सोमवार, 31 अगस्त 2026

कब्बाली ३-

संगीतमय रूपरेखा: राजस्थानी-सूफी कव्वाली

  • ताल: दादरा (6 मात्रा) या कहहरवा (8 मात्रा), जो जैसे-जैसे गीत आगे बढ़ेगा, द्रुत (तेज़) लय में बदल जाएगी।
  • प्रमुख वाद्य यंत्र: हारमोनियम, ढोलक/तबला, मंजीरे, और पृष्ठभूमि में राजस्थानी लोक संगीत का स्पर्श देने के लिए खड़ताल या कामायचा/सारंगी की हल्की गूँज।

1. मंगलाचरण / विलम्बित आलाप (शांत और आध्यात्मिक माहौल)

  • संगीत: केवल हारमोनियम का एक लंबा सुर और मंजीरे की धीमी झनकार।
  • मुख्य कव्वाल (गंभीर और गूँजती आवाज़ में): ​"सुन ऐ रब्बे-कायनात, सुन ऐ नूर-ए-अज़ल! तू ही मकां, तू ही ला-मकां तुझको ये गजल! मैं हूँ मुसाफिर, मैं हूँ भटकता बटोही, ढूँढ रहा हूँ तुझे मैं अम्बर और जल-थल !"
  • ​"सुन ऐ रब्बे-कायनात, सुन ऐ नूर-ए-अज़ल!

    तू ही मकां, तू ही ला-मकां तुझको ये गजल!

    मैं हूँ मुसाफिर, मैं हूँ भटकता बटोही,

    ढूँढ रहा हूँ तुझे मैं अम्बर और जल-थल !"


    • कोरस (धीमे और समवेत स्वर में): ​"ढूँढ रहा हूँ तुझे मैं अम्बर और जल-थल..."
    • ​"ढूँढ रहा हूँ तुझे मैं अम्बर और जल-थल..."


      2. स्थायी (मध्य लय - राजस्थानी लोक फ्लेवर के साथ)

      • संगीत: ढोलक की थाप और खड़ताल की खनक शुरू होती है।
      • मुख्य कव्वाल: ​"मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!"
      • ​"मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!"


        • कोरस (तालियों की थाप के साथ): ​"(बता दे कहाँ है तू!)"
        • ​"(बता दे कहाँ है तू!)"


          • मुख्य कव्वाल: ​"मैं दर-ब-दर फिरा, थक कर गिरा, ताउम्र करता रहूँ, तेरा ही तजिकिरा। मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!"
          • ​"मैं दर-ब-दर फिरा, थक कर गिरा, ताउम्र करता रहूँ, तेरा ही तजिकिरा।

            मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!"


            3. द्रुत लय (तेज़ और तीखा व्यंग्य - राजस्थानी मांड शैली के स्पर्श के साथ)

            • संगीत: ढोलक और मंजीरों की गति तेज हो जाती है।
            • मुख्य कव्वाल (ऊर्जावान और तंज कसते हुए): ​"ये देखा ज़माना, मतलब से आना, ग़रज़ के बज़ार में, गधों को मनाना! सिक्कों की खनक में, ईमान डिग गया, دولت (दौलत) की बदौलत, इन्सान बिक गया!"
            • ​"ये देखा ज़माना, मतलब से आना,

              ग़रज़ के बज़ार में, गधों को मनाना!

              सिक्कों की खनक में, ईमान डिग गया,

              دولت (दौलत) की बदौलत, इन्सान बिक गया!"


              4. करुण और अंतर्मन का अंतरा (विलम्बित लय, दर्द भरा स्वर)

              • संगीत: गति धीमी होती है, केवल हारमोनियम और सारंगी के विलाप जैसे सुर बजते हैं।
              • मुख्य कव्वाल: ​"तीरथ बहुत कर लिए, मूरत में तुझको ढूँढा, पत्थर के इन टुकड़ों में, छान लिया कूढ़ा? उम्र बीतती चली गयी, तन भी हो चला बूढ़ा, सांसों की माला टूटी, तुझसे फिर भी न तुझसे जुड़ा।"
              • ​"तीरथ बहुत कर लिए, मूरत में तुझको ढूँढा,

                पत्थर के इन टुकड़ों में, छान लिया कूढ़ा?

                उम्र बीतती चली गयी, तन भी हो चला बूढ़ा,

                सांसों की माला टूटी, तुझसे फिर भी न तुझसे जुड़ा।"


                • मुख्य कव्वाल (ऊंचे स्वर में): ​"फिर भी न तुझसे जुड़ा।"
                • ​"फिर भी न तुझसे जुड़ा।"


                  • कोरस: ​"(फिर भी न तुझसे जुड़ा।...)"
                  • ​"(फिर भी न तुझसे जुड़ा।...)"


                    5. क्लाइमैक्स / चरमोत्कर्ष (राजस्थानी कव्वाली का ऊर्जावान दौर)

                    • संगीत: ढोलक, खड़ताल और तालियों की गड़गड़ाहट अपनी चरम सीमा पर।
                    • मुख्य कव्वाल (पूरी ताकत और जोश के साथ): ​"ईमान ही सच्चा धन है रोहि, यही रूह की आबरू ! सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से वज़ू करूँ! मैं गिरूँ तो सजदा, उठूँ तो इबादत! सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से वज़ू करूँ !"
                    • ​"ईमान ही सच्चा धन है रोहि, यही रूह की आबरू !

                      सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से वज़ू करूँ!

                      मैं गिरूँ तो सजदा, उठूँ तो इबादत!

                      सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से वज़ू करूँ !"


                      • कोरस (ज़ोरदार और गूँजती आवाज़ में): ​"सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से वज़ू करूँ !"
                      • ​"सजदा करूँ, मजदा करूँ, अश्कों से वज़ू करूँ !"


                        6. समापन (शांत और विलीन होता स्वर)

                        • संगीत: सारे वाद्य यंत्र धीरे-धीरे शांत हो जाते हैं।
                        • मुख्य कव्वाल (ठहरी हुई, बेहद शांत आवाज़ में): ​"तेरे दरश को तरश रहे हम, हमको तेरी जुस्तजू! मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू! हे मेरे प्रभू हे तेरी जुस्तजू! बता दे कहाँ है तू!"
                        • ​"तेरे दरश को तरश रहे हम, हमको तेरी जुस्तजू!

                          मैं तुझको भी पा लूंगा, बता दे कहाँ है तू!

                          हे मेरे प्रभू हे तेरी जुस्तजू! बता दे कहाँ है तू!"


                          (एक अंतिम गहरी हारमोनियम की गूँज के साथ कव्वाली समाप्त होती है)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें