ओ जाने वाले, हो सके तो लौट के आना
ओ जाने वाले, हो सके तो लौट के आना
ये घाट ये बाट, दुनियाँ का हाट ! यहाँ सब सबकुछ बिक जाना ओ जाने वाले, हो सके तो लौट के आना
बचपन के तेरे मीत, तेरे संगी साथी सहारे छूट गये धीरे धीरे चलते रहे हम हारे हारे
बचपन के तेरे मीत, तेरे संगी साथी सहारे ढूँढेंगे तुझे गली-गली, पुकारे ग़म के मारे
पूछेगी हर निगाह, कल तेरा आसियाना । ओ जाने वाले, हो सके तो लौट के आना
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
दे दे के ये आवाज़ कोई हर घड़ी बुलाए
फिर जाए जो उस पार कभी लौट के न आए
है भेद ये कैसा कोई कुछ तो समझाना ।
ओ जाने वाले, हो सके तो लौट के आना
ये घाट तू ये बाट कहीं भूल न जाना
ओ जाने वाले, हो सके तो लौट के आना
(उद्घोष करें) सिनेमाटिक अंदाज मे:
विशेष:
"यह व गीत संगीत यादव योगेश कुमार रोहि जिला अलीगढ़ आजादपुर वालों की रुहानी पेशकश है-
मुखड़ा गायन करें )
तुुमसे बढ़कर दुनियाँ में नासमझा दूजा और, समझ में आज हमको ये बात आगयी।
तुुमसे बढ़कर दुनियाँ में नासमझा दूजा और समझ में, आज हमको ये बात आगयी।
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तुुमसे बढ़कर दुनियाँ में नासमझा दूजा और समझ में आज हमको ये बात आगयी।
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१-अन्तरा-
क्या खूब है तेरा ये करिश्मा,
कहते हैं ये धरती और आसमाँ।
गुम हो जाऐंगे एक दिन ये सारे
,मिट जाऐगा इनका ये समाँ।
पथ की बहती धारा, किनारा,कोई नहीं है छोर, भोर से अंधेरी रात आगयी।
तुुमसे बढ़कर दुनियाँ में ना समझा दूजा और समझ में, आज हमको ये बा..त आगयी।
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२-अन्तरा-
कुदरत में तेरी करिश्माई ,जर्रे जर्रे में ये समायी। कसर नहीं कहीं से
इसकी कारीगरी में भाई।।
ईश्वर की ही छायी परछायीं ।
हृदय की अनुभूति में तू, मैं हो गया भावविभोर, तेरी करुणा मुझपे छागयी।
तुुमसे बढ़कर दुनियाँ में न समझा दूजा और समझ में, आज हमको ये बा..त आगयी।
तुुमसे बढ़कर दुनियाँ में नासमझा दूजा और समझ में, आज हमको ये बात आगयी।
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३-अन्तरा-
सदियों से यही तौर चला है ।
कर्मों का ही सारा मस्लाह है।
भावों ने हर बार छला है।
आशनाई खूबसूरत बला है।
मन में पापों का भार लिए, दु:ख पाया महा घनघोर, जिन्दगी आज तेरी मुरझा गयी।
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तुुमसे बढ़कर दुनियाँ में ना समझा दूजा और समझ में, आज हमको ये बात आगयी।
तुुमसे बढ़कर दुनियाँ में न समझा दूजा और समझ में , आज हमको ये बात आगयी।
प्रस्तुत गीत को उत्तर भारतीय व राजस्थानी लोक संगीत शैली के मिश्रण से समायोजित कर ढोलक और हारमोनियम की थाप पर संगीत बद्ध कर ऑडियो जनरेट करें
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