शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

योगेश रोहि का जीवन परिचय-

भारतीय अध्यात्म- दर्शन व उपनिषद तथा वेद एवं पुराणों के सम्यक अध्येता गोपाचार्य हंस योगेश कुमार रोहि- का (जन्म-10 मार्च 1983 ईस्वी सन् को  ग्राम दभारा-पत्रालय फरिहा-जिला फिरोजाबाद) में  हुआ । परन्तु ग्राम आजादपुर पत्रालय पहाड़ीपुर ज़िला अलीगढ़) इनकी कर्मभूमि और साधना स्थली रही ,जो कि इनकी माता जी का जन्म स्थान और इनकी ननिहाल है। पिता श्रीपुरुषोतम सिंह" कृषक होने के साथ साथ एक प्राइमरी जूनियर अध्यापक भी रहे, जो गणित इतिहास" साहित्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समन्वित थे।

श्रीम‌द्भगवद्‌गीता का सांख्ययोग और भक्तियोग मूलक तथ्यो की व्याख्या तथा मन बुद्धि और आत्मा के स्वरूप की अर्थ समन्वित व्याख्या योगेश कुमार रोहि जी को जीवन के निर्माण की प्रक्रिया के यथार्थ बोध के सन्निकट प्रतीत हुई। परिणाम स्वरूप आपको श्रीम‌द्भगवद्‌गीता के अनुशीलन से जीवन की एक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई।

प्राचीन भारतीय संस्कृति के अन्वेषक, अध्येता होने के साथ साथ आप भारतीय शास्त्रों में विशेषतः भारतीय दर्शन वैशेषिक, सांख्य,  योग और वेदान्त के सै‌द्धान्तिक विवेचक के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करने में सफल हुए इसके लिए आपने भारतीय पुराणों का सम्यक् अनुशीलन करना ही उचित समझा  ।

महाभारत" वाल्मीकि रामायण आदि महाकाव्यो के अतिरिक्त आपने भारतीय आध्यात्मिकता के दिग्दर्शन उपनिषदों के सम्यक अध्येता के रूप में जीवन का अधिकांश समय व्यतीत किया है। योगेश कुमार रोहि" के सतत् अध्ययन ने दीर्घ काल तक अपने गृह क्षेत्र में ही रहकर भारतीय संस्कृति के अतिरिक्त विश्व की भारोपीय संस्कृतियों के समता मूलक तथ्यों के शोध का कार्य प्रशस्त किया है।

भाषा विज्ञान के क्षेत्र में आपकी पकड़ अधिक प्रसंशनीय है। आपके भाषा अध्ययन के विषय भारत और यूरोप की प्राचीन सांस्कृतिक भाषाएँ रहीं जिसमे संस्कृत ,ग्रीक, लैटिन, और फ्रॉञ्च आदि की शब्द व्युत्पत्ति (Etymology) में गहन रूचि थी 

एक मध्यम किसान परिवार में जन्म, फिर सत्संग से जुड़ाव, फिर लगातार अध्ययन,और  समाज के साथ आपके अनवरत वैचारिक विमर्श ने जीवन को अनुभवों की एक नव्यता प्रदान की है। 

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