शनिवार, 17 अक्टूबर 2026

आरती

आजादपुर वाली मइया का ध्रुपद गीत

शेर-

​नव दुर्गा रूप ये, शक्ति के हैं  पुंज अपार।

शरण तुम्हारी हैं मइया.कर दो दूर विकार॥

​स्थायी (ध्रुपद मुखड़ा)

माँ आदिशक्ति जगदम्बे, तू आजादपुर धाम विराजै!

भक्त जनों के संकट हरने को,घण्टा तेरा नित बाजै॥

तेरे चरणों में झुके शीश हमारा, प्रेम-सुधा रस बरसे।

दर्शन पाने को हे जगत रचैया, भक्तों के नयना तरसे॥

​अंतरा (नौ देवियों और आजादपुर दरबार का संगम)

  • ​शैलपुत्री: तुम हिमगिरि पुत्री शैलसुता, नंदी पे करें सवारी।                    आजादपुर के आँगन में, गूंजे जयकार तुम्हारी॥
  • ​ब्रह्मचारिणी: घोर तपस्या , जपमाला हाथ सुहाए।                                    तेरी शरण में आनेवाले को,फल भक्ति का मिल जाए॥
  • ​चंद्रघंटा: माथे चंद्रघंटा लसे, सिंह वाहिनी बलवीरा।                                      संकट सारे दूर भगाए, ये गाते भजन अहीरा॥
  • ​कूष्मांडा ने ब्रह्मांड रचा, कूष्मांडा सुख की दाती। अष्टभुजा धरि शक्ति प्रदर्शन, कष्टों को दूर भगाती ।
  • ​स्कंदमाता ममतामयी, गोद लिए शिशु शोभे। वात्सल्य की मूरत बनकर के, चुप करती  दुखिया रोवै॥
  • ​कात्यायनी कात्यायन सुता, दुष्टों को प्रलयंकारी ! महिषासुर का मर्दन करके करती माँ हुँकारी।
  •  ​कालरात्रि: कृष्ण वर्ण कालरात्रि, उग्र भयंकर वाना । काली बनकर नाश करे, अंधकार का ताना॥
  • ​महागौरी: श्वेत सौम्य महागौरी, पावन निर्मल कान्ति। क्षमा करुणा के रूप में  देती मन को शान्ति॥
  • ​सिद्धिदात्री: कमल आसन सिद्धिदात्री, मोक्ष-सिद्ध की खान।
  •  तेरे दर पे शीश झुकाऐ, तो समस्याओं का समाधान॥

​समापन (आजादपुर दरबार महिमा)

​मइया तेरी ज्योति जले, तिमिर भाग सब जाए।

जो भी श्रद्धा से आवे, वह भी  कुछ फल पाए॥

'चरण' झुके दरबार तुम्हारे, कृपा दृष्टि रखना माँ।

आजादपुर की इस धरती पर, सदा तेरा तुम्हारी महिमा

आजादपुर वाली मइया का ध्रुपद गीत

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​नव दुर्गा के रूप ये, शक्ति के पुंज अपार।


शरण तुम्हारी  हैं माता ,तुम सुन लो पुकार॥


​स्थायी (ध्रुपद मुखड़ा)


माँ आदिशक्ति जगदम्बे, आजादपुर धाम विराजै!


भक्त जनों के संकट हरने, घण्टा तेरा नित बाजै॥


चरणों में झुके शीश हमारा, प्रेम-सुधा रस बरसे।


दर्शन पाने को मइया के, भक्तों के नयना तरसे॥


​अंतरा (नौ देवियों और आजादपुर दरबार का संगम)


​शैलपुत्री:हिमगिरि पुत्री शैलसुता, नंदी असवारी धारी।  आजादपुर के आँगन में, गूंजे जयकार तुम्हारी॥


​ब्रह्मचारिणी: घोर तपस्या साध के, जपमाला हाथ सुहाए। 


तेरी शरण में आने वाले को, भक्ति का फल मिल जाए॥


​चंद्रघंटा: माथे चंद्रघंटा लसे, सिंह वाहिनी बलवीरा। संकट सारे दूर भगाए, गाते भजन अहीरा॥


​कूष्मांडा: मंद हास्य ब्रह्मांड रचा, कूष्मांडा सुख की खान। 


अष्टभुजा धरि शक्ति , यह जीवन का वरदान॥


​स्कंदमाता: स्कंद मात ममतामयी, गोद लिए शिशु ज्ञान। 


वात्सल्य की मूरत बनकर, करती जग का कल्याण॥


​कात्यायनी: महर्षि कात्यायन सुता, अदम्य साहसी रूपा। 


महिषासुर संहार करे, क्रोध भयंकर धूपा॥


​कालरात्रि: कृष्ण वर्ण कालरात्रि, उग्र भयंकर वाना । 


शुभंकरी बन नाश करे, अंधकार का ताना॥


​महागौरी: श्वेत सौम्य महागौरी, पावन निर्मल कान्ति। क्षमा करुणा के रूप यह, देते मन को शान्ति॥


​सिद्धिदात्री: कमल आसन सिद्धिदात्री, मोक्ष-सिद्ध की खान।


 तेरे दर पे शीश झुकाऐ, तो समस्याओं का समाधान॥


​समापन (आजादपुर दरबार महिमा)


​मइया तेरी ज्योति जले, तिमिर भाग सब जाए।


जो भी श्रद्धा से आवे, वह भी  कुछ फल पाए॥


'चरण' झुके दरबार तुम्हारे, कृपा दृष्टि रखना माँ।


आजादपुर की इस धरती पर, सदा तेरा तुम्हारी महिमा


कब्बाली नुमा माता आजादपुर वाली की आरती की स्क्रिप्ट लिखें कब्बाली नुमा शैली में 

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