अश्कों से लिखी गई रिवायत-ए-रब्बानी..."
इंटंरो ४
"यादव योगेश कुमार रोहि की एक रूहानी प्रस्तुति !
(तीनों मिलकर एक सुरीली गूँज पैदा करती हैं)
[संगीत]: ढोलक की एक हल्की सी थाप के साथ लोक धुन का प्रवेश होता है।
[गायन]:
"गहरी नदिया नाव पुरानी, भँवरों में डूबा नादानी!"
ये मौजे हैं आनी जानी! अरे मूरख मत कर मन मानी।
गहरी नदिया नाव पुरानी, भँवरों में डूबा नादानी!"
आलाप ---
पहली गायिका: तेज बहाव में है ये पानी, तूफ़ानों की आई रवानी...
दूसरी और तीसरी गायिका (कोरस/तिकड़ी):
अन्तरा-
नाखुदा तू ही खुदा, आज मत होना जुदा!
खामोश है पर होश है खोजता जीवन सुधा
तीनों मिलकर (लय बढ़ाते हुए):
झूम गया है, बेखुदी में, मग्न है अपने ही निधी में...
ये ज़िंदगी है गुमशुदा, आजतक नही पहचानी !
ये मौजे हैं आनी जानी ! अरे मूरख मत कर मन मानी।
[तिकड़ी का मुख्य टेक / समूह गान]:
🎵 गहरी नदिया नाव पुरानी, भँवरों में डूबा नादानी।
: अंतरा 2 —
दूसरी गायिका (अकेले, भावुक स्वर में):
तपती हवाओं के, ये झोंके, चलने से क्यों हमको रोके! ये लहरों को जगा रहे हैं... तूफान गीत गा रहे हैं।
उठ खड़ी हैं ये लहरें सोके। ये हवाओं की महरवानी।
गहरी नदिया नाव पुरानी भबरों डूबा नादानी।
अन्तरा:
तूफ़ानों के आगोश में, उच्छलती लहरों घोष में, ये आकर के हमको डगमगा रहे हैं! और हलचल दल मंगा रहे हैं।
ये मुसाफिर सी जिन्दगानी ! दर्द में डूबी है आह करहानी...
तीनों का सामूहिक स्वर (दर्द भरी तान के साथ):
🎵 गहरी नदिया नाव पुरानी, भँवरों में डूबा नादानी!
तेज़ बहाव में है ये पानी, तूफ़ानों में आई रवानी!
🔸 दृश्य 4: अंतरा 3 —
तीसरी गायिका:
इन बुलबुलों के दिलों में, ये कैसी बैचेनी तड़प है?
इश्क के बिना भी जीना, रोहि योगियों काही तप है!
तीनों मिलकर (लोक धुन और भजन शैली की ऊँचाई पर):
एक ही तड़प है, एक ही जप है, धड़कनों की,श्वासों से झड़प है!
उम्र है पंछियों का डेरा, जीवन पतझड़ का विटप है! जिंदगी है ये सच से अनजानी...
गहरी नदीया नाव पुरानी!
🔸 दृश्य 5: समापन (Outro & Fade Out)
[कैमरा निर्देश]: कैमरे का फोकस धीरे-धीरे जमीन पर रखे जलते हुए दीये और गायिकाओं के मिलनसार हाथों पर जाता है।
[संगीत]: ढोलक की आवाज़ धीमी होती जाती है; केवल हारमोनियम की लंबी गूँज और मंजीरे की एक आख़िरी हल्की सी आवाज़ रह जाती है।
[गायन (धीमे और रूहानी स्वर में तिकड़ी)]:
साँसों में शोलों की कहानी...
🎵 गहरी नदिया नाव पुरानी, भँवरों में डूबा नादानी...
तूफ़ानों की आई रवानी...
(धीमी गूँज के साथ स्वर शून्य में विलीन हो जाते हैं)
📝
द्रुत ताल पर ढोलकों गुमक न थोपों में सिन्धी लोक धुन में ऑडियो जनरेट करें
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