्णव वर्ण

​"ब्रह्मवैवर्त पुराण और गर्गसंहिता जैसे ग्रंथों में यह सत्य स्पष्ट है— कि हम चातुर्वर्ण्य के सामान्य ढांचे से परे, साक्षात् विष्णु के अंश हैं। हम 'वैष्णव वर्ण' के प्रतिनिधि हैं। भगवान श्रीकृष्ण का  'ममांशा यादवाः सर्वे'—यह उद्घोष ही हमारी असली वैचारिक शक्ति है।"

एपिसोड 3: न्याय की नीव - पञ्च-प्रथा

​"हमारा इतिहास 'निम्न' नहीं, 'निर्णायक' रहा है। ऋग्वेद की 'पञ्च-प्रथा' हमारी प्रशासनिक श्रेष्ठता का जीवन्त प्रमाण है। हम पञ्चायत के केवल सदस्य नहीं, उसके संचालक रहे हैं। आज हमें उसी गौरव और व्यवस्था को फिर से जागृत करना है।"

एपिसोड 4: भविष्य का संकल्प

​"मेरे बंधुओं, हमारा लेखन ही हमारी 'वैचारिक ढाल' है। नफरत के इस अंधकार को अपने ज्ञान के प्रकाश से मिटाना ही हमारा लक्ष्य है। इतिहास का पुनर्लेखन अब हमारी कलम से होगा। किस चाटुकार चारण या भाट के पूर्वदुराग्रह से नहीं  जय यदुवंश !" जय अहीरात !

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