सोमवार, 8 मई 2017

क्रिकेट

"राजू जांगिड़/खेल डेस्क | क्रिकेट मैदान में जब कोई बल्लेबाज शून्य पर आउट हो जाता है तो उसे डक (DUCK) कहा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बल्लेबाज के शून्य पर आउट होने का नाम 'डक' ही क्यों पड़ा ? दरअसल क्रिकेट के 'डक' का सीधा संबंध 'बत्तख के अंडे' से है। आप भी यही सोच रहे होंगे न कि क्रिकेट और बत्तख का एक दूसरे से क्या सम्बंध है तो जानिए इस शब्द की पीछे की दिलचस्प कहानी।पहले अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच से मिला 'डक' क्रिकेट में जब कोई बल्लेबाज शून्य पर आउट होता है तो उसके लिए अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘डक’ का इस्तेमाल किया जाता हैं। अंग्रेजी में ‘डक’ का मतलब ‘बत्तख’ होता है। इस शब्द की शुरूआत 1866 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के बीच खेले गए दुनिया के पहले अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच के दौरान हुई थी। दरअसल 17 जुलाई 1866 को खेले गए एक अनाधिकारिक क्रिकेट मैच में वेल्स के प्रिंस एडवर्ड VII बिना खाता खोले पहली ही गेंद पर आउट हो गए। तब कमेंटेटर ने 'डक' शब्द का इस्तेमाल किया था। ये हैं डक के प्रकार क्रिकेट में जब कोई बल्लेबाज पहली ही गेंद पर आउट हो जाता है तो उसे ‘गोल्डन डक’ या 'रॉयल डक' कहते हैं। वहीं, बल्लेबाज यदि दूसरी गेंद पर आउट हो तो ‘सिल्वर डक’ या तीसरी गेंद पर आउट हो जाता है तो उसे ‘ब्रॉन्ज डक’ कहते हैं। यदि कोई बल्लेबाज बिना किसी गेंद का सामना किए हुए नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े खड़े शून्य पर रन आउट हो जाता है तो इसे ‘डायमंड डक’ कहते हैं। क्रिकेट के ये शब्द शायद बहुत लोगों को पता नहीं है।" - CRICKET के इस शब्द के पीछे के इतिहास को शायद किसी को नहीं है पता http://tz.ucweb.com/5_F1Ek

बुधवार, 26 अप्रैल 2017

हलाला

हलाला का उद्देश्य पति पत्नी में सुलह कराना नहीं, बल्कि तलाक दी गयी औरत से वेश्यावृत्ति करना है, जो इन हादिसों से साबित होता है…. -“आयशा ने कहा कि रसूल के पास रिफ़ा अल कुरैजी कि पत्नी आई और बोली, रीफा ने मुझे तलक दे दिया था और मैंने अब्दुर रहमान बिन अबू जुबैर से शादी कर ली, लेकिन वह नपुंसक है, अब मैं वापिस रिफ़ाके पास जाना चाहती हूँ। रसूल ने कहा जब तक अब्दुर रहमान तुम्हारे साथ विधिवत सम्भोग नहीं कर लेता , तुम रिफ़ा के पास वापिस नहीं जा सकती। “إلا إذا كان لديك علاقة جنسية كاملة مع ” Bukhari, Volume 7, Book 63, Number 186 -“उम्मुल मोमिनीन आयशा ने कहा कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तीन बार तलाक कह दिया, और फिर से अपनी पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की इच्छा प्रकट की। रसूल ने कहा ऐसा करना बहुत बड़ा गुनाह है.. और जब तक उसकी पत्नी किसी दुसरे मर्द का शहद और वह उसके शहद का स्वाद नहीं चख लेते। “حتى انها ذاق العسل من الزوج الآخر وذاقه العسل لها ” Abu Dawud, Book 12, Number 2302 5 – हलाला व्यवसाय जिन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं, वहां मुल्ले मुफ्ती अपने दफ्तर बना लेते हैं और साथ में दस बीस मुस्टंडे भी रखते हैं। इनका काम फतवे देना होता है। चूँकि इस विज्ञानं के युग में नेट, फोन, और फेक्स जैसे साधन सामान्य है, और उन्ही के द्वारा तलाक देने का रिवाज हो चला है। कई बार मेल या फेक्स से औरत को तलाक की सूचना नहीं मिलती फिर भी मुल्ले तलाक मानकर हलाला तय कर देते हैं। अगले पृष्ठ पर पढ़िये : हलाली मुल्लों की हकीकत Prev3 of 4Next अगले पृष्ठ पर जाएँ

हलाला ....

जानिए इस्लाम में हलाल से हलाला तक का सफर, देखिये कैसे मौलवी बहु, बेटियों से मजे करते हैं ! Share This: Share on Facebook Share on Twitter Share on Google Plus Share this on WhatsApp 1 – तलाक कैसे हो जाती है यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने तीन बार “तलाक ” शब्द का उच्चारण कर दे, या कहे की मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए, तो तलाक हो जाती है ….. क्योंकि इस कथन को उस व्यक्ति की कसम माना जाता है। जैसा की कुरान ने कहा है… ”और अगर तुम पक्की कसम खाओगे तो उस पर अल्लाह जरुर पकड़ेगा “सूरा – मायदा 5 :89 तलाक के बारे में कुरान की इसी आयत के आधार पर हदीसों में इस प्रकार लिखा है… – “इमाम अल बगवी ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे की मैंने तुझे दो तलाक दिए और तीसरा देना चाहता हूँ, तब भी तलाक वैध मानी जाएगी और सभी विद्वानों ने इसे जायज बताया है। (Rawdha al-talibeen 7/73” “فرع قال البغوي ولو قال أنت بائن باثنتين أو ثلاث ونوى الطلاق وقع ثم إن نوى طلقتين أو ثلاثا فذاك – “इमाम इब्न कदमा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे कि मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए हैं लेकिन चाहे उसने यह बात एक ही बार कही हो, फिर भी तलाक हो जायेगा .Al-Kafi 3/122” إذا قال لزوجته : أنت طالق ثلاثا فهي ثلاث وإن نوى واحدة“ 2 – अल्लाह की तरकीब ऐसा कई बार होता है कि व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देकर बाद में पछताता है, क्योंकि औरतें गुलामों की तरह काम करती हैं और बच्चे भी पालती हैं। कुछ पढ़ी लिखी औरतें पैसा कमा कर घर भी चलाती है इस इसलिए लोग फिर से अपनी औरत चाहते है। ”हे नबी तू नहीं जनता कि कदाचित तलाक के बाद अल्लाह कोई नयी तरकीब सुझा दे ” सूरा -अत तलाक 65 :1 और इस आयत के बाद काफी सोच विचार कर के अल्लाह ने जो उपाय निकाला है, वह औरतों के लिए शर्मनाक है। 3 – हलाला तलाक़ दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है जिस के तहेत मत्लूका (तलाक दी गयी पत्नी ) को किसी दूसरे मर्द के साथ निकाह करना होगा और उसके साथ हम बिस्तरी की शर्त लागू होगी फिर वह तलाक़ देगा, बाद इद्दत ख़त्म औरत का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा, तब जा कर दोनों तमाम जिंदगी गुज़ारेंगे। हलाला के बारे में कुरान और हदीसों में इस प्रकार लिखा है…. और यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया, तो उस स्त्री को रखना जायज नहीं होगा। जब तक वह स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास न कर ले फिर वह व्यक्ति भी उसे तलाक दे दे। तो फिर उन दौनों के लिए एक दूसरे की तरफ पलट आने में कोई दोष नहीं होगा “सूरा – बकरा 2 :230 “فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُ مِن بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يَتَرَاجَعَا إِن ظَنَّا أَن يُقِيمَا حُدُودَ اللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ 2:230 (नोट – इस आयत में अरबी में ” تحلّل لهُ ‘तुहल्लिल लहु” शब्द आया है, मुस्लिम इसका अर्थ “wedding ” करते हैं , जबकि sexual intercourse सही अर्थ होता है। इसी से ” हलालाह حلالہ ” शब्द बना है। अंगरेजी के एक अनुवाद में है “uptill she consummated intercourse with another person “यानी जबतक किसी दूसरे व्यक्ति से सम्भोग नहीं करवा लेती ) और तलाक शुदा औरत का हलाला करवाकर घर वापसी को ” रजअ رجع” कहा जाता है। हलाला इस तरह होता है, पहले तलाकशुदा महिला इद्दत का समय पूरा करे। फिर उसका कहीं और निकाह हो। शौहर के साथ उसके वैवाहिक रिश्ते बनें। इसके बाद शौहर अपनी मर्जी से तलाक दे या उसका इंतकाल हो जाए। फिर बीवी इद्दत का समय पूरा करे। तब जाकर वह पहले शौहर से फिर से निकाह कर सकती है। बड़े बड़े इस्लाम के विद्वान् तलाक शुदा पत्नी को वापिस रखने के लिए हलाला को सही मानते हैं , अगले पृष्ठ पर देखिये विडियो मौलाना खुद तलाक के बारे में क्या राय रखते है

हलाला

जानिए इस्लाम में हलाल से हलाला तक का सफर, देखिये कैसे मौलवी बहु, बेटियों से मजे करते हैं ! Share This: Share on Facebook Share on Twitter Share on Google Plus Share this on WhatsApp 1 – तलाक कैसे हो जाती है यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के सामने तीन बार “तलाक ” शब्द का उच्चारण कर दे, या कहे की मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए, तो तलाक हो जाती है ….. क्योंकि इस कथन को उस व्यक्ति की कसम माना जाता है। जैसा की कुरान ने कहा है… ”और अगर तुम पक्की कसम खाओगे तो उस पर अल्लाह जरुर पकड़ेगा “सूरा – मायदा 5 :89 तलाक के बारे में कुरान की इसी आयत के आधार पर हदीसों में इस प्रकार लिखा है… – “इमाम अल बगवी ने कहा है , यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे की मैंने तुझे दो तलाक दिए और तीसरा देना चाहता हूँ, तब भी तलाक वैध मानी जाएगी और सभी विद्वानों ने इसे जायज बताया है। (Rawdha al-talibeen 7/73” “فرع قال البغوي ولو قال أنت بائن باثنتين أو ثلاث ونوى الطلاق وقع ثم إن نوى طلقتين أو ثلاثا فذاك – “इमाम इब्न कदमा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से कहे कि मैंने तुझे तीनों तलाक दे दिए हैं लेकिन चाहे उसने यह बात एक ही बार कही हो, फिर भी तलाक हो जायेगा .Al-Kafi 3/122” إذا قال لزوجته : أنت طالق ثلاثا فهي ثلاث وإن نوى واحدة“ 2 – अल्लाह की तरकीब ऐसा कई बार होता है कि व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देकर बाद में पछताता है, क्योंकि औरतें गुलामों की तरह काम करती हैं और बच्चे भी पालती हैं। कुछ पढ़ी लिखी औरतें पैसा कमा कर घर भी चलाती है इस इसलिए लोग फिर से अपनी औरत चाहते है। ”हे नबी तू नहीं जनता कि कदाचित तलाक के बाद अल्लाह कोई नयी तरकीब सुझा दे ” सूरा -अत तलाक 65 :1 और इस आयत के बाद काफी सोच विचार कर के अल्लाह ने जो उपाय निकाला है, वह औरतों के लिए शर्मनाक है। 3 – हलाला तलाक़ दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है जिस के तहेत मत्लूका (तलाक दी गयी पत्नी ) को किसी दूसरे मर्द के साथ निकाह करना होगा और उसके साथ हम बिस्तरी की शर्त लागू होगी फिर वह तलाक़ देगा, बाद इद्दत ख़त्म औरत का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा, तब जा कर दोनों तमाम जिंदगी गुज़ारेंगे। हलाला के बारे में कुरान और हदीसों में इस प्रकार लिखा है…. और यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया, तो उस स्त्री को रखना जायज नहीं होगा। जब तक वह स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास न कर ले फिर वह व्यक्ति भी उसे तलाक दे दे। तो फिर उन दौनों के लिए एक दूसरे की तरफ पलट आने में कोई दोष नहीं होगा “सूरा – बकरा 2 :230 “فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُ مِن بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يَتَرَاجَعَا إِن ظَنَّا أَن يُقِيمَا حُدُودَ اللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ 2:230 (नोट – इस आयत में अरबी में ” تحلّل لهُ ‘तुहल्लिल लहु” शब्द आया है, मुस्लिम इसका अर्थ “wedding ” करते हैं , जबकि sexual intercourse सही अर्थ होता है। इसी से ” हलालाह حلالہ ” शब्द बना है। अंगरेजी के एक अनुवाद में है “uptill she consummated intercourse with another person “यानी जबतक किसी दूसरे व्यक्ति से सम्भोग नहीं करवा लेती ) और तलाक शुदा औरत का हलाला करवाकर घर वापसी को ” रजअ رجع” कहा जाता है। हलाला इस तरह होता है, पहले तलाकशुदा महिला इद्दत का समय पूरा करे। फिर उसका कहीं और निकाह हो। शौहर के साथ उसके वैवाहिक रिश्ते बनें। इसके बाद शौहर अपनी मर्जी से तलाक दे या उसका इंतकाल हो जाए। फिर बीवी इद्दत का समय पूरा करे। तब जाकर वह पहले शौहर से फिर से निकाह कर सकती है। बड़े बड़े इस्लाम के विद्वान् तलाक शुदा पत्नी को वापिस रखने के लिए हलाला को सही मानते हैं , अगले पृष्ठ पर देखिये विडियो मौलाना खुद तलाक के बारे में क्या राय रखते है Prev2 of 4Next अगले पृष्ठ पर जाएँ एक परजीवी का पता चला!! वैद्यों ने सभी समुद्री आहारों से परहेज़ करने को कहा! ३ दिन में कीट आपके शरीर को छोड़ देंगे अगर आप नाश्ते में ये लें.... आंत्रकृमि से बचाव को २३४५६७ से ज्यादा लोगों ने प्रभावी ढंग से अपनाया! आजमायें! कीट शत्रु # १ प्राप्त हो चुका है... त्वचा गोरी करने का एक बढ़िया रामबाण नुस्खा। इसे लिख लें और आज़माएँ। कीटों से छुटकारा पाना इतना आसान कभी भी नहीं था! आपको केवल चाहिए Share this on WhatsApp ← क्या है पंचाग, जानें किस अंग्रेजी माह के साथ होता है कौन सा हिंदू महीनाPoK से भारत आए हर हिंदू शरणार्थी को 5.5 लाख रुपये देगी मोदी सरकार →Share This Post:000 You May Also Like कमाल की मशीन जो अपने आप बना देती है दीवार, ऐसी मशीन आपने पहले कभी नही देखि होगी…. J&K में तैनात BSF जवान का वीडियो वायरल: कहा- हम भूखे रहते हैं, बड़े अफसर सामान बाजार में बेच देते हैं ‘दृष्टांत’ मैग्जीन में प्रकाशित हुई मुलायम खानदान की अकूत संपत्ति पर कवर स्टोरी Recent Posts कंगना रनौत को तलाक व हलाला भी पसन्द हो, जरुरी नहीं कि आम मुस्लिम महिला को भी यह सब पसन्द हो !! सिर्फ 3 बम से पूरी धरती जब चाहे तब तबाह कर सकता है ये देश ! सुर आपके भी आज यूं बदले नज़र आये, हमें हर एक भाषण में फकत जुमले नज़र आये !! ‘कन्हैया खालिद लीग’ का पाखण्ड और संवेदनहीनता एक बार फिर सामने आयी ! नक्सलवाद को समझने के लिए व मिटाने के लिए हमें रॉकेट साइंस नहीं चाहिए ! 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Video: JMU छात्रों का बड़ा ऐलान, कश्मीर के पत्थरबाज़ों को देंगे अपनी अक्ल पर पड़े पत्थर देखिये वीडियो: गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियां करती हैं ये काम.... सिर्फ 3 बम से पूरी धरती जब चाहे तब तबाह कर सकता है ये देश ! PopularRecentComment फ्रांस सरकार एक साथ इतनी मस्जिदों पर लगवा रही है तालें, मस्जिदों में धार्मिक विचारों के नाम पर…. पेप्सी-कोक को भारत से भगाने के लिए तमिलनाडु से अभियान की हुई शुरुआत… देखिये : 26 जनवरी पर भारत के मुसलमानों को इससे बेस्ट स्पीच कहीं नहीं मिलेगी…. विश्व के आठ शक्तिशाली देशों की लिस्ट में भारत छठे नंबर पर… राजनीति में समय की नजाकत के हिसाब से आस्था बदलती रहती है, खास नेता भक्त इसे जरूर पढ़ेंगे…. 18.9 इंच लंबे अंग के कारण बेरोजगार हुआ यह शख्स, संबंध भी नहीं कर पाता है Video: खुद पर काबू नहीं रख पाईं सनी लियोनी… योग के दौरान कर दिया ये कांड ! Video: देखिए लड़की की बीच रिंग में ठुकाई…करोड़ों आंखों ने देखा ये तमाशा !

मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

हिन्दी वर्ण माला

हिंदी के लिए प्रयुक्‍त देवनागरी वर्णमाला भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 (i) के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी भारत संघ की राजभाषा है । यह लिपि संस्कृत के अखिल भारतीय स्वरूप के लिए तथा पाली, प्राकृत और अपभ्रंश के विविध रूपों के लिए प्रयुक्‍त होती रही है । यही नहीं, भारत के संविधान की आठवीं सूची में विनिर्दिष्‍ट कई आधुनिक भारतीय भाषाएँ, यथा : मराठी, कोंकणी, नेपाली, बोडो, संथाली, मणिपुरी, डोगरी आदि भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं । इसी लिपि को आधार बना कर समस्त भारतीय भाषाओं के लिए ‘अतिरिक्‍त लिपि' के रूप में ‘परिवर्धित देवनागरी' का विकास किया गया है । हिंदी भाषा के लेखन के लिए अब ‘मानक देवनागरी' लिपि का प्रयोग होने लगा है । हिंदी के लिए प्रयुक्‍त देवनागरी वर्णमाला में 11 स्वर और 35 व्यंजन हैं । इनका स्वरूप निम्‍न प्रकार से है : स्वर उच्चारण का स्थान और प्रयत्न स्वरों के उच्‍चारण में केवल काकल में अवरोध होता है, मुख विवर से हवा निर्बाध गति से बाहर निकलती है । जिह्वा का हिस्सा विशेष कुछ ऊपर उठता है । अ आ ह्रस्व, अर्ध विवृत, मध्य स्वर दीर्घ, विवृत, पश्‍च स्वर इ ई ह्रस्व, संवृत, अग्र स्वर दीर्घ, संवृत, अग्र स्वर उ ऊ ह्रस्व, संवृत, पश्‍च, गोलीकृत स्वर दीर्घ, संवृत, पश्‍च, गोलीकृत स्वर ऋ ह्रस्व स्वर, जिसका उच्‍चारण ‘ रि ' की तरह होता है । ए ऐ दीर्घ, अर्ध संवृत, अग्र स्वर दीर्घ, अर्ध विवृत, अग्र स्वर ओ औ दीर्घ, अर्ध संवृत, पश्‍च स्वर दीर्घ, अर्ध विवृत, पश्‍च स्वर अनुस्वार और विसर्ग टिप्पणी 1. ‘ऋ' वर्ण का केवल तत्सम शब्दों में (यानी संस्कृत से हिंदी में ज्यों-के-त्यों गृहीत शब्दों में) लिखित प्रयोग होता है, जबकि इसका वास्तविक उच्‍चारण ‘रि' जैसा होता है । (अन्य भारतीय भाषाओं में, विशेषकर मराठी, गुजराती और दक्षिण भारत की भाषाओं में इसका उच्‍चारण ‘रु' जैसा होता है) । 2. हिंदी में दीर्घ ‘ऋ' तथा ह्रस्व और दीर्घ लृ – ॡ का प्रयोग नहीं होता । संस्कृत वर्णमाला में भी अब इन तीनों स्वरों का प्रयोग सामान्यत: देखने में नहीं आता । 3. हिंदी में ‘ऐ' और ‘औ' का प्रयोग संध्यक्षर की तरह न होकर मूल स्वर की तरह होता है (केवल ‘मैया' और ‘कौवा' वाली स्थितियों को छोड़कर) । 4. सभी स्वर घोष हैं । 5. प्राय: कई वर्णमाला चार्टों में अनुस्वार (अं) और विसर्ग (अ:) को स्वर वर्णमाला में सम्मिलित दिखाया जाता है, जो ठीक नहीं है । जहाँ तक हिंदी का संबंध है, वस्तुत: ये दोनो ‘स्वर' न होकर ‘व्यंजन' है । और पूर्ववर्ती स्वर के साथ ही उच्‍चारित हो सकते हैं । 6. अनुस्वार चिह्न (ं) का स्थान स्वर या उसकी मात्रा की शिरोरेखा के ऊपर है । यह विशेषक चिह्न स्ववर्गीय ङ् ञ् ण् न् और म् के स्थान पर प्रयुक्‍त होता है । 7. विसर्ग चिह्न ( : ) का स्थान स्वर या उसकी मात्रा के ठीक आगे है । यह स्वन तत्सम शब्दों में ही प्रयुक्‍त होता है, शब्दों में नहीं । उच्‍चारण की से यह संघर्षी ( ) का अघोष रूप है । 8. चंद्र बिंदु ( ँ ) का स्थान स्वर या उसकी मात्रा की शिरोरेखा के ऊपर है । यह विशेषक चिह्न संबंधित स्वर के अनुनासिक उच्‍चारण का है (यानी उस स्वर के उच्‍चारण में मुख विवर के साथ – साथ नासिका विवर से भी हवा बाहर निकलती है । हिंदी में सभी स्वरों का सार्थक अनुनासिकीकरण संभव है । 9. ‘आ' या उसकी मात्रा की सूचक शिरोरेखा पर लगा चंद्र चिह्न (ॅ) विवृत ‘ऑ' का सूचक है । कुछ अंग्रेज़ी शब्दों के देवनागरीकरण में इस विशेषक चिह्न का प्रयोग होता है । जैसे : कॉलेज, ऑफिस आदि । हिंदी व्यंजन (व्यंजनों का उच्‍चारण करते समय मुखाववय में यथास्थिति आंशिक या पूर्ण अवरोध होता है, फिर भले ही काकल में अवरोध हो या नहीं ।) व्यंजन उच्चारण में स्थान और प्रयत्न कवर्ग क ख ग घ ड़ मृदु तालव्य / कंठ्य स्पर्श चवर्ग च छ ज झ ञ तालव्य स्पर्श (आधुनिक पारिभासिक शब्दावली में स्पर्श – संघर्षी) टवर्ग ट ठ ड ढ ण मूर्धन्य स्पर्श तवर्ग त थ द ध न दंत्य स्पर्श पवर्ग प फ ब भ म () ओष्ठ्य स्पर्श य र ल व परंपरागत शब्दावली में ‘ अर्धस्वर ' श ष स ह उष्म / ऊष्म या संघर्षी व्यंजन ड़ ढ़ मूर्धन्य ताड़ित व्यंजन टिप्पणी 1. उपर्युक्‍त व्यंजनों / वर्णों में ‘अ' अंतर्निहित स्वर है । 2. प्रत्येक वर्ग में दूसरा और चौथा व्यंजन ‘महाप्राण' है ( ‘ह' स्वन मिश्रित), जबकि शेष तीनों व्यंजन ‘अल्पप्राण' । 3. प्रत्येक वर्ग में पहला और दूसरा व्यंजन ‘अघोष' (घोष तंत्रियों में कंपन रहित) है, जबकि शेष तीनों व्यंजन ‘घोष' (घोष तंत्रियों में कंपन सहित) हैं । 4. प्रत्येक वर्ग का पाँचवाँ व्यंजन ‘नासिक्य' है क्योंकि इसमें मुखविवर के साथ – साथ नासिका विवर से भी हवा बाहर निकलती है । इन पाँचों नासिक्य व्यंजनों में से प्रथम तीन हिंदी शब्दों के आरंभ में नहीं आते । 5. ट वर्ग (यानी मूर्धन्य व्यंजन) भारतीय भाषाओं की विशेषता है । ये व्यंजन यथावत् अंग्रेज़ी में प्रयुक्‍त नहीं होते । 6. परंपरागत ‘अर्धस्वर' के अधीन परिगणित चारों व्यंजन य, र, ल, व में से पहला व्यंजन ‘य' ‘अर्धस्वर' है, जबकि ‘व' (जैसे : ‘वन' शब्दों में ) वस्तुत : ‘घोष संघर्षी' है । हाँ, किसी पूर्ववर्ती व्यंजन के साथ उच्‍चरित होकर यह ‘अर्धस्वर' बन जाता है । जैसे ‘स्वर' या ‘अनुस्वार' जैसे शब्दों में ‘व' । 7. ‘ष' का लिखित प्रयोग केवल तत्सम शब्दों में ही होता है । हिंदी में इस व्यंजन का उच्‍चारण ‘श' जैसा ही होता है । 8. ड़ और ढ़ हिंदी के विशिष्‍ट उच्‍चारण वाले व्यंजन हैं । संस्कृत में इनका उच्‍चारण नहीं होता । 9. क्ष, त्र, ज्ञ और श्र भले ही वर्णमाला में दिए जाते हैं किंतु ये एकल व्यंजन नहीं हैं । वस्तुत : ये क्रमश : क् + ष, त् + र, ज् + ञ और श् + र के व्यंजन – संयोग हैं । 10. कुछ अरबी, फारसी और अंग्रेज़ी उच्‍चारण वाले गृहीत शब्द व्यंजन वर्ण के नीचे नुक्‍ता लगाकर लिखे जा रहे हैं । ये हैं :- क़, ख़, ग़, ज़ और फ़ । 11. ‘ळ' (जिसे प्राय : हिंदी भाषी ‘ मराठी ‘ ळ कहता है) का उच्‍चारण ‘मानक हिंदी' में नहीं होता । हाँ, यह उच्‍चारण हिंदी की कुछ बोलियों (जैसे हरियाणवी, राजस्थानी आदि) में अवश्य सुनाई पड़ता है । इस व्यंजन उच्‍चारण को ‘परिवर्धित देवनागरी' में स्थान दिया गया है ताकि मराठी सहित दक्षिण भारत की भाषाओं आदि के और हिंदी की बोलियों के लिप्यांकन में इस उच्‍चारण को ‘परिवर्धित देवनागरी' के माध्यम से सही रूप में व्‍यक्‍त किया जा सके । मुख्य पृष्ठ

आर्य जर्मन में ....

The Harii (Latinized West Germanic "warriors"[1]) were, according to 1st century CE Roman historian Tacitus, a Germanic people. In his work Germania, Tacitus describes them as using black shields and painting their bodies ("nigra scuta, tincta corpora"), and attacking at night as a shadowy army, much to the terror of their opponents. Theories have been proposed connecting the Harii to the einherjar, ghostly warriors in service to the god Odin, attested much later among the North Germanic peoples by way of Norse mythology, and to the tradition of the Wild Hunt, a procession of the dead through the winter night sky sometimes led by Odin. GermaniaEdit Regarding the Harii, Tacitus writes in Germania: As for the Harii, quite apart from their strength, which exceeds that of the other tribes I have just listed, they pander to their innate savagery by skill and timing: with black shields and painted bodies, they choose dark nights to fight, and by means of terror and shadow of a ghostly army they cause panic, since no enemy can bear a sight so unexpected and hellish; in every battle the eyes are the first to be conquered.[2] TheoriesEdit According to John Lindow, Andy Orchard, and Rudolf Simek connections are commonly drawn between the Harii and the Einherjar of Norse mythology; those that have died and gone to Valhalla ruled over by the god Odin, preparing for the events of Ragnarök.[2][3][4] Lindow says that regarding the theorized connection between the Harii and the Einherjar, "many scholars think there may be basis for the myth in an ancient Odin cult, which would be centered on young warriors who entered into an ecstatic relationship with Odin" and that the name Harii has been etymologically connected to the -herjar element of einherjar.[3] Simek says that since the connection has become widespread, "one tends to interpret these obviously living armies of the dead as religiously motivated bands of warriors, who led to the formation of the concept of the einherjar as well as the Wild Hunt".[4] See alsoEdit Einherjar Notes References Last edited 3 months ago by an anonymous user RELATED ARTICLES Sæhrímnir
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1 सदी के सीई के अनुसार, हरी (लैटिनैज्ड वेस्ट जर्नेनिक "योद्धा" [1]) एक जर्मनिक लोगों के रूप में रोमन इतिहासकार टेसिटस थे अपने काम में जर्मनिया, टैसिटस ने उन्हें काले ढिल्लों का इस्तेमाल करने और उनके शरीर ("निग्रा स्कूटा, टिंक्सा कॉरपोरा") को चित्रित करने और रात को एक अस्पष्ट सेना के रूप में हमला करने के बारे में बताया, जो उनके विरोधियों के आतंक के लिए बहुत अधिक है। सिद्धांतों को हरि को जोड़ने के लिए प्रस्तावित किया गया है, भगवान ओडििन की सेवा में भूतिया योद्धा, नॉर्दर्न पौराणिक कथाओं के माध्यम से उत्तरी जर्मनिक लोगों के बीच बहुत बाद में साक्ष्य, और वन्य हंट की परंपरा के अनुसार, मृतकों के माध्यम से एक जुलूस सर्दियों की रात आसमान कभी कभी ओडिन के नेतृत्व में। जर्मनिया हरि के बारे में संपादित करें, टैसिटस जर्मनिया में लिखता है: हरियाई के लिए, उनकी ताकत से काफी अलग है, जो अन्य जनजातियों से अधिक है जो मैंने अभी सूचीबद्ध किया है, वे कौशल और समय-समय पर अपने जन्मजात क्रूरता को ढंकते हैं: काले ढालें ​​और चित्रित शरीर, वे लड़ने के लिए अंधेरे रातों चुनते हैं, और आतंक के माध्यम से और एक भूतिया सेना की छाया के कारण वे आतंक पैदा करते हैं, क्योंकि कोई दुश्मन इतनी अप्रत्याशित और नारकीय नहीं देख सकता है; हर लड़ाई में आंखें जीतने वाली पहली हैं। [2] सिद्धांतों के अनुसार जॉन लिंडो, एंडी ऑर्चर्ड और रूडोल्फ सिमेक के संबंधों को सामान्यतः हरि और नर्स पौराणिक कथाओं के आइर्जर के बीच खींचा जाता है; जो लोग मर चुके हैं और वाल्हाल्ला के पास जाते हैं, वे ओडिन देवता पर रगेनरोक की घटनाओं की तैयारी कर रहे हैं। [2] [3] [4] Lindow कहते हैं कि हरि और Einherjar के बीच थिअरीज़ कनेक्शन के बारे में, "कई विद्वानों का मानना ​​है कि एक प्राचीन ओडिन पंथ में मिथक के लिए आधार हो सकता है, जो कि युवा योद्धाओं पर केन्द्रित होगा जो ओडिन के साथ एक खुशहाल संबंध में प्रवेश किया" और नाम हरि एथिकल रूप से आइफरर तत्व के साथ-साथ जुड़े हुए हैं। [3] सिमेक का कहना है कि जब से कनेक्शन व्यापक हो गए हैं, "मृतकों की स्पष्ट रूप से रहने वाली सेनाओं को योद्धाओं के धार्मिक रूप से प्रेरित बैंडों के रूप में परिभाषित करने की प्रवृत्ति होती है, जिसने einherjar के साथ-साथ वन्य हंट" की अवधारणा को जन्म दिया। [4 ] संपादित करें Einherjar नोट्स संदर्भ अंतिम 3 महीने पहले एक अज्ञात उपयोगकर्ता द्वारा संपादित संबंधित लेख Sährímnir
Indo-European etymology :

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Proto-IE: *ar(y)- <PIH *a->
Meaning: master
Hittite: arawa- 'frei', Lyk. arawã 'abgabenfrei' (Tischler 53-55 is doubtful)
Old Indian: árya-, aryá- m. `master, lord', ā́rya- `Arian'
Avestan: airyō 'arisch'
Other Iranian: OPers ariya- 'arisch'
Celtic: Gaul Ario-manus; Ir aire, gen. airech gl. `primas'
Russ. meaning: господин; "ариец"
References: WP I 80
piet-meaning,piet-hitt,piet-ind,piet-avest,piet-iran,piet-celt,piet-rusmean,piet-refer,

इंडो-यूरोपीय व्युत्पत्ति:

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प्रोटो- आईई: * एआर (वाई) - <पीआईएच * ए->
अर्थ: मास्टर
हित्ती: आरा- 'फ्रीी', लिक। आरा 'abgabenfrei' (Tischler 53-55 संदिग्ध है)
पुरानी भारतीय: आर्य-, आर्य-मी `मास्टर, लॉर्ड ', अरिया- अरियन'
अवेस्तान: एयरोओ 'अरसिक'
अन्य ईरानी: ओरीर्स अरिया- 'अरिश'
केल्टिक: गॉल एरियो-मैनुस; आईआर एयर, जनरल एरिक ग्ल `Primas '
रस। अर्थ: господин; "Ариец"
संदर्भ: WP I 80
पीट-अर्थ, पीट-hitt, पीट-इंडस्ट्रीज़, पीट-avest, पीट-ईरान, पीट-सेल्ट, पीट-rusmean, पीट-देखें,