शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

विडियो गोलोक-

दृश्य एवं पृष्ठभूमि स्वर: सभी अवतार श्रीकृष्ण में समाहित हुए।
ध्वनि: चा... चा... चा...  
​वक्ता १: ब्रह्मन, श्रीकृष्ण ही सर्वोपरि हैं। विष्णु  ने ब्रह्मा शंकर आदि देवगणों को गोलोक धाम दिखाया। देवताओं ने इसी उपरान्त गोलोक की विरजा नदी पार की।  
​वक्ता २: तभी गोलोक में प्रथम द्वार पर स्थित चन्द्रानना सभी आगन्तुक ब्रह्मा विष्णु व शिव सभी से बोली -  आप किस ब्रह्माण्ड के अधिपति हैं? यहां तो करोड़ों ब्रह्मांड लुढ़क रहे हैं।
ध्वनि: हां...  
​वक्ता ३: हे देवगण, जिस ब्रह्मांड में भगवान पृश्निगर्भ का सनातन अवतार हुआ है, स्मरण रहे, हम उसी ब्रह्मांड के निवासी हैं।  
​पृष्ठभूमि स्वर: गोलोक में देवताओं ने देखा, वहां गोपगण गोपोपेश्वर श्रीकृष्ण का वासुदेव आदि नामों से गुण -गान कर रहे हैं, सभी देवगण  अवतार श्रीकृष्ण में लीन हो गए। वे ही परम कारण हैं।  
​मंत्रोच्चार: ओम नमो भगवते वासुदेवाय। ओम वासुदेवाय। ओम नमो भगवते वासुदेवाय।  
​देवता कहते भगल: हे भगवन, आप हमारी रक्षा करें।  
​भगवान : देवताओं, तुम यदुकुल में जन्म लो। गोपों और गोपियों, तुम सब भूतल पर जन्म लो। मैं पृथ्वी का भार दूर करूंगा।  
 प्रभु,देवगण किन गृहों में वे जन्म लेंगे?  
​भगवान: मैं स्वयं यशोदा और  देवकी के यहां द्विधा अर्थात दोनो रूपों  प्रकट होऊंगा। और लक्ष्मी रुक्मिणी का रूप धारण करेंगी। तथा महालक्ष्मी आदि प्रकृति स्वयं राधा जीत के रूप में प्रकट होगी।  

​संस्कृत कथा पाठ:
गोलोकान्दगेहे यो द्विबालरूपधृक् स एव वैकुंठात् चतुर्बाहु अवतीर्णः वासुदेवरूपः गोविन्दे प्रत्यलीयत। गोविन्दः श्यामलः अभवत्। यशोदा जागरिता भूत्वा बालं क्रोड़े गृह्णाति। नंद बाबा अतीव प्रेम्णा बालस्य मुखं पश्यति। गोकुले आनंदोत्सवः। गोलोकान् नंदगेहे स एव वैकुंठात् गोकुले वासुदेव सौ गोविन्दे प्रत्यलीयत। स गोविन्दः श्यामलः अभवत्।  
​प्रस्तुतकर्ता (समापन स्वर):
इस प्रकार श्रीकृष्ण की यह लीला बहुत अद्भुत है, इसे सुनकर हमें जीवन में प्रेम और भक्ति का संदेश मिलता है। आशा है आपको यह प्रसंग पसंद आया होगा। चैनल को सब्सक्राइब करें और देखते रहें। मित्रों, गोपों की उत्पत्ति एवं उनका भूतल पर अवतरण वाला यह प्रसंग कैसा लगा? अवश्य बताइएगा। फिर मिलेंगे किसी दूसरे वीडियो के साथ, तब तक के लिए नमस्कार।

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