रविवार, 8 फ़रवरी 2026

भगवद्गीता 4:13 — वर्ण व्यवस्थाश्लोक (संक्षेप):चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः…हिंदी अर्थ:मैंने चार वर्णों की रचना गुण और कर्म के आधार पर की है।🔍 विवाद क्यों?

📌 1. भगवद्गीता 4:13 — वर्ण व्यवस्था
श्लोक (संक्षेप):
चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः…
हिंदी अर्थ:
मैंने चार वर्णों की रचना गुण और कर्म के आधार पर की है।
🔍 विवाद क्यों?
कुछ लोग इसे जन्म आधारित जाति व्यवस्था का समर्थन मानते हैं, जबकि कई विद्वान कहते हैं कि यह कर्म आधारित सामाजिक वर्गीकरण था, जन्म से नहीं।
📌 2. भगवद्गीता 9:32 — स्त्री और शूद्र पर टिप्पणी
श्लोक (संक्षेप):
मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्यु: पापयोनय:
स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम्॥
हिंदी अर्थ:
हे अर्जुन! जो भी मेरी शरण लेते हैं — चाहे वे स्त्रियाँ हों, वैश्य हों या शूद्र — वे भी परम गति को प्राप्त होते हैं।
⚠️ विवाद क्यों?
“पापयोनय:” शब्द के कारण इसे अपमानजनक समझा गया। समर्थक कहते हैं — गीता यहाँ भेद मिटाने की बात कर रही है, विरोधी इसे सामाजिक हीनता का प्रमाण मानते हैं।
📌 3. भगवद्गीता 18:41 — जन्म से पेशा?
श्लोक (संक्षेप):
ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परन्तप
कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः॥
हिंदी अर्थ:
चारों वर्णों के कर्म उनके स्वभाव से उत्पन्न गुणों के अनुसार निर्धारित किए गए हैं।
⚔️ विवाद क्यों?
कुछ इसे जन्म से काम तय करने का धार्मिक आधार मानते हैं — जबकि दूसरे कहते हैं यह प्राकृतिक क्षमता पर आधारित था, न कि जाति पर।
📌 4. भगवद्गीता 2:47 — कर्म करो, फल मत सोचो
श्लोक (संक्षेप):
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
हिंदी अर्थ:
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल पर नहीं।
💥 विवाद क्यों?
आलोचक कहते हैं इससे शोषित वर्ग को “फल मत मांगो, बस काम करो” का उपदेश देकर अन्याय को正 ठहराया गया।
📌 5. भगवद्गीता 16:7 — विद्रोह पर दृष्टिकोण
श्लोक (संक्षेप):
नासौ शौचं न चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते…
हिंदी अर्थ:
आसुरी प्रवृत्ति वाले लोगों में न पवित्रता होती है, न सही आचरण, न सत्य।
🔥 विवाद क्यों?
कई बार सत्ता विरोध या सामाजिक विद्रोह को “आसुरी प्रवृत्ति” कहकर दबाने में इसका उपयोग हुआ।
⚖️ निष्कर्ष (साफ शब्दों में)
👉 गीता का मूल संदेश आध्यात्मिक है
👉 लेकिन इतिहास में इन श्लोकों की ऐसी व्याख्याएँ की गईं जिनसे जातिवाद और असमानता को बल मिला
👉 इसलिए आज ये श्लोक धार्मिक कम और सामाजिक बहस ज़्यादा बन चुके हैं

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

योगेश रोहि का जीवन परिचय-

भारतीय अध्यात्म- दर्शन व उपनिषद तथा वेद एवं पुराणों के सम्यक अध्येता गोपाचार्य हंस योगेश कुमार रोहि- का (जन्म-10 मार्च 1983 ईस्वी सन् को  ग्राम दभारा-पत्रालय फरिहा-जिला फिरोजाबाद) में  हुआ । परन्तु ग्राम आजादपुर पत्रालय पहाड़ीपुर ज़िला अलीगढ़) इनकी कर्मभूमि और साधना स्थली रही ,जो कि इनकी माता जी का जन्म स्थान और इनकी ननिहाल है। पिता श्रीपुरुषोतम सिंह" कृषक होने के साथ साथ एक प्राइमरी जूनियर अध्यापक भी रहे, जो गणित इतिहास" साहित्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समन्वित थे।

श्रीम‌द्भगवद्‌गीता का सांख्ययोग और भक्तियोग मूलक तथ्यो की व्याख्या तथा मन बुद्धि और आत्मा के स्वरूप की अर्थ समन्वित व्याख्या योगेश कुमार रोहि जी को जीवन के निर्माण की प्रक्रिया के यथार्थ बोध के सन्निकट प्रतीत हुई। परिणाम स्वरूप आपको श्रीम‌द्भगवद्‌गीता के अनुशीलन से जीवन की एक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हुई।

प्राचीन भारतीय संस्कृति के अन्वेषक, अध्येता होने के साथ साथ आप भारतीय शास्त्रों में विशेषतः भारतीय दर्शन वैशेषिक, सांख्य,  योग और वेदान्त के सै‌द्धान्तिक विवेचक के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करने में सफल हुए इसके लिए आपने भारतीय पुराणों का सम्यक् अनुशीलन करना ही उचित समझा  ।

महाभारत" वाल्मीकि रामायण आदि महाकाव्यो के अतिरिक्त आपने भारतीय आध्यात्मिकता के दिग्दर्शन उपनिषदों के सम्यक अध्येता के रूप में जीवन का अधिकांश समय व्यतीत किया है। योगेश कुमार रोहि" के सतत् अध्ययन ने दीर्घ काल तक अपने गृह क्षेत्र में ही रहकर भारतीय संस्कृति के अतिरिक्त विश्व की भारोपीय संस्कृतियों के समता मूलक तथ्यों के शोध का कार्य प्रशस्त किया है।

भाषा विज्ञान के क्षेत्र में आपकी पकड़ अधिक प्रसंशनीय है। आपके भाषा अध्ययन के विषय भारत और यूरोप की प्राचीन सांस्कृतिक भाषाएँ रहीं जिसमे संस्कृत ,ग्रीक, लैटिन, और फ्रॉञ्च आदि की शब्द व्युत्पत्ति (Etymology) में गहन रूचि थी 

एक मध्यम किसान परिवार में जन्म, फिर सत्संग से जुड़ाव, फिर लगातार अध्ययन,और  समाज के साथ आपके अनवरत वैचारिक विमर्श ने जीवन को अनुभवों की एक नव्यता प्रदान की है। 

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मजदूरों की डायरी- प्रतिलिपि







विजेन्द्र मिस्त्री का हिसाब १२ जनवरी तक पूर्ण हुआ - 
उन पर ३०० रुपए अतिरिक्त पहुँचे।



१२ जनवरी तक उनका हिसाब फाइनल हुआ 
मुकेश पर ४२५ रुपये अतिरिक्त पहुँचे-


१३- जनवरी को सभी की नागा- लुक्का को १०० रुपये दिए। 

१४- जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम(#) विजेन्द्र मिस्त्री के साथ चला- 


१५ जनवरी को नागा- केवल दुपहर तक लुक्का का काम चला- १०० लुक्का को रुपये दिये-

१६- जनवरी की नागा-

१७- जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम विजेन्द्र मिस्त्री के साथ चला- 
इसी दौरान विजेन्द्र मिस्त्री को ५०० रुपये दिए।(#)


१८- जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम विजेन्द्र मिस्त्री के साथ चला-
इसी दौरान मुकेश को ५०० रुपये दिए।
लुक्का को भी १०० रुपये दिए।(#)


१९- जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम विजेन्द्र मिस्त्री के साथ चला- इसी दौरान मुकेश और विजेन्द्र मिस्त्री को क्रमश ५०० और १००० रुपये दिए। तथा लुक्का को १००० रुपये दिए गये।(#)


२० जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम विजेन्द्र मिस्त्री के साथ चला- इसी दौरान मुकेश और विजेन्द्र मिस्त्री को  पेट्रोल के लिए २०० रुपये दिए।(#)

२१ जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम विजेन्द्र मिस्त्री के साथ चला- इसी दौरान मुकेश को २०० और विजेन्द्र मिस्त्री को ५०० रुपये दिए। (#)



२२ जनवरी को नागा- परन्तु २०० रुपये लुक्का ने लिए

२३ जनवरी की नागा-

२४ जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम विजेन्द्र मिस्त्री के साथ चला-(#)

२५ जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम विजेन्द्र मिस्त्री के साथ चला- इसी दौरान मुकेश और विजेन्द्र मिस्त्री को क्रमश १००० - और १००० रुपये दिए। (#)

२६ जनवरी को नागा- होते हुए भी लुक्का ने १०० रुपये लिए।

२७ जनवरी की नागा-

२८ जनवरी की नागा-

२९ जनवरी को लुक्का और मुकेश का काम चला इसी दौरान मुकेश को ५०० रुपये और विजेन्द्र मिस्त्री को १५०० रुपये दिए। लुक्का को ५०० रुपये दिए जो भोजन व्यवस्था में व्यय हुए।*****(#)



३० जनवरी को नागा- होते हुए भी लुक्का ने १०० रुपये लिए। 

१- फरवरी की नागा-

२-फरवरी को मुकेश और विजेन्द्र मिस्त्री को शराब हेतु २०० रुपये दिए। ठाकुर जी बरला वाले का मुकेश के साथ काम चला-(#)

३- फरवरी को ठाकुर जी को ९०० रुपये दिए। मुकेश और विजेन्द्र मिस्त्री को क्रमश १००० और १००० हजार रुपए दिए। (#)

३- फरवरी को लुक्का की नागा होते हुए भी १०० रुपये दिए 

४ फरवरी को मुकेश और विजेन्द्र मिस्त्री के साथ ठाकुर जी बरला का काम चला-
इसी दौरान मुकेश को १००० रुपये दिए गये।(#)


५ फरवरी को मुकेश और विजेन्द्र मिस्त्री के साथ ठाकुर जी बरला का काम चला-
इसी दौरान ठाकुर जी बरला को ९०० रुपये दिए। (#)


६ फरवरी की नागा होने पर भी ५०० विजेन्द्र मिस्त्री को दिए फोन वे द्वारा- इसी समय लुक्का को २०० रुपए दिए उधार-


७ फरवरी नागा-

८ फरवरी नागा- होते हुए भी मुकेश ने 800 रुपये लिए।


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लुक्का पर अबतक 6300 रुपये पहुँचे-
और 28 दिन की ड्यूटी- 28×400=11200-
4900 रुपये लुक्का को 4 फरवरी को दिए गये।


मुकेश और विजेन्द्र मिस्त्री की 3 फरवरी तक 11 ड्यूटी-
विजेन्द्र मिस्त्री के 11 ड्यूटी के

400 रुपये काट कर 1950 रुपये शेष रहे।


---------------------++++++++++++------केबिल पर

(53) फण्टी केबिल पर गयीं 7 फरवरी को

3 गाटर आठ फुटा-