२-इससे आगे कामनाओं का अस्तित्व मनोवेगों पर आधारित है मनुष्य प्रत्येक कर्म ही कामनाओं की प्रेरणा पर आधारित है। और जीवन का अवलम्बन कर्म है। कामनाओं सञ्चय काम ( sex) के रूप में मन में समाहित है।
३-और अब बात करते हैं वासनाओं की वासना हमारे चित्त में सञ्चित वह संस्कार हैं। जो हमारे मन में पूर्वजन्म से प्रवृत्तियों के रूप में बसे हुए हैं।
जहाँ कामनाओ मन में होती हैं वहीं वासनाऐं चित में बसी हुई होती हैं।
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